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ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की तहसील स्तर की बैठक सम्पन्न बस्ती। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन तहसील इकाई हर्रैया की मासिक बैठक रविवार क को सिटकोहर गौर में सम्पन्न हुई। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, संगठन की मजबूती और उनके हितों की रक्षा के लिए गहन विमर्श किया गया। इसमें निष्पक्ष पत्रकारिता, तहसील स्तर पर संगठन के विस्तार और समस्याओं के निराकरण पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अवधेश कुमार त्रिपाठी एवं संचालन जिला महामंत्री अनिल कुमार पांडेय ने किया। जिला अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकार का चरित्र उसकी विश्वसनीयता की नींव होता है। यदि पत्रकार ईमानदार, नैतिक और जिम्मेदार है, तो उसकी खबरें समाज में भरोसा पैदा करती हैं। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं बल्कि समाज का दर्पण है। दर्पण की स्पष्टता तभी बनी रहती है, जब उसमें चरित्र और निष्पक्षता की चमक हो। आज के दौर में, जब सोशल मीडिया और तेज सूचना प्रवाह के कारण गलत खबरें तेजी से फैलती हैं, तब चरित्र और निष्पक्षता का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक सच्चा पत्रकार वही है जो दबाव, लालच और भय से ऊपर उठकर समाज के हित में सत्य को प्रस्तुत करे। जिला महामंत्र ने कहा कि पत्रकार हितों के लिए संगठन सदैव प्रयत्नशील है। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियों के बीच निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर संगठन पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने पत्रकारों को एकजुट होकर अपना हक मांगने और संगठन को तहसील स्तर पर मजबूत करने का आह्वान किया। जिला उपाध्यक्ष जनार्दन पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीण पत्रकार निश्चित रूप से आम जनमानस की आवाज हैं लेकिन अपने दायित्वों के निर्वहन में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का सुनिश्चित होना बेहद आवश्यक है। बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बैठक में अपनी बात रखी। अन्य वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता कर रहे हैं लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं। जिसके लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय, शमशेर सिंह, प्रेम कुमार सिंह, बेनी माधव पाण्डेय, राम ललित यादव, बृजेश पाल सिंह, सत्यदेव शुक्ल, रामराज मिश्रा, राम जीत पाण्डेय, विवेक कांत पांडेय, रवीश मिश्र, रूबल कमलापुरी, राधे श्याम यादव, दिनेश चंद्र, मनोज सिंह, आदित्य सिंह, भूपेंद्र विक्रम मिश्रज विनोद कुमार, योगेंद्र मणि तिवारी सहित तमाम पत्रकार मौजूद रहे।

2 hrs ago
user_देश हित
देश हित
पत्रकार बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की तहसील स्तर की बैठक सम्पन्न बस्ती। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन तहसील इकाई हर्रैया की मासिक बैठक रविवार क को सिटकोहर गौर में सम्पन्न हुई। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, संगठन की मजबूती और उनके हितों की रक्षा के लिए गहन विमर्श किया गया। इसमें निष्पक्ष पत्रकारिता, तहसील स्तर पर संगठन के विस्तार और समस्याओं के निराकरण पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अवधेश कुमार त्रिपाठी एवं संचालन जिला महामंत्री अनिल कुमार पांडेय ने किया। जिला अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकार का चरित्र उसकी विश्वसनीयता की नींव होता है। यदि पत्रकार ईमानदार, नैतिक और जिम्मेदार

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है, तो उसकी खबरें समाज में भरोसा पैदा करती हैं। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं बल्कि समाज का दर्पण है। दर्पण की स्पष्टता तभी बनी रहती है, जब उसमें चरित्र और निष्पक्षता की चमक हो। आज के दौर में, जब सोशल मीडिया और तेज सूचना प्रवाह के कारण गलत खबरें तेजी से फैलती हैं, तब चरित्र और निष्पक्षता का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक सच्चा पत्रकार वही है जो दबाव, लालच और भय से ऊपर उठकर समाज के हित में सत्य को प्रस्तुत करे। जिला महामंत्र ने कहा कि पत्रकार हितों के लिए संगठन

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सदैव प्रयत्नशील है। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियों के बीच निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर संगठन पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने पत्रकारों को एकजुट होकर अपना हक मांगने और संगठन को तहसील स्तर पर मजबूत करने का आह्वान किया। जिला उपाध्यक्ष जनार्दन पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीण पत्रकार निश्चित रूप से आम जनमानस की आवाज हैं लेकिन अपने दायित्वों के निर्वहन में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का सुनिश्चित होना बेहद आवश्यक है। बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बैठक में अपनी बात रखी।

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अन्य वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता कर रहे हैं लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं। जिसके लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय, शमशेर सिंह, प्रेम कुमार सिंह, बेनी माधव पाण्डेय, राम ललित यादव, बृजेश पाल सिंह, सत्यदेव शुक्ल, रामराज मिश्रा, राम जीत पाण्डेय, विवेक कांत पांडेय, रवीश मिश्र, रूबल कमलापुरी, राधे श्याम यादव, दिनेश चंद्र, मनोज सिंह, आदित्य सिंह, भूपेंद्र विक्रम मिश्रज विनोद कुमार, योगेंद्र मणि तिवारी सहित तमाम पत्रकार मौजूद रहे।

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  • बस्ती। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन तहसील इकाई हर्रैया की मासिक बैठक रविवार क को सिटकोहर गौर में सम्पन्न हुई। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, संगठन की मजबूती और उनके हितों की रक्षा के लिए गहन विमर्श किया गया। इसमें निष्पक्ष पत्रकारिता, तहसील स्तर पर संगठन के विस्तार और समस्याओं के निराकरण पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अवधेश कुमार त्रिपाठी एवं संचालन जिला महामंत्री अनिल कुमार पांडेय ने किया। जिला अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकार का चरित्र उसकी विश्वसनीयता की नींव होता है। यदि पत्रकार ईमानदार, नैतिक और जिम्मेदार है, तो उसकी खबरें समाज में भरोसा पैदा करती हैं। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं बल्कि समाज का दर्पण है। दर्पण की स्पष्टता तभी बनी रहती है, जब उसमें चरित्र और निष्पक्षता की चमक हो। आज के दौर में, जब सोशल मीडिया और तेज सूचना प्रवाह के कारण गलत खबरें तेजी से फैलती हैं, तब चरित्र और निष्पक्षता का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक सच्चा पत्रकार वही है जो दबाव, लालच और भय से ऊपर उठकर समाज के हित में सत्य को प्रस्तुत करे। जिला महामंत्र ने कहा कि पत्रकार हितों के लिए संगठन सदैव प्रयत्नशील है। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियों के बीच निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर संगठन पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने पत्रकारों को एकजुट होकर अपना हक मांगने और संगठन को तहसील स्तर पर मजबूत करने का आह्वान किया। जिला उपाध्यक्ष जनार्दन पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीण पत्रकार निश्चित रूप से आम जनमानस की आवाज हैं लेकिन अपने दायित्वों के निर्वहन में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का सुनिश्चित होना बेहद आवश्यक है। बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बैठक में अपनी बात रखी। अन्य वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता कर रहे हैं लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं। जिसके लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय, शमशेर सिंह, प्रेम कुमार सिंह, बेनी माधव पाण्डेय, राम ललित यादव, बृजेश पाल सिंह, सत्यदेव शुक्ल, रामराज मिश्रा, राम जीत पाण्डेय, विवेक कांत पांडेय, रवीश मिश्र, रूबल कमलापुरी, राधे श्याम यादव, दिनेश चंद्र, मनोज सिंह, आदित्य सिंह, भूपेंद्र विक्रम मिश्रज विनोद कुमार, योगेंद्र मणि तिवारी सहित तमाम पत्रकार मौजूद रहे।
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    बस्ती।  ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन तहसील इकाई हर्रैया की मासिक बैठक रविवार क को सिटकोहर गौर में सम्पन्न हुई। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, संगठन की मजबूती और उनके हितों की रक्षा के लिए गहन विमर्श किया गया। इसमें निष्पक्ष पत्रकारिता, तहसील स्तर पर संगठन के विस्तार और समस्याओं के निराकरण पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अवधेश कुमार त्रिपाठी एवं संचालन जिला महामंत्री अनिल कुमार पांडेय ने किया।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकार का चरित्र उसकी विश्वसनीयता की नींव होता है। यदि पत्रकार ईमानदार, नैतिक और जिम्मेदार है, तो उसकी खबरें समाज में भरोसा पैदा करती हैं। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं बल्कि समाज का दर्पण है। दर्पण की स्पष्टता तभी बनी रहती है, जब उसमें चरित्र और निष्पक्षता की चमक हो। आज के दौर में, जब सोशल मीडिया और तेज सूचना प्रवाह के कारण गलत खबरें तेजी से फैलती हैं, तब चरित्र और निष्पक्षता का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक सच्चा पत्रकार वही है जो दबाव, लालच और भय से ऊपर उठकर समाज के हित में सत्य को प्रस्तुत करे। जिला महामंत्र  ने कहा कि पत्रकार हितों के लिए संगठन सदैव प्रयत्नशील है। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियों के बीच निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर संगठन पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने पत्रकारों को एकजुट होकर अपना हक मांगने और संगठन को तहसील स्तर पर मजबूत करने का आह्वान किया। जिला उपाध्यक्ष जनार्दन पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीण पत्रकार निश्चित रूप से आम जनमानस की आवाज हैं लेकिन अपने दायित्वों के निर्वहन में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का सुनिश्चित होना बेहद आवश्यक है। बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बैठक में अपनी बात रखी। अन्य वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता कर रहे हैं लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं। जिसके लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय, शमशेर सिंह, प्रेम कुमार सिंह, बेनी माधव पाण्डेय, राम ललित यादव, बृजेश पाल सिंह, सत्यदेव शुक्ल, रामराज मिश्रा, राम जीत पाण्डेय, विवेक कांत पांडेय, रवीश मिश्र, रूबल कमलापुरी, राधे श्याम यादव, दिनेश चंद्र, मनोज सिंह, आदित्य सिंह, भूपेंद्र विक्रम मिश्रज विनोद कुमार, योगेंद्र मणि तिवारी सहित तमाम पत्रकार मौजूद रहे।
    user_देश हित
    देश हित
    पत्रकार बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 🙏👍
    1
    🙏👍
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
  • सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं लेख: अजीत मिश्रा (खोजी) कहते हैं कि अस्पताल 'धरती का स्वर्ग' और डॉक्टर 'भगवान' का रूप होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से आई एक वायरल वीडियो ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। अब अस्पताल 'स्वर्ग' तो नहीं, हाँ 'मयखाना' ज़रूर बन गए हैं। बांदा के एक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान 'डॉक्टर साहब' और उनके सहयोगियों की 'दारू पार्टी' का दृश्य देखकर लगता है कि यहाँ मरीजों की धड़कनें नापने के लिए स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि बोतलों के ढक्कन नापने का पैमाना इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर 'नशे' की नुमाइश हैरानी की बात यह नहीं है कि अस्पताल में शराब पी जा रही थी—भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस दौर में यह अब 'आम' बात लगने लगी है। असली तमाशा तो यह है कि इसे बाकायदा 'डॉ. सुशील' नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट किया गया। यानी सिस्टम का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि अब अपराध छिपकर नहीं, बल्कि 'रील' बनाकर और 'लाइक-शेयर' बटोरने के लिए किया जा रहा है। शायद डॉक्टर साहब को लगा होगा कि सफेद कोट पहनकर जाम छलकाते हुए वे किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लगेंगे। जब डॉक्टर ही 'टल्ली' हो, तो मरीज का क्या? अब जरा उस मरीज की कल्पना कीजिए जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में आधी रात को अस्पताल पहुँचता है। उसे क्या पता कि जो हाथ उसका ऑपरेशन करेंगे या सुई लगाएंगे, वो खुद लड़खड़ा रहे हैं। इलाज या खिलवाड़? शराब के नशे में धुत डॉक्टर मरीज को दवा देगा या जहर, इसकी गारंटी तो अब भगवान भी नहीं ले सकते। सरकारी संरक्षण का गुरूर: ये वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि इन 'सफेदपोशों' को प्रशासन का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि जाँच होगी, कमेटी बैठेगी और फिर मामला 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया जाएगा। सिस्टम की बेहोशी का इलाज कौन करेगा? बांदा की यह घटना केवल एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट तो डकारती है, लेकिन अस्पतालों में अनुशासन कायम नहीं रख पाती। क्या सरकारी अस्पताल अब केवल रसूखदारों की अय्याशी के अड्डे बनकर रह गए हैं? कड़वा सवाल: > "साहब! अगर डॉक्टर ही नशे में रहेगा, तो मरीज को होश में लाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अब अस्पतालों के बाहर 'दवा' के साथ-साथ 'चखने' की दुकान खोलना ही बाकी रह गया है?" प्रशासन को चाहिए कि केवल सस्पेंशन का 'नाटक' न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी 'डॉ. सुशील' की हिम्मत अस्पताल को बार (Bar) बनाने की न हो। वरना जनता तो यही कहेगी— "मरीज का राम नाम सत्य है, क्योंकि डॉक्टर साहब अभी 'मस्त' हैं।" बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट
    1
    सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं
लेख: अजीत मिश्रा (खोजी)
कहते हैं कि अस्पताल 'धरती का स्वर्ग' और डॉक्टर 'भगवान' का रूप होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से आई एक वायरल वीडियो ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। अब अस्पताल 'स्वर्ग' तो नहीं, हाँ 'मयखाना' ज़रूर बन गए हैं। बांदा के एक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान 'डॉक्टर साहब' और उनके सहयोगियों की 'दारू पार्टी' का दृश्य देखकर लगता है कि यहाँ मरीजों की धड़कनें नापने के लिए स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि बोतलों के ढक्कन नापने का पैमाना इस्तेमाल होता है।
सोशल मीडिया पर 'नशे' की नुमाइश
हैरानी की बात यह नहीं है कि अस्पताल में शराब पी जा रही थी—भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस दौर में यह अब 'आम' बात लगने लगी है। असली तमाशा तो यह है कि इसे बाकायदा 'डॉ. सुशील' नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट किया गया। यानी सिस्टम का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि अब अपराध छिपकर नहीं, बल्कि 'रील' बनाकर और 'लाइक-शेयर' बटोरने के लिए किया जा रहा है। शायद डॉक्टर साहब को लगा होगा कि सफेद कोट पहनकर जाम छलकाते हुए वे किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लगेंगे।
जब डॉक्टर ही 'टल्ली' हो, तो मरीज का क्या?
अब जरा उस मरीज की कल्पना कीजिए जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में आधी रात को अस्पताल पहुँचता है। उसे क्या पता कि जो हाथ उसका ऑपरेशन करेंगे या सुई लगाएंगे, वो खुद लड़खड़ा रहे हैं।
इलाज या खिलवाड़? शराब के नशे में धुत डॉक्टर मरीज को दवा देगा या जहर, इसकी गारंटी तो अब भगवान भी नहीं ले सकते।
सरकारी संरक्षण का गुरूर: ये वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि इन 'सफेदपोशों' को प्रशासन का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि जाँच होगी, कमेटी बैठेगी और फिर मामला 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया जाएगा।
सिस्टम की बेहोशी का इलाज कौन करेगा?
बांदा की यह घटना केवल एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट तो डकारती है, लेकिन अस्पतालों में अनुशासन कायम नहीं रख पाती। क्या सरकारी अस्पताल अब केवल रसूखदारों की अय्याशी के अड्डे बनकर रह गए हैं?
कड़वा सवाल: > "साहब! अगर डॉक्टर ही नशे में रहेगा, तो मरीज को होश में लाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अब अस्पतालों के बाहर 'दवा' के साथ-साथ 'चखने' की दुकान खोलना ही बाकी रह गया है?"
प्रशासन को चाहिए कि केवल सस्पेंशन का 'नाटक' न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी 'डॉ. सुशील' की हिम्मत अस्पताल को बार (Bar) बनाने की न हो। वरना जनता तो यही कहेगी— "मरीज का राम नाम सत्य है, क्योंकि डॉक्टर साहब अभी 'मस्त' हैं।"
बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • *पब्लिक का भी ग़ज़ब हाल है!* *हापुड में रेलवे लाइन के पास पालीथीन में महिला की हेयर विग पड़ी थीं।* *किसी ने पुलिस को सूचना सरका दी,रेलवे लाइन के पास "महिला का सिर कटा पड़ा है"।* *पुलिस पहुंची,जांच की तो कटे सर का रहस्य पुलिस की समझ में आ गया।* *मौके पर बरामद स्टाइलिश हेयर विग को देखकर पुलिस भी हंसी नहीं रोक पाई।*
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    *पब्लिक का भी ग़ज़ब हाल है!*
*हापुड में रेलवे लाइन के पास पालीथीन में महिला की हेयर विग पड़ी थीं।*
*किसी ने पुलिस को सूचना सरका दी,रेलवे लाइन के पास "महिला का सिर कटा पड़ा है"।*
*पुलिस पहुंची,जांच की तो कटे सर का रहस्य पुलिस की समझ में आ गया।*
*मौके पर बरामद स्टाइलिश हेयर विग को देखकर पुलिस भी हंसी नहीं रोक पाई।*
    user_Republic India live
    Republic India live
    हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by हरिशंकर पांडेय
    1
    Post by हरिशंकर पांडेय
    user_हरिशंकर पांडेय
    हरिशंकर पांडेय
    स्वतंत्र पत्रकारिता हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • Post by Bp News Hanswar
    1
    Post by Bp News Hanswar
    user_Bp News Hanswar
    Bp News Hanswar
    Court reporter टांडा, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • संत कबीर नगर । जिले के खलीलाबाद स्थित बाजार में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर में दिनभर रौनक देखने को मिली। शुभ मुहूर्त के चलते लोगों ने जमकर खरीदारी की, जिससे सर्राफा बाजार में विशेष चहल-पहल बनी रही। हालांकि सोने-चांदी के बढ़ते दामों का असर भी देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। गोला बाजार स्थित स्वर्गीय सीताराम सर्राफ की पुरानी प्रतिष्ठित दुकान रजनीश कुमार अश्वनी कुमार सर्राफ पर ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ रही। दुकान के प्रोपराइटर रजनीश कुमार वर्मा (प्रिंस वर्मा) ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया पर ग्राहकों ने जरूरत और बजट को ध्यान में रखते हुए खरीदारी की। महंगाई के चलते बड़े और भारी आभूषणों की अपेक्षा छोटे, हल्के और किफायती गहनों की मांग अधिक रही। उन्होंने बताया कि विवाह (लग्न) का सीजन शुरू होने के कारण भी लोगों ने खरीदारी में रुचि दिखाई। जिन लोगों को गहनों की तत्काल आवश्यकता थी, उन्होंने ही ज्यादा खरीदारी की। सोने के लगातार बढ़ते दामों के कारण बाजार पर दबाव जरूर है, लेकिन फिर भी त्योहार का असर बाजार में साफ नजर आया। उनके के अनुसार सोने-चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव से कारोबार प्रभावित हो रहा है। कीमतों की अनिश्चितता के कारण व्यापारियों को भी असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, अक्षय तृतीया के अवसर पर पूरे बाजार में मेले जैसा माहौल रहा और लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी कर त्योहार को उत्साहपूर्वक मनाया। #AkshayaTritiya #अक्षयतृतीया #GoldShopping #Jewellery #SantKabirNagar #Khalilabad #UPNews #FestivalVibes #GoldPrice #TrendingNews #BreakingNews #MarketUpdate #WeddingSeason #ShoppingTime #FestiveSeason #GoldDemand #HindiNews #NewsUpdate #liveuponenews
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    संत कबीर नगर ।
जिले के खलीलाबाद स्थित बाजार में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर में दिनभर रौनक देखने को मिली। शुभ मुहूर्त के चलते लोगों ने जमकर खरीदारी की, जिससे सर्राफा बाजार में विशेष चहल-पहल बनी रही। हालांकि सोने-चांदी के बढ़ते दामों का असर भी देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई।
गोला बाजार स्थित स्वर्गीय सीताराम सर्राफ की पुरानी प्रतिष्ठित दुकान रजनीश कुमार अश्वनी कुमार सर्राफ पर ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ रही। दुकान के प्रोपराइटर रजनीश कुमार वर्मा (प्रिंस वर्मा) ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया पर ग्राहकों ने जरूरत और बजट को ध्यान में रखते हुए खरीदारी की। महंगाई के चलते बड़े और भारी आभूषणों की अपेक्षा छोटे, हल्के और किफायती गहनों की मांग अधिक रही।
उन्होंने बताया कि विवाह (लग्न) का सीजन शुरू होने के कारण भी लोगों ने खरीदारी में रुचि दिखाई। जिन लोगों को गहनों की तत्काल आवश्यकता थी, उन्होंने ही ज्यादा खरीदारी की। सोने के लगातार बढ़ते दामों के कारण बाजार पर दबाव जरूर है, लेकिन फिर भी त्योहार का असर बाजार में साफ नजर आया।
उनके के अनुसार सोने-चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव से कारोबार प्रभावित हो रहा है। कीमतों की अनिश्चितता के कारण व्यापारियों को भी असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, अक्षय तृतीया के अवसर पर पूरे बाजार में मेले जैसा माहौल रहा और लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी कर त्योहार को उत्साहपूर्वक मनाया।
#AkshayaTritiya #अक्षयतृतीया #GoldShopping #Jewellery #SantKabirNagar #Khalilabad #UPNews #FestivalVibes #GoldPrice #TrendingNews  #BreakingNews #MarketUpdate #WeddingSeason #ShoppingTime #FestiveSeason #GoldDemand #HindiNews #NewsUpdate
#liveuponenews
    user_LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 🙏सहयोग आपका,संर्घष हमारा।👍 "हमारी संस्था का एक ही सपना, ✍️पढ़ा लिखा हो समाज अपना"।
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    🙏सहयोग आपका,संर्घष हमारा।👍
"हमारी संस्था का एक ही सपना,
✍️पढ़ा लिखा हो समाज अपना"।
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    19 hrs ago
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