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योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जोरदार ढंग से यह बात कही कि पहले अत्याचार का दौर था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज किसी में भी त्योहारों में बाधा डालने की हिम्मत नहीं है।
BHARAT TODAY NEWS
योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जोरदार ढंग से यह बात कही कि पहले अत्याचार का दौर था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज किसी में भी त्योहारों में बाधा डालने की हिम्मत नहीं है।
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- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी मिलने की जानकारी सामने आई है। इस खबर को साझा करते हुए, पोस्ट में उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया गया है कि वे संबंधित वीडियो को अधिक से अधिक साझा करें, उस पर टिप्पणी करें और उसे लाइक करें। इसमें यह भी कहा गया है कि इस मामले में आगे क्या होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।1
- नबी करीम क्षेत्र में गंभीर पानी की किल्लत के चलते, कांग्रेस पार्टी ने स्थानीय जनता के साथ मिलकर एक मटका फोड़ प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में, नबी करीम के निवासियों ने पानी की कमी से जूझते हुए अपनी आवाज़ उठाई।1
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- उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में क्रांतिभूमि महुआ डाबर में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय "महुआ डाबर महोत्सव-2026" का आयोजन 8, 9 और 10 जून 2026 को किया जाएगा। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव की थीम "शौर्य, शहादत और विरासत" निर्धारित की गई है, जिसका उद्घाटन प्रसिद्ध लेखक प्रणव मुखर्जी करेंगे। बस्ती के बहादुरपुर विकासखंड में मनोरमा नदी के तट पर स्थित महुआ डाबर, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। यह स्थल 1857 की क्रांति के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध हुए अभूतपूर्व जनप्रतिरोध और भीषण नरसंहार का साक्षी रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से पहले, महुआ डाबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपड़ा व्यापार और पीतल उद्योग का एक प्रमुख केंद्र था, जहां मनोरमा नदी के माध्यम से व्यापक व्यापार संचालित होता था। यह क्षेत्र अपने समृद्ध बाजारों, दो मंजिला पक्के मकानों और शिक्षित समाज के कारण एक विकसित एवं आत्मनिर्भर कस्बे के रूप में प्रसिद्ध था। 10 जून 1857 को महुआ डाबर के क्रांतिकारियों ने फैजाबाद से बिहार के दानापुर जा रहे ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के एक दल को चुनौती दी। क्रांतिकारी जफर अली और उनके साथियों ने नदी पार कर रहे लेफ्टिनेंट लिण्डसे और लेफ्टिनेंट थॉमस सहित छह ब्रिटिश अधिकारियों को घेरकर मार डाला, जबकि सार्जेंट बुशर किसी तरह जान बचाकर भाग निकला, जिसे बाद में बाबू बल्ली सिंह ने दस दिनों तक बंदी बनाकर रखा। इस घटना से क्रुद्ध होकर ब्रिटिश शासन ने 3 जुलाई 1857 को घुड़सवार सेना के साथ महुआ डाबर को चारों ओर से घेर लिया। अंग्रेजी सैनिकों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर लगभग पांच हजार निर्दोष ग्रामीणों, कारीगरों और नागरिकों की हत्या कर दी और पूरे कस्बे को आग के हवाले कर दिया, जिससे घर, दुकानें, खेत और फसलें नष्ट हो गईं। इतिहास के इस अध्याय को दबाने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने महुआ डाबर का नाम सरकारी अभिलेखों और नक्शों से मिटा दिया। इसके स्थान पर एक नए गांव को महुआ डाबर नाम दिया गया, जबकि मूल स्थल को राजस्व अभिलेखों में "गैर-चिरागी" घोषित कर दिया गया। महुआ डाबर संग्रहालय, जो वर्ष 1999 में स्थापित हुआ, इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। इसके विकास में महानिदेशक एवं क्रांतिकारी वंशज डॉ. शाह आलम राना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संग्रहालय में दुर्लभ दस्तावेज, हथियार, सिक्के और पुरातात्विक अवशेष संरक्षित हैं, जो इस भूले-बिसरे नरसंहार की ऐतिहासिक सच्चाई को सामने लाते हैं। वर्ष 2010 में लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा प्रोफेसर अनिल कुमार के निर्देशन में यहां पुरातात्विक उत्खनन कराया गया, जिसमें प्राचीन कुएं, लखौरी ईंटों की दीवारें, जली हुई लकड़ियां, सिक्के, ढाल, भाले और पुराने भवनों के अवशेष मिले, जिन्होंने इस ऐतिहासिक घटना के प्रमाणों को पुष्ट किया। डॉ. राना के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप महुआ डाबर को उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के "स्वतंत्रता संग्राम सर्किट" में शामिल किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में एक भव्य एवं जीवंत स्मारक विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। प्रत्येक वर्ष यहां शहीदों को शस्त्र सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। महोत्सव का कार्यक्रम विवरण इस प्रकार है: प्रथम दिवस (8 जून 2026, सोमवार) को क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि, स्वास्थ्य परीक्षण एवं निःशुल्क दवा वितरण शिविर, स्थानीय विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, महुआ डाबर के इतिहास पर परिचर्चा, विरासत यात्रा और स्वतंत्रता संग्राम आधारित फिल्म एवं वृत्तचित्र प्रदर्शन होंगे। द्वितीय दिवस (9 जून 2026, मंगलवार) पर स्वतंत्रता संग्राम साहित्य सम्मेलन, इतिहासकारों, शोधार्थियों एवं लेखकों का संवाद, ओपन माइक (कविता, गीत, वक्तृत्व एवं लोककला), युवाओं हेतु करियर काउंसलिंग सत्र, मशाल सलामी और शहीदों की झांकी एवं नाट्य मंचन का आयोजन होगा। तृतीय दिवस (10 जून 2026, बुधवार) जो शहादत दिवस है, सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा शस्त्र सलामी, महुआ डाबर संग्रहालय भ्रमण, विरासत संरक्षण संकल्प सभा, उत्कृष्ट प्रतिभाओं एवं सहयोगियों का सम्मान, सांस्कृतिक संध्या एवं लोक कलाकारों की प्रस्तुति तथा राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ महोत्सव का समापन होगा। यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उन हजारों गुमनाम शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह नई पीढ़ी को अपने इतिहास, विरासत और बलिदान की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। इस अवसर पर प्रचार-प्रसार अभियान से जुड़े अतुल कुमार सिंह, नासिर खान, सुनील पंडित और आदिल खान आदि ने महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की।1
- राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक मामलों के विरोध में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। ‘कॉकरोच पार्टी’ के अध्यक्ष अभिजीत दीप के नेतृत्व में हजारों की संख्या में छात्र और आम नागरिक जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर बुलंद आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। छात्रों और आम जनता ने एकजुटता दिखाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा, जिससे यह प्रदर्शन सफलतापूर्वक जारी रहा।1
- दिल्ली के गुलशन चौक स्थित सलाम कॉलोनी के एक युवा ने भारतीय सेना में चयनित होकर कमाल कर दिखाया है। सेना में चयन के बाद उनका यह पहला खास इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने अपनी कठिन मेहनत, संघर्ष और देश सेवा के जुनून की कहानी साझा की है, जिसके बल पर वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं। इस प्रेरणादायक सफलता गाथा में युवा ने भारतीय सेना में चयन की अपनी पूरी यात्रा, ट्रेनिंग के अनुभव और सलाम कॉलोनी से सेना तक के अपने सफर का विस्तृत वर्णन किया है। इंटरव्यू में उनके परिवार की खुशी भी झलकती है और उन्होंने युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है।1
- राजधानी दिल्ली में एक बड़ा मामला सामने आया है जहाँ हिंदू मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मलिक को जान से मारने की धमकी मिली है। उन्हें अपने कार्यालय में खून से लिखा एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा था कि 'काफिर दीपक मलिक तेरा सर तन से जुदा करना पड़ेगा हम आ रहे हैं'। यह धमकी भरा पत्र मिलते ही दीपक मलिक ने तुरंत डायल 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जाँच शुरू कर दी है और संबंधित एजेंसियों को भी इस मामले की जानकारी दी है। संबंधित एजेंसियों ने भी अपनी जाँच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है और राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मलिक ने पत्रकारों से भी इस विषय पर बात की है।1
- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इसमें भारी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जबकि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की उपस्थिति ने इस प्रदर्शन को और अधिक चर्चा में ला दिया। प्रदर्शन स्थल पर "जय भीम" के नारों की गूँज सुनाई देती रही। शनिवार सुबह अमेरिका के बोस्टन से नई दिल्ली पहुँचे अभिजीत दिपके का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके समर्थकों ने स्वागत किया, जिसके बाद वे सीधे जंतर-मंतर पहुँचे। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। दिपके ने विशेष रूप से नीट-यूजी पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है, और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने अपनी भारत वापसी पर माँ द्वारा गिरफ्तारी की आशंका व्यक्त करने का भी ज़िक्र किया, और कहा कि यह डर सिर्फ उनकी माँ का नहीं, बल्कि देश के अनेक युवाओं के परिवारों में मौजूद है जो सरकार की आलोचना करने पर कार्रवाई की आशंका रखते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की मौजूदगी ने कुछ समय के लिए तनाव पैदा कर दिया, जब वह कथित तौर पर कीटनाशक स्प्रे लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुँचा और सीजेपी के खिलाफ नारेबाजी करने लगा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और उस व्यक्ति के बीच मामूली कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई, लेकिन दिल्ली पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में लिया और उस व्यक्ति को हटा दिया, जिसके बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा। सीजेपी समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर भी ज़ोर दिया। संगठन के प्रवक्ता ने बताया कि उनका प्रमुख उद्देश्य धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जनसमर्थन जुटाना है, और आगे की रणनीति का निर्णय संगठन सामूहिक रूप से करेगा। गर्मी और भारी भीड़ के कारण प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके की तबीयत भी कुछ समय के लिए बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें मंच के पीछे विश्राम के लिए ले जाया गया और फिर वाहन में बैठाकर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। उनके सहयोगियों ने बताया कि उनकी स्थिति स्थिर है। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी, जो समय के साथ युवाओं और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों को लेकर व्यापक समर्थन हासिल कर चुकी है। शनिवार का यह प्रदर्शन दिल्ली पुलिस की अनुमति से शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया था।1
- आज, दिल्ली के जंतर मंतर पर 'कॉकरोच पार्टी' द्वारा पेपर लीक के मुद्दे को लेकर एक जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में पार्टी के सदस्यों ने अपनी असहमति और विरोध दर्ज कराया।1