कुमारिल भट्ट (लगभग 7वीं शताब्दी) भारत के एक महान दार्शनिक, मीमांसा दर्शन के भट्ट संप्रदाय के संस्थापक और वैदिक परंपरा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रभाव को कम कर वेदों की सर्वोच्चता (अपौरुषेयता) पुनः स्थापित की। 'मीमांसाश्लोकवार्त्तिक' इनकी प्रमुख रचना है। उन्होंने बौद्ध दार्शनिकों को शास्त्रार्थ में पराजित कर सनातन धर्म का संरक्षण किया। कुमारिल भट्ट का जीवन परिचय (मुख्य बिंदु): समय और जन्म: इनका काल लगभग 650 ईस्वी के आसपास माना जाता है। इन्हें बिहार के मिथिला या दक्षिण भारत का निवासी माना जाता है। शिक्षा: वे बाल्यकाल से ही वेदों, वेदांत और शास्त्रों के प्रकांड विद्वान थे। बौद्ध मत का खंडन: बौद्ध धर्म के उत्कर्ष के समय, उन्होंने वेदों की रक्षा हेतु बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया और फिर उसके सिद्धांतों का खंडन किया। प्रमुख कार्य: 'मीमांसाश्लोकवार्त्तिक' (Mīmāṃsāślokavārttika) और 'तंत्रवार्तिक' (Tantravārttika) इनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं, जो पूर्व मीमांसा पर आधारित हैं। योगदान: कुमारिल भट्ट ने ज्ञान के स्वरूप और प्रमाणीकरण (ज्ञान की सत्यता) पर गंभीर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बौद्ध आदर्शवाद के विरुद्ध वैदिक कर्मकांडवाद का जोरदार बचाव किया। दर्शन और विद्या: वे जैमिनी के पूर्व मीमांसा के अनुयायी थे और उनका दर्शन 'अस्तित्ववादी यथार्थवाद' के रूप में भी जाना जाता है। अंत: बौद्ध गुरु को छद्म भेष में धोखा देने (वेदों के बचाव हेतु) के पाप के प्रायश्चित स्वरूप, उन्होंने प्रयाग में भूसे (तुष) की अग्नि में बैठकर आत्मदाह किया। कुमारिल भट्ट को भारतीय दर्शन में वेदों के सच्चे रक्षक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने पाण्डित्य से बौद्ध मत के तर्क को निष्प्रभावी कर दिया। जय सनातन 🚩🕉️
कुमारिल भट्ट (लगभग 7वीं शताब्दी) भारत के एक महान दार्शनिक, मीमांसा दर्शन के भट्ट संप्रदाय के संस्थापक और वैदिक परंपरा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रभाव को कम कर वेदों की सर्वोच्चता (अपौरुषेयता) पुनः स्थापित की। 'मीमांसाश्लोकवार्त्तिक' इनकी प्रमुख रचना है। उन्होंने बौद्ध दार्शनिकों को शास्त्रार्थ में पराजित कर सनातन धर्म का संरक्षण किया। कुमारिल भट्ट का जीवन परिचय (मुख्य बिंदु): समय और जन्म: इनका काल लगभग 650 ईस्वी के आसपास माना जाता है। इन्हें बिहार के मिथिला या दक्षिण भारत का निवासी माना जाता है। शिक्षा: वे बाल्यकाल से ही वेदों, वेदांत और शास्त्रों के प्रकांड विद्वान थे। बौद्ध मत का खंडन: बौद्ध धर्म के उत्कर्ष के समय, उन्होंने वेदों की रक्षा हेतु बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया और फिर उसके सिद्धांतों का खंडन किया। प्रमुख कार्य: 'मीमांसाश्लोकवार्त्तिक' (Mīmāṃsāślokavārttika) और 'तंत्रवार्तिक' (Tantravārttika) इनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं, जो पूर्व मीमांसा पर आधारित हैं। योगदान: कुमारिल भट्ट ने ज्ञान के स्वरूप और प्रमाणीकरण (ज्ञान की सत्यता) पर गंभीर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बौद्ध आदर्शवाद के विरुद्ध वैदिक कर्मकांडवाद का जोरदार बचाव किया। दर्शन और विद्या: वे जैमिनी के पूर्व मीमांसा के अनुयायी थे और उनका दर्शन 'अस्तित्ववादी यथार्थवाद' के रूप में भी जाना जाता है। अंत: बौद्ध गुरु को छद्म भेष में धोखा देने (वेदों के बचाव हेतु) के पाप के प्रायश्चित स्वरूप, उन्होंने प्रयाग में भूसे (तुष) की अग्नि में बैठकर आत्मदाह किया। कुमारिल भट्ट को भारतीय दर्शन में वेदों के सच्चे रक्षक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने पाण्डित्य से बौद्ध मत के तर्क को निष्प्रभावी कर दिया। जय सनातन 🚩🕉️
- उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रभाव को कम कर वेदों की सर्वोच्चता (अपौरुषेयता) पुनः स्थापित की। 'मीमांसाश्लोकवार्त्तिक' इनकी प्रमुख रचना है। उन्होंने बौद्ध दार्शनिकों को शास्त्रार्थ में पराजित कर सनातन धर्म का संरक्षण किया। कुमारिल भट्ट का जीवन परिचय (मुख्य बिंदु): समय और जन्म: इनका काल लगभग 650 ईस्वी के आसपास माना जाता है। इन्हें बिहार के मिथिला या दक्षिण भारत का निवासी माना जाता है। शिक्षा: वे बाल्यकाल से ही वेदों, वेदांत और शास्त्रों के प्रकांड विद्वान थे। बौद्ध मत का खंडन: बौद्ध धर्म के उत्कर्ष के समय, उन्होंने वेदों की रक्षा हेतु बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया और फिर उसके सिद्धांतों का खंडन किया। प्रमुख कार्य: 'मीमांसाश्लोकवार्त्तिक' (Mīmāṃsāślokavārttika) और 'तंत्रवार्तिक' (Tantravārttika) इनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं, जो पूर्व मीमांसा पर आधारित हैं। योगदान: कुमारिल भट्ट ने ज्ञान के स्वरूप और प्रमाणीकरण (ज्ञान की सत्यता) पर गंभीर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बौद्ध आदर्शवाद के विरुद्ध वैदिक कर्मकांडवाद का जोरदार बचाव किया। दर्शन और विद्या: वे जैमिनी के पूर्व मीमांसा के अनुयायी थे और उनका दर्शन 'अस्तित्ववादी यथार्थवाद' के रूप में भी जाना जाता है। अंत: बौद्ध गुरु को छद्म भेष में धोखा देने (वेदों के बचाव हेतु) के पाप के प्रायश्चित स्वरूप, उन्होंने प्रयाग में भूसे (तुष) की अग्नि में बैठकर आत्मदाह किया। कुमारिल भट्ट को भारतीय दर्शन में वेदों के सच्चे रक्षक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने पाण्डित्य से बौद्ध मत के तर्क को निष्प्रभावी कर दिया। जय सनातन 🚩🕉️1
- Post by UP 42 Ayodhya Live1
- मिल्कीपुर अयोध्या हैरिंग्टनगंज (अयोध्या)। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम कदनपुर में शुक्रवार को ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में पूरे दिन ग्रामीणों की शिकायतों और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया गया। चौपाल की अध्यक्षता ग्राम प्रधान काशीनाथ यादव ने की, जबकि ग्राम सचिव रंजीत कुमार ने ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनके समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान पंचायत सहायक मधु तिवारी, रोजगार सेवक जय सिंह और सफाईकर्मी ओमप्रकाश सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। चौपाल में ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की खराब स्थिति, पेयजल संकट, फार्म रजिस्ट्री में आ रही दिक्कतें, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ में देरी, राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर की नकल से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कई ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर न मिलने की शिकायत भी की। कार्यक्रम के दौरान ग्राम में हाल ही में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी की भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि इस डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से छात्र-छात्राओं और युवाओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और विभिन्न शैक्षणिक संसाधनों तक आसान पहुंच मिलेगी। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया। ग्राम सचिव ने आश्वासन दिया कि सभी समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर त्वरित समाधान का प्रयास किया जाएगा। साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर पात्र लोगों से उनका लाभ उठाने की अपील की गई। इस अवसर पर मायावती, राम सहाय, राम सजीवन, राम केवल, फूल कुमारी, राम कृपाल, सतेन्द्र कुमार, खुशबू, पन्नालाल, दयाराम और अनिल कुमार सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजन गांव के विकास को नई दिशा देंगे।4
- अपाची सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने नेशनल हाईवे पर की ताबड़तोड़ फायरिंग (जौनपुर खेतासराय) शादी की खुशियां मातम में बदलीं, दुल्हन के अधूरे रह गए सपने बताते चलें कि शाहगंज-जौनपुर नेशनल हाईवे पर खेतासराय थाना क्षेत्र के बादशाही के पास कल शुक्रवार की देर रात दिल दहला देने वाली वारदात में अपाची सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने बारात लेकर जा रहे दूल्हे को सरेआम गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल दूल्हे को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है, वहीं शादी की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के बड़ऊर गांव निवासी रामलखन बिंद के पुत्र आजाद बिंद (22) की शादी खेतासराय थाना क्षेत्र के जमदहा अंतर्गत बीबीपुर गांव निवासी गोरखनाथ बिंद की पुत्री सोनी के साथ तय थी। शुक्रवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बारात धूमधाम से खेतासराय के लिए रवाना हुई थी। जानकारी के मुताबिक जैसे ही दूल्हे की गाड़ी शाहगंज-जौनपुर नेशनल हाईवे पर बादशाही मनेछा गांव के पास पहुंची, तभी पीछे से आए अपाची बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने दूल्हे की कार को ओवरटेक कर कार रुकवा ली। और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली दूल्हे के पेट और मुंह में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजन और बाराती घायल दूल्हे को आनन-फानन में खेतासराय स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां हालत नाजुक देख उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही खेतासराय, खुटहन और शाहगंज थानों की पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल में जुट गई है। हालांकि घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। उधर, बीबीपुर गांव में जहां बारात पहुंचनी थी, वहां खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। डीजे की आवाज थम गई और दुल्हन के रूप में सजी सोनी बिंद के अरमान अधूरे रह गए। पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस ने टीमों का गठन किया गया है। जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा। ब्यूरो रिपोर्ट1
- अयोध्या जिले के सिविल कोर्ट परिसर स्थित आठ तल्ला बिल्डिंग चौबीस कक्षीय भवन के सभागार में ३० अप्रैल २०२६को लिपिक पद से सेवा निवृत्त हुए संजय कुमार सिंह को सहयोगी न्यायिक कर्मी साथियों द्वारा खचाखच भरे मीटिंग हाल में विदाई सम्मान समारोह आयोजित कर नम आंखों से विदा किया गया,विदाई सम्मान समारोह के अवसर पर मीटिंग हाल पहुंचे जिला जज रणंजय कुमार वर्मा का केंद्रीय नाजिर व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा बुके देकर स्वागत किया गया,बताया जाता है कि हंसमुख स्वभाव मिलनसार प्रवृति के संजय कुमार सिंह 25 जुलाई 1985 में लिपिक पद पर सेवा में आए और अपने उत्तरदायित्वों का बखूबी निर्वहन करते हुए ४२ साल अपनी सेवा देते हुए 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत हुए,जिला जज रणंजय कुमार वर्मा के द्वारा संजय कुमार सिंह को विदाई सम्मान समारोह के अवसर पर अंग वस्त्र, रामचरित मानस की पुस्तक,स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया,न्यायिक कर्मियों द्वारा संजय कुमार सिंह को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया,सम्मानित करने वाले न्यायिक कर्मियों में केंद्रीय नाजिर रविन्द्र सिंह,प्रशासनिक अधिकारी,सहायक नाजिर सुनील कुमार सिंह,राम शंकर कौशलेंद्र श्रीवास्तव,संतोष ओझा, सहित कई अन्य न्यायिक कर्मियों द्वारा गले लगकर नम आंखों से विदाई दी गई,जिला जज रणंजय कुमार वर्मा व न्यायिक अधिकारी रुपाली सिंह द्वारा संजय कुमार सिंह के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए अपने परिवार के साथ प्रसन्नता पूर्वक बचा हुआ समय बिताने की कामना किया गया,विदाई समारोह पर केंद्रीय नाजिर रविन्द्र सिंह व संजय कुमार सिंह द्वारा जानकारी दी गई,कार्यक्रम का संचालन राम शंकर यादव द्वारा किया गया।1
- एसडीएम साहब कल्पराम यादव जी का घर सरकार के अधिकार मे था, बुलडोजर ने गिरा दिया। लेकिन नीला आसमान ईश्वर के अधीन है, उसके नीचे से कैसे हटा सकते हो? अन्याय की बुलडोजर नीति से गरीब का आशियाना तो गिरा दोगे, पर उसके हौसले और हक़ की लड़ाई को नहीं मिटा पाओगे। जनता सब देख रही है, जवाब वक्त आने पर देगी। मसूद आलम ख़ान राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी 290 विधानसभा श्रावस्ती #बुलडोजर_नहीं_न्याय_चाहिए #श्रावस्ती_की_आवाज़ #SP_के_साथ_जनता #कल्पराम_यादव #BulldozerRaj #SaveDemocracy #SamajwadiParty1
- मामूली कहासुनी मे हुई मारपीट का विडियो वायरल अयोध्या। अयोध्या धाम के मौर्या मिष्ठान के सामने चले जम के लात घुसे,जमकर चले लाठी फिल्मी स्टाइल में । बताया जाता है कि मामूली बात पर हुई कहा सुनी के बाद शुरू हो गई मारपीट। बीजेपी कार्यकर्ता व श्रद्धालुओं के बीच हुई जम कार मारपीट। अयोध्या कोतवाली क्षेत्र का मामला। जिसका विडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल1
- मिल्कीपुर अयोध्या अयोध्या। जनपद के थाना इनायतनगर क्षेत्र अंतर्गत हैरिग्टनगंज ब्लॉक के ग्राम हरीरामपुर (पुरे भटौली, सूरजा अहिरन पुरवा) में शुक्रवार सुबह एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। जिस घर में मुंडन संस्कार की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां अचानक मातम पसर गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अशोक यादव (45) पुत्र उदय राज यादव का शव सुबह करीब 5:30 बजे गांव के दक्षिण दिशा में स्थित एक बाग में चिलबिल के पेड़ से गमछे के सहारे फांसी पर लटका मिला। सुबह शौच के लिए गए ग्रामीणों की नजर जब शव पर पड़ी तो हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्राधिकारी पीयूष रंजन, थाना प्रभारी रतन कुमार शर्मा व हैरिग्टनगंज चौकी इंचार्ज आशीष सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर कब्जे में लिया और पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बताया जा रहा है कि मृतक अपने चार भाइयों में सबसे छोटे थे और उनके दो पुत्र हैं। घर में शुक्रवार को मुंडन कार्यक्रम के तहत भोज आयोजित होना था, लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को शोक में डुबो दिया। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि पारिवारिक कलह, विशेषकर पत्नी से अनबन, इस कदम की वजह हो सकती है। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।4