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फरीदाबाद के गणपति कॉलोनी में अवैध मस्जिद पर चला बुल्डोजर फरीदाबाद के गणपति कॉलोनी में उसे समय हड़कंप मच गया जब नगर निगम का तोड़फोड़ का दस्ता बुलडोजर लेकर अवैध रूप से बना रहे मस्जिद को तोड़ने के लिए पहुंच गया इस दौरान भारी पुलिस बल तन तैनात रहा प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह मस्जिद गैर कानूनी रूप से बनाई जा रही थी मस्जिद प्रशासन पर ना तो जमीन की रजिस्ट्री है ना ही कमर्शियल मीटर लगा हुआ ।
Ravinder Pandat News
फरीदाबाद के गणपति कॉलोनी में अवैध मस्जिद पर चला बुल्डोजर फरीदाबाद के गणपति कॉलोनी में उसे समय हड़कंप मच गया जब नगर निगम का तोड़फोड़ का दस्ता बुलडोजर लेकर अवैध रूप से बना रहे मस्जिद को तोड़ने के लिए पहुंच गया इस दौरान भारी पुलिस बल तन तैनात रहा प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह मस्जिद गैर कानूनी रूप से बनाई जा रही थी मस्जिद प्रशासन पर ना तो जमीन की रजिस्ट्री है ना ही कमर्शियल मीटर लगा हुआ ।
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- फरीदाबाद के गणपति कॉलोनी में अवैध मस्जिद पर चला बुल्डोजर फरीदाबाद के गणपति कॉलोनी में उसे समय हड़कंप मच गया जब नगर निगम का तोड़फोड़ का दस्ता बुलडोजर लेकर अवैध रूप से बना रहे मस्जिद को तोड़ने के लिए पहुंच गया इस दौरान भारी पुलिस बल तन तैनात रहा प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह मस्जिद गैर कानूनी रूप से बनाई जा रही थी मस्जिद प्रशासन पर ना तो जमीन की रजिस्ट्री है ना ही कमर्शियल मीटर लगा हुआ ।1
- प्रयागराजयमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? इन सवालों का निष्पक्ष जवाब ही पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकता है। प्रयागराजयमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? इन सवालों का निष्पक्ष जवाब ही पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकता है।1
- फ़रीदाबाद- चांदपुर में कबाड़ गोदाम पर काम करने वाले दो 18 वर्षीय युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जांच की मांग फ़रीदाबाद- छांयसा थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव में कबाड़ के गोदाम पर काम करने वाले दो 18 वर्षीय युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतकों की पहचान अरबाज और शंकर के रूप में हुई है। दोनों युवक एक ही कबाड़ के गोदाम पर काम करते थे। परिजनों के अनुसार सोमवार रात दोनों युवकों ने गोदाम पर रहने वाले अन्य मजदूरों के साथ खाना खाया था। खाना खाने के कुछ समय बाद अचानक दोनों की तबीयत खराब हो गई। अरबाज ने सीने में दर्द होने की बात मजदूरों को बताई, जबकि शंकर ने पेट में दर्द की शिकायत की। हालत बिगड़ने पर अरबाज को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब चार बजे शंकर की तबीयत भी अचानक ज्यादा खराब हो गई। साथी मजदूर उसे भी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक शंकर की मौत अरबाज की मौत के करीब तीन घंटे बाद हुई। परिजनों का कहना है कि दोनों युवकों के मुंह से झाग निकल रहा था। उन्हें आशंका है कि किसी जहरीली चीज, कीड़े या कोई गलत पदार्थ खाने की वजह से दोनों की तबीयत खराब हुई हो सकती है। हालांकि अभी मौत के सही कारण की पुष्टि नहीं हुई है। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। परिजनों के अनुसार शंकर के माता-पिता नहीं हैं। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। वहीं अरबाज मेवात का रहने वाला था और 18 सितंबर को ही काम करने के लिए चांदपुर गांव आया था। उसे यहां काम करते हुए अभी चार दिन ही हुए थे। दोनों की अचानक हुई मौत के बाद परिजनों ने मामले की सही जांच कराने और मौत के कारण का पता लगाने की मांग की है।3
- पत्नी की हत्या के बाद फरार हुआ मनोज, 72 घंटे तक पुलिस को छकाया, आखिर डबुआ में पकड़ा गया1
- दिल्ली पुलिस ने कालिंदी कुंज थाना क्षेत्र में चलाया Say No to Drugs” यानी “नशे को ना कहें” अभियान दिल्ली में नशे के खिलाफ जंग को लेकर दिल्ली पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। इसी कड़ी में कालिंदी कुंज थाना क्षेत्र के खड्डा कॉलोनी, अर्पण विहार स्थित एनटीपीसी पार्क में “Say No to Drugs” यानी “नशे को ना कहें” अभियान चलाया गया। कालिंदी कुंज थाना अध्यक्ष रमन कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया। नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि नशे की शुरुआत भले ही छोटी लगे, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के साथ-साथ पूरे परिवार और समाज को प्रभावित कर सकता है। लोगों से अपील की गई कि वे खुद नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी नशे से बचाने के लिए जागरूक करें। इस दौरान दिल्ली पुलिस की इस पहल को क्षेत्र के लोगों ने भी सकारात्मक कदम बताया। पुलिस का उद्देश्य सिर्फ नशे के कारोबार पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करके नशे की मांग और लत को कम करना भी है। थाना अध्यक्ष रमन कुमार ने कहा कि इलाके को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि क्षेत्र में नशे का कारोबार या किसी भी तरह की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं नशे का कारोबार या कोई अन्य अवैध गतिविधि दिखाई देती है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। फिलहाल, “नशे को ना कहें” अभियान के जरिए कालिंदी कुंज पुलिस ने लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने का संदेश दिया है। नुक्कड़ नाटक और जन-जागरूकता के माध्यम से पुलिस का प्रयास है कि समाज को नशे की गिरफ्त से बचाया जाए और क्षेत्र को नशामुक्त बनाने की दिशा में लगातार काम किया जाए।1
- 72 घंटे तक पुलिस को चकमा देता रहा पत्नी का कातिल, मोबाइल ऑन होते ही डबुआ में दबोचा गया!1
- नोएडा व्यूरो रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के नोएडा में बुधवार रात यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर एसी बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत1
- दिल्ली: कालकाजी में गैंग रैप के खिलाफ छात्राओं ने मार्च निकाला दिल्ली: कालकाजी इलाके में हुए गैंग रैप की घटना के विरोध में लेडी श्री राम कॉलेज की छात्राओं ने मार्च निकाला। छात्राओं ने आजादी के नारे लगाते हुए पुलिस को अपनी शिकायत दर्ज कराई। इस प्रदर्शन में छात्राओं ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की और इस गंभीर अपराध के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की अपील की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।1