शहीद अवंती प्रीमियर लीग (SABPL) रात्रि क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य शुभारंभ आज बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। इस शानदार टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि रोहित गुर्जर मानपुर ने फीता काटकर किया, जिसके तुरंत बाद तालियों की गड़गड़ाहट और खिलाड़ियों के जोश से पूरा मैदान गूंज उठा। इस अवसर पर शहीद अवंती विद्या पीठ के निदेशक राजुद्दीन खान सर और समस्त वहरावती युवा टीम मौजूद थी, वहीं गांव के खेल प्रेमियों और दर्शकों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। चारों ओर लगी रोशनी से पूरा मैदान किसी स्टेडियम से कम नहीं लग रहा था। 51,000 रुपये की शानदार विजेता राशि वाला यह टूर्नामेंट युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह भर रहा है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का जोश, खिलाड़ियों का जुनून और गांव की एकता को यादगार बना दिया। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़कर गांव में भाईचारा, प्रतिभा और नई ऊर्जा का संदेश देते हैं, जिससे वहरावती की धरती पर क्रिकेट का यह महाकुंभ रोशनी से जगमगा उठा।
शहीद अवंती प्रीमियर लीग (SABPL) रात्रि क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य शुभारंभ आज बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। इस शानदार टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि रोहित गुर्जर मानपुर ने फीता काटकर किया, जिसके तुरंत बाद तालियों की गड़गड़ाहट और खिलाड़ियों
के जोश से पूरा मैदान गूंज उठा। इस अवसर पर शहीद अवंती विद्या पीठ के निदेशक राजुद्दीन खान सर और समस्त वहरावती युवा टीम मौजूद थी, वहीं गांव के खेल प्रेमियों और दर्शकों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना
दिया। चारों ओर लगी रोशनी से पूरा मैदान किसी स्टेडियम से कम नहीं लग रहा था। 51,000 रुपये की शानदार विजेता राशि वाला यह टूर्नामेंट युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह भर रहा है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का जोश, खिलाड़ियों का
जुनून और गांव की एकता को यादगार बना दिया। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़कर गांव में भाईचारा, प्रतिभा और नई ऊर्जा का संदेश देते हैं, जिससे वहरावती की धरती पर क्रिकेट का यह महाकुंभ रोशनी से जगमगा उठा।
- शहीद अवंती प्रीमियर लीग (SABPL) रात्रि क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य शुभारंभ आज बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। इस शानदार टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि रोहित गुर्जर मानपुर ने फीता काटकर किया, जिसके तुरंत बाद तालियों की गड़गड़ाहट और खिलाड़ियों के जोश से पूरा मैदान गूंज उठा। इस अवसर पर शहीद अवंती विद्या पीठ के निदेशक राजुद्दीन खान सर और समस्त वहरावती युवा टीम मौजूद थी, वहीं गांव के खेल प्रेमियों और दर्शकों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। चारों ओर लगी रोशनी से पूरा मैदान किसी स्टेडियम से कम नहीं लग रहा था। 51,000 रुपये की शानदार विजेता राशि वाला यह टूर्नामेंट युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह भर रहा है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का जोश, खिलाड़ियों का जुनून और गांव की एकता को यादगार बना दिया। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़कर गांव में भाईचारा, प्रतिभा और नई ऊर्जा का संदेश देते हैं, जिससे वहरावती की धरती पर क्रिकेट का यह महाकुंभ रोशनी से जगमगा उठा।4
- सड़क के किनारे कूड़ा डाला हुआ है, जिसकी वजह से प्रतिदिन दुर्घटनाएँ होती हैं।1
- श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने मारवाड़ी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने संगठन के एक स्थानीय कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मारवाड़ी भाषा को पूर्वी राजस्थान पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. परमार ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान विविधताओं से भरा प्रदेश है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती और बृज क्षेत्र) की लोक भाषाओं और बोलियों का उल्लेख किया, जिनका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश पर केवल मारवाड़ी भाषा को थोपकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई अस्मिता को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने बताया कि श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत हर क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के सम्मान का पक्षधर है। उन्होंने इसे पूर्वी राजस्थान के युवाओं और वहाँ की संस्कृति के साथ अन्याय बताया कि किसी एक क्षेत्र की बोली को पूरे राज्य की एकमात्र प्रतिनिधि भाषा के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी के मद्देनजर, उन्होंने भाषाई नीतियों में संतुलन बनाए रखने और पूर्वी राजस्थान की बोलियों को भी उनका उचित हक एवं सम्मान दिए जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार के इस बयान का पुरजोर समर्थन किया। इस बयान के बाद प्रदेश के भाषाई और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।1
- धौलपुर जिले की बाड़ी में बिजली चोरों के खिलाफ डिस्कॉम का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में विभाग ने चार मोहल्लों में बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, हरिजन बस्ती में लोगों से बिजली कनेक्शन लेने की अपील भी की गई है, ताकि वे वैध तरीके से बिजली का उपयोग करें। डिस्कॉम ने ग्रामीण क्षेत्रों से चार ट्रांसफार्मर भी हटा दिए हैं। इस कार्रवाई के बीच, एक्सईएन गोविंद सिंह ने अधिकारियों के साथ एक बैठक की और बिजली से संबंधित शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।2
- धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।3
- धौलपुर में साइबर अपराध पुलिस थाना ने एक ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के बैंक खाते से निकाले गए 60 हजार 848 रुपये की पूरी राशि मात्र 24 घंटे के भीतर वापस दिलवा दी। सरमथुरा निवासी प्रेम सिंह के व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करते ही बिना किसी ओटीपी के उनके खाते से कुल 60,848 रुपये निकाल लिए गए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित प्रेम सिंह ने एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के तुरंत बाद, साइबर अपराध पुलिस थाना धौलपुर में तैनात कांस्टेबल अमित शर्मा ने संबंधित बैंकों और वॉलेट कंपनियों के नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा। इस त्वरित समन्वय और कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ठगी की गई संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस कर दी गई। साइबर थाना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मोबाइल ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।1
- धौलपुर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग मुक्त परिसर और भय मुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एक रैली निकाली, जिसके माध्यम से सभी उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने एंटी-रैगिंग संबंधी पोस्टर भी तैयार किए। कार्यक्रम में एंटी-रैगिंग के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाला एक नाटक भी मंचित किया गया। यह आयोजन प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार दुबे की अध्यक्षता में, और सहायक आचार्य एनाटॉमी डॉ. संतोष कुमार एवं सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी डॉ. आशीष सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग न करने की हिदायत दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई सीनियर छात्र-छात्रा किसी जूनियर छात्र-छात्रा के साथ रैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत नेशनल एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नंबर 18001805522 पर की जा सकती है। इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गुप्ता, डॉ. हेमलता गुप्ता, अनिल गोयल, ध्रुव सिंह सिकरवार, मुकेश यादव और प्रेमराज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।3
- बाड़ी उपखंड पर समस्त युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कदम को पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय और दुर्व्यवहार बताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बाड़ी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान में बृज भाषा का प्रचलन है। उनका कहना था कि यदि मारवाड़ी भाषा को पूरे राजस्थान में थोपा गया, तो यह पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय होगा और बृज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। इसी क्रम में, शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी जिक्र किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का समुचित अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू की जाती है, खासकर जब पूर्वी राजस्थान से लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तो यह विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन आवश्यक है। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों की वास्तविक भाषाई परिस्थिति के अध्ययन के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा गया, तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को हल नहीं कर पाएंगे और सरकारी नौकरी से वंचित रह जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि माननीय उच्च न्यायालय को अपना फैसला बदलना चाहिए और पूर्वी राजस्थान की भाषा हिंदी एवं बृज भाषा ही रहने देनी चाहिए, जिससे भविष्य में न तो विद्यार्थियों को कोई परेशानी आए और न ही बृज भाषा का अस्तित्व खत्म हो। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी बताया कि इन पूर्वी जिलों में भगवान श्री कृष्ण के समय से ही बृज और हिंदी का प्रचलन रहा है, और कई कवियों ने भी बृज भाषा में रचनाएं लिखी हैं। उनके अनुसार, अचानक से इस तरह भाषा का बोझ थोपना गलत है, और यदि पूरे क्षेत्र में मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के रूप में लागू किया गया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह पिछड़ जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, चेतन शर्मा, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीना, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमन्त, कांता शर्मा, पायल सहित सैकड़ों युवा और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।4