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राजधानी लखनऊ के काकोरी कोतवाली क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की भरमार बताई गई है, जहाँ कौड़िया खेड़ा गाँव के पास बड़े पैमाने पर नकली सीमेंट बनाने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस खेल में, वर्तमान समय पर डैमेज सीमेंट की बोरियाँ उतारी जा रही हैं, जबकि कंपनी इन क्षतिग्रस्त बोरियों को साफ तौर पर नष्ट करने का आदेश देती है। पैसों के लालच में कुछ लोग इस डैमेज सीमेंट को छानकर, इसे अन्य नामी-गिरामी कंपनियों की बोरियों में भर रहे हैं। इसके बाद, इस नकली सीमेंट को बड़ी मात्रा में दुकानदारों को कम दामों पर सप्लाई करके मोटी रकम कमाई जा रही है। गंभीर बात यह है कि इस अवैध सीमेंट कारोबार को स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस तरह के अवैध कार्य से कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका जताई गई है।

1 hr ago
user_Khabro Ki Paini Najar News New
Khabro Ki Paini Najar News New
Advertising agency बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

राजधानी लखनऊ के काकोरी कोतवाली क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की भरमार बताई गई है, जहाँ कौड़िया खेड़ा गाँव के पास बड़े पैमाने पर नकली सीमेंट बनाने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस खेल में, वर्तमान समय पर डैमेज सीमेंट की बोरियाँ उतारी जा रही हैं, जबकि कंपनी इन क्षतिग्रस्त बोरियों को साफ तौर पर नष्ट करने का आदेश देती है। पैसों के लालच में कुछ लोग इस डैमेज सीमेंट को छानकर, इसे अन्य नामी-गिरामी कंपनियों की बोरियों में भर रहे हैं। इसके बाद, इस नकली सीमेंट को बड़ी मात्रा में दुकानदारों को कम दामों पर सप्लाई करके मोटी रकम कमाई जा रही है। गंभीर बात यह है कि इस अवैध सीमेंट कारोबार को स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस तरह के अवैध कार्य से कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका जताई गई है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • लखनऊ के थाना इंदिरा नगर क्षेत्र के सुगमऊ में स्थित एक देशी शराब ठेके को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस ठेके पर सुबह 7 बजे से ही शराब की बिक्री शुरू हो जाती है, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ठेके के एक सेल्समैन ने कथित तौर पर कहा है कि यह 'सिस्टम' चौकी तक जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार चौकी प्रभारी देवेंद्र सिंह के संरक्षण में चल रहा है। उनकी शिकायत है कि सुबह से ही शराबियों की भीड़ जुटने लगती है, जिससे इलाके का माहौल खराब हो रहा है, लेकिन बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर शराब बिक्री का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
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    लखनऊ के थाना इंदिरा नगर क्षेत्र के सुगमऊ में स्थित एक देशी शराब ठेके को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस ठेके पर सुबह 7 बजे से ही शराब की बिक्री शुरू हो जाती है, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ठेके के एक सेल्समैन ने कथित तौर पर कहा है कि यह 'सिस्टम' चौकी तक जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार चौकी प्रभारी देवेंद्र सिंह के संरक्षण में चल रहा है। उनकी शिकायत है कि सुबह से ही शराबियों की भीड़ जुटने लगती है, जिससे इलाके का माहौल खराब हो रहा है, लेकिन बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर शराब बिक्री का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
    user_Khabro Ki Paini Najar News New
    Khabro Ki Paini Najar News New
    Advertising agency बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    46 min ago
  • लखनऊ के मलिहाबाद स्थित अस्थाई मंडी में बिजली की बड़े पैमाने पर चोरी और दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इस मामले में विद्युत विभाग की संलिप्तता का गंभीर आरोप लग रहा है, जिसके चलते सूत्रों के अनुसार विभाग को 'मोटी रकम' पहुँच रही है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि अस्थाई मंडी तक बिजली कैसे पहुँच रही है और क्या यह सीधे तौर पर विद्युत विभाग की साठगांठ का नतीजा है या फिर बिजली का चोरी-छिपे उपयोग किया जा रहा है।
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    लखनऊ के मलिहाबाद स्थित अस्थाई मंडी में बिजली की बड़े पैमाने पर चोरी और दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इस मामले में विद्युत विभाग की संलिप्तता का गंभीर आरोप लग रहा है, जिसके चलते सूत्रों के अनुसार विभाग को 'मोटी रकम' पहुँच रही है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि अस्थाई मंडी तक बिजली कैसे पहुँच रही है और क्या यह सीधे तौर पर विद्युत विभाग की साठगांठ का नतीजा है या फिर बिजली का चोरी-छिपे उपयोग किया जा रहा है।
    user_आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    Voice of people Bakshi Ka Talab, Lucknow•
    1 hr ago
  • आज विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिला अध्यक्ष अजीत वर्मा जी ने लखनऊ के मड़ियाँव थाना क्षेत्र स्थित अपने निजी आवास पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस अवसर पर विश्व हिंदू रक्षा परिषद के माननीय अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय संगठन मंत्री हिमांशु धवन, प्रदेश संगठन मंत्री ओम शंकर गुप्ता और प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल जी सहित अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद रहे। जिला अध्यक्ष अजीत वर्मा जी ने सभी उपस्थित माननीय अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। स्वयं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय जी ने अपने हाथों से उपस्थित लोगों में भंडारे का प्रसाद वितरित कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
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    आज विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिला अध्यक्ष अजीत वर्मा जी ने लखनऊ के मड़ियाँव थाना क्षेत्र स्थित अपने निजी आवास पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस अवसर पर विश्व हिंदू रक्षा परिषद के माननीय अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय संगठन मंत्री हिमांशु धवन, प्रदेश संगठन मंत्री ओम शंकर गुप्ता और प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल जी सहित अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद रहे। जिला अध्यक्ष अजीत वर्मा जी ने सभी उपस्थित माननीय अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। स्वयं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय जी ने अपने हाथों से उपस्थित लोगों में भंडारे का प्रसाद वितरित कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
    user_Ajit Verma
    Ajit Verma
    Court reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • ब्रेकिंग न्यूज़ के मुताबिक, संवाददाता आशीष मिश्रा ने एक घटना की जानकारी दी है, जिसमें फायरिंग के बीच एक बच्चा सड़क पर रो रहा था। बताया गया है कि इस दौरान एक सिपाही ने तुरंत दौड़ लगाई और बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया।
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    ब्रेकिंग न्यूज़ के मुताबिक, संवाददाता आशीष मिश्रा ने एक घटना की जानकारी दी है, जिसमें फायरिंग के बीच एक बच्चा सड़क पर रो रहा था। बताया गया है कि इस दौरान एक सिपाही ने तुरंत दौड़ लगाई और बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया।
    user_आशीष कुमार मिश्रा
    आशीष कुमार मिश्रा
    Court reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    19 min ago
  • देश में चल रहे 'अमृत काल' पर कटाक्ष करते हुए, नीति-निर्माताओं पर यह आरोप लगाया गया है कि वे शायद 'सोमरस या विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी का काढ़ा' पीकर नियम-कानून बना रहे हैं, जिसके चलते ज़मीन पर 'दिव्य नौटंकी' देखने को मिल रही है, जिससे 'बड़े-बड़े सर्कस वाले' भी शरमा जाएं। इस पूरे घटनाक्रम को एक 'महान ड्रामा' के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस 'ड्रामा' के पहले दृश्य में पश्चिम बंगाल के 'वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट' का उल्लेख है, जिसके तहत 14 साल या 'टूटी-फूटी, लंगड़ी-लूली, स्थायी रूप से अपाहिज' गाय को काटा जा सकता है। हालाँकि, इसके लिए सरकारी डॉक्टर और म्युनिसिपैलिटी अधिकारी से 'फिट-फॉर-स्लॉटर' का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पोस्ट में इस पर व्यंग्य करते हुए कहा गया है कि जो गरीब किसान अपनी बीमार गाय के इलाज का खर्च नहीं उठा सकता, उसे अब अफसरों से यह मनुहार करनी पड़ेगी कि उसकी गाय 'पर्याप्त रूप से लंगड़ी' हो चुकी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जानवर भले ही तड़पता रहे, लेकिन पहले नौकरशाही की फाइलें पूरी होनी चाहिए, और कोर्ट का आदेश है कि सब कुछ बंद बूचड़खानों में ही होगा। दूसरे दृश्य में देश के दो अलग-अलग कोनों में दिख रहे विरोधाभास को सामने रखा गया है। जहाँ सड़क पर मुसलमान भाईचारा और कानून बचाने के लिए गोवंश को न छूने और किसी और जानवर की कुर्बानी देने की बात कर रहे हैं, वहीं सड़क पर हिंदू व्यापारी चिंतित हैं कि अगर वे बूढ़ी और दूध न देने वाली गायों को नहीं बेचेंगे, तो अपने बच्चों को क्या खिलाएंगे और नई दुधारू गायें कहाँ से लाएंगे। आरोप है कि ए.सी. कमरों में बैठकर सिर्फ भावनाओं के आधार पर नीतियां बनाने वाले यह भूल गए हैं कि भारत का ग्रामीण पशु व्यापार 'किसान की जेब के अर्थशास्त्र' से चलता है, न कि 'किसी धर्म की किताब' से। जब तक गाय दूध देती है, वह माता होती है; दूध देना बंद करने पर वह गरीब किसान के लिए एक 'अनुत्पादक जिम्मेदारी' बन जाती है, और उसे न बेचना किसान की आजीविका पर सीधा प्रहार है। तीसरे दृश्य में 'संवर्धन' के नाम पर 'आवारा पशुओं का आतंक' दर्शाया गया है। भावनाओं के उबाल में बिना सोचे-समझे गोवंश के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद से देश के खेतों और सड़कों पर 'गोमाता' का नया अवतार, यानी 'आवारा पशु' देखने को मिल रहे हैं। चारे की भारी कमी है, और 'संरक्षण' के नाम पर लाखों जानवर सड़कों पर प्लास्टिक खा रहे हैं, किसानों की फसलें तबाह कर रहे हैं, और हाईवे पर गाड़ियों से टकराकर खुद भी मर रहे हैं और इंसानों की भी जान ले रहे हैं। इसे 'अंधेर नगरी, चौपट राजा' की स्थिति बताया गया है, जहाँ ऐसा 'संरक्षण' हुआ है कि जानवर और किसान दोनों सड़क पर आ गए हैं। पोस्ट में इस 'नौटंकी' से इतर, कड़वी सच्चाई यह बताई गई है कि एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और डेयरी उद्योग के लिए पशुओं का वैज्ञानिक संरक्षण और संवर्धन जितना आवश्यक है, अनुपयोगी हो चुके पशुओं का व्यावहारिक प्रबंधन (कटान सहित) भी उतना ही अनिवार्य है। पशुधन को 'सजावट की वस्तु' न मानकर एक 'आर्थिक चक्र' बताया गया है, और चेतावनी दी गई है कि पुराने और बीमार पशुओं को हटाने की तार्किक व्यवस्था न होने पर स्वस्थ पशुओं के हिस्से का चारा और चिकित्सा भी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि 'दुनिया का कोई भी विकसित समाज केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि विज्ञान और व्यावहारिक संतुलन से चलता है'। अंत में नीति-निर्माताओं से सवाल पूछा गया है कि वे कब तक पशुधन प्रबंधन को 'केवल वोट बैंक और मजहबी चश्मे' से देखते रहेंगे, और उनसे 'भांग का नशा उतरने' के बाद एक व्यावहारिक राष्ट्रीय नीति बनाने का आग्रह किया गया है, जो धार्मिक सौहार्द, किसान की आजीविका और मूक जानवरों को सड़कों पर तड़पने से रोके। यह पोस्ट सैय्यद अली हसनैन आब्दी फ़ैज़ द्वारा लिखी गई है।
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    देश में चल रहे 'अमृत काल' पर कटाक्ष करते हुए, नीति-निर्माताओं पर यह आरोप लगाया गया है कि वे शायद 'सोमरस या विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी का काढ़ा' पीकर नियम-कानून बना रहे हैं, जिसके चलते ज़मीन पर 'दिव्य नौटंकी' देखने को मिल रही है, जिससे 'बड़े-बड़े सर्कस वाले' भी शरमा जाएं। इस पूरे घटनाक्रम को एक 'महान ड्रामा' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस 'ड्रामा' के पहले दृश्य में पश्चिम बंगाल के 'वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट' का उल्लेख है, जिसके तहत 14 साल या 'टूटी-फूटी, लंगड़ी-लूली, स्थायी रूप से अपाहिज' गाय को काटा जा सकता है। हालाँकि, इसके लिए सरकारी डॉक्टर और म्युनिसिपैलिटी अधिकारी से 'फिट-फॉर-स्लॉटर' का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पोस्ट में इस पर व्यंग्य करते हुए कहा गया है कि जो गरीब किसान अपनी बीमार गाय के इलाज का खर्च नहीं उठा सकता, उसे अब अफसरों से यह मनुहार करनी पड़ेगी कि उसकी गाय 'पर्याप्त रूप से लंगड़ी' हो चुकी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जानवर भले ही तड़पता रहे, लेकिन पहले नौकरशाही की फाइलें पूरी होनी चाहिए, और कोर्ट का आदेश है कि सब कुछ बंद बूचड़खानों में ही होगा।

दूसरे दृश्य में देश के दो अलग-अलग कोनों में दिख रहे विरोधाभास को सामने रखा गया है। जहाँ सड़क पर मुसलमान भाईचारा और कानून बचाने के लिए गोवंश को न छूने और किसी और जानवर की कुर्बानी देने की बात कर रहे हैं, वहीं सड़क पर हिंदू व्यापारी चिंतित हैं कि अगर वे बूढ़ी और दूध न देने वाली गायों को नहीं बेचेंगे, तो अपने बच्चों को क्या खिलाएंगे और नई दुधारू गायें कहाँ से लाएंगे। आरोप है कि ए.सी. कमरों में बैठकर सिर्फ भावनाओं के आधार पर नीतियां बनाने वाले यह भूल गए हैं कि भारत का ग्रामीण पशु व्यापार 'किसान की जेब के अर्थशास्त्र' से चलता है, न कि 'किसी धर्म की किताब' से। जब तक गाय दूध देती है, वह माता होती है; दूध देना बंद करने पर वह गरीब किसान के लिए एक 'अनुत्पादक जिम्मेदारी' बन जाती है, और उसे न बेचना किसान की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

तीसरे दृश्य में 'संवर्धन' के नाम पर 'आवारा पशुओं का आतंक' दर्शाया गया है। भावनाओं के उबाल में बिना सोचे-समझे गोवंश के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद से देश के खेतों और सड़कों पर 'गोमाता' का नया अवतार, यानी 'आवारा पशु' देखने को मिल रहे हैं। चारे की भारी कमी है, और 'संरक्षण' के नाम पर लाखों जानवर सड़कों पर प्लास्टिक खा रहे हैं, किसानों की फसलें तबाह कर रहे हैं, और हाईवे पर गाड़ियों से टकराकर खुद भी मर रहे हैं और इंसानों की भी जान ले रहे हैं। इसे 'अंधेर नगरी, चौपट राजा' की स्थिति बताया गया है, जहाँ ऐसा 'संरक्षण' हुआ है कि जानवर और किसान दोनों सड़क पर आ गए हैं।

पोस्ट में इस 'नौटंकी' से इतर, कड़वी सच्चाई यह बताई गई है कि एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और डेयरी उद्योग के लिए पशुओं का वैज्ञानिक संरक्षण और संवर्धन जितना आवश्यक है, अनुपयोगी हो चुके पशुओं का व्यावहारिक प्रबंधन (कटान सहित) भी उतना ही अनिवार्य है। पशुधन को 'सजावट की वस्तु' न मानकर एक 'आर्थिक चक्र' बताया गया है, और चेतावनी दी गई है कि पुराने और बीमार पशुओं को हटाने की तार्किक व्यवस्था न होने पर स्वस्थ पशुओं के हिस्से का चारा और चिकित्सा भी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि 'दुनिया का कोई भी विकसित समाज केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि विज्ञान और व्यावहारिक संतुलन से चलता है'। अंत में नीति-निर्माताओं से सवाल पूछा गया है कि वे कब तक पशुधन प्रबंधन को 'केवल वोट बैंक और मजहबी चश्मे' से देखते रहेंगे, और उनसे 'भांग का नशा उतरने' के बाद एक व्यावहारिक राष्ट्रीय नीति बनाने का आग्रह किया गया है, जो धार्मिक सौहार्द, किसान की आजीविका और मूक जानवरों को सड़कों पर तड़पने से रोके। यह पोस्ट सैय्यद अली हसनैन आब्दी फ़ैज़ द्वारा लिखी गई है।
    user_सैय्यद अली हसनैन आब्दी
    सैय्यद अली हसनैन आब्दी
    सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • अहमदाबाद में दिनांक 24 मई 2026 को नरेंद्र मोदी विचार मंच द्वारा नारनपुरा पुलिस स्टेशन और वाडज पुलिस स्टेशन के स्टाफ दोस्तों के लिए एक निःशुल्क चिकित्सा स्वास्थ्य जांच शिविर और स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में नारनपुरा पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री के.एस. सक्सेना साहेब और वाडज पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री एच.पी. गरासिया साहेब विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी विचार मंच के कई प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें नारनपुरा नरेंद्र मोदी विचार मंच के गुजरात प्रदेश मंत्री श्री पंकजभाई पितलिया, गुजरात प्रदेश सचिव श्री विपुलभाई पटेल, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री जयकिशन जानी, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री योगेशभाई दोशी, अहमदाबाद जिला मार्गदर्शन मंत्री श्री गिरीशचंद्र पटेल, और नरेंद्र मोदी विचार मंच के अहमदाबाद शहर जिला मीडिया कन्वीनर श्री जयमीनभाई गज्जर प्रमुख थे। यह शिविर और सेमिनार बहुत अच्छे से व्यवस्थित किया गया था।
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    अहमदाबाद में दिनांक 24 मई 2026 को नरेंद्र मोदी विचार मंच द्वारा नारनपुरा पुलिस स्टेशन और वाडज पुलिस स्टेशन के स्टाफ दोस्तों के लिए एक निःशुल्क चिकित्सा स्वास्थ्य जांच शिविर और स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में नारनपुरा पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री के.एस. सक्सेना साहेब और वाडज पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री एच.पी. गरासिया साहेब विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी विचार मंच के कई प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें नारनपुरा नरेंद्र मोदी विचार मंच के गुजरात प्रदेश मंत्री श्री पंकजभाई पितलिया, गुजरात प्रदेश सचिव श्री विपुलभाई पटेल, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री जयकिशन जानी, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री योगेशभाई दोशी, अहमदाबाद जिला मार्गदर्शन मंत्री श्री गिरीशचंद्र पटेल, और नरेंद्र मोदी विचार मंच के अहमदाबाद शहर जिला मीडिया कन्वीनर श्री जयमीनभाई गज्जर प्रमुख थे। यह शिविर और सेमिनार बहुत अच्छे से व्यवस्थित किया गया था।
    user_क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    Court reporter Sadar, Lucknow•
    2 hrs ago
  • उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम कथित तौर पर एक महिला सिपाही के हंगामे के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही अमर ट्रेवल्स की बस में सीट को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जब बस पूरी तरह से भरी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर दे रही थी, जबकि बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही। आरोप है कि सीट न मिलने पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और उसने पुलिसिया रौब दिखाया। इसके बाद, उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा यात्रियों से अभद्रता किए जाने के भी आरोप लगे हैं। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा। इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।
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    उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम कथित तौर पर एक महिला सिपाही के हंगामे के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही अमर ट्रेवल्स की बस में सीट को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जब बस पूरी तरह से भरी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर दे रही थी, जबकि बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही।

आरोप है कि सीट न मिलने पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और उसने पुलिसिया रौब दिखाया। इसके बाद, उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा यात्रियों से अभद्रता किए जाने के भी आरोप लगे हैं। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा।

इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।
    user_JANTA DARPAN
    JANTA DARPAN
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • राजधानी लखनऊ के काकोरी कोतवाली क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की भरमार बताई गई है, जहाँ कौड़िया खेड़ा गाँव के पास बड़े पैमाने पर नकली सीमेंट बनाने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस खेल में, वर्तमान समय पर डैमेज सीमेंट की बोरियाँ उतारी जा रही हैं, जबकि कंपनी इन क्षतिग्रस्त बोरियों को साफ तौर पर नष्ट करने का आदेश देती है। पैसों के लालच में कुछ लोग इस डैमेज सीमेंट को छानकर, इसे अन्य नामी-गिरामी कंपनियों की बोरियों में भर रहे हैं। इसके बाद, इस नकली सीमेंट को बड़ी मात्रा में दुकानदारों को कम दामों पर सप्लाई करके मोटी रकम कमाई जा रही है। गंभीर बात यह है कि इस अवैध सीमेंट कारोबार को स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस तरह के अवैध कार्य से कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका जताई गई है।
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    राजधानी लखनऊ के काकोरी कोतवाली क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की भरमार बताई गई है, जहाँ कौड़िया खेड़ा गाँव के पास बड़े पैमाने पर नकली सीमेंट बनाने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस खेल में, वर्तमान समय पर डैमेज सीमेंट की बोरियाँ उतारी जा रही हैं, जबकि कंपनी इन क्षतिग्रस्त बोरियों को साफ तौर पर नष्ट करने का आदेश देती है।

पैसों के लालच में कुछ लोग इस डैमेज सीमेंट को छानकर, इसे अन्य नामी-गिरामी कंपनियों की बोरियों में भर रहे हैं। इसके बाद, इस नकली सीमेंट को बड़ी मात्रा में दुकानदारों को कम दामों पर सप्लाई करके मोटी रकम कमाई जा रही है। गंभीर बात यह है कि इस अवैध सीमेंट कारोबार को स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

इस तरह के अवैध कार्य से कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका जताई गई है।
    user_Khabro Ki Paini Najar News New
    Khabro Ki Paini Najar News New
    Advertising agency बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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