उपजाऊ कृषि भूमि का उचित मुआवजा मिले इसी को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन मारवाड़ मूंडवा क्षेत्र के हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित किसानों ने मंगलवार दिन में उपखंड मुख्यालय पर विरोध धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने जिला कलेक्टर के नाम उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के लिए उचित मुआवजे की मांग की। किसानों ने कंपनी पर आरोप लगाया कि ट्रांसमिशन टावरों के निर्माण और राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के कारण उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग सीमित हो जाएगा। इससे भूमि का बाजार मूल्य घटेगा और भविष्य में विकास तथा अन्य उपयोग भी प्रभावित होंगे। साथ ही किसानों ने कहा कि सर्किल रेट के आधार पर उन्हें मुआवजा देना गलत किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास या बिजली परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि देश के विकास और बिजली व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए किसानों की भूमि का उचित और न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित किया जाना न्याय संगत है। उन्होंने बताया कि नागौर जिले में अधिकांश स्थानों पर सर्किल रेट वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम है, इसलिए केवल सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देना न्यायोचित नहीं है। ज्ञापन में मांग की गई कि जिन मामलों में सर्किल रेट बाजार मूल्य से कम हो, वहां जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में मार्केट रेट कमेटी गठित की जाए। इसमें स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं से भूमि का वास्तविक मूल्य निर्धारित कराकर उसी आधार पर मुआवजा दिया जाए। किसानों ने प्रभावित भूमि के लिए बाजार दर से चार गुना मुआवजा देने सहित कुल 14 मांगें रखीं। किसानों ने यह भी उल्लेख किया कि एक ही ट्रांसमिशन परियोजना में अलग-अलग राज्यों में मुआवजे की दरों में भारी असमानता है, जो न्यायसंगत नहीं है। एसडीएम बोले-किसानों, व कंपनी प्रतिनिधियों के बीच होगी बातचीत इस दौरान उपखंड अधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया कि किसी की भूमि जबरन नहीं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक वार्ता आयोजित की गई है, जिसमें सभी पक्षों से चर्चा कर उचित एवं संतोषजनक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
उपजाऊ कृषि भूमि का उचित मुआवजा मिले इसी को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन मारवाड़ मूंडवा क्षेत्र के हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित किसानों ने मंगलवार दिन में उपखंड मुख्यालय पर विरोध धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने जिला कलेक्टर के नाम उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के लिए उचित मुआवजे की मांग की। किसानों ने कंपनी पर आरोप लगाया कि ट्रांसमिशन टावरों के निर्माण और राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के कारण उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग सीमित हो जाएगा। इससे भूमि का बाजार मूल्य घटेगा और भविष्य में विकास तथा अन्य उपयोग भी प्रभावित होंगे। साथ ही किसानों ने कहा कि सर्किल रेट के आधार पर उन्हें मुआवजा देना गलत किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास या बिजली परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि देश के विकास और बिजली व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए किसानों की भूमि का उचित और न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित किया जाना न्याय संगत है। उन्होंने बताया कि नागौर जिले में अधिकांश स्थानों पर सर्किल रेट वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम है, इसलिए केवल सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देना न्यायोचित नहीं है। ज्ञापन में मांग की गई कि जिन मामलों में सर्किल रेट बाजार मूल्य से कम हो, वहां जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में मार्केट रेट कमेटी गठित की जाए। इसमें स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं से भूमि का वास्तविक मूल्य निर्धारित कराकर उसी आधार पर मुआवजा दिया जाए। किसानों ने प्रभावित भूमि के लिए बाजार दर से चार गुना मुआवजा देने सहित कुल 14 मांगें रखीं। किसानों ने यह भी उल्लेख किया कि एक ही ट्रांसमिशन परियोजना में अलग-अलग राज्यों में मुआवजे की दरों में भारी असमानता है, जो न्यायसंगत नहीं है। एसडीएम बोले-किसानों, व कंपनी प्रतिनिधियों के बीच होगी बातचीत इस दौरान उपखंड अधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया कि किसी की भूमि जबरन नहीं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक वार्ता आयोजित की गई है, जिसमें सभी पक्षों से चर्चा कर उचित एवं संतोषजनक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
- राजस्थान में मराठी भाषा पढ़ने के संबंध में विरोध चल रहा है और आमरण अनशन 5 दिन से जारी राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा पढ़ाई जाएगी। राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे के निर्देशों के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में 'शास्त्रीय मराठी भाषा अध्ययन केंद्र' (Classical Marathi Language Study Centres) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राजस्थान में मराठी भाषा पढ़ने के संबंध में विरोध चल रहा है और आमरण अनशन 5 दिन से जारी राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा पढ़ाई जाएगी। राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे के निर्देशों के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में 'शास्त्रीय मराठी भाषा अध्ययन केंद्र' (Classical Marathi Language Study Centres) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।1
- रियान बड़ी क्षेत्र में मंगलवार शाम को मौसम ने करवट ली। तेज बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। शाम करीब 5 बजे आसमान में काले घने बादल छाने लगे और 6 बजे तक पूरे क्षेत्र में दिन में ही अंधेरा छा गया, जिसके बाद तेज बारिश शुरू हो गई। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार मौसम में बदलाव के कारण उमस काफी बढ़ गई थी। गर्मी और चिपचिपाहट से लोग परेशान थे। मंगलवार शाम की बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया और लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली। यह बारिश किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन दिनों खरीफ फसलों की बढ़वार का समय है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय होने वाली वर्षा फसलों के विकास के लिए बेहद लाभदायक होती है। खेतों में खड़ी बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार सहित अन्य फसलों को इस बारिश से पर्याप्त नमी मिलेगी, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में भी इसी प्रकार संतुलित वर्षा होती रही, तो इस बार अच्छी पैदावार की संभावना और मजबूत होगी। तेज बारिश का असर क्षेत्र की लूणी नदी पर भी पड़ सकता है। आसपास के इलाकों में हुई वर्षा से नदी के बहाव में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे जल स्रोतों का जलस्तर भी सुधरेगा। ग्रामीणों का मानना है कि लगातार हो रही अच्छी बारिश से तालाबों, जोहड़ों और अन्य जलाशयों में पानी की आवक बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई की स्थिति बेहतर होगी। कुल मिलाकर, मंगलवार शाम हुई बारिश ने जहां लोगों को उमस से राहत दी, वहीं किसानों के लिए बेहतर फसल की उम्मीद जगाई है। रियान बड़ी क्षेत्र में मंगलवार शाम को मौसम ने करवट ली। तेज बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। शाम करीब 5 बजे आसमान में काले घने बादल छाने लगे और 6 बजे तक पूरे क्षेत्र में दिन में ही अंधेरा छा गया, जिसके बाद तेज बारिश शुरू हो गई। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार मौसम में बदलाव के कारण उमस काफी बढ़ गई थी। गर्मी और चिपचिपाहट से लोग परेशान थे। मंगलवार शाम की बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया और लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली। यह बारिश किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन दिनों खरीफ फसलों की बढ़वार का समय है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय होने वाली वर्षा फसलों के विकास के लिए बेहद लाभदायक होती है। खेतों में खड़ी बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार सहित अन्य फसलों को इस बारिश से पर्याप्त नमी मिलेगी, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में भी इसी प्रकार संतुलित वर्षा होती रही, तो इस बार अच्छी पैदावार की संभावना और मजबूत होगी। तेज बारिश का असर क्षेत्र की लूणी नदी पर भी पड़ सकता है। आसपास के इलाकों में हुई वर्षा से नदी के बहाव में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे जल स्रोतों का जलस्तर भी सुधरेगा। ग्रामीणों का मानना है कि लगातार हो रही अच्छी बारिश से तालाबों, जोहड़ों और अन्य जलाशयों में पानी की आवक बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई की स्थिति बेहतर होगी। कुल मिलाकर, मंगलवार शाम हुई बारिश ने जहां लोगों को उमस से राहत दी, वहीं किसानों के लिए बेहतर फसल की उम्मीद जगाई है।1
- मांगलियावास हाईवे अर्जुनपुरा खालसा के पास हाईवे अथॉरिटी के सामने किसान अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अजमेर के आदेश लिए मिन्नते करता रहा, हाईवे अथॉरिटी अधिकारियों ने नहीं माने अतिरिक्त जिला कलेक्टर के आदेश, किसान ने दी न्यायालय की शरण में जाने और पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज करवाने की चेतावनी मांगलियावास हाईवे अर्जुनपुरा खालसा के पास हाईवे अथॉरिटी के सामने किसान अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अजमेर के आदेश लिए मिन्नते करता रहा, हाईवे अथॉरिटी अधिकारियों ने नहीं माने अतिरिक्त जिला कलेक्टर के आदेश, किसान ने दी न्यायालय की शरण में जाने और पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज करवाने की चेतावनी2
- अजमेर अपराधियों के मकानों को तोड़ने की कार्रवाई करते समय बड़ी दीवार पड़ोसी के मकान पर गिरी पट्टी टूटी1
- Google पर Customer Care नंबर सर्च करना पड़ा भारी! क्रेडिट कार्ड के नाम पर लाखों की ठगी, SOG से Zero FIR के बाद अजमेर साइबर पुलिस जांच में अजमेर से साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। जयपुर निवासी एक युवक को क्रेडिट कार्ड के लिए गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करना भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने खुद को कस्टमर केयर अधिकारी बताकर युवक से संपर्क किया और लाखों रुपये की ठगी कर ली। मामले में एसओजी से जीरो नंबर FIR दर्ज होने के बाद केस अजमेर साइबर थाने को ट्रांसफर किया गया है। फिलहाल साइबर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।1
- एक पेड़ गौ माता के नाम' अभियान से ईटावड़ा गौशाला में हरियाली की पहल पादूकलां क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम ईटावड़ा से पर्यावरण संरक्षण और गौसेवा का प्रेरणादायक संदेश सामने आया है। यहां 'एक पेड़ गौ माता के नाम' अभियान के तहत गौशाला परिसर में पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया गया। बिखरनियांकलां ग्राम पंचायत के ईटावड़ा स्थित श्री बालाजी गौ सेवा समिति के तत्वावधान में हरियाली राजस्थान अभियान के तहत गौशाला परिसर में छायादार, फलदार और औषधीय प्रजातियों के विभिन्न पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में समिति पदाधिकारियों, ग्रामीणों और युवाओं ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।गौशाला अध्यक्ष सीताराम वैष्णव ने बताया कि अभियान का उद्देश्य गौशाला परिसर को हराभरा बनाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देना है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी ग्रामीणों ने स्वयं ली है।कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष हनुमानराम लोरा, सचिव लुणाराम रिणवां, पशुधन निरीक्षक रक्षा पारीक सहित समिति के पदाधिकारी, गौरक्षक, ग्रामीण और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे। सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प लिया।ईटावड़ा गौशाला से शुरू हुआ 'एक पेड़ गौ माता के नाम' अभियान अब ग्रामीणों के लिए पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बन रहा है। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो हरियाली राजस्थान का सपना साकार हो सकता है।4
- नागौर जिले की थांवला पुलिस ने अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लगभग 18 टन अवैध बजरी बरामद की। खनिज विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दो मामले दर्ज किए गए हैं और जांच शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी उप निरीक्षक उमराव जाट के नेतृत्व में की गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों के बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार लगातार जारी है। पुलिस ने गश्त के दौरान आलनियावास क्षेत्र से दो और थांवला-अजमेर मार्ग से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को अवैध बजरी का परिवहन करते हुए पकड़ा। वाहनों की जांच में वैध रॉयल्टी या परिवहन संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद खनिज विभाग की रिपोर्ट पर बीएनएस की धारा 303(2) और एमएमआरडी एक्ट की धारा 4/21 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया का सोशल मीडिया नेटवर्क बहुत सक्रिय है। पुलिस या खनन विभाग की गाड़ियों की सूचना मिलते ही अवैध खनन में लगे वाहन तुरंत नदी क्षेत्र से हटा लिए जाते हैं। अधिकारियों के लौटने के बाद खनन फिर से शुरू हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, लूणी नदी क्षेत्र में पूरे दिन जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बजरी निकाली जाती है। स्थानीय किसानों ने अवैध खनन से लूणी नदी के प्राकृतिक स्वरूप में हो रहे बदलाव पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में नदी चंबल के बीहड़ों जैसी हो सकती है। किसानों के मुताबिक, अत्यधिक खनन के कारण बारिश का पानी नदी क्षेत्र में रुकने के बजाय तेजी से बह जाता है, जिससे भू-जल पुनर्भरण प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर आसपास के कुओं और ट्यूबवेलों के जलस्तर पर पड़ने की आशंका है। नागौर जिले की थांवला पुलिस ने अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लगभग 18 टन अवैध बजरी बरामद की। खनिज विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दो मामले दर्ज किए गए हैं और जांच शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी उप निरीक्षक उमराव जाट के नेतृत्व में की गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों के बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार लगातार जारी है। पुलिस ने गश्त के दौरान आलनियावास क्षेत्र से दो और थांवला-अजमेर मार्ग से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को अवैध बजरी का परिवहन करते हुए पकड़ा। वाहनों की जांच में वैध रॉयल्टी या परिवहन संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद खनिज विभाग की रिपोर्ट पर बीएनएस की धारा 303(2) और एमएमआरडी एक्ट की धारा 4/21 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया का सोशल मीडिया नेटवर्क बहुत सक्रिय है। पुलिस या खनन विभाग की गाड़ियों की सूचना मिलते ही अवैध खनन में लगे वाहन तुरंत नदी क्षेत्र से हटा लिए जाते हैं। अधिकारियों के लौटने के बाद खनन फिर से शुरू हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, लूणी नदी क्षेत्र में पूरे दिन जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बजरी निकाली जाती है। स्थानीय किसानों ने अवैध खनन से लूणी नदी के प्राकृतिक स्वरूप में हो रहे बदलाव पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में नदी चंबल के बीहड़ों जैसी हो सकती है। किसानों के मुताबिक, अत्यधिक खनन के कारण बारिश का पानी नदी क्षेत्र में रुकने के बजाय तेजी से बह जाता है, जिससे भू-जल पुनर्भरण प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर आसपास के कुओं और ट्यूबवेलों के जलस्तर पर पड़ने की आशंका है।1
- पुलिस कस्टडी से भाग रहे गैंगरेप के आरोपियों पर टूटा भीड़ का कहर, भीड़ से आरोपियों को छुड़ाने में छूटे पुलिस के पसीने। #rudrapur #udhamsinghnagar #GangRape1