खरोरा में 10 जून 2026 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान खरोरा स्थित शारदा मंदिर में माता शारदा और श्री हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जिसमें क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं और उपस्थित जनों के बीच भोग-प्रसाद का वितरण किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. तेजराम पाल (जिला संयोजक, चिकित्सा प्रकोष्ठ), दुलारी सुरेंद्र वर्मा (जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि), लोनिता चंद्राकर (महिला मोर्चा जिला कार्यकारिणी सदस्य), चंद्रकांत साहू (अध्यक्ष, बंगोली मंडल), राजेंद्र खूंटे, मारुति नंदन वर्मा (महामंत्री, बंगाली मंडल), श्रीमती हीरा वर्मा (अध्यक्ष, महिला मोर्चा बंगाली मंडल) सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण और राष्ट्र की उन्नति की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।
खरोरा में 10 जून 2026 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान खरोरा स्थित शारदा मंदिर में माता शारदा और श्री
हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जिसमें क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं और उपस्थित जनों के बीच भोग-प्रसाद का वितरण किया गया। इस आयोजन में
बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. तेजराम पाल (जिला संयोजक, चिकित्सा प्रकोष्ठ), दुलारी सुरेंद्र वर्मा (जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि), लोनिता चंद्राकर (महिला मोर्चा जिला कार्यकारिणी सदस्य), चंद्रकांत साहू (अध्यक्ष, बंगोली
मंडल), राजेंद्र खूंटे, मारुति नंदन वर्मा (महामंत्री, बंगाली मंडल), श्रीमती हीरा वर्मा (अध्यक्ष, महिला मोर्चा बंगाली मंडल) सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण और राष्ट्र की उन्नति की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।
- खरोरा के ग्राम भालेसूर में नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया है। ग्राम के नवनिर्वाचित सरपंच नवीन कुमार वर्मा के मार्गदर्शन और निगरानी में गठित महिला संगठन ने गांव में जागरूकता रैली निकाली और नशे के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया। इस दौरान महिलाओं ने गांव को नशामुक्त करने तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने का संकल्प लिया। अभियान के तहत आयोजित एक बैठक में अवैध शराब की बिक्री, चौक-चौराहों पर खुलेआम शराब का सेवन, सार्वजनिक स्थलों पर नशाखोरी और दुकानों में डिस्पोजल व पानी की आड़ में होने वाली अवैध गतिविधियों जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। महिला समूह ने निर्णय लिया है कि वे प्रतिदिन संगठित होकर गांव के विभिन्न मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों की निगरानी करेंगी और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल पंचायत एवं संबंधित विभाग को देंगी। सरपंच नवीन कुमार वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि नशा समाज और परिवार दोनों के लिए घातक है, और गांव को नशामुक्त बनाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की। इस पहल में नीलेश्वरी धुरंधर, प्रभा वर्मा, वृंदा वर्मा, पिंकी ध्रुव, शिवकुमारी ध्रुव, चमेली वर्मा, कृष्णाबाई वर्मा, ईश्वरी रजक, प्रमिला टंडन, हीराबाई वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल थीं। सभी ने एकजुट होकर अपने गांव को नशामुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित बनाने का संकल्प लिया है।4
- बिलासपुर के रतनपुर थाना क्षेत्र स्थित बिकमा तालाब में छह मगरमच्छ के बच्चे मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तालाब किनारे इन शावकों को देखा और तुरंत पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची टीम ने सभी शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू किया। जानकारी के अनुसार, ये मगरमच्छ के बच्चे हाल ही में तालाब किनारे दिए गए अंडों से बाहर निकले थे। सुबह तालाब में नहाने गए लोगों की नजर इन शावकों पर पड़ी, जिसके बाद प्रशासन को सूचित किया गया। रतनपुर पुलिस और वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी छह मगरमच्छ शावकों को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के उपरांत, वन विभाग ने इन सभी शावकों को उनके प्राकृतिक आवास खुटाघाट डैम में छोड़ दिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान, बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे और मगरमच्छ के बच्चों को देखने के लिए उत्सुक दिखे। वन विभाग ने यह आशंका जताई है कि बिकमा तालाब में अभी भी तीन और मगरमच्छ मौजूद हो सकते हैं। इसे देखते हुए, विभाग ने क्षेत्र के लोगों से तालाब के आसपास सावधानी बरतने, अनावश्यक रूप से पानी के किनारे न जाने और मगरमच्छ दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग या प्रशासन को सूचना देने की अपील की है। वन विभाग ने बताया है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है।2
- बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड बलौदाबाजार अंतर्गत गिंदोला से तिल्दा जाने वाला लोक निर्माण विभाग (PWD) का मार्ग पिछले तीन वर्षों से टेंडर प्रक्रिया में फंसा होने के कारण अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बदहाल सड़क के कारण स्कूली बच्चों सहित आम नागरिकों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है, जिससे यह मार्ग शासन-प्रशासन के विकास दावों पर गंभीर सवाल उठा रहा है और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह मार्ग इतना जर्जर है कि कई बार स्कूल वाहन और अन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। सड़क पर बरसाती पानी की निकासी के लिए डाले गए पाइप के आसपास का हिस्सा लगातार टूट रहा है, और जहाँ चार गाँवों का पानी एक साथ पार होता है, वहाँ पुल के बजाय केवल पाइप डाल दिए गए हैं, जिससे समस्या और भी गंभीर हो गई है। बरसात के दिनों में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने पिछले तीन वर्षों से लगातार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को सड़क मरम्मत के लिए आवेदन सौंपे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता और संबंधित अधिकारियों को भी कई बार आवेदन दिए हैं, लेकिन 13 जून 2026 तक सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। विभाग की ओर से हर बार यही जवाब दिया जाता है कि मामला अभी टेंडर प्रक्रिया में है। अब मानसून की दस्तक के साथ ग्रामीणों को आशंका है कि जल्द ही बारिश का हवाला देकर काम को फिर टाल दिया जाएगा। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह सिर्फ सड़क का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सड़क मरम्मत और स्थायी समाधान की मांग की है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।1
- बिलासपुर के कोटा क्षेत्र में जिम संचालक निखिल गोस्वामी की हत्या के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों में से एक व्यक्ति मृतक की अपनी पत्नी से बातचीत को लेकर नाराज था। इसी पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पहले निखिल की आंखों में मिर्च पाउडर झोंका और फिर बेरहमी से उसकी पिटाई कर बड़े पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी। इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका जुलूस भी निकाला। इसके उपरांत, सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हत्या में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।1
- रायगढ़ जिले के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के अतरमुड़ा में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक मकान में चल रहे कथित देह व्यापार के धंधे का भंडाफोड़ किया है। रायगढ़ एसपी के निर्देश पर गठित एक विशेष टीम ने छापेमारी कर मौके से कुल 6 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें 4 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। पुलिस को लंबे समय से इस मकान में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसी सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें कई अहम सबूत भी बरामद किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, जिस्मफरोसी का यह धंधा किराए के मकान में संचालित हो रहा था। फिलहाल, पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।1
- कोंडागांव से सामने आई खबर के अनुसार, वहाँ आदिवासियों को उनके जंगल से बेदखल किया जा रहा है। उन्हें जंगल से बाहर निकालने के लिए यह तर्क दिया जा रहा है कि उन्होंने 'औषधीय कब्जा' कर रखा है।1
- गरियाबंद जिले के राजिम में खनिज विभाग ने रेत माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद अवैध रेत उत्खनन कर रहे माफियाओं के खिलाफ कलेक्टर बी एस उईके के निर्देश पर खनिज विभाग और राजिम थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने चौबेबाँधा सिंधौरी में छापा मारा। इस दौरान मौके से एक चैनमाउंटेन मशीन और रेत से भरा एक हाइवा वाहन जब्त किया गया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मानसून अवधि में 15 जून से 15 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी रेत खदान बंद रखने का निर्देश है, जिसका उद्देश्य नदियों के पर्यावरण और जल-जीवों का संरक्षण करना है। इसके बावजूद गरियाबंद जिले में रेत माफिया सक्रिय थे और दिन-रात धड़ल्ले से अवैध उत्खनन एवं परिवहन कर रहे थे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद खनिज विभाग हरकत में आया और मंगलवार को यह कार्रवाई की गई। खनिज अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि में किसी भी प्रकार का उत्खनन पूरी तरह गैरकानूनी है और दोषियों पर खनिज अधिनियम के तहत भारी जुर्माना तथा जेल की कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर बी एस उईके ने भी सख्त लहजे में कहा कि जिले में अवैध रेत उत्खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम लगातार निगरानी कर रही है। हालांकि, लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बाद भी रेत माफियाओं के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से भी अवैध उत्खनन की सूचना तुरंत देने की अपील की है।2
- बिलासपुर के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कछार, सेंदरी और लोफंदी में अवैध रेत उत्खनन का कार्य लगातार जारी है, जिस पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम कछार निवासी सावन खांडे ने कलेक्टर बिलासपुर को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि के पास अरपा नदी से लगातार अवैध खनन हो रहा है। विरोध करने पर खनिज माफियाओं ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसकी एफआईआर कोनी थाने में दर्ज है; इसके बावजूद उनकी जमीन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और अवैध खनन का कार्य अनवरत जारी है। प्रार्थी सावन खांडे के अनुसार, इस मामले में केवल एक बार नहीं बल्कि कई स्तरों पर शिकायतें की गई हैं, जिसमें कोनी थाना, जिला प्रशासन, कलेक्टर कार्यालय और मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार कार्यक्रम तक शामिल हैं। हालांकि, इन शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, महामहिम राज्यपाल ने भी ऐसे मामलों का संज्ञान लिया था, और खनिज सचिव ने ड्रोन से निगरानी कर अवैध खनन पर नियंत्रण का दावा किया था। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों और निर्देशों के असर पर गंभीर सवाल उठाती है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां क्षेत्रवासी स्थानीय विधायक से सक्रिय पहल की अपेक्षा कर रहे हैं। कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने इस मामले में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एक किसान को इतने स्तरों पर शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासनिक तंत्र की गंभीर विफलता है, और यदि शासन के सर्वोच्च स्तर से निर्देश होने पर भी हालात नहीं बदलते तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। गौराहा ने प्रदेश सरकार के अवैध खनन रोकने के बड़े-बड़े दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ग्राम कछार की स्थिति इन दावों की वास्तविकता को उजागर करती है, और शिकायतों पर कार्रवाई न होने से जनता का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है। अब यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों, राज्यपाल के संज्ञान और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था के बावजूद यदि अवैध खनन नहीं रुक रहा है, तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। इस प्रश्न का उत्तर केवल प्रभावित किसानों को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा रखने वाले सभी लोगों को चाहिए।1