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किसान रातभर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं सवाल यह उठता है कि आखिर नहरें क्यों सूखी पड़ी हैं।
Rakesh Chaudhary
किसान रातभर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं सवाल यह उठता है कि आखिर नहरें क्यों सूखी पड़ी हैं।
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- यह पोस्ट गरीबी और मजबूरी से उपजी पीड़ा पर गहरा दुख व्यक्त करती है। इसमें कहा गया है कि गरीब का वास्तविक दर्द वही समझ सकता है, जिसने स्वयं ऐसी परिस्थितियों का सामना किया हो। पोस्ट इस बात पर जोर देती है कि गरीबों के रोते हुए चेहरे की व्यथा को कोई भी अन्य व्यक्ति नहीं समझ सकता।1
- उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जनपद के निचलौल क्षेत्र में स्थित सिरौली और ठूठीबारी के पेट्रोल पंपों पर ओड़वलिया के पूर्व प्रधान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व प्रधान का कहना है कि स्थानीय क्षेत्र में तेल की कमी होने के बावजूद, इन पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल पड़ोसी देश नेपाल भेजा जा रहा है। उनके अनुसार, इस कथित गतिविधि के कारण स्थानीय लोगों और किसानों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।1
- महराजगंज जिले में जनगणना-2027 के पहले चरण के तहत स्व-गणना पूरी कर चुके लोगों को अब अपने दर्ज किए गए डेटा में सुधार करने का अवसर दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, प्रगणक घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन कर रहे हैं और साथ ही मकानों की गणना का कार्य भी कर रहे हैं। एनआईसी के अनुसार, डेटा सत्यापन और मकान गणना की यह पूरी प्रक्रिया आगामी 20 जून तक जारी रहेगी। इसके अतिरिक्त, ऐसे परिवारों की भी अब घर-घर जाकर गणना की जाएगी, जिन्होंने पहले चरण में अपनी स्व-गणना नहीं की थी।1
- बगहा शास्त्री नगर के वार्ड नंबर 14 में सड़कों की दयनीय स्थिति सामने आई है, जहां जलजमाव के कारण सड़क की पहचान करना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या को उजागर करते हुए यह सवाल उठाया है कि क्या यह वास्तव में एक सड़क है या फिर एक तालाब में तब्दील हो चुकी है। इस गंभीर मुद्दे पर जनता अपनी आवाज उठा रही है और अधिकारियों से इस 'ग्राउंड रियलिटी' पर ध्यान देने की मांग कर रही है।1
- पुरंदरपुर थाना क्षेत्र से जुड़े बाइक चोरी के मामले में एक युवक ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है।1
- कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया। यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।1
- किसान रातभर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं सवाल यह उठता है कि आखिर नहरें क्यों सूखी पड़ी हैं।1
- AIMIM की महराजगंज जिला इकाई ने जिलाध्यक्ष सरवर खान के नेतृत्व में जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने ईदुल अजहा के पर्व के दौरान जिले में बेहतर बिजली आपूर्ति और साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने विशेष रूप से यह अपील की है कि ईदगाहों, मस्जिदों और आवासीय मोहल्लों में विशेष सफाई अभियान चलाया जाए, ताकि पर्व के दौरान स्वच्छता बनी रहे। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।1
- एक नए एप्लिकेशन का प्रचार किया जा रहा है जो उपयोगकर्ताओं को प्रतिदिन ₹400 से ₹500 कमाने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, इच्छुक उपयोगकर्ताओं को कमेंट बॉक्स में दिए गए लिंक से एप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा। एप्लिकेशन डाउनलोड करने पर ₹51 का मुफ्त बोनस मिलेगा, और दोस्तों को रेफर करने पर ₹200 का अतिरिक्त मुफ्त रेफरल बोनस प्राप्त होगा। उपयोगकर्ताओं को ऐप डाउनलोड करके गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।1