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बरेली जिले के सिरौली थाना क्षेत्र में अटा उर्फ फंदापुर निवासी शिवानी शर्मा ने अपने पति पर गंभीर अत्याचारों का आरोप लगाया है। शिवानी शर्मा का कहना है कि उसका पति प्रधान के साथ मिलकर उसे गलत काम करने के लिए मजबूर करता था। जब भी वह इन हरकतों का विरोध करती थी, तो उसका पति बेरहमी से उसकी पिटाई करता था।
Krishna kumar gautam
बरेली जिले के सिरौली थाना क्षेत्र में अटा उर्फ फंदापुर निवासी शिवानी शर्मा ने अपने पति पर गंभीर अत्याचारों का आरोप लगाया है। शिवानी शर्मा का कहना है कि उसका पति प्रधान के साथ मिलकर उसे गलत काम करने के लिए मजबूर करता था। जब भी वह इन हरकतों का विरोध करती थी, तो उसका पति बेरहमी से उसकी पिटाई करता था।
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- वाराणसी के नमो घाट पर बुधवार को नमामि गंगे ने युवा शक्ति के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसमें युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इस दौरान, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता प्रदर्शित करती तख्तियों के साथ उपस्थित जन सामान्य को स्वच्छता का संकल्प भी दिलाया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने इस अवसर पर युवाओं की भूमिका को अति महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और नवीन सोच के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से लड़ने और एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाएं, तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन भागीदारी सुनिश्चित करें। शुक्ला ने यह भी कहा कि युवा जमीनी स्तर पर और सोशल मीडिया का उपयोग करके जलवायु संकट एवं पर्यावरण बचाव के संदेशों को तेजी से जन-जन तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि युवा वृक्षारोपण अभियानों, स्वच्छता कार्यों और अपशिष्ट प्रबंधन में सक्रिय रूप से नेतृत्व करें, तो सतत जीवनशैली को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनके अनुसार, दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग बंद करना, जल और ऊर्जा बचाना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने सभी से मिलकर यह संकल्प लेने का आग्रह किया कि वे न केवल स्वयं पर्यावरण के प्रति जागरूक रहेंगे, बल्कि अपने समाज और देश को भी जागरूक करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज का छोटा सा कदम, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ कल का निर्माण करेगा। इस आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला के साथ अमन, सरोज, शिवानी, अंजलि, कोमल, अंशिका, शालिनी आदि उपस्थित रहे।1
- बरेली जिले के सिरौली थाना क्षेत्र में अटा उर्फ फंदापुर निवासी शिवानी शर्मा ने अपने पति पर गंभीर अत्याचारों का आरोप लगाया है। शिवानी शर्मा का कहना है कि उसका पति प्रधान के साथ मिलकर उसे गलत काम करने के लिए मजबूर करता था। जब भी वह इन हरकतों का विरोध करती थी, तो उसका पति बेरहमी से उसकी पिटाई करता था।1
- वाराणसी के सामने घाट स्थित लंका थाना क्षेत्र में, गंगा नदी का जलस्तर कम होने के कारण युवकों ने रेत के रास्ते नदी के बीच पहुँचकर बाइक से स्टंट किए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- एक टीवी एंकर द्वारा डिजिटल शिक्षा को लेकर दिए गए बयान के बाद ऑनलाइन टीचर्स और यूट्यूब एजुकेटर्स में गहरी नाराज़गी है। एंकर के इस बयान, जिसमें उन्होंने 'दो कौड़ी का ज्ञान' शब्दों का इस्तेमाल किया, के कारण सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। खान सर समेत कई शिक्षकों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए करारा जवाब दिया है। यह विवाद इस अहम सवाल को उठाता है कि क्या डिजिटल एजुकेशन को कम आंकना उचित है।1
- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एडिशनल एसपी अनुज चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे ऐसे अंदाज में देशवासियों को संबोधित करते नजर आ रहे हैं मानो यह किसी राष्ट्राध्यक्ष का 'राष्ट्र के नाम संबोधन' हो। यह परंपरा और अधिकार आमतौर पर मुख्य रूप से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पदों से जुड़ा रहा है, जिसके चलते यह वीडियो देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। इस वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिनमें व्यंग्यात्मक टिप्पणियां प्रमुख हैं। कई यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा है कि अब 'राष्ट्र के नाम संबोधन' केवल प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति तक सीमित नहीं रह गया है, और देश को यह नई उपलब्धि मिली है कि एक एडिशनल एसपी भी यह संबोधन कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे प्रशासनिक अधिकारियों के बढ़ते सार्वजनिक प्रभाव से जोड़कर देखा है, जबकि अन्य इसे महज एक औपचारिक संदेश को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश बता रहे हैं। हालांकि, जनता को जागरूक करने या कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संदेश जारी करना किसी भी अधिकारी की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का हिस्सा होता है, लेकिन इस वीडियो की खास शैली और प्रस्तुति ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। फिलहाल वीडियो को लेकर लोगों के बीच चर्चा जारी है और इसे लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।1
- वाराणसी की विश्वप्रसिद्ध कबीर चौरा गली इन दिनों अवैध ट्रांसपोर्ट व्यवसाय 'राज रोड लाइन्स' के कारण रोज़ाना जाम और विवाद का अड्डा बन गई है। इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, 34 वर्षों से वकालत कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता तारकेश्वरी प्रसाद श्रीवास्तव ने पुलिस कमिश्नर, आरटीओ, जीएसटी और नगर निगम को एक कानूनी नोटिस भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह ट्रांसपोर्ट व्यवसाय चेतगंज थाना क्षेत्र के मकान नं. C-25/6 से संचालित हो रहा है। नोटिस के अनुसार, 'राज रोड लाइन्स' के मालिक श्री राज बिना किसी वैध अनुमति के लंबे समय से परिवहन व्यवसाय चला रहे हैं। उनके कर्मचारी नियमित रूप से बड़े बक्से और क्रेट सड़क और फुटपाथ पर रख देते हैं, जिससे ट्रक और मालवाहक वाहन घंटों सड़क पर खड़े रहते हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि पैदल चलने वाले राहगीरों को भी भारी परेशानी होती है। अधिवक्ता तारकेश्वरी प्रसाद श्रीवास्तव के साथ 03-06-2026 को एक घटना हुई, जब वे अपनी कार गैराज से बाहर निकाल रहे थे। ट्रांसपोर्टर ने उनकी गाड़ी के ठीक सामने सामान रखकर रास्ता रोक दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो ट्रांसपोर्टर और उनके कर्मचारियों ने गाली-गलौज की और शारीरिक हमले की धमकी देकर उन्हें वाहन बाहर निकालने से रोक दिया। शिकायतकर्ता ने अपनी नोटिस में इस बात पर जोर दिया है कि कबीर चौरा गली श्री शिव प्रसाद गुप्ता सरकारी अस्पताल जाने वाली एम्बुलेंस का मुख्य मार्ग है। सड़क पर अवैध कब्जे के कारण आपातकालीन सेवाओं में अनावश्यक देरी हो रही है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यह गली भैरव नाथ मंदिर से थोड़ी दूरी पर स्थित है, जहाँ माननीय मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नियमित दर्शन के लिए आते हैं। सरकार ने इस क्षेत्र के कला-सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए 'कला सांस्कृतिक द्वार' भी बनवाया है। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि 'राज रोड लाइन्स' के पास मोटर वाहन अधिनियम 1988, केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989, यूपी मोटर वाहन नियम, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, व्यापार लाइसेंस, वाणिज्यिक परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और पीयूसी जैसे कोई कानूनी दस्तावेज या अनुमति नहीं है। बावजूद इसके, यह पूरा कारोबार स्थानीय यातायात निरीक्षकों, पुलिस और जीएसटी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बेरोकटोक चल रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पुलिस कमिश्नर, डीसीपी चेतगंज, यातायात निरीक्षक, एआरटीओ, जीएसटी अधिकारी और नगर आयुक्त को 2 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस अवैध धंधे को तत्काल बंद कराया जाए, सड़क को खाली कराया जाए, ट्रांसपोर्टर के मालिक और जिम्मेदार व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज की जाए, और सरकारी राजस्व की भरपाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री से भी भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अपनी शिकायत के समर्थन में, अधिवक्ता ने सड़क पर हुए कब्जे की तस्वीरें भी संलग्न की हैं।1
- एक डुबकियां मोबाइल विक्रेता से उसकी दुकान के बाहर हाथापाई हुई। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1