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जानिए... कम पढ़ें लिखें लोग भी इसी दुनिया में कैसे शून्य से शिखर तक का सफर तय किये... महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय दुनिया अक्सर कहती है..... पढ़ोगे.. लिखोगे तो... बनोगे नवाब सिर्फ खेलोगे बेमतलब तो... होओगे ख़राब लेकिन, सच कुछ दूसरा ही है... ज़िद्द चाहिए. जी हाँ, आसमान में सुराख़ करने के लिए इरादा फौलादी होना चाहिए... मानने से हार.. और ठानने से सिर्फ जीत मिलती है... और हाँ, जितने वाले हमलोगों के बीच में से ही कोई होता है... जो लगातार चलता रहा.. सही दिशा में, सकारात्मक सोच रखा,, साहस नहीं खोया... बाकी सब.. इस वीडियो में समझा जा सकता है.... धन्यवाद

1 hr ago
user_JHVP BHARAT NEWS
JHVP BHARAT NEWS
Local News Reporter महाराजगंज, सीवान, बिहार•
1 hr ago
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जानिए... कम पढ़ें लिखें लोग भी इसी दुनिया में कैसे शून्य से शिखर तक का सफर तय किये... महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय दुनिया अक्सर कहती है..... पढ़ोगे.. लिखोगे तो... बनोगे नवाब सिर्फ खेलोगे बेमतलब तो... होओगे ख़राब लेकिन, सच कुछ दूसरा ही है... ज़िद्द चाहिए. जी हाँ, आसमान में सुराख़ करने के लिए इरादा फौलादी होना चाहिए... मानने से हार.. और ठानने से सिर्फ जीत मिलती है... और हाँ, जितने वाले हमलोगों के बीच में से ही कोई होता है... जो लगातार चलता रहा.. सही दिशा में, सकारात्मक सोच रखा,, साहस नहीं खोया... बाकी सब.. इस वीडियो में समझा जा सकता है.... धन्यवाद

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  • महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ भारतीय कॉल : 9931481554 व्हाट्सप्प : +91-6202433405 मोहनजोदड़ो सभ्यता के विकास पर विशेष लेख भूमिका मानव इतिहास की प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में सिंधु घाटी सभ्यता का विशेष स्थान है। इसी महान सभ्यता का एक प्रमुख और विकसित नगर था मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ है – “मृतकों का टीला”। यह नगर आज के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित था। लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह नगर अपने चरम विकास पर था। 1. खोज और महत्व मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। इसके बाद जॉन मार्शल के नेतृत्व में विस्तृत खुदाई कराई गई। इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पहले ही अत्यंत उन्नत शहरी सभ्यता विकसित हो चुकी थी। 2. नगर नियोजन (City Planning) मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन था। सड़कों का निर्माण सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली ग्रिड प्रणाली में किया गया था। घर पक्की ईंटों से बने होते थे और अधिकतर घरों में आंगन, स्नानघर और कुएँ होते थे। शहर में नालियों की उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था थी, जो ढकी हुई होती थी। नगर को मुख्य रूप से ऊपरी नगर (दुर्ग क्षेत्र) और निचला नगर में विभाजित किया गया था। यह नगर नियोजन उस समय की अत्यंत उन्नत तकनीकी समझ को दर्शाता है। 3. सामाजिक और आर्थिक जीवन मोहनजोदड़ो के लोग मुख्यतः कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प से जुड़े थे। गेहूँ, जौ और कपास की खेती की जाती थी। मिट्टी के बर्तन, मनके, धातु के औजार और आभूषण बनाए जाते थे। व्यापार के लिए तौल-माप की मानकीकृत प्रणाली का प्रयोग होता था। इस सभ्यता का व्यापार दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक होता था। 4. महान स्नानागार (Great Bath) मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध निर्माण महान स्नानागार है। यह एक विशाल जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे बने हुए थे। इसे पक्की ईंटों और जलरोधी पदार्थों से बनाया गया था। माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था। 5. धर्म और संस्कृति मोहनजोदड़ो के लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी मुख्यतः मूर्तियों और मुहरों से मिलती है। मातृ देवी (Mother Goddess) की पूजा के प्रमाण मिलते हैं। पशु आकृतियों वाली मुहरें भी मिली हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि एक मुहर पर दिखाई देने वाली आकृति बाद में भगवान शिव के पशुपति रूप से मिलती-जुलती है। 6. लिपि और कला मोहनजोदड़ो की लिपि आज भी अपूर्ण रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है। इस सभ्यता की कला अत्यंत उत्कृष्ट थी। प्रसिद्ध कांस्य की “नर्तकी” की मूर्ति दाढ़ी वाले पुजारी की मूर्ति सुंदर मुहरें और मिट्टी के खिलौने ये सभी उस समय की उच्च कला और शिल्पकला को दर्शाते हैं। 7. पतन के कारण लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास मोहनजोदड़ो सभ्यता का पतन शुरू हो गया। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं: प्राकृतिक आपदाएँ और बाढ़ जलवायु परिवर्तन व्यापार का पतन नदी के मार्ग में परिवर्तन हालाँकि इसके पतन का सटीक कारण आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है। निष्कर्ष मोहनजोदड़ो सभ्यता मानव इतिहास की सबसे उन्नत प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक थी। इसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित व्यापार प्रणाली, उत्कृष्ट कला और वैज्ञानिक सोच यह दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समाज अत्यंत संगठित और विकसित था। आज मोहनजोदड़ो के अवशेष हमें यह सिखाते हैं कि सभ्यता का विकास केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और ज्ञान से भी होता है।
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    महाराजगंज, सिवान, बिहार 
JHVP BHARAT NEWS 
EDITED BY : परवेज़ भारतीय 
कॉल : 9931481554
व्हाट्सप्प : +91-6202433405
मोहनजोदड़ो सभ्यता के विकास पर विशेष लेख
भूमिका
मानव इतिहास की प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में सिंधु घाटी सभ्यता का विशेष स्थान है। इसी महान सभ्यता का एक प्रमुख और विकसित नगर था मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ है – “मृतकों का टीला”। यह नगर आज के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित था। लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह नगर अपने चरम विकास पर था।
1. खोज और महत्व
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। इसके बाद जॉन मार्शल के नेतृत्व में विस्तृत खुदाई कराई गई। इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पहले ही अत्यंत उन्नत शहरी सभ्यता विकसित हो चुकी थी।
2. नगर नियोजन (City Planning)
मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन था।
सड़कों का निर्माण सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली ग्रिड प्रणाली में किया गया था।
घर पक्की ईंटों से बने होते थे और अधिकतर घरों में आंगन, स्नानघर और कुएँ होते थे।
शहर में नालियों की उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था थी, जो ढकी हुई होती थी।
नगर को मुख्य रूप से ऊपरी नगर (दुर्ग क्षेत्र) और निचला नगर में विभाजित किया गया था।
यह नगर नियोजन उस समय की अत्यंत उन्नत तकनीकी समझ को दर्शाता है।
3. सामाजिक और आर्थिक जीवन
मोहनजोदड़ो के लोग मुख्यतः कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प से जुड़े थे।
गेहूँ, जौ और कपास की खेती की जाती थी।
मिट्टी के बर्तन, मनके, धातु के औजार और आभूषण बनाए जाते थे।
व्यापार के लिए तौल-माप की मानकीकृत प्रणाली का प्रयोग होता था।
इस सभ्यता का व्यापार दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक होता था।
4. महान स्नानागार (Great Bath)
मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध निर्माण महान स्नानागार है।
यह एक विशाल जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे बने हुए थे।
इसे पक्की ईंटों और जलरोधी पदार्थों से बनाया गया था।
माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था।
5. धर्म और संस्कृति
मोहनजोदड़ो के लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी मुख्यतः मूर्तियों और मुहरों से मिलती है।
मातृ देवी (Mother Goddess) की पूजा के प्रमाण मिलते हैं।
पशु आकृतियों वाली मुहरें भी मिली हैं।
कुछ विद्वान मानते हैं कि एक मुहर पर दिखाई देने वाली आकृति बाद में भगवान शिव के पशुपति रूप से मिलती-जुलती है।
6. लिपि और कला
मोहनजोदड़ो की लिपि आज भी अपूर्ण रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है।
इस सभ्यता की कला अत्यंत उत्कृष्ट थी।
प्रसिद्ध कांस्य की “नर्तकी” की मूर्ति
दाढ़ी वाले पुजारी की मूर्ति
सुंदर मुहरें और मिट्टी के खिलौने
ये सभी उस समय की उच्च कला और शिल्पकला को दर्शाते हैं।
7. पतन के कारण
लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास मोहनजोदड़ो सभ्यता का पतन शुरू हो गया। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं:
प्राकृतिक आपदाएँ और बाढ़
जलवायु परिवर्तन
व्यापार का पतन
नदी के मार्ग में परिवर्तन
हालाँकि इसके पतन का सटीक कारण आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है।
निष्कर्ष
मोहनजोदड़ो सभ्यता मानव इतिहास की सबसे उन्नत प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक थी। इसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित व्यापार प्रणाली, उत्कृष्ट कला और वैज्ञानिक सोच यह दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समाज अत्यंत संगठित और विकसित था।
आज मोहनजोदड़ो के अवशेष हमें यह सिखाते हैं कि सभ्यता का विकास केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और ज्ञान से भी होता है।
    user_JHVP BHARAT NEWS
    JHVP BHARAT NEWS
    Local News Reporter महाराजगंज, सीवान, बिहार•
    1 hr ago
  • Post by जनसत्ता NEWS@
    1
    Post by जनसत्ता NEWS@
    user_जनसत्ता NEWS@
    जनसत्ता NEWS@
    दरौंधा, सीवान, बिहार•
    3 hrs ago
  • Post by Yuva RJD Neta Siwan
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    Post by Yuva RJD Neta Siwan
    user_Yuva RJD Neta Siwan
    Yuva RJD Neta Siwan
    Local Politician Hussainganj, Siwan•
    9 hrs ago
  • 🚨 ब्रेकिंग न्यूज | सिवान 🚨 सिवान जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार हबीब नगर शंकरपुर निवासी फिरोज अंसारी को अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल है। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर इस वारदात को अंजाम दिया और घटना के बाद मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है और अपराधियों की तलाश शुरू कर दी गई है। #BreakingNews #Siwan #BiharNews #CrimeNews #SiwanCrime #Hussainganj #BiharBreaking #Firing
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    🚨 ब्रेकिंग न्यूज | सिवान 🚨
सिवान जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार हबीब नगर शंकरपुर निवासी फिरोज अंसारी को अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल है। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर इस वारदात को अंजाम दिया और घटना के बाद मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है और अपराधियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
#BreakingNews #Siwan #BiharNews #CrimeNews #SiwanCrime #Hussainganj #BiharBreaking #Firing
    user_Aakash Srivastava
    Aakash Srivastava
    पत्रकार सिवान, सीवान, बिहार•
    21 hrs ago
  • सिसवन प्रखंड कृषि कार्यालय में आयोजित किसान क्रेडिट कार्ड कैंप में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कैंप की अध्यक्षता प्रखंड कृषि पदाधिकारी अंकित उपाध्याय ने की। इस दौरान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक और कृषि कर्मी भी मौजूद रहे। कैंप में लगभग 50 किसान क्रेडिट कार्ड फॉर्म जमा किए गए।
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    सिसवन प्रखंड कृषि कार्यालय में आयोजित किसान क्रेडिट कार्ड कैंप में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कैंप की अध्यक्षता प्रखंड कृषि पदाधिकारी अंकित उपाध्याय ने की। इस दौरान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक और कृषि कर्मी भी मौजूद रहे। कैंप में लगभग 50 किसान क्रेडिट कार्ड फॉर्म जमा किए गए।
    user_Sachita nand pandey
    Sachita nand pandey
    सिसवन, सीवान, बिहार•
    1 day ago
  • क्या नस,बंदी के बाद भी ब`च्चा संभव
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    क्या नस,बंदी के बाद भी ब`च्चा संभव
    user_AGS live
    AGS live
    Local News Reporter बरौली, गोपालगंज, बिहार•
    1 hr ago
  • परसा (सारण) के डेढ़नी थाना क्षेत्र के पड़ी शीतल गांव की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। नाबालिग बच्ची के साथ हुई दरिंदगी
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    परसा (सारण) के डेढ़नी थाना क्षेत्र के पड़ी शीतल गांव की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
नाबालिग बच्ची के साथ हुई दरिंदगी
    user_Taraiya LIVE
    Taraiya LIVE
    Local News Reporter तरैया, सारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय दुनिया अक्सर कहती है..... पढ़ोगे.. लिखोगे तो... बनोगे नवाब सिर्फ खेलोगे बेमतलब तो... होओगे ख़राब लेकिन, सच कुछ दूसरा ही है... ज़िद्द चाहिए. जी हाँ, आसमान में सुराख़ करने के लिए इरादा फौलादी होना चाहिए... मानने से हार.. और ठानने से सिर्फ जीत मिलती है... और हाँ, जितने वाले हमलोगों के बीच में से ही कोई होता है... जो लगातार चलता रहा.. सही दिशा में, सकारात्मक सोच रखा,, साहस नहीं खोया... बाकी सब.. इस वीडियो में समझा जा सकता है.... धन्यवाद
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    महाराजगंज, सिवान, बिहार 
JHVP BHARAT NEWS 
EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय 
दुनिया अक्सर कहती है.....
पढ़ोगे.. लिखोगे तो... बनोगे नवाब 
सिर्फ खेलोगे बेमतलब तो... होओगे ख़राब 
लेकिन, सच कुछ दूसरा ही है... ज़िद्द चाहिए.
जी हाँ, आसमान में सुराख़ करने के लिए इरादा फौलादी होना चाहिए... मानने से हार.. और ठानने से सिर्फ जीत मिलती है...
और हाँ, जितने वाले हमलोगों के बीच में से ही कोई होता है... जो लगातार चलता रहा.. सही दिशा में, सकारात्मक सोच रखा,, साहस नहीं खोया... बाकी सब.. इस वीडियो में समझा जा सकता है.... धन्यवाद
    user_JHVP BHARAT NEWS
    JHVP BHARAT NEWS
    Local News Reporter महाराजगंज, सीवान, बिहार•
    1 hr ago
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