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अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस: काम करने वालों के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं का भी दिन अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस केवल उन लोगों का दिन ही नहीं है जो काम में लगे हुए हैं, बल्कि उन सभी परोलेटेरिएट (काम में लगे+काम से निकाले+युवाओं का भी है जो काम से बाहर हैं और रोजगार की तलाश में हैं।)का दिन है । इस दिन का नाम भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस है जिसको आम बोलचाल भाषा मे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस या मई दिवस कहा जाता है। क्योंकि इतिहास में यह पहली बार 1 मई 1848 को मनाया गया और यह दिन यूरोप में काम करने का शिखर वाला दिन होता है इसलिए इसको चुना गया और आज भी पहली मई के दिन ही मनाया जाता है। आज के दौर में यह समझना और भी जरूरी हो गया है कि श्रम दिवस का सवाल केवल मजदूरी बढ़ाने, सेवा सुरक्षा या सेवा शर्तों से संबंधित ही नहीं, बल्कि सबको रोजगार गारंटी और काम करने के दिन की कानूनी अवधि को तय करने के सैद्धांतिक नियम को याद कर लागू करने का दिन भी हैं जिसका सापेक्ष रूप में संबंध तकनीकी उन्नति व उत्पादकता के साथ होता है जो बेरोजगारी दूर करने और काम के बोझ को घटाने का सूत्र देता है। श्रम दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ एक प्राकृतिक दिन में 24 घंटे होते हैं, इनमें से जीवनयापन के लिए मजदूर कितने घंटे अपनी श्रम शक्ति बेचता है, यही“कार्य दिवस” या श्रम दिवस कहलाता है जो कभी भी 24 घंटे नहीं हो सकता तथा शून्य भी नहीं हो सकता। यह सीमा बहुत ही लचीली सीमा होती है जिसको श्रमिक अपने संघर्षों से तय करवाते हैं । इतिहास में यह कार्य दिवस कभी 20, 18, 16, 14, 12, 10 और अंतत: 1890 में 8 घंटे तक सीमित करवाया गया था । तब 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक कार्यों के लिए सामान्य कार्य दिवस माना गया। लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद जब मशीनों का उपयोग बढ़ा तो उत्पादन भी बढ़ा लेकिन मशीन के विलोमानुपात में श्रमिकों की जरुरत घटने लगी/ बेरोजगारी पहली बार बड़े पैमाने पर सामने आई। इंग्लैंड में कारखानों के बाहर ‘श्रमिकों की जरुरत नहीं" जैसे बोर्ड लगाए जाने लगे। इसी दौर में मशीनों के खिलाफ संघर्ष करने वाला "लुडाइट आंदोलन" उभरा, जिनका कहना था कि मशीनें ही मजदूरों की दुश्मन हैं जो इनका रोजगार छीनती हैं लेकिन कार्ल मार्क्स ने सिद्धांत देकर सिद्ध किया कि तकनीकी उन्नति मानव की सहयोगी है उसका स्वागत किया जाना चाहिए उसको रोका नहीं जाना चाहिए और न ही रोका जा सकता है। संगठित संघर्ष और कार्य दिवस अवधि में कमी मजदूरों ने रोजगार तथा फ्री टाइम पाने के लिए संघर्षों के माध्यम से कार्य दिवस अवधि को समय समय पर कम करवाया। 19वीं सदी में यह 12 घंटे, फिर 10 घंटे तथा 8 घंटे तक सीमित करवाया। "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" के माध्यम से कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगल्स ने इन संघर्षों को सैद्धांतिक दिशा दी और 1848 में काम के दिन को 10 घंटे के रूप में जब जीता गया तो इसे अपनी सैद्धांतिक जीत बताया। 1866 में अंतर्राष्ट्रीय वर्कर्स एसोसिएशन की बैठक में 8 घंटे के कार्य दिवस की आवश्यकता का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 मई 1886 को शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए ऐतिहासिक हड़ताल की। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने अपनी जान दी, अंतत : 8 घंटे का कार्य दिवस एक वैश्विक मानक बन गया। कार्ल मार्क्स ने अपनी विश्व प्रसिद्ध कृति "दास कैपिटल' में लिखा कि मजदूर के जीवन का स्तर इस बात से तय होता हैं कि वह एक काम के दिन में कितना समय अपने लिए काम करता है और कितना समय बुर्जुआ वर्ग के लिए। "आवश्यक श्रम'' और "अतिरिक्त श्रम समय" का सवाल मार्क्सवाद के अनुसार कार्य दिवस दो भागों में बंटा होता है- "आवश्यक श्रम समय" : जिसमें मजदूर अपनी मजदूरी के बराबर उत्पादन करता है। "अतिरिक्त श्रम समय" : जिसमें वह पूंजीपति के लिए मुनाफा पैदा करता है। तकनीकी विकास के साथ "आवश्यक श्रम समय' घटता चला जाता है, लेकिन "अतिरिक्त श्रम समय' बढता चला जाता है। यही पूंजीवादी शोषण का आधार है।तकनीकी विकास, एआई और बढती बेरोजगारी:- आज तकनीक, ऑटोमेशन और एआई के कारण उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है। एक व्यक्ति मशीन की सहायता से पहले के मुकाबले कई गुना अधिक उत्पादन कर देता है लेकिन इस का लाभ समाज को समान रूप से नहीं दिया जाता।परिणामस्वरूप- बेरोजगारी बढ़ जाती है। काम करने वालों पर काम का बोझ बढ़ जाता है। क्रयशक्ति घट जाती है। सामाजिक असमानता बढ़ जाती है जो लक्षण अब अपने चरम पर हैं। आज एक तरफ लाखों युवा बेरोजगार हैं, तो दूसरी तरफ काम करने वाले मजदूरों के पास फ्री टाइम नहीं है। इसलिए आज तकनीकी उन्नति के कारण कार्य दिवस अवधि कानूनी रूप से 8 घंटे से घटाकर 6 घंटे की जरुरत है। इतिहास में 8 घंटे का कार्य दिवस एक बड़ी उपलब्धि थी लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह पर्याप्त नहीं है। आज एक आई के दौर में जब उत्पादन क्षमता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ चुकी है तो कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप से घटाना ही तार्किक और न्यायसंगत कदम है। इसलिए आज का केंद्रीय नारा होना चाहिए:“काम का दिन 6 घंटे या उससे कम किया जाए' जो बेरोजगारी को खत्म करेगा। रोजगार के अवसर बढ़ाएगा। मजदूरों को फ्री टाईम देगा। सामाजिक जीवन को बेहतर बनाएगा। बेरोजगार युवाओं का सवाल अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस को केवल काम करने वालों तक सीमित करना अधूरा दृष्टिकोण है। बल्कि यह काम से बाहर बैठे युवाओं को रोजगार में लाने का सैद्धांतिक अवसर भी होता है। आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि- काम कर रहे लोगों पर काम का इतना बोझ क्यों तथा जो काम करना चाहते हैं, उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा? इस समस्या का सैद्धांतिक उत्तर व समाधान आज के दिन के अवसर पर सैद्धांतिक रूप में काम की अवधि को कानूनी रूप से कम करने में ही है जिसे हमने कई दशकों से तिलांजलि देकर आंखों से ओझल कर रखा है। हालांकि यह सूत्र सबसे कारगर सूत्र है। इसके अलावा कोई भी सूत्र वर्तमान सामाजिक संकट को हल नहीं करता। उदाहरण के तौर पर कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप में 8 घंटे से घटाकर 6 करने पर काम का समय 25% घटेगा और रोजगार के अवसर 33% बढ़ेंगे। इसी प्रकार काम के दिन को 20% सीमित करने पर रोजगार 25% बढता है। काम के दिन को 30% सीमित करने पर रोजगार 42% बढता है। काम के दिन को 40% सीमित करने तथा काम के दिन को 50%सीमित करने पर रोजगार के अवसर 100% बढ़ जाते हैं। निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस का वर्तमान संदेश:- आज जब साप्ताहिक कार्य घंटे 70-90 तक बढाने की बातें हो रही हैं, तब श्रम दिवस का सिद्धांत हमें एक अलग दिशा दिखाता है। सबको रोजगार मिले तथा रोजगार में लगे लोगों को फ्री टाइम देने का एक मात्र यही वह रास्ता है जिससे बेरोजगारी खत्म होगी। मजदूरों का जीवन बेहतर होगा। समाज अधिक न्यायपूर्ण बनेगा। अत: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर शिकागो मजदूर आंदोलन 1886 के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए आज के दौर में 6 घंटे के कार्य दिवस को एक नए ऐतिहासिक लक्ष्य के रूप में स्थापित करें।

7 hrs ago
user_Isha sharma
Isha sharma
Jaipur, Rajasthan•
7 hrs ago

अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस: काम करने वालों के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं का भी दिन अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस केवल उन लोगों का दिन ही नहीं है जो काम में लगे हुए हैं, बल्कि उन सभी परोलेटेरिएट (काम में लगे+काम से निकाले+युवाओं का भी है जो काम से बाहर हैं और रोजगार की तलाश में हैं।)का दिन है । इस दिन का नाम भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस है जिसको आम बोलचाल भाषा मे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस या मई दिवस कहा जाता है। क्योंकि इतिहास में यह पहली बार 1 मई 1848 को मनाया गया और यह दिन यूरोप में काम करने का शिखर वाला दिन होता है इसलिए इसको चुना गया और आज भी पहली मई के दिन ही मनाया जाता है। आज के दौर में यह समझना और भी जरूरी हो गया है कि श्रम दिवस का सवाल केवल मजदूरी बढ़ाने, सेवा सुरक्षा या सेवा शर्तों से संबंधित ही नहीं, बल्कि सबको रोजगार गारंटी और काम करने के दिन की कानूनी अवधि को तय करने के सैद्धांतिक नियम को याद कर लागू करने का दिन भी हैं जिसका सापेक्ष रूप में संबंध तकनीकी उन्नति व उत्पादकता के साथ होता है जो बेरोजगारी दूर करने और काम के बोझ को घटाने का सूत्र देता है। श्रम दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ एक प्राकृतिक दिन में 24 घंटे होते हैं, इनमें से जीवनयापन के लिए मजदूर कितने घंटे अपनी श्रम शक्ति बेचता है, यही“कार्य दिवस” या श्रम दिवस कहलाता है जो कभी भी 24 घंटे नहीं हो सकता तथा शून्य भी नहीं हो सकता। यह सीमा बहुत ही लचीली सीमा होती है जिसको श्रमिक अपने संघर्षों से तय करवाते हैं । इतिहास में यह कार्य दिवस कभी 20, 18, 16, 14, 12, 10 और अंतत: 1890 में 8 घंटे तक सीमित करवाया गया था । तब 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक कार्यों के लिए सामान्य कार्य दिवस माना गया। लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद जब मशीनों का उपयोग बढ़ा तो उत्पादन भी बढ़ा लेकिन मशीन के विलोमानुपात में श्रमिकों की जरुरत घटने लगी/ बेरोजगारी पहली बार बड़े पैमाने पर सामने आई। इंग्लैंड में कारखानों के बाहर ‘श्रमिकों की जरुरत नहीं" जैसे बोर्ड लगाए जाने लगे। इसी दौर में मशीनों के खिलाफ संघर्ष करने वाला "लुडाइट आंदोलन" उभरा, जिनका कहना था कि मशीनें ही मजदूरों की दुश्मन हैं जो इनका रोजगार छीनती हैं लेकिन कार्ल मार्क्स ने सिद्धांत देकर सिद्ध किया कि तकनीकी उन्नति मानव की सहयोगी है उसका स्वागत किया जाना चाहिए उसको रोका नहीं जाना चाहिए और न ही रोका जा सकता है। संगठित संघर्ष और कार्य दिवस अवधि में कमी मजदूरों ने रोजगार तथा फ्री टाइम पाने के लिए संघर्षों के माध्यम से कार्य दिवस अवधि को समय समय पर कम करवाया। 19वीं सदी में यह 12 घंटे, फिर 10 घंटे तथा 8 घंटे तक सीमित करवाया। "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" के माध्यम से कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगल्स ने इन संघर्षों को सैद्धांतिक दिशा दी और 1848 में काम के दिन को 10 घंटे के रूप में जब जीता गया तो इसे अपनी सैद्धांतिक जीत बताया। 1866 में अंतर्राष्ट्रीय वर्कर्स एसोसिएशन की बैठक में 8 घंटे के कार्य दिवस की आवश्यकता का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 मई 1886 को शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए ऐतिहासिक हड़ताल की। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने अपनी जान दी, अंतत : 8 घंटे का कार्य दिवस एक वैश्विक मानक बन गया। कार्ल मार्क्स ने अपनी विश्व प्रसिद्ध कृति "दास कैपिटल' में लिखा कि मजदूर के जीवन का स्तर इस बात से तय होता हैं कि वह एक काम के दिन में कितना समय अपने लिए काम करता है और कितना समय बुर्जुआ वर्ग के लिए। "आवश्यक श्रम'' और "अतिरिक्त श्रम समय" का सवाल मार्क्सवाद के अनुसार कार्य दिवस दो भागों में बंटा होता है- "आवश्यक श्रम समय" : जिसमें मजदूर अपनी मजदूरी के बराबर उत्पादन करता है। "अतिरिक्त श्रम समय" : जिसमें वह पूंजीपति के लिए मुनाफा पैदा करता है। तकनीकी विकास के साथ "आवश्यक श्रम समय' घटता चला जाता है, लेकिन "अतिरिक्त श्रम समय' बढता चला जाता है। यही पूंजीवादी शोषण का आधार है।तकनीकी विकास, एआई और बढती बेरोजगारी:- आज तकनीक, ऑटोमेशन और एआई के कारण उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है। एक व्यक्ति मशीन की सहायता से पहले के मुकाबले कई गुना अधिक उत्पादन कर देता है लेकिन इस का लाभ समाज को समान रूप से नहीं दिया जाता।परिणामस्वरूप- बेरोजगारी बढ़ जाती है। काम करने वालों पर काम का बोझ बढ़ जाता है। क्रयशक्ति घट जाती है। सामाजिक असमानता बढ़ जाती है जो लक्षण अब अपने चरम पर हैं। आज एक तरफ लाखों युवा बेरोजगार हैं, तो दूसरी तरफ काम करने वाले मजदूरों के पास फ्री टाइम नहीं है। इसलिए आज तकनीकी उन्नति के कारण कार्य दिवस अवधि कानूनी रूप से 8 घंटे से घटाकर 6 घंटे की जरुरत है। इतिहास में 8 घंटे का कार्य दिवस एक बड़ी उपलब्धि थी लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह पर्याप्त नहीं है। आज एक आई के दौर में जब उत्पादन क्षमता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ चुकी है तो कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप से घटाना ही तार्किक और न्यायसंगत कदम है। इसलिए आज का केंद्रीय नारा होना चाहिए:“काम का दिन 6 घंटे या उससे कम किया जाए' जो बेरोजगारी को खत्म करेगा। रोजगार के अवसर बढ़ाएगा। मजदूरों को फ्री टाईम देगा। सामाजिक जीवन को बेहतर बनाएगा। बेरोजगार युवाओं का सवाल अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस को केवल काम करने वालों तक सीमित करना अधूरा दृष्टिकोण है। बल्कि यह काम से बाहर बैठे युवाओं को रोजगार में लाने का सैद्धांतिक अवसर भी होता है। आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि- काम कर रहे लोगों पर काम का इतना बोझ क्यों तथा जो काम करना चाहते हैं, उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा? इस समस्या का सैद्धांतिक उत्तर व समाधान आज के दिन के अवसर पर सैद्धांतिक रूप में काम की अवधि को कानूनी रूप से कम करने में ही है जिसे हमने कई दशकों से तिलांजलि देकर आंखों से ओझल कर रखा है। हालांकि यह सूत्र सबसे कारगर सूत्र है। इसके अलावा कोई भी सूत्र वर्तमान सामाजिक संकट को हल नहीं करता। उदाहरण के तौर पर कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप में 8 घंटे से घटाकर 6 करने पर काम का समय 25% घटेगा और रोजगार के अवसर 33% बढ़ेंगे। इसी प्रकार काम के दिन को 20% सीमित करने पर रोजगार 25% बढता है। काम के दिन को 30% सीमित करने पर रोजगार 42% बढता है। काम के दिन को 40% सीमित करने तथा काम के दिन को 50%सीमित करने पर रोजगार के अवसर 100% बढ़ जाते हैं। निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस का वर्तमान संदेश:- आज जब साप्ताहिक कार्य घंटे 70-90 तक बढाने की बातें हो रही हैं, तब श्रम दिवस का सिद्धांत हमें एक अलग दिशा दिखाता है। सबको रोजगार मिले तथा रोजगार में लगे लोगों को फ्री टाइम देने का एक मात्र यही वह रास्ता है जिससे बेरोजगारी खत्म होगी। मजदूरों का जीवन बेहतर होगा। समाज अधिक न्यायपूर्ण बनेगा। अत: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर शिकागो मजदूर आंदोलन 1886 के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए आज के दौर में 6 घंटे के कार्य दिवस को एक नए ऐतिहासिक लक्ष्य के रूप में स्थापित करें।

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  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। वैष्णो देवी से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की CNG कार में अचानक आग लग गई, जिसमें 6 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगातार लंबी दूरी तक कार चलने के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे गाड़ी में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। गेट नहीं खुले, फंस गए लोग हादसे के दौरान कार के दरवाजे नहीं खुल पाए, जिससे अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल सके और जिंदा जल गए। आग इतनी भीषण थी कि शव बुरी तरह जल गए—यहां तक कि हड्डियां तक पिघलने की बात सामने आ रही है। मौके पर मची अफरा-तफरी हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जांच जारी पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। शॉर्ट सर्किट और CNG सिस्टम को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। शोक की लहर इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में शोक की लहर है। मृतकों की पहचान और परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है। सावधानी ही सुरक्षा है: लंबी यात्रा के दौरान वाहन की नियमित जांच और ओवरहीटिंग से बचाव बेहद जरूरी है।
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    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। वैष्णो देवी से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की CNG कार में अचानक आग लग गई, जिसमें 6 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई।
कैसे हुआ हादसा?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगातार लंबी दूरी तक कार चलने के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे गाड़ी में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया।
गेट नहीं खुले, फंस गए लोग
हादसे के दौरान कार के दरवाजे नहीं खुल पाए, जिससे अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल सके और जिंदा जल गए। आग इतनी भीषण थी कि शव बुरी तरह जल गए—यहां तक कि हड्डियां तक पिघलने की बात सामने आ रही है।
मौके पर मची अफरा-तफरी
हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जांच जारी
पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। शॉर्ट सर्किट और CNG सिस्टम को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
शोक की लहर
इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में शोक की लहर है। मृतकों की पहचान और परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है।
सावधानी ही सुरक्षा है: लंबी यात्रा के दौरान वाहन की नियमित जांच और ओवरहीटिंग से बचाव बेहद जरूरी है।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    9 hrs ago
  • भूमि पर काटी जा रही ‘नारायण एन्क्लेव’ कॉलोनी, नियमों को दरकिनार कर हो रही प्लाटिंग
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    भूमि पर काटी जा रही ‘नारायण एन्क्लेव’ कॉलोनी, नियमों को दरकिनार कर हो रही प्लाटिंग
    user_Vivek singh jadoun
    Vivek singh jadoun
    News Anchor Jaipur, Rajasthan•
    12 hrs ago
  • Digraj Singh Shahpura#जन्मदिन पर कक्षा 10/12वीं के विद्यार्थियों सम्मान#1 मई/2 बजे/मोती महल शाहपुरा
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    Digraj Singh Shahpura#जन्मदिन पर कक्षा 10/12वीं के विद्यार्थियों सम्मान#1 मई/2 बजे/मोती महल शाहपुरा
    user_Breaking Live News
    Breaking Live News
    Shahpura, Jaipur•
    11 hrs ago
  • दौसा जिले के पुलिस थाने में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़िता के पिता गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया, जहां कई घंटों तक विरोध प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर एकत्रित हो गए और टंकी के नीचे धरना देकर पुलिस के खिलाफ रोष जताया। ग्रामीणों की मांग है कि नामजद आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने समझाइश का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद नांगल राजावतान के डिप्टी एसपी दीपक मीणा और लवाण एसडीएम ने मौके पर पहुंच ग्रामीणों से बातचीत की। पुलिस-प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन ग्रामीण तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। गौरतलब है कि पीड़िता के पिता ने 27 अप्रैल को थाने में पांच लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसमें युवती के अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है।
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    दौसा जिले के पुलिस थाने में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़िता के पिता गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया, जहां कई घंटों तक विरोध प्रदर्शन किया।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर एकत्रित हो गए और टंकी के नीचे धरना देकर पुलिस के खिलाफ रोष जताया। ग्रामीणों की मांग है कि नामजद आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने समझाइश का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद नांगल राजावतान के डिप्टी एसपी दीपक मीणा और लवाण एसडीएम ने मौके पर पहुंच ग्रामीणों से बातचीत की।
पुलिस-प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन ग्रामीण तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।
गौरतलब है कि पीड़िता के पिता ने 27 अप्रैल को थाने में पांच लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसमें युवती के अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है।
    user_Knowledge Nooks
    Knowledge Nooks
    Local News Reporter लालसोट, दौसा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • लालसोट हादसा: आमने-सामने टक्कर में दो की मौत लालसोट के दत्तवास मोड़ पर शुक्रवार को दो कारों की भीषण भिड़ंत में 70 वर्षीय मंजू मित्तल और 35 वर्षीय हरकेश मीणा की मौत हो गई। हादसे में छात्रा ऋद्धि मित्तल व एक अन्य गंभीर घायल हुए, जिन्हें जयपुर रेफर किया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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    लालसोट हादसा: आमने-सामने टक्कर में दो की मौत
लालसोट के दत्तवास मोड़ पर शुक्रवार को दो कारों की भीषण भिड़ंत में 70 वर्षीय मंजू मित्तल और 35 वर्षीय हरकेश मीणा की मौत हो गई। हादसे में छात्रा ऋद्धि मित्तल व एक अन्य गंभीर घायल हुए, जिन्हें जयपुर रेफर किया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
    user_Girdhari lal Sahu
    Girdhari lal Sahu
    लालसोट, दौसा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • Post by DEV GURJAR
    1
    Post by DEV GURJAR
    user_DEV GURJAR
    DEV GURJAR
    Taxi Driver श्री माधोपुर, सीकर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • #Horoscope #DailyHoroscope #Astrology #ZodiacSigns #AstrologyReading #Zodiac #HoroscopeToday #AstroLife #StarSigns #CosmicEnergy 🌟 USA Audience Target Hashtags #USA #AmericanAudience #USATrend #TrendingUSA #USALifestyle #ExploreUSA #ViralUSA ♈ Zodiac Specific (Example) (आप अपनी राशि के हिसाब से यूज़ करें) Aries: #Aries #AriesSeason Taurus: #Taurus #TaurusVibes Gemini: #Gemini #GeminiSeason Cancer: #CancerZodiac Leo: #LeoSeason Virgo: #VirgoVibes Libra: #LibraLife Scorpio: #ScorpioEnergy Sagittarius: #SagittariusVibes Capricorn: #CapricornLife Aquarius: #AquariusSeason Pisces: #PiscesEnergyरोज़ानानमस्कार दोस्तों 🙏 स्वागत है आपका हमारे यूट्यूब चैनल एस्ट्रो राशिफल में। यहाँ आपको रोज़ाना मिलेगी सभी 12 राशियों का सटीक राशिफल, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और आपके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण ज्योतिष जानकारी। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा, किस राशि को मिलेगा धन लाभ और किसे मिलेगी खुशखबरी, तो हमारे चैनल एस्ट्रो राशिफल को अभी सब्सक्राइब करें और बेल आइकन जरूर दबाएँ 🔔 ताकि आपको रोज़ सबसे पहले आज का राशिफल मिल सके। धन्यवाद 🙏 जय हिंद।#astrologer #astrology #facts #horoscope #horoscopetagalog #horoscopefortoday #horoscopeabayoyvettesandrine #horoscope2024 #horoscopereading #horoscopetoday #horoscope2025 #horoscopengayongaraw #horoscopepredictions #horoscopetelugu #horoscopesinhala #horoscopemalayalam #horoscopekannada #todayhoroscope, #astrologer #astrology #facts #horoscope, #horoscopetagalog, #horoscopefortoday,#horoscopeabayoyvettesandrine, #horoscope2024, #horoscopereading, #horoscopetoday, #horoscope2025, #horoscopengayongaraw, #horoscopepredictions, #horoscopetelugu, #horoscopesinhala, #horoscopemalayalam, #horoscopekannada, @VanessaRaye, @SiriusJoyTV, @searchlighttarot, @ZodiacAttraction, @harisazmiastrologer, @Vaidik_JyoI, @111HindiTarot, @DailyHoroscopeus, @dailyhoroscopefree, @todayhoroscope
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    user_Roopsingh Chouhan
    Roopsingh Chouhan
    Artist कालवाड़, जयपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि वीआईपी कल्चर खत्म हुआ और हम खुद भी ट्रैफिक पर रखेंगे लेकिन हकीकत कुछ और ही है हकीकत यह है कि वीआईपी कल्चर बरकरार है मुख्यमंत्री के काफिले से पहले रास्ते रोक दिए जाते हैं
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    राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि वीआईपी कल्चर खत्म हुआ और हम खुद भी ट्रैफिक पर रखेंगे लेकिन हकीकत कुछ और ही है हकीकत यह है कि वीआईपी कल्चर बरकरार है मुख्यमंत्री के काफिले से पहले रास्ते रोक दिए जाते हैं
    user_Vivek singh jadoun
    Vivek singh jadoun
    News Anchor Jaipur, Rajasthan•
    12 hrs ago
  • मजदूर दिवस पर श्रमिकों का सम्मान, परिंडे लगाकर दिया सेवा संदेश लालसोट। अनुराग सेवा संस्थान ने “अनुराग-31” अभियान के तहत बुद्ध पूर्णिमा व मजदूर दिवस पर गणगौर मेला मैदान में श्रमनिष्ठ सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया। श्रमिकों का तिलक व उत्तरीय से सम्मान कर उनके साथ अल्पाहार किया गया। संस्थान पदाधिकारियों ने श्रम को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए “अनुराग परिण्डा अभियान” के तहत परिंडे लगाकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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    मजदूर दिवस पर श्रमिकों का सम्मान, परिंडे लगाकर दिया सेवा संदेश
लालसोट। अनुराग सेवा संस्थान ने “अनुराग-31” अभियान के तहत बुद्ध पूर्णिमा व मजदूर दिवस पर गणगौर मेला मैदान में श्रमनिष्ठ सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया। श्रमिकों का तिलक व उत्तरीय से सम्मान कर उनके साथ अल्पाहार किया गया।
संस्थान पदाधिकारियों ने श्रम को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए “अनुराग परिण्डा अभियान” के तहत परिंडे लगाकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
    user_Girdhari lal Sahu
    Girdhari lal Sahu
    लालसोट, दौसा, राजस्थान•
    14 hrs ago
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