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भारत एनकाउंटर मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके तहत इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आ गई है। दर्शकों से अपनी राय साझा करने और इस जानकारी को आगे शेयर करने का आग्रह किया गया है।
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भारत एनकाउंटर मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके तहत इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आ गई है। दर्शकों से अपनी राय साझा करने और इस जानकारी को आगे शेयर करने का आग्रह किया गया है।
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- भारत एनकाउंटर मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके तहत इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आ गई है। दर्शकों से अपनी राय साझा करने और इस जानकारी को आगे शेयर करने का आग्रह किया गया है।1
- छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ अवैध गांजा बिक्री का विरोध करने पर एक विक्रेता द्वारा कथित तौर पर एक गर्भवती महिला के पेट पर मुक्का मारने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि इस मामले में पुलिस से शिकायत करने के बाद भी पीड़िता को कोई सहायता नहीं मिली।1
- मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर वन मंडल कार्यालय में रविवार को उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अजीत दुबे को शासकीय वन विभाग रेस्ट हाउस में कमरा आवंटित नहीं किया गया। इस घटना से वन कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी वन मंडल कार्यालय पहुँचकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। कर्मचारियों ने डीएफओ कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए इस फैसले का कड़ा विरोध जताया। हालात को देखते हुए, प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे अपने जिला पदाधिकारियों के साथ डीएफओ चंद्र कुमार अग्रवाल के चैंबर में पहुँचे, जहाँ दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत हुई। इस घटना के बाद वन विभाग के भीतर प्रशासन और कर्मचारी संगठन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई है।1
- नागपुर के रहने वाले करण जायसवाल नामक व्यक्ति छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले से लापता हो गए हैं। उनके दोस्तों ने उन्हें ढूंढने की अपील की है, जिसमें कहा गया है कि यदि किसी को भी करण जायसवाल के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो वे जल्द से जल्द एक दिए गए नंबर पर कॉल करके सूचित करें।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेशवासियों को एक संदेश दिया है। उन्होंने योग दिवस के इस खास मौके पर राज्य के निवासियों को संबोधित करते हुए यह संदेश जारी किया।1
- आज 22 जून को अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत ने मीडिया के सामने आकर अपने 'ऑडियो ट्रेडिंग' को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके खिलाफ एक षड्यंत्र किया जा रहा है। मीडिया से बात करते हुए महापौर मंजूषा भगत के आंसू छलक पड़े, और उन्होंने खुद को एक मजबूर महिला बताया। भगत ने कहा कि उनके साथ गलत हो रहा है, और यह 'ऑडियो ट्रेडिंग' इसी षड्यंत्र का हिस्सा है।1
- बीती रात करीब 11 बजे, काशीराम निवासी शिवम मिश्रा सरकारी तंत्र से तंग आकर और भरत तिवारी की हत्या से आहत होकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। यह घटना स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सामने आई एक बड़ी खबर से जुड़ी बताई जा रही है। शिवम मिश्रा के इस कदम ने पूरे बिहार में तहलका मचा दिया है।1
- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड मुख्यालय में 22 जून 2026 को सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग और संयुक्त सामाजिक संगठनों के तत्वावधान में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के तहत प्रतापपुर थाना परिसर के समीप से एक रैली निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होते हुए कदमपारा चौक पहुँची। वहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया और सांकेतिक पुतला दहन भी किया। कार्यक्रम के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार बंछोर ने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की, अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन और एकता को अत्यंत आवश्यक बताया। सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने अपने संबोधन में बताया कि रायपुर में 6 जून 2026 को हुई आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर तैयार एक संयुक्त ज्ञापन 22 जून को महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को सौंपा गया। इसी क्रम में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में भी ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 'वनवासी' शब्द के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि इससे आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता आहत होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी हैं और प्रकृति के रक्षक हैं। अपनी पहचान, परंपरा और संस्कृति से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” इसके अतिरिक्त, बीपीएस पोया ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्रोच्चारण संबंधी निर्देशों पर भी सवाल उठाया, शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और समावेशी बनाने की वकालत करते हुए विज्ञान एवं पर्यावरण आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मांगों में स्थानीय भर्ती में प्राथमिकता एवं 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करना, निजीकरण का विरोध, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, भू-माफियाओं पर नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाना, आदिवासी धर्म कोड की मान्यता, परिसीमन से जुड़े मुद्दों का समाधान, ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, उद्योग-व्यापार एवं खनन में आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, नक्सल प्रभावित निर्दोष बंदियों की रिहाई, डीलिस्टिंग का विरोध, आस्था केंद्रों एवं देवगुड़ियों का संरक्षण, पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, तथा आदिवासी शिक्षा, मातृभाषा और पाँचवीं अनुसूची के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार एवं प्रशासन द्वारा इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर बिमला अगरिया, गौरीशंकर नेताम, विनय पावले, लक्ष्मण आर्मो, सफलाल, अमर बहादुर सिंह आयाम, बनवारी खलखो, राजू सिंह आयाम, जीतन सोनहा, रामचंद्र मांझी, अंजली आयाम, लक्ष्मी बैगा, इंद्रपाल सिंह चेरवा, प्रदीप सिंह, राजेश सिंह पोया, राम सिंह पोया (GSU जिलाध्यक्ष), त्रिभुवन सिंह टेकाम, मंजू मिंज (पूर्व जिला पंचायत सदस्य) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1