प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज स्थित मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर, भागीपुर गांव में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ एवं संत सम्मेलन के तहत आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित दिनेश त्रिपाठी महाराज ने सती चरित्र का विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर भक्तगण भावविभोर हो गए। इस दौरान उन्होंने मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव के विवाह के लिए सहमत होने की कथा भी सुनाई। सती चरित्र की कथा सुनाते हुए पंडित महाराज ने बताया कि राजा दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का अपमान करने के उद्देश्य से एक महायज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को छोड़कर समस्त देवताओं को आमंत्रित किया। भगवान शंकर के मना करने के बाद भी माता सती ने अपने पिता के घर जाने की इच्छा जताई, जिस पर भगवान शंकर ने उन्हें बिना बुलाए जाने पर कष्ट का भागी बनने की बात कही। इसके बावजूद सती अपने पिता के घर गईं, जहाँ भगवान शंकर के अपमान को सुनकर उन्होंने स्वयं को हवन कुंड में अग्नि को समर्पित कर दिया। इस घटना के बाद भगवान शंकर के दूतों ने यज्ञ स्थल को तहस-नहस कर दिया, और माता सती के अग्नि में समाहित होने के कारण तीनों लोकों को भगवान शिव के कोप का सामना करना पड़ा। मंदिर के मुख्य पुजारी अखिल भारतीय पांच तेरा भाई त्यागी श्री 108 महंत विनय दास त्यागी महाराज ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 28 तारीख को हवन कार्यक्रम होगा, और 29 तारीख को सामूहिक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान अमित सिंह, सुशील सिंह, शिव मुन्ना सिंह, प्रशांत शुक्ला, ओमकार शुक्ला, पप्पू प्रजापति, नगर पंचायत प्रतिनिधि बद्री प्रसाद गुप्ता, एडवोकेट चुलबुल मिश्रा, विजय प्रकाश जायसवाल, एडवोकेट विक्रम सिंह, सभासद सुनील मौर्या, श्रीकांत सिंह और संजय सिंह सहित काफी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष भक्त उपस्थित रहे।
प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज स्थित मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर, भागीपुर गांव में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ एवं संत सम्मेलन के तहत आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित दिनेश त्रिपाठी महाराज ने सती चरित्र का विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर भक्तगण भावविभोर हो गए। इस दौरान उन्होंने मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव के विवाह के लिए सहमत होने की कथा भी सुनाई। सती चरित्र की कथा सुनाते हुए पंडित महाराज ने बताया कि राजा दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का अपमान करने के उद्देश्य से एक महायज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को छोड़कर समस्त देवताओं को आमंत्रित किया। भगवान शंकर के मना करने के बाद भी माता सती ने अपने पिता के घर जाने की इच्छा जताई, जिस पर भगवान शंकर ने उन्हें बिना बुलाए जाने पर कष्ट का भागी बनने की बात कही। इसके बावजूद सती अपने पिता के घर गईं, जहाँ भगवान शंकर के अपमान को सुनकर उन्होंने स्वयं को हवन कुंड में अग्नि को समर्पित कर दिया। इस घटना के बाद भगवान शंकर के दूतों ने यज्ञ स्थल को तहस-नहस कर दिया, और माता सती के अग्नि में समाहित होने के कारण तीनों लोकों को भगवान शिव के कोप का सामना करना पड़ा। मंदिर के मुख्य पुजारी अखिल भारतीय पांच तेरा भाई त्यागी श्री 108 महंत विनय दास त्यागी महाराज ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 28 तारीख को हवन कार्यक्रम होगा, और 29 तारीख को सामूहिक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान अमित सिंह, सुशील सिंह, शिव मुन्ना सिंह, प्रशांत शुक्ला, ओमकार शुक्ला, पप्पू प्रजापति, नगर पंचायत प्रतिनिधि बद्री प्रसाद गुप्ता, एडवोकेट चुलबुल मिश्रा, विजय प्रकाश जायसवाल, एडवोकेट विक्रम सिंह, सभासद सुनील मौर्या, श्रीकांत सिंह और संजय सिंह सहित काफी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष भक्त उपस्थित रहे।
- सुलतानपुर जनपद के संसारीपुर स्थित ज्ञानोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रशिक्षक शिवकुमार श्रीवास्तव ने एक कठपुतली कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला के दौरान, बच्चों ने स्वयं कठपुतलियाँ बनाना सीखा और उन्हें धूप में सुखाने का काम किया। प्रशिक्षक ने बच्चों को कठपुतली बनाने और उन्हें संचालित करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक रूप से नोट भी करवाया। इस कला को देखकर बच्चे बेहद उत्साहित और प्रसन्न हुए। उनकी खुशी इतनी थी कि उन्होंने विभाग से कार्यशाला को और अधिक दिनों तक जारी रखने का अनुरोध भी किया। विद्यालय परिवार भी सरकार द्वारा चलाई जा रही "सृजन कठपुतली कार्यशाला" से बहुत खुश है और इस पहल में पूरा सहयोग दे रहा है।1
- सुल्तानपुर में 'सृजन' कार्यक्रम के तहत भारतीय लोक परंपरा की प्राचीन कला कठपुतली संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ और ज्ञानोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, संसारी पुर के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यशाला 22 से 28 मई 2026 तक आयोजित की जा रही है। इसमें प्रशिक्षक शिव कुमार श्रीवास्तव विद्यार्थियों को कठपुतली संचालन, संवाद और मंच प्रस्तुति की बारीकियां सिखा रहे हैं। प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से आयोजित हो रही इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं और कला प्रेमियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिल रही है।1
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- प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने सदर विकास खंड के ग्राम गोड़े में स्थापित आंवला फंक्शनल पैक हाउस का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं का गहनता से जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस पैक हाउस को स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन का केंद्र बनाया जाए। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाइयों को इस पहल से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने उप कृषि निदेशक को निर्देशित किया कि जो महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से काम करने की इच्छुक हैं या जो लघु इकाइयां आंवला आधारित उत्पाद जैसे मुरब्बा, कैंडी, जूस, पाउडर और अचार तैयार करना चाहती हैं, उन्हें आवश्यक सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से न केवल स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। जिलाधिकारी ने उपायुक्त उद्योग को निर्देश दिए कि इच्छुक व्यक्तियों एवं समूहों से आवेदन प्राप्त कर आवश्यक कार्यवाही शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि पैक हाउस का संचालन प्रभावी ढंग से प्रारम्भ कराया जा सके। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को आंवला उत्पादों के बेहतर विपणन और प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, जिससे उत्पादों को बाजार मिल सके और लोगों को स्थायी रोजगार प्राप्त हो सके। इस निरीक्षण के दौरान उप कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव, जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा, अधिशासी अभियन्ता ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग सुजीत राय और उपायुक्त उद्योग एस.एस. रावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के पर्वतपुर सुलेमान गाँव में अवैध खनन माफियाओं का आतंक जारी है, जहाँ रात के अंधेरे में टीलों और खेतों से मिट्टी व मोरंग का धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन रात 8 से 10 बजे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला खेतों में पहुँचता है, जिनकी पूरी रात चलने वाली आवाज़ से उनका सोना दूभर हो गया है। इस लगातार हो रहे खनन के कारण खेतों की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है और गाँव के संपर्क मार्ग भी पूरी तरह खराब हो चुके हैं। पहले खनन माफियाओं के खौफ से शिकायत करने से कतराते रहे ग्रामीण, लेकिन अब खेतों को हो रहे भारी नुकसान और रास्तों के टूटने के बाद उनका सब्र जवाब दे गया है। इसी के चलते, सोमवार को दर्जनों ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन से इस अवैध खनन पर रोक लगाने की माँग करते हुए शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण खनन माफिया बेखौफ होकर पर्यावरण और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। इस अवैध खनन को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है, और उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।1
- प्रतापगढ़ सदर से तेलियाचौराहा जाने वाली सड़क इन दिनों 'कूड़ा कॉरिडोर' बन गई है, जहां नालियों में पानी बहने के बजाय प्लास्टिक, सड़ा हुआ कूड़ा और मच्छरों का झुंड तैरता नजर आ रहा है। गर्मी में उठ रही भीषण बदबू से राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है, जिसके चलते लोग सड़क से गुजरते समय अपनी नाक बंद करने को मजबूर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई है, जिससे यह साफ है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आँखों पर पट्टी बांध रखी है। कूड़े से अटी पड़ी ये नालियाँ अब गंभीर बीमारियों का अड्डा बन चुकी हैं, और डेंगू, मलेरिया तथा अन्य संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन पर आरोप है कि वह शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। इस स्थिति पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों की नजर इस गंदगी पर क्यों नहीं पड़ रही। क्या उनकी जिम्मेदारी सिर्फ टैक्स वसूलने तक ही सीमित है, जबकि जनता बदबू और मच्छरों के बीच नारकीय जीवन जीने को मजबूर है और अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर फाइलें पलट रहे हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। सड़क किनारे फैली यह गंदगी अब प्रशासन की कार्यशैली पर ही एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही है। अब यह देखना बाकी है कि इस खबर के वायरल होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर यह गंदगी इसी तरह लोगों की जिंदगी को नरक बनाती रहेगी।1
- प्रतापगढ़ जनपद के मान्धाता विकासखंड में ब्लॉक प्रमुख इसरार अहमद और उनके प्रतिनिधि अशफाक अहमद द्वारा पिछले चार सालों में कराए गए विकास कार्यों की ग्रामीणों ने जमकर सराहना की है। विशेष रूप से प्रसिद्ध जमुआ बाबा ब्रह्मचारी धाम परिसर में वर्षों से लंबित विकास कार्य पूरे होने पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल है, जिसे लेकर उन्होंने ब्लॉक प्रमुख और उनके प्रतिनिधि को धन्यवाद दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जो कार्य अब तक सांसद और विधायक स्तर से पूरे नहीं हो सके थे, उन्हें मान्धाता ब्लॉक प्रमुख और प्रमुख प्रतिनिधि अशफाक अहमद ने कर दिखाया है। धाम परिसर में बाउंड्री वॉल, आकर्षक लाइट व्यवस्था, धाम का जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्य मार्ग के किनारे लगभग 600 मीटर तक इंटरलॉकिंग और दोनों तरफ आधुनिक लाइटें लगाई गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की सुंदरता में वृद्धि हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रमुख प्रतिनिधि अशफाक अहमद द्वारा बिना किसी भेदभाव के मंदिर और मस्जिद सहित सभी जाति और धर्म के लोगों के लिए विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिसकी पहली प्राथमिकता विकास है। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता रोहित सिंह समेत कई अन्य ग्रामीणों ने मौजूद रहकर इन कार्यों की सराहना की और कहा कि ऐसे विकास कार्यों से क्षेत्र की पहचान मजबूत होगी तथा श्रद्धालुओं को और भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। जमुआ बाबा ब्रह्मचारी धाम के अलावा खुयलन देवी धाम, बालाजी धाम और पूरे कंठी का भी बेहतर विकास किया गया है।1
- प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज स्थित मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर, भागीपुर गांव में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ एवं संत सम्मेलन के तहत आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित दिनेश त्रिपाठी महाराज ने सती चरित्र का विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर भक्तगण भावविभोर हो गए। इस दौरान उन्होंने मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव के विवाह के लिए सहमत होने की कथा भी सुनाई। सती चरित्र की कथा सुनाते हुए पंडित महाराज ने बताया कि राजा दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का अपमान करने के उद्देश्य से एक महायज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को छोड़कर समस्त देवताओं को आमंत्रित किया। भगवान शंकर के मना करने के बाद भी माता सती ने अपने पिता के घर जाने की इच्छा जताई, जिस पर भगवान शंकर ने उन्हें बिना बुलाए जाने पर कष्ट का भागी बनने की बात कही। इसके बावजूद सती अपने पिता के घर गईं, जहाँ भगवान शंकर के अपमान को सुनकर उन्होंने स्वयं को हवन कुंड में अग्नि को समर्पित कर दिया। इस घटना के बाद भगवान शंकर के दूतों ने यज्ञ स्थल को तहस-नहस कर दिया, और माता सती के अग्नि में समाहित होने के कारण तीनों लोकों को भगवान शिव के कोप का सामना करना पड़ा। मंदिर के मुख्य पुजारी अखिल भारतीय पांच तेरा भाई त्यागी श्री 108 महंत विनय दास त्यागी महाराज ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 28 तारीख को हवन कार्यक्रम होगा, और 29 तारीख को सामूहिक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान अमित सिंह, सुशील सिंह, शिव मुन्ना सिंह, प्रशांत शुक्ला, ओमकार शुक्ला, पप्पू प्रजापति, नगर पंचायत प्रतिनिधि बद्री प्रसाद गुप्ता, एडवोकेट चुलबुल मिश्रा, विजय प्रकाश जायसवाल, एडवोकेट विक्रम सिंह, सभासद सुनील मौर्या, श्रीकांत सिंह और संजय सिंह सहित काफी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष भक्त उपस्थित रहे।1