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जनगणना पर सीकर कलेक्टर का बड़ा बयान, क्यों है हलचल देखते है.........

17 hrs ago
user_DEV GURJAR
DEV GURJAR
Taxi Driver श्री माधोपुर, सीकर, राजस्थान•
17 hrs ago

जनगणना पर सीकर कलेक्टर का बड़ा बयान, क्यों है हलचल देखते है.........

More news from राजस्थान and nearby areas
  • खाटूश्यामजी में गेस्ट हाउस में जमकर तोड़फोड़, सीसीटीवी में कैद हुई पूरी वारदात का वीडियो
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    खाटूश्यामजी में गेस्ट हाउस में जमकर तोड़फोड़, सीसीटीवी में कैद हुई पूरी वारदात का वीडियो
    user_SIKAR NATION NEWS
    SIKAR NATION NEWS
    Local News Reporter सीकर ग्रामीण, सीकर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    1
    Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    user_RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    Sikar, Rajasthan•
    13 hrs ago
  • #murder #surajgarh #jhunjhunu
    1
    #murder #surajgarh #jhunjhunu
    user_PGS INDIA NEWS
    PGS INDIA NEWS
    Court reporter सीकर ग्रामीण, सीकर, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • Post by सम्राट vlog नवलगढ़
    1
    Post by सम्राट vlog नवलगढ़
    user_सम्राट vlog नवलगढ़
    सम्राट vlog नवलगढ़
    Local News Reporter नवलगढ़, झुंझुनू, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • #Horoscope #DailyHoroscope #Astrology #ZodiacSigns #AstrologyReading #Zodiac #HoroscopeToday #AstroLife #StarSigns #CosmicEnergy 🌟 USA Audience Target Hashtags #USA #AmericanAudience #USATrend #TrendingUSA #USALifestyle #ExploreUSA #ViralUSA ♈ Zodiac Specific (Example) (आप अपनी राशि के हिसाब से यूज़ करें) Aries: #Aries #AriesSeason Taurus: #Taurus #TaurusVibes Gemini: #Gemini #GeminiSeason Cancer: #CancerZodiac Leo: #LeoSeason Virgo: #VirgoVibes Libra: #LibraLife Scorpio: #ScorpioEnergy Sagittarius: #SagittariusVibes Capricorn: #CapricornLife Aquarius: #AquariusSeason Pisces: #PiscesEnergyरोज़ानानमस्कार दोस्तों 🙏 स्वागत है आपका हमारे यूट्यूब चैनल एस्ट्रो राशिफल में। यहाँ आपको रोज़ाना मिलेगी सभी 12 राशियों का सटीक राशिफल, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और आपके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण ज्योतिष जानकारी। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा, किस राशि को मिलेगा धन लाभ और किसे मिलेगी खुशखबरी, तो हमारे चैनल एस्ट्रो राशिफल को अभी सब्सक्राइब करें और बेल आइकन जरूर दबाएँ 🔔 ताकि आपको रोज़ सबसे पहले आज का राशिफल मिल सके। धन्यवाद 🙏 जय हिंद।#astrologer #astrology #facts #horoscope #horoscopetagalog #horoscopefortoday #horoscopeabayoyvettesandrine #horoscope2024 #horoscopereading #horoscopetoday #horoscope2025 #horoscopengayongaraw #horoscopepredictions #horoscopetelugu #horoscopesinhala #horoscopemalayalam #horoscopekannada #todayhoroscope, #astrologer #astrology #facts #horoscope, #horoscopetagalog, #horoscopefortoday,#horoscopeabayoyvettesandrine, #horoscope2024, #horoscopereading, #horoscopetoday, #horoscope2025, #horoscopengayongaraw, #horoscopepredictions, #horoscopetelugu, #horoscopesinhala, #horoscopemalayalam, #horoscopekannada, @VanessaRaye, @SiriusJoyTV, @searchlighttarot, @ZodiacAttraction, @harisazmiastrologer, @Vaidik_JyoI, @111HindiTarot, यह बात भली भांति समझ लें कि दुख की घड़ी में आपका संचित धन ही आपके काम आएगा इसलिए आज के दिन अपने धन का संचय करने का विचार बनाएं। जिसके साथ आप रहते हैं, उससे वाद-विवाद करने से बचें। यदि कोई समस्या है, तो उसे शान्ति से बातचीत करके सुलझाएँ। आपको अपने प्रिय के साथ समय बिताने की ज़रूरत है, ताकि आप दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से जान व समझ सकें। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। आज आप अपने जीवनसाथी के साथ सैर-सपाटे का मज़ा ले सकते हैं। साथ में समय गुज़ारने का यह बढ़िया मौक़ा है। आपकी कमियां आपको अच्छी तरह से पता हैं आपको जरुरत है उन कमियों को दूर करने की। भाग्यांक: 1 e
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भाग्यांक: 1 e
    user_Roopsingh Chouhan
    Roopsingh Chouhan
    Artist कालवाड़, जयपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस केवल उन लोगों का दिन ही नहीं है जो काम में लगे हुए हैं, बल्कि उन सभी परोलेटेरिएट (काम में लगे+काम से निकाले+युवाओं का भी है जो काम से बाहर हैं और रोजगार की तलाश में हैं।)का दिन है । इस दिन का नाम भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस है जिसको आम बोलचाल भाषा मे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस या मई दिवस कहा जाता है। क्योंकि इतिहास में यह पहली बार 1 मई 1848 को मनाया गया और यह दिन यूरोप में काम करने का शिखर वाला दिन होता है इसलिए इसको चुना गया और आज भी पहली मई के दिन ही मनाया जाता है। आज के दौर में यह समझना और भी जरूरी हो गया है कि श्रम दिवस का सवाल केवल मजदूरी बढ़ाने, सेवा सुरक्षा या सेवा शर्तों से संबंधित ही नहीं, बल्कि सबको रोजगार गारंटी और काम करने के दिन की कानूनी अवधि को तय करने के सैद्धांतिक नियम को याद कर लागू करने का दिन भी हैं जिसका सापेक्ष रूप में संबंध तकनीकी उन्नति व उत्पादकता के साथ होता है जो बेरोजगारी दूर करने और काम के बोझ को घटाने का सूत्र देता है। श्रम दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ एक प्राकृतिक दिन में 24 घंटे होते हैं, इनमें से जीवनयापन के लिए मजदूर कितने घंटे अपनी श्रम शक्ति बेचता है, यही“कार्य दिवस” या श्रम दिवस कहलाता है जो कभी भी 24 घंटे नहीं हो सकता तथा शून्य भी नहीं हो सकता। यह सीमा बहुत ही लचीली सीमा होती है जिसको श्रमिक अपने संघर्षों से तय करवाते हैं । इतिहास में यह कार्य दिवस कभी 20, 18, 16, 14, 12, 10 और अंतत: 1890 में 8 घंटे तक सीमित करवाया गया था । तब 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक कार्यों के लिए सामान्य कार्य दिवस माना गया। लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद जब मशीनों का उपयोग बढ़ा तो उत्पादन भी बढ़ा लेकिन मशीन के विलोमानुपात में श्रमिकों की जरुरत घटने लगी/ बेरोजगारी पहली बार बड़े पैमाने पर सामने आई। इंग्लैंड में कारखानों के बाहर ‘श्रमिकों की जरुरत नहीं" जैसे बोर्ड लगाए जाने लगे। इसी दौर में मशीनों के खिलाफ संघर्ष करने वाला "लुडाइट आंदोलन" उभरा, जिनका कहना था कि मशीनें ही मजदूरों की दुश्मन हैं जो इनका रोजगार छीनती हैं लेकिन कार्ल मार्क्स ने सिद्धांत देकर सिद्ध किया कि तकनीकी उन्नति मानव की सहयोगी है उसका स्वागत किया जाना चाहिए उसको रोका नहीं जाना चाहिए और न ही रोका जा सकता है। संगठित संघर्ष और कार्य दिवस अवधि में कमी मजदूरों ने रोजगार तथा फ्री टाइम पाने के लिए संघर्षों के माध्यम से कार्य दिवस अवधि को समय समय पर कम करवाया। 19वीं सदी में यह 12 घंटे, फिर 10 घंटे तथा 8 घंटे तक सीमित करवाया। "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" के माध्यम से कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगल्स ने इन संघर्षों को सैद्धांतिक दिशा दी और 1848 में काम के दिन को 10 घंटे के रूप में जब जीता गया तो इसे अपनी सैद्धांतिक जीत बताया। 1866 में अंतर्राष्ट्रीय वर्कर्स एसोसिएशन की बैठक में 8 घंटे के कार्य दिवस की आवश्यकता का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 मई 1886 को शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए ऐतिहासिक हड़ताल की। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने अपनी जान दी, अंतत : 8 घंटे का कार्य दिवस एक वैश्विक मानक बन गया। कार्ल मार्क्स ने अपनी विश्व प्रसिद्ध कृति "दास कैपिटल' में लिखा कि मजदूर के जीवन का स्तर इस बात से तय होता हैं कि वह एक काम के दिन में कितना समय अपने लिए काम करता है और कितना समय बुर्जुआ वर्ग के लिए। "आवश्यक श्रम'' और "अतिरिक्त श्रम समय" का सवाल मार्क्सवाद के अनुसार कार्य दिवस दो भागों में बंटा होता है- "आवश्यक श्रम समय" : जिसमें मजदूर अपनी मजदूरी के बराबर उत्पादन करता है। "अतिरिक्त श्रम समय" : जिसमें वह पूंजीपति के लिए मुनाफा पैदा करता है। तकनीकी विकास के साथ "आवश्यक श्रम समय' घटता चला जाता है, लेकिन "अतिरिक्त श्रम समय' बढता चला जाता है। यही पूंजीवादी शोषण का आधार है।तकनीकी विकास, एआई और बढती बेरोजगारी:- आज तकनीक, ऑटोमेशन और एआई के कारण उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है। एक व्यक्ति मशीन की सहायता से पहले के मुकाबले कई गुना अधिक उत्पादन कर देता है लेकिन इस का लाभ समाज को समान रूप से नहीं दिया जाता।परिणामस्वरूप- बेरोजगारी बढ़ जाती है। काम करने वालों पर काम का बोझ बढ़ जाता है। क्रयशक्ति घट जाती है। सामाजिक असमानता बढ़ जाती है जो लक्षण अब अपने चरम पर हैं। आज एक तरफ लाखों युवा बेरोजगार हैं, तो दूसरी तरफ काम करने वाले मजदूरों के पास फ्री टाइम नहीं है। इसलिए आज तकनीकी उन्नति के कारण कार्य दिवस अवधि कानूनी रूप से 8 घंटे से घटाकर 6 घंटे की जरुरत है। इतिहास में 8 घंटे का कार्य दिवस एक बड़ी उपलब्धि थी लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह पर्याप्त नहीं है। आज एक आई के दौर में जब उत्पादन क्षमता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ चुकी है तो कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप से घटाना ही तार्किक और न्यायसंगत कदम है। इसलिए आज का केंद्रीय नारा होना चाहिए:“काम का दिन 6 घंटे या उससे कम किया जाए' जो बेरोजगारी को खत्म करेगा। रोजगार के अवसर बढ़ाएगा। मजदूरों को फ्री टाईम देगा। सामाजिक जीवन को बेहतर बनाएगा। बेरोजगार युवाओं का सवाल अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस को केवल काम करने वालों तक सीमित करना अधूरा दृष्टिकोण है। बल्कि यह काम से बाहर बैठे युवाओं को रोजगार में लाने का सैद्धांतिक अवसर भी होता है। आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि- काम कर रहे लोगों पर काम का इतना बोझ क्यों तथा जो काम करना चाहते हैं, उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा? इस समस्या का सैद्धांतिक उत्तर व समाधान आज के दिन के अवसर पर सैद्धांतिक रूप में काम की अवधि को कानूनी रूप से कम करने में ही है जिसे हमने कई दशकों से तिलांजलि देकर आंखों से ओझल कर रखा है। हालांकि यह सूत्र सबसे कारगर सूत्र है। इसके अलावा कोई भी सूत्र वर्तमान सामाजिक संकट को हल नहीं करता। उदाहरण के तौर पर कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप में 8 घंटे से घटाकर 6 करने पर काम का समय 25% घटेगा और रोजगार के अवसर 33% बढ़ेंगे। इसी प्रकार काम के दिन को 20% सीमित करने पर रोजगार 25% बढता है। काम के दिन को 30% सीमित करने पर रोजगार 42% बढता है। काम के दिन को 40% सीमित करने तथा काम के दिन को 50%सीमित करने पर रोजगार के अवसर 100% बढ़ जाते हैं। निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस का वर्तमान संदेश:- आज जब साप्ताहिक कार्य घंटे 70-90 तक बढाने की बातें हो रही हैं, तब श्रम दिवस का सिद्धांत हमें एक अलग दिशा दिखाता है। सबको रोजगार मिले तथा रोजगार में लगे लोगों को फ्री टाइम देने का एक मात्र यही वह रास्ता है जिससे बेरोजगारी खत्म होगी। मजदूरों का जीवन बेहतर होगा। समाज अधिक न्यायपूर्ण बनेगा। अत: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर शिकागो मजदूर आंदोलन 1886 के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए आज के दौर में 6 घंटे के कार्य दिवस को एक नए ऐतिहासिक लक्ष्य के रूप में स्थापित करें।
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    अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस केवल उन लोगों का दिन ही नहीं है जो काम में लगे हुए हैं, बल्कि उन सभी परोलेटेरिएट (काम में लगे+काम से  निकाले+युवाओं का भी है जो काम से बाहर हैं और रोजगार की तलाश में हैं।)का दिन है । इस दिन का नाम भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस है जिसको आम बोलचाल भाषा मे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस या  मई दिवस कहा जाता है। क्योंकि इतिहास में यह पहली बार 1 मई 1848 को मनाया गया और यह दिन यूरोप में काम करने का शिखर वाला दिन होता है इसलिए इसको चुना गया और आज भी पहली मई के दिन ही मनाया जाता है।
आज के दौर में यह समझना और भी जरूरी हो गया है कि श्रम दिवस का सवाल केवल मजदूरी बढ़ाने, सेवा सुरक्षा या सेवा शर्तों से संबंधित ही नहीं, बल्कि सबको रोजगार गारंटी और  काम करने के दिन की कानूनी अवधि को तय करने के सैद्धांतिक नियम को याद कर लागू करने का दिन भी हैं  जिसका सापेक्ष रूप में संबंध तकनीकी उन्नति व उत्पादकता के साथ होता है जो बेरोजगारी दूर करने और काम के बोझ को घटाने का सूत्र देता है।
श्रम दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
एक  प्राकृतिक दिन में 24 घंटे होते हैं, इनमें से जीवनयापन के लिए मजदूर कितने घंटे अपनी श्रम शक्ति बेचता है, यही“कार्य दिवस” या श्रम दिवस कहलाता है जो कभी भी 24 घंटे नहीं हो सकता तथा शून्य भी नहीं हो सकता। यह सीमा बहुत ही लचीली सीमा होती है जिसको श्रमिक अपने संघर्षों से तय करवाते हैं । इतिहास में यह कार्य दिवस कभी 20, 18, 16, 14, 12, 10 और अंतत:  1890 में 8 घंटे तक सीमित  करवाया गया था । तब 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक कार्यों के लिए सामान्य कार्य दिवस माना गया।
लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद जब मशीनों का उपयोग बढ़ा  तो उत्पादन  भी बढ़ा लेकिन  मशीन के विलोमानुपात में श्रमिकों की जरुरत घटने लगी/ बेरोजगारी पहली बार बड़े पैमाने पर सामने आई। इंग्लैंड  में कारखानों के बाहर ‘श्रमिकों की  जरुरत नहीं" जैसे बोर्ड  लगाए जाने लगे।
इसी दौर में मशीनों के खिलाफ संघर्ष करने वाला
"लुडाइट आंदोलन" उभरा, जिनका कहना था कि  मशीनें ही मजदूरों की दुश्मन हैं जो  इनका रोजगार छीनती हैं लेकिन कार्ल मार्क्स ने सिद्धांत  देकर  सिद्ध किया कि तकनीकी उन्नति मानव की सहयोगी है उसका स्वागत किया जाना चाहिए उसको रोका नहीं जाना चाहिए और न ही रोका जा सकता है।
संगठित संघर्ष और कार्य दिवस अवधि में कमी
मजदूरों ने रोजगार तथा फ्री टाइम पाने के लिए संघर्षों  के  माध्यम से  कार्य दिवस  अवधि को समय  समय पर कम करवाया। 19वीं सदी में यह 12 घंटे, फिर 10 घंटे तथा 8 घंटे तक सीमित  करवाया।
"कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" के माध्यम से कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगल्स ने इन संघर्षों को सैद्धांतिक दिशा दी और 1848 में काम के दिन को 10 घंटे के रूप में जब जीता गया तो इसे अपनी सैद्धांतिक जीत बताया। 1866 में अंतर्राष्ट्रीय वर्कर्स एसोसिएशन की बैठक में 8 घंटे के कार्य दिवस की आवश्यकता का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 मई 1886 को शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए ऐतिहासिक  हड़ताल की। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने अपनी जान दी,  अंतत :  8 घंटे का कार्य दिवस एक वैश्विक मानक बन गया।
कार्ल मार्क्स ने अपनी  विश्व प्रसिद्ध कृति "दास कैपिटल' में लिखा कि मजदूर के जीवन का स्तर इस बात से तय होता हैं कि वह एक  काम  के दिन में कितना समय अपने लिए काम करता है और  कितना समय बुर्जुआ वर्ग के लिए।
"आवश्यक श्रम'' और "अतिरिक्त श्रम समय" का सवाल
मार्क्सवाद के अनुसार कार्य दिवस दो भागों में
बंटा होता है-
"आवश्यक श्रम समय" : जिसमें मजदूर अपनी मजदूरी के बराबर उत्पादन करता है।
"अतिरिक्त श्रम समय" : जिसमें वह पूंजीपति के लिए
मुनाफा पैदा करता है।
तकनीकी विकास के साथ "आवश्यक श्रम समय' घटता चला जाता है, लेकिन "अतिरिक्त श्रम समय' बढता चला जाता है। यही पूंजीवादी शोषण का आधार है।तकनीकी विकास, एआई और बढती बेरोजगारी:-
आज तकनीक, ऑटोमेशन और एआई के कारण उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है। एक व्यक्ति मशीन की सहायता से पहले के मुकाबले कई गुना अधिक उत्पादन कर देता है लेकिन इस का लाभ समाज को समान रूप से नहीं  दिया जाता।परिणामस्वरूप-
बेरोजगारी बढ़ जाती है। काम करने वालों पर काम का बोझ  बढ़ जाता है। क्रयशक्ति घट जाती है। सामाजिक असमानता बढ़  जाती है जो लक्षण अब अपने चरम पर हैं। आज एक तरफ लाखों युवा बेरोजगार हैं, तो दूसरी तरफ काम करने वाले मजदूरों के पास फ्री टाइम नहीं है। इसलिए आज तकनीकी उन्नति के कारण कार्य दिवस अवधि कानूनी रूप से 8 घंटे से घटाकर 6 घंटे  की जरुरत है।
इतिहास में 8 घंटे का कार्य दिवस एक बड़ी उपलब्धि  थी लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह पर्याप्त नहीं है। आज एक आई के दौर में जब उत्पादन क्षमता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ चुकी है तो  कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप से घटाना ही तार्किक और न्यायसंगत कदम है। इसलिए आज का केंद्रीय नारा होना चाहिए:“काम का दिन 6 घंटे या उससे कम किया जाए' जो बेरोजगारी को  खत्म करेगा। रोजगार के अवसर बढ़ाएगा। मजदूरों को फ्री टाईम देगा। सामाजिक जीवन को बेहतर बनाएगा।
बेरोजगार युवाओं का सवाल
अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस को केवल काम करने वालों तक
सीमित करना अधूरा दृष्टिकोण है। बल्कि यह काम से बाहर बैठे युवाओं को रोजगार में लाने का सैद्धांतिक अवसर भी होता है।
आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि-
काम कर रहे लोगों पर काम का इतना बोझ क्यों तथा जो काम करना चाहते हैं, उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा?
इस समस्या का  सैद्धांतिक उत्तर व समाधान आज के दिन के अवसर पर सैद्धांतिक रूप में काम  की अवधि को कानूनी रूप से कम करने  में ही है जिसे हमने कई दशकों से तिलांजलि देकर आंखों से ओझल कर रखा है। हालांकि यह सूत्र सबसे कारगर सूत्र है। इसके अलावा कोई भी सूत्र वर्तमान सामाजिक संकट को हल नहीं करता।
उदाहरण के तौर पर कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप में 8 घंटे से घटाकर 6 करने पर काम का समय 25% घटेगा और रोजगार के अवसर 33% बढ़ेंगे। इसी प्रकार काम के दिन को 20% सीमित करने पर रोजगार 25% बढता है। काम के दिन को 30% सीमित करने पर रोजगार 42% बढता है। काम के दिन को 40% सीमित करने तथा काम के दिन को 50%सीमित करने पर रोजगार के अवसर 100% बढ़ जाते हैं।
निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस का  वर्तमान संदेश:-
आज जब साप्ताहिक कार्य घंटे 70-90 तक बढाने की
बातें हो रही हैं, तब श्रम दिवस का सिद्धांत हमें एक
अलग दिशा दिखाता है। सबको रोजगार मिले तथा  रोजगार में लगे लोगों को फ्री टाइम देने का एक मात्र यही वह रास्ता है जिससे बेरोजगारी खत्म होगी। मजदूरों का जीवन बेहतर होगा। समाज अधिक न्यायपूर्ण बनेगा।
अत: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर शिकागो मजदूर आंदोलन 1886 के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए आज के दौर में 6 घंटे के कार्य दिवस को एक नए ऐतिहासिक लक्ष्य के रूप में स्थापित करें।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    8 hrs ago
  • Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    1
    Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    user_RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    Sikar, Rajasthan•
    15 hrs ago
  • पलसाना। श्री श्याम संकीर्तन के प्रथम वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में कस्बे के लाल चौक में गुरुवार रात विशाल श्री श्याम भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम रात 8 बजे से शुरू होकर देर रात तक प्रभु इच्छा तक चलता रहा। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पावन सानिध्य श्री श्री 1008 निम्बार्क रत्न महंत मनोहर शरण शास्त्री जी महाराज का रहा। भजन संध्या में श्याम रस के प्रसिद्ध गायक पप्पू शर्मा (खाटू वाले), प्रिया पाल एवं अमित खंडेलवाल (सीकर वाले) ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जानकारी देते हुए निम्बार्क रत्न महंत मनोहर शरण शास्त्री महाराज ने बताया कि यह श्याम संकीर्तन आज से एक वर्ष पहले शुरू किया गया था, जो हर माह की ग्यारस को पलसाना के बालाजी मंदिर में नियमित रूप से आयोजित होता है। 30 अप्रैल को इस संकीर्तन के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ही यह विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन संध्या के दौरान बाबा श्याम का दिव्य दरबार आकर्षक रूप से सजाया गया। बाबा श्याम को छप्पन भोग अर्पित किया गया और अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित की गई। जैसे ही भजनों की प्रस्तुति शुरू हुई, श्याम भक्त भाव-विभोर हो उठे। भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया। देर रात तक भक्तजन नाचते-गाते हुए बाबा श्याम की भक्ति में लीन रहे।
    1
    पलसाना। श्री श्याम संकीर्तन के प्रथम वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में कस्बे के लाल चौक में गुरुवार रात विशाल श्री श्याम भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम रात 8 बजे से शुरू होकर देर रात तक प्रभु इच्छा तक चलता रहा। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में पावन सानिध्य श्री श्री 1008 निम्बार्क रत्न महंत मनोहर शरण शास्त्री जी महाराज का रहा। भजन संध्या में श्याम रस के प्रसिद्ध गायक पप्पू शर्मा (खाटू वाले), प्रिया पाल एवं अमित खंडेलवाल (सीकर वाले) ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जानकारी देते हुए निम्बार्क रत्न महंत मनोहर शरण शास्त्री महाराज ने बताया कि यह श्याम संकीर्तन आज से एक वर्ष पहले शुरू किया गया था, जो हर माह की ग्यारस को पलसाना के बालाजी मंदिर में नियमित रूप से आयोजित होता है। 30 अप्रैल को इस संकीर्तन के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ही यह विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया।
भजन संध्या के दौरान बाबा श्याम का दिव्य दरबार आकर्षक रूप से सजाया गया। बाबा श्याम को छप्पन भोग अर्पित किया गया और अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित की गई। जैसे ही भजनों की प्रस्तुति शुरू हुई, श्याम भक्त भाव-विभोर हो उठे। भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया। देर रात तक भक्तजन नाचते-गाते हुए बाबा श्याम की भक्ति में लीन रहे।
    user_SIKAR NATION NEWS
    SIKAR NATION NEWS
    Local News Reporter सीकर ग्रामीण, सीकर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • Post by सम्राट vlog नवलगढ़
    1
    Post by सम्राट vlog नवलगढ़
    user_सम्राट vlog नवलगढ़
    सम्राट vlog नवलगढ़
    Local News Reporter नवलगढ़, झुंझुनू, राजस्थान•
    7 hrs ago
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