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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- लखीमपुर खीरी के जंग बहादुर गंज स्थित रेलवे लाइन पार के मोहल्ले में विकास कार्यों की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, उनके मोहल्ले की गलियों में पानी की निकासी के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण खड़ज़े पर पानी भरा रहता है। शिकायत है कि नालियों का निर्माण भी सही ढंग से नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्र में जलभराव की समस्या लगातार बनी हुई है।2
- औरंगाबाद ग्राम पंचायत में मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जहाँ गलियों में पानी बह रहा है और चारों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायती दावे सिर्फ वादों तक ही सीमित हैं। ग्राउंड पर न तो कोई सफाई होती है और न ही लोगों की शिकायतों की कोई सुनवाई की जाती है। इस प्रकार की स्थिति से औरंगाबाद ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और उसकी कमाई पर सवाल खड़े होते हैं।1
- पलिया नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष लक्ष्मी देवी गुप्ता के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में नगर पालिका के विभिन्न कार्यों, खरीद प्रक्रियाओं और टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप है। शिकायतकर्ता मनोज गुप्ता ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर शासन से मिली धनराशि का दुरुपयोग किया गया। कई निर्माण कार्यों को नियमों के विपरीत छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया और निविदा प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। शिकायत पत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर फर्जी भुगतान करने, सड़क निर्माण कार्यों में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग न करने, एक ही कार्य का दो बार भुगतान करने और खरीद प्रक्रियाओं में बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर सामान खरीदने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। यह भी कहा गया है कि नगर पालिका द्वारा स्ट्रीट लाइट, स्टील डस्टबिन, कूड़ा रिक्शा-ठिलिया, प्लास्टिक डस्टबिन, सीवरेज पंप, पानी के टैंकर और अन्य उपकरणों की खरीद में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है। कुछ मामलों में बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर सामान खरीदने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, एक विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी करने और नियमों के विपरीत निविदाएं निरस्त करने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा, विजिलेंस अथवा विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और सरकारी धन की वसूली की मांग की है। इस शिकायत की प्रतियां मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नगर विकास, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, सांसद और विधायक समेत कुल 12 अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को भेजी गई हैं। वहीं, इस मामले पर जानकारी लेने पर पालिकाध्यक्ष लक्ष्मी देवी गुप्ता ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनोज गुप्ता को ही नगर पालिका रोड निर्माण का ठेका दिया गया था। उनके अनुसार, यह आरोप कि चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया, गलत है क्योंकि मनोज गुप्ता द्वारा किए गए सड़क निर्माण का कार्य मानकों के विपरीत पाया गया था, जिसकी जांच कराकर भुगतान रोक दिया गया था। पालिकाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इसी वजह से मनोज गुप्ता द्वारा इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।3
- लखीमपुर खीरी जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत चौकी महेवागंज इलाके में, ताजिया रोड चौक का भ्रमण किया गया। इस दौरान, ताजिया रखने वाले और बनाने वाले लोगों से विस्तृत बातचीत की गई। इन वार्ताओं के उपरांत, कमेटी के सदस्यों द्वारा ताजिया की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट रखने पर सहमति व्यक्त की गई।1
- सोमवार को दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर सराय काले खां स्टेशन के पास एक अनोखी घटना हुई, जब मेट्रो कोच में अचानक एक बंदर घुस आया। मेट्रो के दरवाजे खुलते ही ‘कपिराज’ ने कोच में प्रवेश किया, जिससे यात्री पहले तो डर गए। हालांकि, बंदर ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और देखते ही देखते कोच में उधम-मस्ती करने लगा। वीडियो में साफ दिख रहा है कि बंदर कभी यात्रियों के कंधे पर चढ़ रहा था, तो कभी उनकी गोदी में बैठ रहा था। सबसे दिलचस्प नजारा तो तब था, जब 'कपिराज' मेट्रो की खिड़की पर बैठकर बाहर के दृश्यों का आनंद लेने लगा, मानो वह भी दिल्ली घूमने निकला हो। शुरुआत में डर के मारे यात्रियों ने मोबाइल निकाले, लेकिन बंदर की इन शरारतों को देखकर सभी हंस पड़े। कई लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो अब तेज़ी से वायरल हो रहा है। लोग इस अनोखे यात्री को 'दिल्ली मेट्रो का नया यात्री' कहकर संबोधित कर रहे हैं।1
- लखनऊ में हुए एक दुखद अग्निकांड में अब तक 15 छात्र-छात्राओं की मौत की खबर है। इस घटना ने एक बार फिर शहर में धड़ल्ले से जारी अवैध निर्माणों और स्थानीय प्रशासन की लचर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ASTv24 डिजिटल के शाहिद लखाही के अनुसार, शहर के हर रिहायशी इलाके में ऐसे अवैध निर्माण आसानी से मिल जाते हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण का प्रवर्तन दल 'चढ़ावे और भेंट' लेकर कागजों पर अवैध को वैध बना देता है। इसी का एक उदाहरण एक MLC साहब का होटल भी है, जिसके गिराने का आदेश तक जारी हुआ था, लेकिन 'अंडर द टेबल' सब कुछ व्यवस्थित कर लिया गया। लखनऊ अग्निकांड से यह स्पष्ट हो गया है कि जिस इमारत में यह कोचिंग चल रही थी, वहाँ कोई दूसरा सुरक्षा मार्ग मौजूद नहीं था। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि इतने बच्चों को पढ़ाने के लिए यहाँ कोचिंग चलाने की अनुमति कैसे दी गई। आरोप है कि जब तक स्थानीय प्रशासन चंद पैसों की लालच में ऐसी जगहों पर कोचिंग चलाने की इजाजत देता रहेगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। हर बार की तरह, इस घटना पर भी दो-एक दिन चर्चा होगी और फिर कहीं और ऐसा ही हादसा हो जाएगा।1