कुदरत का स्वर्ग या बदहाली का नर्क? बेरीनाग के गुरना सहित दर्जनों गांवों की सिसकियों पर कब टूटेगी हुक्मरानों की चुप्पी! कुदरत का स्वर्ग या बदहाली का नर्क? बेरीनाग के गुरना सहित दर्जनों गांवों की सिसकियों पर कब टूटेगी हुक्मरानों की चुप्पी! बेरीनाग (पिथौरागढ़) तहसील मुख्यालय बेरीनाग से महज बीस किलोमीटर दूर, हिमालय की सुरम्य पर्वतमालाओं और बांज-बुरांश की हसीन वादियों के बीच बसा गुरना गांव पहली नजर में किसी जीते-जागते स्वर्ग जैसा नजर आता है। लेकिन इस बेमिसाल कुदरती नक्काशी के पीछे एक खौफनाक जमीनी हकीकत दफन है। यह वह बदनसीब इलाका है, जहां आजादी के अमृतकाल में भी बुनियादी 'सड़क' ग्रामीणों के लिए एक अनसुलझा रहस्य और अधूरा ख्वाब बनकर रह गई है। पगडंडियों पर दम तोड़ती उम्मीदें गुरना ही नहीं, बल्कि उसके आंचल में फैले रीठा, रैतोली, पीपलतड़, म्याल और पिलकी जैसे कई गांवों के हालात प्रशासनिक संवेदनहीनता की गवाही दे रहे हैं। बिष्ट, पुजारा और भण्डारी समुदायों की बहुलता वाले इन गांवों में आज भी मरीज को अस्पताल पहुंचाना हो या रोजमर्रा का राशन घर लाना, सब कुछ खड़ी-पथरीली पगडंडियों और जानलेवा चढ़ाइयों के रहमोकरम पर निर्भर है। सड़क के अभाव में डोली-पालकी के सहारे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते ग्रामीणों की चीखें इन शांत पहाड़ों से टकराकर दम तोड़ देती हैं। मुवानी का सीधा रास्ता, फिर भी हुक्मरानों की बेरुखी क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी कुन्दन सिंह रावल ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह समूचा क्षेत्र जितना प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज है, उतना ही सरकारी उपेक्षा का शिकार भी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गुरना से मुवानी के लिए सदियों पुराना पैदल मार्ग मौजूद है, तो उसे मोटर मार्ग में तब्दील करने में शासन के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं? यदि यह सड़क बन जाती है, तो मुवानी की यात्रा बेहद सुगम और कम खर्चीली हो जाएगी, लेकिन फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। पलायन का दंश: उजड़ते आशियाने और वीरान होती वादियां शिक्षा, यातायात और आपातकालीन चिकित्सा के नाम पर शून्य इन गांवों से अधिकांश बाशिंदे पलायन कर चुके हैं। पहाड़ के नौजवानों को अपनी ही माटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। अब पीछे बचे हैं तो बस कुछ बेबस बुजुर्ग और उम्मीद खोते बच्चे, जो हर सुबह बादलों को चीरती सूरज की किरणों के साथ इस वीराने में विकास की गाड़ी आने का इंतजार करते हैं। अब देखना यह है कि सोए हुए सिस्टम की आंखें कब खुलती हैं या यह सुरम्य वादियां केवल नेताओं के चुनावी पर्यटन का केंद्र बनकर रह जाएंगी।
कुदरत का स्वर्ग या बदहाली का नर्क? बेरीनाग के गुरना सहित दर्जनों गांवों की सिसकियों पर कब टूटेगी हुक्मरानों की चुप्पी! कुदरत का स्वर्ग या बदहाली का नर्क? बेरीनाग के गुरना सहित दर्जनों गांवों की सिसकियों पर कब टूटेगी हुक्मरानों की चुप्पी! बेरीनाग (पिथौरागढ़) तहसील मुख्यालय बेरीनाग से महज बीस किलोमीटर दूर, हिमालय की सुरम्य पर्वतमालाओं और बांज-बुरांश की हसीन वादियों के बीच बसा गुरना गांव पहली नजर में किसी जीते-जागते स्वर्ग जैसा नजर आता है। लेकिन इस बेमिसाल कुदरती नक्काशी के पीछे एक खौफनाक जमीनी हकीकत दफन है। यह वह बदनसीब इलाका है, जहां आजादी के अमृतकाल में भी बुनियादी 'सड़क' ग्रामीणों के लिए एक अनसुलझा रहस्य और अधूरा ख्वाब बनकर रह गई है। पगडंडियों पर दम तोड़ती उम्मीदें गुरना ही नहीं, बल्कि उसके आंचल में फैले रीठा, रैतोली, पीपलतड़, म्याल और पिलकी जैसे कई गांवों के हालात प्रशासनिक संवेदनहीनता की गवाही दे रहे हैं। बिष्ट, पुजारा और भण्डारी समुदायों की बहुलता वाले इन गांवों में आज भी मरीज को अस्पताल पहुंचाना हो या रोजमर्रा का राशन घर लाना, सब कुछ खड़ी-पथरीली पगडंडियों और जानलेवा चढ़ाइयों के रहमोकरम पर निर्भर है। सड़क के अभाव में डोली-पालकी के सहारे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते ग्रामीणों की चीखें इन शांत पहाड़ों से टकराकर दम तोड़ देती हैं। मुवानी का सीधा रास्ता, फिर भी हुक्मरानों की बेरुखी क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी कुन्दन सिंह रावल ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह समूचा क्षेत्र जितना प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज है, उतना ही सरकारी उपेक्षा का शिकार भी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गुरना से मुवानी के लिए सदियों पुराना पैदल मार्ग मौजूद है, तो उसे मोटर मार्ग में तब्दील करने में शासन के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं? यदि यह सड़क बन जाती है, तो मुवानी की यात्रा बेहद सुगम और कम खर्चीली हो जाएगी, लेकिन फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। पलायन का दंश: उजड़ते आशियाने और वीरान होती वादियां शिक्षा, यातायात और आपातकालीन चिकित्सा के नाम पर शून्य इन गांवों से अधिकांश बाशिंदे पलायन कर चुके हैं। पहाड़ के नौजवानों को अपनी ही माटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। अब पीछे बचे हैं तो बस कुछ बेबस बुजुर्ग और उम्मीद खोते बच्चे, जो हर सुबह बादलों को चीरती सूरज की किरणों के साथ इस वीराने में विकास की गाड़ी आने का इंतजार करते हैं। अब देखना यह है कि सोए हुए सिस्टम की आंखें कब खुलती हैं या यह सुरम्य वादियां केवल नेताओं के चुनावी पर्यटन का केंद्र बनकर रह जाएंगी।
- मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद): यह पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिवस की याद में मनाया जाता है।1
- मुस्लिम भाइयों ने मनाया अपने नबी का जन्म दिवस सड़क किया जाम मुस्लिम भाइयों मनाया अपने नबी का जन्म दिवस1
- उत्तराखंड के नैनीताल जिले के डॉन परेवा क्षेत्र में लंबे समय से सड़क की बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा है, जहां ग्रामीणों ने क्षेत्र में पहुंचे क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट और विधायक सरिता आर्या को घेरकर सरेआम खरी-खोटी सुना दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उबड़-खाबड़ और गड्डों में तब्दील हो चुके मुख्य मार्ग की दुर्दशा से नाराज ग्रामीणों ने दोनों जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए साफ कहा कि चुनाव के समय किए गए बड़े-बड़े वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और धरातल पर लोगों का चलना दूभर हो गया है। जनता के भारी विरोध और तीखी नोकझोंक के बीच घिरे नेताओं ने किसी तरह लोगों को शांत कराने का प्रयास किया और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को जल्द से जल्द सड़क सुदृढ़ीकरण और डामरीकरण का काम शुरू करने के कड़े निर्देश दिए, हालांकि ग्रामीणों ने मांग जल्द पूरी न होने पर आगामी समय में उग्र आंदोलन की खुली चेतावनी दी है।1
- बढ़ती महंगाई के खिलाफ कांग्रेस ने फूंका भाजपा सरकार का पुतला बाजपुर। बुधवार बढ़ती महंगाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बन्नाखेड़ा चौराहे पर प्रदर्शन कर भाजपा सरकार का पुतला दहन किया। ब्लॉक अध्यक्ष पवन शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि महंगाई से गरीब और मध्यम वर्ग परेशान है। उन्होंने चेतावनी दी कि महंगाई पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। प्रदर्शन में डीके जोशी, जसपाल सिंह बिल्लू समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- स्लग - सीमांत खटीमा: 'पैगंबर-ए-इस्लाम' के जन्मदिन पर निकला विशाल जुलूस-ए-मोहम्मदी, हजारों लोग हुए शामिल स्थान - खटीमा उधम सिंह नगर रिपोर्ट - अशोक सरकार मो-9758494633 एंकर /विजुअल - ऊधम सिंह नगर के सीमांत क्षेत्र खटीमा में ईद-ए-मिलादुन्नबी का त्योहार बड़े ही अकीदत, धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मुबारक मौके पर शहर में एक विशाल और भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया, जिसमें हजारों की तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश के मौके पर सीमांत खटीमा की सड़कें अकीदत के रंग में रंगी नजर आईं। ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर शहर के प्रमुख मार्गों से एक भव्य जुलूस निकाला गया। हाथों में इस्लामिक परचम के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लिए और पैगंबर साहब की शान में नात-ओ-सलाम पढ़ते हुए हजारों लोग इस जुलूस का हिस्सा बने। जुलूस में बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सभी पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। पूरे रास्ते अमन, मोहब्बत और आपसी भाईचारे के नारों से माहौल गूंजता रहा। जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया गया और लोगों के लिए तबर्रुक व लंगर का भी खास इंतजाम रहा। जुलूस को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शहर के प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम अमन और शांति के साथ संपन्न हुआ। खटीमा में निकले इस विशाल जुलूस ने न केवल मजहबी आस्था की मिसाल पेश की, बल्कि क्षेत्र में कौमी एकता और आपसी सौहार्द का एक मजबूत संदेश भी दिया। बाइट 1 - मौलाना इरफान उल हक कादरी खटीमा बाइट 2 - नासिर खान मस्जिद कमेटी बाइट 3 - आरिफ अंसारी समाजसेवी बाइट 4 - नीरज सेमवाल पुलिस क्षेत्राधिकारी1
- अमरिया में ईद मिलादुन्नबी पर उमड़ा जनसैलाब, हजारों लोगों ने निकाला जुलूसे मोहम्मदी1
- बीसलपुर में जुलूस-ए-मोहम्मदी, पुलिस बल रहा तैनात। बैंड-बाजों के साथ निकले जुलूस में धार्मिक नारों की गूंज रही। बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम चुर्रासकतपुर मुस्लिम समुदाय ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मोत्सव (यौमे पैदाइश) अकीदत के साथ मनाया। इस अवसर पर महादेवा, अभयपुर, चेना, नकटी, मीरपुर, बाहानपुर, रिछोला सबल, चुर्रासकतपुर, शायर, राजुपुर कुंडरी और मूसेली समेत दर्जनों गांवों से जुलूस निकाला गया। बैंड-बाजों के साथ निकले जुलूस में धार्मिक नारों की गूंज रही। उलेमाओं ने भाईचारा, गरीबों की मदद और नेकी के रास्ते पर चलने का संदेश दिया। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत कर फल और मिठाइयां बांटीं गई। सुरक्षा को लेकर भारी पुलिस बल तैनात रहा। चौकी प्रभारी अंकित यादव ने बताया कि जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और पुलिस ने पहले ही मार्गों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की थी।1
- स्कूल से चोरी लैपटॉप और नकदी के साथ दो शातिर चोर गिरफ्तार रामनगर पुलिस ने सीसीटीवी और सर्विलांस की मदद से किया खुलासा, चोरी का सामान बरामद रामनगर। थाना रामनगर क्षेत्र में स्कूल से लैपटॉप और नकदी चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी का लैपटॉप, चार्जर, नकदी, ब्लूटूथ स्पीकर और वारदात में ताला तोड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया पाना बरामद किया है। जानकारी के अनुसार, 20 अगस्त 2026 को कानिया निवासी कैलाश चन्द्र पाण्डेय ने थाना रामनगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके स्कूल से लैपटॉप और करीब 10 हजार रुपये की नकदी चोरी हो गई है। शिकायत के आधार पर थाना रामनगर में FIR संख्या 261/26 के तहत धारा 331 (4)/305(ए) BNS में मुकदमा दर्ज किया गया।1