मलारना डूंगर उपखंड के मलारना स्टेशन वन चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर एक जंगली मादा सूअर को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सुबह जब लोग मलारना स्टेशन की ओर दूध देने आए, तो उन्होंने इसकी सूचना वन चौकी पर दी, लेकिन वन चौकी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। आसपास के ग्रामीणों, जिनमें श्यामोली निवासी चेतराम गुर्जर भी शामिल थे, ने बताया कि शाम 6 बजे के बाद मलारना स्टेशन से लेकर कोथाली गांव तक जंगली जानवरों के कारण डर का माहौल बना रहता है। शाम के समय जंगली जानवर जंगल से निकलकर खेतों की ओर जाते हैं, जिससे इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। थोड़े दिन पहले ही श्यामोली गांव के मुरारी गुर्जर का नीलगाय से एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस द्वारा सवाई माधोपुर ले जाया गया था। इसके अतिरिक्त, मलारना स्टेशन के राकेश गुर्जर का भी जंगली सूअर से एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनका हाथ फैक्चर हो चुका था। ग्रामीणों के अनुसार, शाम के वक्त जंगली सूअर, नीलगाय, सियार जैसे जानवर रोड पार कर खेतों की ओर जाते हैं और सुबह के समय खेतों से वापस जंगल की ओर लौटते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों द्वारा सूचना देने के बाद भी वन विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और मादा सूअर दोपहर 12 बजे तक सड़क पर ही पड़ा रहा। इस स्थिति को देखते हुए, स्थानीय लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि वन विभाग जंगली सूअर के शव को अन्य जंगली जानवरों के भोजन के रूप में इस्तेमाल कर सकता था।
मलारना डूंगर उपखंड के मलारना स्टेशन वन चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर एक जंगली मादा सूअर को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सुबह जब लोग मलारना स्टेशन की ओर दूध देने आए, तो उन्होंने इसकी सूचना वन चौकी पर दी, लेकिन वन चौकी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। आसपास के ग्रामीणों, जिनमें श्यामोली निवासी चेतराम गुर्जर भी शामिल थे, ने बताया कि शाम 6 बजे के बाद मलारना स्टेशन से लेकर कोथाली गांव तक जंगली जानवरों के कारण डर का माहौल बना रहता है। शाम के समय जंगली जानवर जंगल से निकलकर खेतों की ओर जाते हैं, जिससे इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। थोड़े दिन पहले ही श्यामोली गांव के मुरारी गुर्जर का नीलगाय से एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस द्वारा सवाई माधोपुर ले जाया गया था। इसके अतिरिक्त, मलारना स्टेशन के राकेश गुर्जर का भी जंगली सूअर से एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनका हाथ फैक्चर हो चुका था। ग्रामीणों के अनुसार, शाम के वक्त जंगली सूअर, नीलगाय, सियार जैसे जानवर रोड पार कर खेतों की ओर जाते हैं और सुबह के समय खेतों से वापस जंगल की ओर लौटते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों द्वारा सूचना देने के बाद भी वन विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और मादा सूअर दोपहर 12 बजे तक सड़क पर ही पड़ा रहा। इस स्थिति को देखते हुए, स्थानीय लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि वन विभाग जंगली सूअर के शव को अन्य जंगली जानवरों के भोजन के रूप में इस्तेमाल कर सकता था।
- चौथ का बरवाड़ा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय शेरसिंहपुरा में रविवार को प्रधानाध्यापक रामधन मीणा के सेवानिवृत्ति समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय में लगभग 20 वर्षों तक सेवाएँ देने के बाद सेवानिवृत्त हुए मीणा को ग्रामीणों, विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थियों ने माला पहनाकर और साफा बांधकर सम्मानित किया। इस अवसर पर रामधन मीणा ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विद्यालय को एक वाटर कूलर भेंट किया। समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने उनके शिक्षण कार्य, अनुशासन और विद्यालय के विकास में दिए गए योगदान की सराहना की। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी और विद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद रहे।1
- ग्राम पंचायत सारसोप के समुद्रपुरा गांव में गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है, जहां हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त और पीले रंग का पानी निकल रहा है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि हैंडपंप का यह पानी न केवल पीले रंग का है, बल्कि इसकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है, जिससे उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ गया है। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण मजबूरी में इसी खराब पानी का इस्तेमाल पीने और अपने घरेलू कार्यों के लिए कर रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, समुद्रपुरा के ग्रामीणों ने जलदाय विभाग और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से पानी की गुणवत्ता की जांच करवाने, शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने और इस समस्या का स्थायी समाधान उपलब्ध कराने की अपील की है। फ्लोराइड युक्त पीले पानी की समस्या से ग्रामीण गहरे चिंतित हैं।1
- यह माँग उठाई गई है कि गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।1
- जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम1
- लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी का जीवन और उनके कार्य हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। उन्होंने राष्ट्र सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 'सेवा धर्म' को अपने शासन का मुख्य आधार बनाया। अहिल्याबाई जी ने समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक को न्याय और सम्मान प्रदान किया। उनका न्यायप्रिय और लोक-कल्याणकारी मार्ग हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।1
- मलारना डूंगर उपखंड के मलारना स्टेशन वन चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर एक जंगली मादा सूअर को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सुबह जब लोग मलारना स्टेशन की ओर दूध देने आए, तो उन्होंने इसकी सूचना वन चौकी पर दी, लेकिन वन चौकी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। आसपास के ग्रामीणों, जिनमें श्यामोली निवासी चेतराम गुर्जर भी शामिल थे, ने बताया कि शाम 6 बजे के बाद मलारना स्टेशन से लेकर कोथाली गांव तक जंगली जानवरों के कारण डर का माहौल बना रहता है। शाम के समय जंगली जानवर जंगल से निकलकर खेतों की ओर जाते हैं, जिससे इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। थोड़े दिन पहले ही श्यामोली गांव के मुरारी गुर्जर का नीलगाय से एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस द्वारा सवाई माधोपुर ले जाया गया था। इसके अतिरिक्त, मलारना स्टेशन के राकेश गुर्जर का भी जंगली सूअर से एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनका हाथ फैक्चर हो चुका था। ग्रामीणों के अनुसार, शाम के वक्त जंगली सूअर, नीलगाय, सियार जैसे जानवर रोड पार कर खेतों की ओर जाते हैं और सुबह के समय खेतों से वापस जंगल की ओर लौटते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों द्वारा सूचना देने के बाद भी वन विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और मादा सूअर दोपहर 12 बजे तक सड़क पर ही पड़ा रहा। इस स्थिति को देखते हुए, स्थानीय लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि वन विभाग जंगली सूअर के शव को अन्य जंगली जानवरों के भोजन के रूप में इस्तेमाल कर सकता था।1