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उँचेहरा में तहसीलदार कार्यालय परिसर के अंदर स्थित सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति ने लोगों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। शौचालय के चारों ओर घनी झाड़ियाँ, गंदगी और अव्यवस्था इस कदर फैल चुकी है कि पूरा परिसर किसी जंगल जैसा दिखाई देता है। इस परिसर के सामने जनपद पंचायत कार्यालय, आईटीआई सहित कई शासकीय कार्यालय स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन हजारों महिला एवं पुरुष अपने कार्यों के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय की जर्जर एवं गंदगी से भरी स्थिति के कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों को उठानी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि स्वच्छता अभियान और नागरिक सुविधाओं के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और नियमित रखरखाव नहीं कराया गया तो भविष्य में यह स्थान दुर्घटनाओं एवं असामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बन सकता है। जनहित में मांग की जाती है कि सार्वजनिक शौचालय की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, आसपास उगी झाड़ियों को हटाया जाए, शौचालय को नियमित रूप से संचालित एवं स्वच्छ रखा जाए और महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। स्वच्छ और सुरक्षित उँचेहरा, हम सबकी जिम्मेदारी है। अब प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

4 hrs ago
user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago

उँचेहरा में तहसीलदार कार्यालय परिसर के अंदर स्थित सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति ने लोगों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। शौचालय के चारों ओर घनी झाड़ियाँ, गंदगी और अव्यवस्था इस कदर फैल चुकी है कि पूरा परिसर किसी जंगल जैसा दिखाई देता है। इस परिसर के सामने जनपद पंचायत कार्यालय, आईटीआई सहित कई शासकीय कार्यालय स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन हजारों महिला एवं पुरुष अपने कार्यों के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय की जर्जर एवं गंदगी से भरी स्थिति के कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों को उठानी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही

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को दर्शाती है, बल्कि स्वच्छता अभियान और नागरिक सुविधाओं के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और नियमित रखरखाव नहीं कराया गया तो भविष्य में यह स्थान दुर्घटनाओं एवं असामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बन सकता है। जनहित में मांग की जाती है कि सार्वजनिक शौचालय की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, आसपास उगी झाड़ियों को हटाया जाए, शौचालय को नियमित रूप से संचालित एवं स्वच्छ रखा जाए और महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। स्वच्छ और सुरक्षित उँचेहरा, हम सबकी जिम्मेदारी है। अब प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

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  • गब्बर Is Back स्टाइल: "मौत के बाद भी बिल...! मैहर के अस्पताल की डरावनी कहानी",मैहर को किसी गब्बर का इंतजार मौत हुई... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली सवाल तब शुरू हुआ, जब परिजनों से कहा—"पहले ₹25 हजार दो... फिर शव मिलेगा!" गब्बर Is Back स्टाइल: "मौत के बाद भी बिल...! मैहर के अस्पताल की डरावनी कहानी",मैहर को किसी गब्बर का इंतजार मौत हुई... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली सवाल तब शुरू हुआ, जब परिजनों से कहा—"पहले ₹25 हजार दो... फिर शव मिलेगा!" मैहर-कटनी रोड पर स्थित नागपुर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। इस बार मामला सिर्फ इलाज का नहीं, बल्कि मौत के बाद कथित वसूली का है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लेकिन दुख और सदमे के बीच परिवार पर एक और बोझ डाल दिया गया। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर विपिन सिंह ने शव सौंपने से पहले ₹25 हजार जमा करने की मांग की। परिजनों का कहना है कि इलाज महज करीब तीन घंटे चला था, लेकिन बिल ऐसा बनाया गया कि परिवार सकते में आ गया। जब उन्होंने विरोध किया तो कथित तौर पर अभद्र व्यवहार हुआ और शव देने में भी घंटों की देरी की गई। फिर कहानी में नया मोड़ आया... जैसे ही पत्रकार अस्पताल पहुंचे और मामला तूल पकड़ने लगा, परिजनों का दावा है कि अस्पताल ने कथित रूप से ₹13 हजार लेकर शव सौंप दिया। क्या इंसान की सांसों की कीमत तय होती है... और मौत के बाद भी शव की रिहाई बिल की रकम से होती है? अगर परिजनों के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल है। क्या इलाज सेवा है या कारोबार? क्या मजबूर परिवारों के आंसुओं की भी कोई कीमत तय कर दी गई है? निगाहें ढूढ़ती है स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को। क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियां बनकर फाइलों में दफन हो जाएगा? या फिर कोई गब्बर मैहर मे भी आयेगा
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    गब्बर Is Back स्टाइल: "मौत के बाद भी बिल...! मैहर के अस्पताल की डरावनी कहानी",मैहर को किसी गब्बर का इंतजार

 मौत हुई... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली सवाल तब शुरू हुआ, जब परिजनों से कहा—"पहले ₹25 हजार दो... फिर शव मिलेगा!"
गब्बर Is Back स्टाइल: "मौत के बाद भी बिल...! मैहर के अस्पताल की डरावनी कहानी",मैहर को किसी गब्बर का इंतजार
मौत हुई... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली सवाल तब शुरू हुआ, जब परिजनों से कहा—"पहले ₹25 हजार दो... फिर शव मिलेगा!"
मैहर-कटनी रोड पर स्थित नागपुर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। इस बार मामला सिर्फ इलाज का नहीं, बल्कि मौत के बाद कथित वसूली का है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लेकिन दुख और सदमे के बीच परिवार पर एक और बोझ डाल दिया गया। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर विपिन सिंह ने शव सौंपने से पहले ₹25 हजार जमा करने की मांग की।
परिजनों का कहना है कि इलाज महज करीब तीन घंटे चला था, लेकिन बिल ऐसा बनाया गया कि परिवार सकते में आ गया। जब उन्होंने विरोध किया तो कथित तौर पर अभद्र व्यवहार हुआ और शव देने में भी घंटों की देरी की गई।
फिर कहानी में नया मोड़ आया...
जैसे ही पत्रकार अस्पताल पहुंचे और मामला तूल पकड़ने लगा, परिजनों का दावा है कि अस्पताल ने कथित रूप से ₹13 हजार लेकर शव सौंप दिया।
क्या इंसान की सांसों की कीमत तय होती है... और मौत के बाद भी शव की रिहाई बिल की रकम से होती है?
अगर परिजनों के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल है। क्या इलाज सेवा है या कारोबार? क्या मजबूर परिवारों के आंसुओं की भी कोई कीमत तय कर दी गई है?
निगाहें ढूढ़ती है स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को।
क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा?
या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियां बनकर फाइलों में दफन हो जाएगा? या फिर कोई गब्बर मैहर मे भी आयेगा
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • उँचेहरा में तहसीलदार कार्यालय परिसर के अंदर स्थित सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति ने लोगों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। शौचालय के चारों ओर घनी झाड़ियाँ, गंदगी और अव्यवस्था इस कदर फैल चुकी है कि पूरा परिसर किसी जंगल जैसा दिखाई देता है। इस परिसर के सामने जनपद पंचायत कार्यालय, आईटीआई सहित कई शासकीय कार्यालय स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन हजारों महिला एवं पुरुष अपने कार्यों के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय की जर्जर एवं गंदगी से भरी स्थिति के कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों को उठानी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि स्वच्छता अभियान और नागरिक सुविधाओं के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और नियमित रखरखाव नहीं कराया गया तो भविष्य में यह स्थान दुर्घटनाओं एवं असामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बन सकता है। जनहित में मांग की जाती है कि सार्वजनिक शौचालय की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, आसपास उगी झाड़ियों को हटाया जाए, शौचालय को नियमित रूप से संचालित एवं स्वच्छ रखा जाए और महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। स्वच्छ और सुरक्षित उँचेहरा, हम सबकी जिम्मेदारी है। अब प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
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    उँचेहरा में तहसीलदार कार्यालय परिसर के अंदर स्थित सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति ने लोगों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। शौचालय के चारों ओर घनी झाड़ियाँ, गंदगी और अव्यवस्था इस कदर फैल चुकी है कि पूरा परिसर किसी जंगल जैसा दिखाई देता है। इस परिसर के सामने जनपद पंचायत कार्यालय, आईटीआई सहित कई शासकीय कार्यालय स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन हजारों महिला एवं पुरुष अपने कार्यों के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय की जर्जर एवं गंदगी से भरी स्थिति के कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों को उठानी पड़ रही है।

यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि स्वच्छता अभियान और नागरिक सुविधाओं के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और नियमित रखरखाव नहीं कराया गया तो भविष्य में यह स्थान दुर्घटनाओं एवं असामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बन सकता है। जनहित में मांग की जाती है कि सार्वजनिक शौचालय की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, आसपास उगी झाड़ियों को हटाया जाए, शौचालय को नियमित रूप से संचालित एवं स्वच्छ रखा जाए और महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। स्वच्छ और सुरक्षित उँचेहरा, हम सबकी जिम्मेदारी है। अब प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
    user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्वामी नीलकंठ महाराज जी के ओइला आश्रम में गुरु महाराज की प्रतिमा खंडित किए जाने की घटना ने क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना के बाद, बड़ी संख्या में संत समाज और श्रद्धालु सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। यह घटना 25 जुलाई को हुई जब आश्रम में गुरु महाराज की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित था। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने आश्रम पहुंचकर कार्यक्रम का विरोध किया और वहां मौजूद साधु-संतों के साथ अभद्रता की। उपद्रवियों ने प्रतिमा का हाथ का अंगूठा तोड़कर उसे खंडित कर दिया, जिससे प्राण-प्रतिष्ठा का धार्मिक कार्य बीच में ही रुक गया। साधु-संतों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से दो मांगें की हैं: प्रतिमा खंडित करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और आश्रम की भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को तत्काल मुक्त कराया जाए। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए उचित दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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    मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्वामी नीलकंठ महाराज जी के ओइला आश्रम में गुरु महाराज की प्रतिमा खंडित किए जाने की घटना ने क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना के बाद, बड़ी संख्या में संत समाज और श्रद्धालु सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा।

यह घटना 25 जुलाई को हुई जब आश्रम में गुरु महाराज की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित था। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने आश्रम पहुंचकर कार्यक्रम का विरोध किया और वहां मौजूद साधु-संतों के साथ अभद्रता की। उपद्रवियों ने प्रतिमा का हाथ का अंगूठा तोड़कर उसे खंडित कर दिया, जिससे प्राण-प्रतिष्ठा का धार्मिक कार्य बीच में ही रुक गया।

साधु-संतों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से दो मांगें की हैं: प्रतिमा खंडित करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और आश्रम की भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को तत्काल मुक्त कराया जाए। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए उचित दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
    user_MADHYA BHARAT NEWS
    MADHYA BHARAT NEWS
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • सतना जिले के ग्राम छुलहा में मानसून की बारिश के कारण 900 मीटर का कच्चा रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गया है। इस वजह से स्कूली बच्चों, बीमार बुजुर्गों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस कच्चे मार्ग पर 'बेशरम के पौधे' लगाकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारिश के कारण यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर गया है, जिससे बच्चों को घुटनों तक कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया था। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मार्ग को पक्का करवाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने सांसद, विधायक और कलेक्टर से भी गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश शासन की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। लगातार सामने आ रहे वीडियो और विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थानीय जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने का दोबारा आश्वासन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रजातंत्र में जनता के पास अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और वे अपनी इस मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
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    सतना जिले के ग्राम छुलहा में मानसून की बारिश के कारण 900 मीटर का कच्चा रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गया है। इस वजह से स्कूली बच्चों, बीमार बुजुर्गों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस कच्चे मार्ग पर 'बेशरम के पौधे' लगाकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारिश के कारण यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर गया है, जिससे बच्चों को घुटनों तक कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया था।

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मार्ग को पक्का करवाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने सांसद, विधायक और कलेक्टर से भी गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता।

यह क्षेत्र मध्य प्रदेश शासन की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। लगातार सामने आ रहे वीडियो और विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थानीय जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने का दोबारा आश्वासन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रजातंत्र में जनता के पास अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और वे अपनी इस मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
    user_Sunil kumar dahiya
    Sunil kumar dahiya
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र की अवधारणा बदल चुकी है, जहाँ पब्लिक को मालिक माना जाता था, वहाँ अब परिभाषा बदल गई है। हाल ही में नागौद क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर बच्चों ने आंदोलन किया। लेकिन, फर्जी आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आज तक एक ट्रॉली मुरम तक नहीं पड़ी। यह घटना ग्राम छुलहा में घटी, जो पंचायत गिनजारा के अंतर्गत आता है। यह पूरा मामला रैगांव विधानसभा क्षेत्र में है और जनपद पंचायत नागौद, सतना में स्थित है। मोदी यादव के राज में मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग अब फेल सरकार हटाओ, देश बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं।
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    मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र की अवधारणा बदल चुकी है, जहाँ पब्लिक को मालिक माना जाता था, वहाँ अब परिभाषा बदल गई है। हाल ही में नागौद क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर बच्चों ने आंदोलन किया। लेकिन, फर्जी आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आज तक एक ट्रॉली मुरम तक नहीं पड़ी। यह घटना ग्राम छुलहा में घटी, जो पंचायत गिनजारा के अंतर्गत आता है। यह पूरा मामला रैगांव विधानसभा क्षेत्र में है और जनपद पंचायत नागौद, सतना में स्थित है। मोदी यादव के राज में मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग अब फेल सरकार हटाओ, देश बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं।
    user_Kamlendra Kushwaha
    Kamlendra Kushwaha
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • ग्राम ककरा की आंगनवाड़ी में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि आंगनवाड़ी केंद्र में शासन द्वारा निर्धारित पोषण आहार उपलब्ध कराने की बजाय बच्चों को केवल नमक और पूड़ी परोसी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार योजना संचालित की जा रही है, लेकिन ग्राम ककरा में योजना के क्रियान्वयन को लेकर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। मामले में शिवम स्व-सहायता समूह की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चों को वास्तव में पौष्टिक आहार की जगह सिर्फ नमक-पूड़ी दी जा रही है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही है। ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों सहित जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के पोषण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।
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    ग्राम ककरा की आंगनवाड़ी में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि आंगनवाड़ी केंद्र में शासन द्वारा निर्धारित पोषण आहार उपलब्ध कराने की बजाय बच्चों को केवल नमक और पूड़ी परोसी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार योजना संचालित की जा रही है, लेकिन ग्राम ककरा में योजना के क्रियान्वयन को लेकर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। मामले में शिवम स्व-सहायता समूह की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चों को वास्तव में पौष्टिक आहार की जगह सिर्फ नमक-पूड़ी दी जा रही है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही है।

ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों सहित जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के पोषण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।
    user_Satyaprakash Media Maihar
    Satyaprakash Media Maihar
    Photographer मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना शहर में गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड के मास्टरमाइंड अमित खरे ने एक और संगीन अपराध को अंजाम दिया है। अमित खरे, जो स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल, जबलपुर के संचालक हैं, ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस कांड का खुलासा कर दिया है और अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है। इससे पहले, अमित खरे पर फर्जी मेडिकल बनाने का आरोप था, जो गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड से जुड़ा था। अब इस नए खुलासे ने राज्य में सनसनी फैला दी है। पुलिस की तत्परता से मामले का पर्दाफाश हुआ और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।
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    मध्य प्रदेश के सतना शहर में गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड के मास्टरमाइंड अमित खरे ने एक और संगीन अपराध को अंजाम दिया है। अमित खरे, जो स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल, जबलपुर के संचालक हैं, ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस कांड का खुलासा कर दिया है और अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है।

इससे पहले, अमित खरे पर फर्जी मेडिकल बनाने का आरोप था, जो गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड से जुड़ा था। अब इस नए खुलासे ने राज्य में सनसनी फैला दी है। पुलिस की तत्परता से मामले का पर्दाफाश हुआ और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।
    user_BJMP जिला अध्यक्ष सतना भूपेंद्
    BJMP जिला अध्यक्ष सतना भूपेंद्
    Local Politician मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
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