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श्री श्री 100890 बाबा रायसर श्री श्री 100890 बाबा रायसर श्री श्री 100890 बाबा रायसर

2 hrs ago
user_Journalist Asif khan KOTA City NEWS
Journalist Asif khan KOTA City NEWS
जर्नलिज्म,पत्रकारिता लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
2 hrs ago

श्री श्री 100890 बाबा रायसर श्री श्री 100890 बाबा रायसर श्री श्री 100890 बाबा रायसर

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  • श्री श्री 100890 बाबा रायसर
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    श्री श्री 100890 बाबा रायसर
    user_Journalist Asif khan KOTA City NEWS
    Journalist Asif khan KOTA City NEWS
    जर्नलिज्म,पत्रकारिता लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • भवानीमंडी मार्ग पर हरियाली का अनोखा ठिकाना, दंपति के जुनून ने रचा मिसाल 700 पौधे, 15 वर्षों की मेहनत—मसालों से लेकर फलों तक का अद्भुत संगम सुनेल। सुनेल से भवानीमंडी मार्ग पर तहसील के पास स्थित एक घर राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। घर के बाहर और भीतर फैली हरियाली, रंग-बिरंगे फूलों और लहराती बेलों को देखकर हर कोई ठिठकने को मजबूर हो जाता है। यह अनोखी हरियाली पर्यावरण प्रेमी दंपति गोविंद धाकड़ और सोनाली धाकड़ की 15 वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। दंपति ने अपने घर को एक छोटे-से हरित संसार में बदल दिया है, जहां 700 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं। इनमें चंपा, चमेली, गुलाब, गुड़हल जैसे फूलों के पौधों के साथ अंजीर, अनार, अमरूद, शहतूत, आंवला, नारंगी और आम जैसे फलदार वृक्ष भी शामिल हैं। इसके अलावा पान, मनी प्लांट, अंगूर सहित कई प्रकार की बेलें भी इस गार्डन की शोभा बढ़ाती हैं। मसालों से नवग्रह वाटिका तक अनूठा संगम इस गार्डन की खासियत इसकी विविधता है। यहां नवग्रह वाटिका और बारह राशियों से जुड़े पौधों के साथ-साथ लौंग, कालीमिर्च, तेजपत्ता जैसे मसालों के पौधे भी लगाए गए हैं। यह गार्डन केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि औषधीय और धार्मिक महत्व भी समेटे हुए है। गौरैया संरक्षण से शुरू हुआ सफर दंपति ने बताया कि एक बार आंधी में घोंसले से गिरे चिड़ियों के बच्चों को देखकर उनका मन विचलित हो गया। वहीं से उन्होंने गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने लकड़ी, नारियल की छाल, मटकी और अन्य सामग्री से 100 से अधिक घोंसले तैयार कर घर के आसपास लगाए, जिससे पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था धाकड़ दंपति मौसम के अनुसार पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं। गर्मी के दिनों में परिंडे बांधकर पानी उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही घास-फूस की छत बनाकर पक्षियों के लिए छाया भी सुनिश्चित की जाती है। पूरी तरह जैविक है यह उपवन इस गार्डन की एक और विशेषता यह है कि यहां पूरी तरह जैविक तरीके अपनाए जाते हैं। दंपति पौधों के लिए खाद और कीटनाशक खुद ही तैयार करते हैं। गिरे हुए पत्तों, फल-फूल और जैविक अपशिष्ट से खाद बनाकर उसका उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। रोजाना दो घंटे की सेवा गोविंद धाकड़ बताते हैं कि वे रोजाना करीब दो घंटे गार्डन की देखभाल में लगाते हैं। सुबह की शुरुआत भी गार्डन की देखरेख से होती है, जिसमें पौधों को खाद देना, कटाई-छंटाई करना और पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना शामिल है। युवाओं के लिए संदेश दंपति का कहना है कि जिस दिन वे गार्डन में समय नहीं देते, उस दिन उनका मन नहीं लगता। वे युवाओं से अपील करते हैं कि वे भी पर्यावरण संरक्षण और गौरैया बचाने के लिए आगे आएं तथा अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें। यह हरित पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जुनून और समर्पण से कोई भी अपने घर को प्रकृति का सुंदर आशियाना बना सकता है।
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    भवानीमंडी मार्ग पर हरियाली का अनोखा ठिकाना, दंपति के जुनून ने रचा मिसाल
700 पौधे, 15 वर्षों की मेहनत—मसालों से लेकर फलों तक का अद्भुत संगम
सुनेल। सुनेल से भवानीमंडी मार्ग पर तहसील के पास स्थित एक घर राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। घर के बाहर और भीतर फैली हरियाली, रंग-बिरंगे फूलों और लहराती बेलों को देखकर हर कोई ठिठकने को मजबूर हो जाता है। यह अनोखी हरियाली पर्यावरण प्रेमी दंपति गोविंद धाकड़ और सोनाली धाकड़ की 15 वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
दंपति ने अपने घर को एक छोटे-से हरित संसार में बदल दिया है, जहां 700 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं। इनमें चंपा, चमेली, गुलाब, गुड़हल जैसे फूलों के पौधों के साथ अंजीर, अनार, अमरूद, शहतूत, आंवला, नारंगी और आम जैसे फलदार वृक्ष भी शामिल हैं। इसके अलावा पान, मनी प्लांट, अंगूर सहित कई प्रकार की बेलें भी इस गार्डन की शोभा बढ़ाती हैं।
मसालों से नवग्रह वाटिका तक अनूठा संगम
इस गार्डन की खासियत इसकी विविधता है। यहां नवग्रह वाटिका और बारह राशियों से जुड़े पौधों के साथ-साथ लौंग, कालीमिर्च, तेजपत्ता जैसे मसालों के पौधे भी लगाए गए हैं। यह गार्डन केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि औषधीय और धार्मिक महत्व भी समेटे हुए है।
गौरैया संरक्षण से शुरू हुआ सफर
दंपति ने बताया कि एक बार आंधी में घोंसले से गिरे चिड़ियों के बच्चों को देखकर उनका मन विचलित हो गया। वहीं से उन्होंने गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने लकड़ी, नारियल की छाल, मटकी और अन्य सामग्री से 100 से अधिक घोंसले तैयार कर घर के आसपास लगाए, जिससे पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था
धाकड़ दंपति मौसम के अनुसार पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं। गर्मी के दिनों में परिंडे बांधकर पानी उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही घास-फूस की छत बनाकर पक्षियों के लिए छाया भी सुनिश्चित की जाती है।
पूरी तरह जैविक है यह उपवन
इस गार्डन की एक और विशेषता यह है कि यहां पूरी तरह जैविक तरीके अपनाए जाते हैं। दंपति पौधों के लिए खाद और कीटनाशक खुद ही तैयार करते हैं। गिरे हुए पत्तों, फल-फूल और जैविक अपशिष्ट से खाद बनाकर उसका उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
रोजाना दो घंटे की सेवा
गोविंद धाकड़ बताते हैं कि वे रोजाना करीब दो घंटे गार्डन की देखभाल में लगाते हैं। सुबह की शुरुआत भी गार्डन की देखरेख से होती है, जिसमें पौधों को खाद देना, कटाई-छंटाई करना और पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना शामिल है।
युवाओं के लिए संदेश
दंपति का कहना है कि जिस दिन वे गार्डन में समय नहीं देते, उस दिन उनका मन नहीं लगता। वे युवाओं से अपील करते हैं कि वे भी पर्यावरण संरक्षण और गौरैया बचाने के लिए आगे आएं तथा अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें।
यह हरित पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जुनून और समर्पण से कोई भी अपने घर को प्रकृति का सुंदर आशियाना बना सकता है।
    user_Dushyant singh gehlot (journal
    Dushyant singh gehlot (journal
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • ईरान v/s अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण पूरी दुनिया में और खास कर भारत में चल रहा तेल-गैस का संकट अब साफ नजर आने लगा है, बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों में भी जहां लकड़ी और उपले आसानी से मिल जाते हैं, गैस एजेंसियों पर अफरा-तफरी का आलम है, सरकार के दावों के उलट जमीन पर हालात काफी बिगड़ चुके हैं, कई छोटे बड़े कारखाने बंद हो रहे हैं और मजदूर 5 साल बाद फिर उसी तरह पलायन को मजबूर हो चुके हैं जैसे कोरोना के समय हुए थे: कई ढाबे और रेस्तरां बंद हो रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन 2 महीने बाद इससे भी बड़ा संकट आने वाला है और वो है खाद का संकट, हमारे यहां पहले ही डीएपी और यूरिया के लिए मारामारी रहती है, सोचिए अगर लड़ाई बंद नहीं हुई तो क्या होगा...
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    ईरान v/s अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण पूरी दुनिया में और खास कर भारत में चल रहा तेल-गैस का संकट अब साफ नजर आने लगा है, बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों में भी जहां लकड़ी और उपले आसानी से मिल जाते हैं, गैस एजेंसियों पर अफरा-तफरी का आलम है, सरकार के दावों के उलट जमीन पर हालात काफी बिगड़ चुके हैं, कई छोटे बड़े कारखाने बंद हो रहे हैं और मजदूर 5 साल बाद फिर उसी तरह पलायन को मजबूर हो चुके हैं जैसे कोरोना के समय हुए थे: कई ढाबे और रेस्तरां बंद हो रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन 2 महीने बाद इससे भी बड़ा संकट आने वाला है और वो है खाद का संकट, हमारे यहां पहले ही डीएपी और यूरिया के लिए मारामारी रहती है, सोचिए अगर लड़ाई बंद नहीं हुई तो क्या होगा...
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • कोटा | भारतीय रेलवे द्वारा कोटा के डकनिया तालाब रेलवे स्टेशन को एक विश्वस्तरीय पहचान देने के लिए चल रहा पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है। 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत हो रहे इस बदलाव से न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह स्टेशन शहर के गौरव में भी चार चांद लगाएगा। प्रमुख विकास कार्य और बदलाव स्टेशन के सौंदर्यीकरण और प्रगतिशील कार्यों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: भव्य प्रवेश द्वार और भवन: स्टेशन के पुराने ढांचे की जगह अब एक आधुनिक और आकर्षक बिल्डिंग ले रही है, जिसमें हाड़ौती की वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी। प्लेटफॉर्म का विस्तार: यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्मों की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाई गई है। साथ ही, बेहतर शेल्टर और बैठने की व्यवस्था की जा रही है। सौंदर्यीकरण: स्टेशन परिसर में लाइटिंग, पेंटिंग और ग्रीन बेल्ट (बागवानी) का काम किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को एक सुखद अनुभव मिले। आधुनिक सुविधाएं: फुटओवर ब्रिज (FOB), लिफ्ट, एस्केलेटर और डिजिटल सूचना बोर्ड जैसी सुविधाएं यहाँ स्थापित की जा रही हैं। यात्रियों के लिए क्या होगा खास? प्रगतिशील कार्यों के पूरा होने के बाद, डकनिया स्टेशन केवल एक स्टॉपेज नहीं बल्कि एक 'अर्बन सेंटर' की तरह कार्य करेगा। स्टेशन के बाहर पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है ताकि जाम की स्थिति न बने। साथ ही, स्टेशन के भीतर साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। विशेष नोट: इस सौंदर्यीकरण परियोजना का उद्देश्य डकनिया स्टेशन पर यात्री दबाव को कम करना और इसे मुख्य कोटा जंक्शन के विकल्प के रूप में मजबूती से तैयार करना है।
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    कोटा | 
भारतीय रेलवे द्वारा कोटा के डकनिया तालाब रेलवे स्टेशन को एक विश्वस्तरीय पहचान देने के लिए चल रहा पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है। 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत हो रहे इस बदलाव से न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह स्टेशन शहर के गौरव में भी चार चांद लगाएगा।
प्रमुख विकास कार्य और बदलाव
स्टेशन के सौंदर्यीकरण और प्रगतिशील कार्यों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
भव्य प्रवेश द्वार और भवन: स्टेशन के पुराने ढांचे की जगह अब एक आधुनिक और आकर्षक बिल्डिंग ले रही है, जिसमें हाड़ौती की वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी।
प्लेटफॉर्म का विस्तार: यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्मों की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाई गई है। साथ ही, बेहतर शेल्टर और बैठने की व्यवस्था की जा रही है।
सौंदर्यीकरण: स्टेशन परिसर में लाइटिंग, पेंटिंग और ग्रीन बेल्ट (बागवानी) का काम किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को एक सुखद अनुभव मिले।
आधुनिक सुविधाएं: फुटओवर ब्रिज (FOB), लिफ्ट, एस्केलेटर और डिजिटल सूचना बोर्ड जैसी सुविधाएं यहाँ स्थापित की जा रही हैं।
यात्रियों के लिए क्या होगा खास?
प्रगतिशील कार्यों के पूरा होने के बाद, डकनिया स्टेशन केवल एक स्टॉपेज नहीं बल्कि एक 'अर्बन सेंटर' की तरह कार्य करेगा। स्टेशन के बाहर पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है ताकि जाम की स्थिति न बने। साथ ही, स्टेशन के भीतर साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
विशेष नोट: इस सौंदर्यीकरण परियोजना का उद्देश्य डकनिया स्टेशन पर यात्री दबाव को कम करना और इसे मुख्य कोटा जंक्शन के विकल्प के रूप में मजबूती से तैयार करना है।
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    Local News Reporter लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by Saddam Shaikh
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    Post by Saddam Shaikh
    user_Saddam Shaikh
    Saddam Shaikh
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • Post by VKH NEWS
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    Post by VKH NEWS
    user_VKH NEWS
    VKH NEWS
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • Post by Mahendar.merotha
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    Post by Mahendar.merotha
    user_Mahendar.merotha
    Mahendar.merotha
    Voice of people लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान, सात सत्रों में बनी भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति संवाददाता - संतोष व्यास ​डूंगरपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के अंतर्गत देवसोमनाथ एवं मांडविया मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति-नीति से अवगत कराना और आगामी संगठनात्मक कार्यों के लिए तैयार करना रहा। शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व जिलाध्यक्ष हरीश पाटीदार ने शिरकत की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा की विचारधारा, विशिष्ट कार्यपद्धति और अनुशासित संगठनात्मक संरचना पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिविर के दौरान कुल सात महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सोशल मीडिया की भूमिका, बूथ सशक्तिकरण, सेवा कार्य और आगामी चुनावी रणनीतियों जैसे विषयों पर गहन मंथन किया गया। ​बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त बनाने का आह्वान :- समापन सत्र के मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि संगठन की असली शक्ति उसके बूथ स्तर के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को धरातल पर उतारने और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री सुशील कटारा, पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या, जिला महामंत्री सुरमाल परमार व पंकज जैन, जिला उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, धनेश्वर आहारी, हसमुख पंड्या, सुरेश फ्लोजिया, शांतिलाल पंड्या, जयप्रकाश पंचाल, मंडल अध्यक्ष किरण पंड्या, सुरेश रोत, जितेन्द्र सिंह, ईश्वर परमार, वासुदेव कटारा, विरमल परमार, कांतिलाल मनात सहित कई जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन आयुष व्यास व कान्ति पटेल ने किया, जबकि अंत में पदमसीह डाबी ने सभी का आभार व्यक्त किया। शिविर के समापन पर सभी कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के साथ पार्टी की विचारधारा को अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाने और संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का सामूहिक संकल्प लिया।
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    बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान, सात सत्रों में बनी भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति
संवाददाता - संतोष व्यास
​डूंगरपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के अंतर्गत देवसोमनाथ एवं मांडविया मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति-नीति से अवगत कराना और आगामी संगठनात्मक कार्यों के लिए तैयार करना रहा।
शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व जिलाध्यक्ष हरीश पाटीदार ने शिरकत की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा की विचारधारा, विशिष्ट कार्यपद्धति और अनुशासित संगठनात्मक संरचना पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिविर के दौरान कुल सात महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सोशल मीडिया की भूमिका, बूथ सशक्तिकरण, सेवा कार्य और आगामी चुनावी रणनीतियों जैसे विषयों पर गहन मंथन किया गया।
​बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त बनाने का आह्वान :-
समापन सत्र के मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि संगठन की असली शक्ति उसके बूथ स्तर के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को धरातल पर उतारने और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री सुशील कटारा, पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या, जिला महामंत्री सुरमाल परमार व पंकज जैन, जिला उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, धनेश्वर आहारी, हसमुख पंड्या, सुरेश फ्लोजिया, शांतिलाल पंड्या, जयप्रकाश पंचाल, मंडल अध्यक्ष किरण पंड्या, सुरेश रोत, जितेन्द्र सिंह, ईश्वर परमार, वासुदेव कटारा, विरमल परमार, कांतिलाल मनात सहित कई जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का कुशल संचालन आयुष व्यास व कान्ति पटेल ने किया, जबकि अंत में पदमसीह डाबी ने सभी का आभार व्यक्त किया। शिविर के समापन पर सभी कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के साथ पार्टी की विचारधारा को अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाने और संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का सामूहिक संकल्प लिया।
    user_Journalist Asif khan KOTA City NEWS
    Journalist Asif khan KOTA City NEWS
    जर्नलिज्म,पत्रकारिता लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    2 hrs ago
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