अरवल-पटना नहर रोड पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में बिहटा के अमहारा निवासी ऋषांक सिंह की असामयिक मृत्यु से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। ऋषांक अपने परिवार का इकलौता पुत्र था और अपने पिता के निधन के बाद से ही परिवार और समाज की सभी जिम्मेदारियों को निभा रहा था। उसकी अचानक मौत ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिससे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और मां की चीख-पुकार से हर आंख नम हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, ऋषांक के पिता त्र्यंबक राज भी किसान आंदोलन और सामाजिक कार्यों से जुड़े एक सक्रिय व्यक्ति थे। उनके कुछ वर्ष पहले हुए निधन के बाद से ऋषांक ने न केवल परिवार की बागडोर संभाली, बल्कि समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगा। वह गांव के हर सुख-दुख में शामिल होता था और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहता था। यह भीषण हादसा रविवार देर रात अरवल सदर थाना क्षेत्र में गांधी मैदान के पास अरवल-पटना नहर मार्ग पर हुआ, जब एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सोन नहर में जा गिरी। कार में पांच युवक सवार थे, जो किसी काम से अरवल आए थे और वापस पटना लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मोड़ पर चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते कार सीधे नहर में समा गई और कुछ ही सेकंड में पानी में डूब गई। स्थानीय लोगों, गोताखोरों और पुलिस की मदद से देर रात तक बचाव अभियान चलाया गया, जिसके बाद क्रेन और हाइड्रा मशीन का उपयोग कर कार को बाहर निकाला गया। इस हादसे में अमहारा निवासी ऋषांक सिंह सहित चार युवकों की मौत हो गई, जबकि कार चालक रोहित कुमार को गंभीर हालत में निकालकर अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन से नियंत्रण खोना ही इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है। अमहारा के ग्रामीण ऋषांक की मौत को केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की अपूरणीय क्षति मान रहे हैं, क्योंकि पिता के बाद जिस बेटे से परिवार और समाज को सबसे अधिक उम्मीदें थीं, वह भी इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया।
अरवल-पटना नहर रोड पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में बिहटा के अमहारा निवासी ऋषांक सिंह की असामयिक मृत्यु से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। ऋषांक अपने परिवार का इकलौता पुत्र था और अपने पिता के निधन के बाद से ही परिवार और समाज की सभी जिम्मेदारियों को निभा रहा था। उसकी अचानक मौत ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिससे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और मां की चीख-पुकार से हर आंख नम हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, ऋषांक के पिता त्र्यंबक राज भी किसान आंदोलन और सामाजिक कार्यों से जुड़े एक सक्रिय व्यक्ति थे। उनके कुछ वर्ष पहले हुए निधन के बाद से ऋषांक ने न केवल परिवार की बागडोर संभाली, बल्कि समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगा। वह गांव के हर सुख-दुख में शामिल होता था और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहता था। यह भीषण हादसा रविवार देर रात अरवल सदर थाना क्षेत्र में गांधी मैदान के पास अरवल-पटना नहर मार्ग पर हुआ, जब एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सोन नहर में जा गिरी। कार में पांच युवक सवार थे, जो किसी काम से अरवल आए थे और वापस पटना लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मोड़ पर चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते कार सीधे नहर में समा गई और कुछ ही सेकंड में पानी में डूब गई। स्थानीय लोगों, गोताखोरों और पुलिस की मदद से देर रात तक बचाव अभियान चलाया गया, जिसके बाद क्रेन और हाइड्रा मशीन का उपयोग कर कार को बाहर निकाला गया। इस हादसे में अमहारा निवासी ऋषांक सिंह सहित चार युवकों की मौत हो गई, जबकि कार चालक रोहित कुमार को गंभीर हालत में निकालकर अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन से नियंत्रण खोना ही इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है। अमहारा के ग्रामीण ऋषांक की मौत को केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की अपूरणीय क्षति मान रहे हैं, क्योंकि पिता के बाद जिस बेटे से परिवार और समाज को सबसे अधिक उम्मीदें थीं, वह भी इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया।
- अरवल-पटना नहर रोड पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में बिहटा के अमहारा निवासी ऋषांक सिंह की असामयिक मृत्यु से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। ऋषांक अपने परिवार का इकलौता पुत्र था और अपने पिता के निधन के बाद से ही परिवार और समाज की सभी जिम्मेदारियों को निभा रहा था। उसकी अचानक मौत ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिससे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और मां की चीख-पुकार से हर आंख नम हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, ऋषांक के पिता त्र्यंबक राज भी किसान आंदोलन और सामाजिक कार्यों से जुड़े एक सक्रिय व्यक्ति थे। उनके कुछ वर्ष पहले हुए निधन के बाद से ऋषांक ने न केवल परिवार की बागडोर संभाली, बल्कि समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगा। वह गांव के हर सुख-दुख में शामिल होता था और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहता था। यह भीषण हादसा रविवार देर रात अरवल सदर थाना क्षेत्र में गांधी मैदान के पास अरवल-पटना नहर मार्ग पर हुआ, जब एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सोन नहर में जा गिरी। कार में पांच युवक सवार थे, जो किसी काम से अरवल आए थे और वापस पटना लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मोड़ पर चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते कार सीधे नहर में समा गई और कुछ ही सेकंड में पानी में डूब गई। स्थानीय लोगों, गोताखोरों और पुलिस की मदद से देर रात तक बचाव अभियान चलाया गया, जिसके बाद क्रेन और हाइड्रा मशीन का उपयोग कर कार को बाहर निकाला गया। इस हादसे में अमहारा निवासी ऋषांक सिंह सहित चार युवकों की मौत हो गई, जबकि कार चालक रोहित कुमार को गंभीर हालत में निकालकर अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन से नियंत्रण खोना ही इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है। अमहारा के ग्रामीण ऋषांक की मौत को केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की अपूरणीय क्षति मान रहे हैं, क्योंकि पिता के बाद जिस बेटे से परिवार और समाज को सबसे अधिक उम्मीदें थीं, वह भी इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया।1
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- पटना-गया पैसेंजर ट्रेन में उस समय हड़कंप मच गया जब एक सीट पर कपड़े में लिपटी लगभग 15 दिन की एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। बच्ची लगातार रो रही थी, जिसकी आवाज सुनकर यात्रियों ने तुरंत उसकी देखभाल की और रेलवे तथा प्रशासन को घटना की जानकारी दी, जिससे मानवता की मिसाल पेश हुई। ट्रेन के पुनपुन स्टेशन पहुंचने पर बच्ची को पुलिस के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पुनपुन थाना पुलिस और तारेगना जीआरपी की मदद से नवजात को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजा गया। डॉक्टरों की जांच में बच्ची पूरी तरह स्वस्थ पाई गई है और फिलहाल उसे एक सुरक्षित संरक्षण गृह में रखा गया है। यह हृदय विदारक घटना मानवता और समाज दोनों को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कौन ऐसे माता-पिता होंगे जिन्होंने अपनी 15 दिन की इस मासूम बच्ची को ट्रेन में अकेला छोड़ दिया।1
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- बिहार के पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम पत्रकारों के सामने ही फूट-फूट कर रोते हुए देखे गए। दरअसल, उन्हें यह उम्मीद थी कि तेजस्वी यादव उन्हें विधान परिषद (MLC) का उम्मीदवार बनाएंगे, लेकिन यह टिकट सुनील सिंह को दे दिया गया। इसी बात से आहत होकर शिवचंद्र राम का धैर्य जवाब दे गया और वे इस कदर भावुक हो गए कि सबके सामने ही उनके आंसू छलक उठे। अब देखना यह है कि इस घटना पर तेजस्वी यादव क्या कदम उठाते हैं।1
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