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श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने मारवाड़ी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने संगठन के एक स्थानीय कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मारवाड़ी भाषा को पूर्वी राजस्थान पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. परमार ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान विविधताओं से भरा प्रदेश है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती और बृज क्षेत्र) की लोक भाषाओं और बोलियों का उल्लेख किया, जिनका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश पर केवल मारवाड़ी भाषा को थोपकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई अस्मिता को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने बताया कि श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत हर क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के सम्मान का पक्षधर है। उन्होंने इसे पूर्वी राजस्थान के युवाओं और वहाँ की संस्कृति के साथ अन्याय बताया कि किसी एक क्षेत्र की बोली को पूरे राज्य की एकमात्र प्रतिनिधि भाषा के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी के मद्देनजर, उन्होंने भाषाई नीतियों में संतुलन बनाए रखने और पूर्वी राजस्थान की बोलियों को भी उनका उचित हक एवं सम्मान दिए जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार के इस बयान का पुरजोर समर्थन किया। इस बयान के बाद प्रदेश के भाषाई और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।

2 hrs ago
user_पत्रकार उपेंद्र दीक्षित
पत्रकार उपेंद्र दीक्षित
धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
2 hrs ago

श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने मारवाड़ी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने संगठन के एक स्थानीय कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मारवाड़ी भाषा को पूर्वी राजस्थान पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. परमार ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान विविधताओं से भरा प्रदेश है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती और बृज क्षेत्र) की लोक भाषाओं और बोलियों का उल्लेख किया, जिनका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश पर केवल मारवाड़ी भाषा को थोपकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई अस्मिता को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने बताया कि श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत हर क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के सम्मान का पक्षधर है। उन्होंने इसे पूर्वी राजस्थान के युवाओं और वहाँ की संस्कृति के साथ अन्याय बताया कि किसी एक क्षेत्र की बोली को पूरे राज्य की एकमात्र प्रतिनिधि भाषा के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी के मद्देनजर, उन्होंने भाषाई नीतियों में संतुलन बनाए रखने और पूर्वी राजस्थान की बोलियों को भी उनका उचित हक एवं सम्मान दिए जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार के इस बयान का पुरजोर समर्थन किया। इस बयान के बाद प्रदेश के भाषाई और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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  • श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने मारवाड़ी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने संगठन के एक स्थानीय कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मारवाड़ी भाषा को पूर्वी राजस्थान पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. परमार ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान विविधताओं से भरा प्रदेश है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती और बृज क्षेत्र) की लोक भाषाओं और बोलियों का उल्लेख किया, जिनका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश पर केवल मारवाड़ी भाषा को थोपकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई अस्मिता को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने बताया कि श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत हर क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के सम्मान का पक्षधर है। उन्होंने इसे पूर्वी राजस्थान के युवाओं और वहाँ की संस्कृति के साथ अन्याय बताया कि किसी एक क्षेत्र की बोली को पूरे राज्य की एकमात्र प्रतिनिधि भाषा के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी के मद्देनजर, उन्होंने भाषाई नीतियों में संतुलन बनाए रखने और पूर्वी राजस्थान की बोलियों को भी उनका उचित हक एवं सम्मान दिए जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार के इस बयान का पुरजोर समर्थन किया। इस बयान के बाद प्रदेश के भाषाई और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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    श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने मारवाड़ी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने संगठन के एक स्थानीय कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मारवाड़ी भाषा को पूर्वी राजस्थान पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

डॉ. परमार ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान विविधताओं से भरा प्रदेश है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती और बृज क्षेत्र) की लोक भाषाओं और बोलियों का उल्लेख किया, जिनका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश पर केवल मारवाड़ी भाषा को थोपकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई अस्मिता को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने बताया कि श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत हर क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के सम्मान का पक्षधर है। उन्होंने इसे पूर्वी राजस्थान के युवाओं और वहाँ की संस्कृति के साथ अन्याय बताया कि किसी एक क्षेत्र की बोली को पूरे राज्य की एकमात्र प्रतिनिधि भाषा के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

इसी के मद्देनजर, उन्होंने भाषाई नीतियों में संतुलन बनाए रखने और पूर्वी राजस्थान की बोलियों को भी उनका उचित हक एवं सम्मान दिए जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार के इस बयान का पुरजोर समर्थन किया। इस बयान के बाद प्रदेश के भाषाई और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।
    user_पत्रकार उपेंद्र दीक्षित
    पत्रकार उपेंद्र दीक्षित
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।
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    धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा।

शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया।

समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।
    user_ANURAG BAGHEL
    ANURAG BAGHEL
    Local News Reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • धौलपुर में साइबर अपराध पुलिस थाना ने एक ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के बैंक खाते से निकाले गए 60 हजार 848 रुपये की पूरी राशि मात्र 24 घंटे के भीतर वापस दिलवा दी। सरमथुरा निवासी प्रेम सिंह के व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करते ही बिना किसी ओटीपी के उनके खाते से कुल 60,848 रुपये निकाल लिए गए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित प्रेम सिंह ने एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के तुरंत बाद, साइबर अपराध पुलिस थाना धौलपुर में तैनात कांस्टेबल अमित शर्मा ने संबंधित बैंकों और वॉलेट कंपनियों के नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा। इस त्वरित समन्वय और कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ठगी की गई संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस कर दी गई। साइबर थाना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मोबाइल ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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    धौलपुर में साइबर अपराध पुलिस थाना ने एक ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के बैंक खाते से निकाले गए 60 हजार 848 रुपये की पूरी राशि मात्र 24 घंटे के भीतर वापस दिलवा दी। सरमथुरा निवासी प्रेम सिंह के व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करते ही बिना किसी ओटीपी के उनके खाते से कुल 60,848 रुपये निकाल लिए गए।

ठगी का पता चलते ही पीड़ित प्रेम सिंह ने एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के तुरंत बाद, साइबर अपराध पुलिस थाना धौलपुर में तैनात कांस्टेबल अमित शर्मा ने संबंधित बैंकों और वॉलेट कंपनियों के नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा। इस त्वरित समन्वय और कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ठगी की गई संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस कर दी गई।

साइबर थाना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मोबाइल ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
    user_Afaq ahmed
    Afaq ahmed
    Court reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • धौलपुर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग मुक्त परिसर और भय मुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एक रैली निकाली, जिसके माध्यम से सभी उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने एंटी-रैगिंग संबंधी पोस्टर भी तैयार किए। कार्यक्रम में एंटी-रैगिंग के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाला एक नाटक भी मंचित किया गया। यह आयोजन प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार दुबे की अध्यक्षता में, और सहायक आचार्य एनाटॉमी डॉ. संतोष कुमार एवं सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी डॉ. आशीष सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग न करने की हिदायत दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई सीनियर छात्र-छात्रा किसी जूनियर छात्र-छात्रा के साथ रैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत नेशनल एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नंबर 18001805522 पर की जा सकती है। इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गुप्ता, डॉ. हेमलता गुप्ता, अनिल गोयल, ध्रुव सिंह सिकरवार, मुकेश यादव और प्रेमराज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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    धौलपुर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग मुक्त परिसर और भय मुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एक रैली निकाली, जिसके माध्यम से सभी उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने एंटी-रैगिंग संबंधी पोस्टर भी तैयार किए।

कार्यक्रम में एंटी-रैगिंग के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाला एक नाटक भी मंचित किया गया। यह आयोजन प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार दुबे की अध्यक्षता में, और सहायक आचार्य एनाटॉमी डॉ. संतोष कुमार एवं सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी डॉ. आशीष सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग न करने की हिदायत दी गई।

अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई सीनियर छात्र-छात्रा किसी जूनियर छात्र-छात्रा के साथ रैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत नेशनल एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नंबर 18001805522 पर की जा सकती है। इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गुप्ता, डॉ. हेमलता गुप्ता, अनिल गोयल, ध्रुव सिंह सिकरवार, मुकेश यादव और प्रेमराज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
    user_Mukesh Sootel
    Mukesh Sootel
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • धौलपुर में नौतपा की भीषण गर्मी और आग उगलती दोपहरी के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए एडवोकेट, पत्रकार और आमजन ने मिलकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार निभाया है। मई-जून की तपती गर्मी से पक्षियों के गले सूख रहे हैं और आवारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं, ऐसे में शहर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल के तहत, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आमजन द्वारा शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें रोजाना ताजा पानी भरा जाता है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए लोगों ने अपनी ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी रोजाना पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस अवसर पर कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रख देना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने बताया कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होता है, तो ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने इस संयुक्त प्रयास को समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आह्वान किया। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता, पत्रकार और आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा और भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो नौतपा की इस तपिश में पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन रहा है।
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    धौलपुर में नौतपा की भीषण गर्मी और आग उगलती दोपहरी के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए एडवोकेट, पत्रकार और आमजन ने मिलकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार निभाया है। मई-जून की तपती गर्मी से पक्षियों के गले सूख रहे हैं और आवारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं, ऐसे में शहर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है।

इस पहल के तहत, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आमजन द्वारा शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें रोजाना ताजा पानी भरा जाता है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए लोगों ने अपनी ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी रोजाना पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है।

पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस अवसर पर कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रख देना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने बताया कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होता है, तो ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने इस संयुक्त प्रयास को समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आह्वान किया।

अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता, पत्रकार और आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा और भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो नौतपा की इस तपिश में पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन रहा है।
    user_Deepu Verma Journalist Dholpur
    Deepu Verma Journalist Dholpur
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • धौलपुर के बाड़ी उपखंड और तहसील कार्यालयों पर 26 मई को कर्मचारियों ने अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के आह्वान पर एक घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राजस्थान सरकार द्वारा कर्मचारी हितों पर किए जा रहे कथित कुठाराघात के विरोध में था, जिसमें कर्मचारियों का तीखा आक्रोश देखने को मिला। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं पर लगातार चोट कर रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकना, बीमा कंपनियों के प्रवेश को रोकना और समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, महासंघ के 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करने की भी मांग की गई है। कर्मचारियों ने दुख व्यक्त किया कि उन्हें अपने स्वयं के जीपीएफ से पैसा निकालने के लिए 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिसे उन्होंने कर्मचारियों के साथ कुठाराघात बताया। इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। इनमें जिला अध्यक्ष चंद्रभान चौधरी, कर्मचारी नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव (जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष), गोपाल कृष्ण शर्मा (आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष), टीकम सिंह जाट (शिक्षक संघ महामंत्री), आईएलआर सुनील कुमार परमार, जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीएलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा, कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा, और अध्यापक अशोक कुमार मीणा जैसे अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया और कर्मचारियों की आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एकजुट होकर सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की घोर निंदा की। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि वह जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाए और 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करे। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।
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    धौलपुर के बाड़ी उपखंड और तहसील कार्यालयों पर 26 मई को कर्मचारियों ने अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के आह्वान पर एक घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राजस्थान सरकार द्वारा कर्मचारी हितों पर किए जा रहे कथित कुठाराघात के विरोध में था, जिसमें कर्मचारियों का तीखा आक्रोश देखने को मिला। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।

कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं पर लगातार चोट कर रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकना, बीमा कंपनियों के प्रवेश को रोकना और समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, महासंघ के 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करने की भी मांग की गई है। कर्मचारियों ने दुख व्यक्त किया कि उन्हें अपने स्वयं के जीपीएफ से पैसा निकालने के लिए 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिसे उन्होंने कर्मचारियों के साथ कुठाराघात बताया।

इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। इनमें जिला अध्यक्ष चंद्रभान चौधरी, कर्मचारी नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव (जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष), गोपाल कृष्ण शर्मा (आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष), टीकम सिंह जाट (शिक्षक संघ महामंत्री), आईएलआर सुनील कुमार परमार, जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीएलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा, कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा, और अध्यापक अशोक कुमार मीणा जैसे अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया और कर्मचारियों की आवाज बुलंद की।

प्रदर्शन के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एकजुट होकर सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की घोर निंदा की। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि वह जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाए और 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करे। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।
    user_OM PRAKASH
    OM PRAKASH
    Journalist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • शहीद अवंती प्रीमियर लीग (SABPL) रात्रि क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य शुभारंभ आज बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। इस शानदार टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि रोहित गुर्जर मानपुर ने फीता काटकर किया, जिसके तुरंत बाद तालियों की गड़गड़ाहट और खिलाड़ियों के जोश से पूरा मैदान गूंज उठा। इस अवसर पर शहीद अवंती विद्या पीठ के निदेशक राजुद्दीन खान सर और समस्त वहरावती युवा टीम मौजूद थी, वहीं गांव के खेल प्रेमियों और दर्शकों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। चारों ओर लगी रोशनी से पूरा मैदान किसी स्टेडियम से कम नहीं लग रहा था। 51,000 रुपये की शानदार विजेता राशि वाला यह टूर्नामेंट युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह भर रहा है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का जोश, खिलाड़ियों का जुनून और गांव की एकता को यादगार बना दिया। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़कर गांव में भाईचारा, प्रतिभा और नई ऊर्जा का संदेश देते हैं, जिससे वहरावती की धरती पर क्रिकेट का यह महाकुंभ रोशनी से जगमगा उठा।
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    शहीद अवंती प्रीमियर लीग (SABPL) रात्रि क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य शुभारंभ आज बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। इस शानदार टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि रोहित गुर्जर मानपुर ने फीता काटकर किया, जिसके तुरंत बाद तालियों की गड़गड़ाहट और खिलाड़ियों के जोश से पूरा मैदान गूंज उठा। इस अवसर पर शहीद अवंती विद्या पीठ के निदेशक राजुद्दीन खान सर और समस्त वहरावती युवा टीम मौजूद थी, वहीं गांव के खेल प्रेमियों और दर्शकों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। चारों ओर लगी रोशनी से पूरा मैदान किसी स्टेडियम से कम नहीं लग रहा था। 51,000 रुपये की शानदार विजेता राशि वाला यह टूर्नामेंट युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह भर रहा है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का जोश, खिलाड़ियों का जुनून और गांव की एकता को यादगार बना दिया। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़कर गांव में भाईचारा, प्रतिभा और नई ऊर्जा का संदेश देते हैं, जिससे वहरावती की धरती पर क्रिकेट का यह महाकुंभ रोशनी से जगमगा उठा।
    user_Reporter Rajkumar Sain Dholpur Rajasthan
    Reporter Rajkumar Sain Dholpur Rajasthan
    Carpenter सेपऊ, धौलपुर, राजस्थान•
    39 min ago
  • धौलपुर में भीषण गर्मी और नौतपा की प्रचंड तपिश के बीच, जब आम जनजीवन प्रभावित है, तब बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा और भी बढ़ गई है। इसी स्थिति को समझते हुए धौलपुर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए बेजुबान जीवों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी में पक्षियों के सूखते गले और पानी की तलाश में भटकते आवारा पशुओं को राहत प्रदान करना है। इस अभियान के तहत, शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर पक्षियों के लिए मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें प्रतिदिन ताजा पानी भरा जाता है। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गायों, कुत्तों और बंदरों जैसे जानवरों के लिए लोगों ने खुद की ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी नियमित रूप से पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस दौरान कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, पर प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है। उन्होंने नौतपा में एक बर्तन पानी रखने को भी सबसे बड़ा पुण्य का काम बताते हुए अधिवक्ता समुदाय से इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा हो जाता है तब ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने एडवोकेट, पत्रकार एवं आमजन के इस संयुक्त प्रयास को पूरे समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आग्रह किया। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के दौरान धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में पानी से भरा एक मिट्टी का बर्तन रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता और पत्रकार एवं आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। नौतपा की इस तपिश में यह सामाजिक सरोकार न सिर्फ पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान है, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल भी है। इस अभियान में प्रशांत हुंडावाल के साथ रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा, भानु शर्मा सहित कई लोग सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
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    धौलपुर में भीषण गर्मी और नौतपा की प्रचंड तपिश के बीच, जब आम जनजीवन प्रभावित है, तब बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा और भी बढ़ गई है। इसी स्थिति को समझते हुए धौलपुर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए बेजुबान जीवों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी में पक्षियों के सूखते गले और पानी की तलाश में भटकते आवारा पशुओं को राहत प्रदान करना है।

इस अभियान के तहत, शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर पक्षियों के लिए मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें प्रतिदिन ताजा पानी भरा जाता है। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गायों, कुत्तों और बंदरों जैसे जानवरों के लिए लोगों ने खुद की ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी नियमित रूप से पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है।

पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस दौरान कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, पर प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है। उन्होंने नौतपा में एक बर्तन पानी रखने को भी सबसे बड़ा पुण्य का काम बताते हुए अधिवक्ता समुदाय से इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा हो जाता है तब ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने एडवोकेट, पत्रकार एवं आमजन के इस संयुक्त प्रयास को पूरे समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आग्रह किया।

अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के दौरान धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में पानी से भरा एक मिट्टी का बर्तन रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता और पत्रकार एवं आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। नौतपा की इस तपिश में यह सामाजिक सरोकार न सिर्फ पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान है, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल भी है। इस अभियान में प्रशांत हुंडावाल के साथ रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा, भानु शर्मा सहित कई लोग सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
    user_पत्रकार उपेंद्र दीक्षित
    पत्रकार उपेंद्र दीक्षित
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
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