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Ajit Meena
More news from राजस्थान and nearby areas
- ग्राम बेगाना में lewa खेत पर जाने का रास्ता खराब हो रहा है रास्ता जाने का1
- 20 मिनट का 'तांडव': ओलावृष्टि और बारिश से खेतों में बिछी चने की फसल बड़गांव। कस्बे में आज सुबह जब अचानक मौसम बदला और सुबह सवा 9 बजे के करीब शुरू हुई । बारिश के साथ तेज हवा चली व चने के आकार के ओले भी गिरे। महज 20 मिनट तक हुई मूसलाधार बारिश और उसके साथ गिरे चने के आकार के ओलों ने किसानों की लहलहाती उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया है। फूलों से लदी फसल हुई धराशायी इस समय चने की फसल अपनी सबसे महत्वपूर्ण अवस्था में थी।खेतों में चने के पौधों पर फूल आ रहे थे। लेकिन 20 मिनट की इस बेमौसम मार ने सब कुछ बदल कर रख दिया।ओलों की मार से चने के आकार के ओले गिरने से पौधों पर लगे कोमल फूल झड़ गए हैं, जिससे अब फलियाँ बनने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित होगी। तेज हवा का प्रकोप: बारिश के साथ चली तूफानी हवाओं के कारण भारी हो चुके पौधे जमीन पर आड़े पड़ गए हैं।1
- धाकड़ समाज ने पूर्व पार्षद उमेश नागर पर हमले के खिलाफ सशक्त विरोध जताया एवं आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। न्याय की मांग #धाकड़ #Baran #न्यायकीमाँग #सामाजिकएकता #Protest #JusticeForUmeshNagar1
- Post by User96111
- प्रदेश में SIR को लेकर कांग्रेस लगातार बीजेपी पर हावी हो रही है। कोटा में कांग्रेस नेता प्रहलाद गुजंल ने कहा- SIR के जरिये बीजेपी सांप्रदायिक एजेंडा पूरा करना चाहती है। कलेक्टर परेशान हैं, अधिकारी परेशान हैं, ऊपर से नाम काटे जाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे बुरा क्या होगा कि पालिका चेयरमैन और नेशनल अवार्डी रहे नसरूददीन का नाम काटने का फॉर्म जमा करवा दिया गया।1
- Post by Mayur times news1
- गोरमेंट कॉमर्स कॉलेज के छात्र नेता संयम जैन ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे छात्रों और समाज के हितों के खिलाफ बताया और इसे “काला कानून” करार दिया। संयम जैन ने अपने बयान में कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आज विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग आसीन हैं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष जैसे पदों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समाज में प्रतिनिधित्व बढ़ा है, ऐसे में असमानता के नाम पर नीतियों को लागू करना गंभीर बहस का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सामान्य वर्ग के कई समुदाय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाने की मांग की। छात्र नेता ने देशभर के युवाओं, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि 30 जनवरी तक गांव, जिला और शहर स्तर पर अधिक से अधिक संख्या में ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया जाए, ताकि यूजीसी के इन नियमों को वापस लिया जा सके। संयम जैन ने कहा कि यह आंदोलन छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए। फिलहाल इस मुद्दे पर छात्र संगठनों में लगातार चर्चा तेज होती जा रही है और आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन अभियान और व्यापक रूप लेने की संभावना है।1
- Post by Ajit Meena1