नई दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जनजातीय समाज के संदर्भ में “वनवासी” शब्द के प्रयोग को लेकर उठे विवाद के बीच, डूंगरपुर विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी बंशीलाल कटारा ने भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। कटारा ने आरोप लगाया कि ये दल “वनवासी” शब्द को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर जनजातीय समाज की भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं और राजनीतिक लाभ लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। कटारा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत का जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति और जंगलों से जुड़ा रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय वन क्षेत्रों में निवास करता था, इसलिए उन्हें “वनवासी” कहा जाता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह शब्द किसी भी प्रकार से अपमानजनक नहीं है, बल्कि जनजातीय समाज के प्रकृति से गहरे संबंध को दर्शाता है। कटारा के अनुसार, अमित शाह ने विशाल जनजातीय सम्मेलन में जनजातीय समाज के सम्मान, विकास और देश निर्माण में उनकी भूमिका का ही उल्लेख किया था। पूर्व विधायक ने BAP द्वारा अमित शाह का पुतला दहन और विरोध प्रदर्शनों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जनजातीय समाज के वास्तविक मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास पर काम करने के बजाय, कुछ नेता केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए समाज को भ्रमित कर रहे हैं। कटारा ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन बाहरी विचारधाराओं तथा ताकतों के प्रभाव में आकर जनजातीय समाज को मुख्यधारा से दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देश की आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं लागू की गई हैं, और केंद्र सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल तथा रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। बंशीलाल कटारा ने जनजातीय समाज से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या राजनीतिक प्रोपेगेंडा में न आएं और समाज के हित में कार्य करने वाली शक्तियों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को बांटने की राजनीति करने वालों को जनता जवाब देगी, और “वनवासी” व “आदिवासी” शब्दों के नाम पर विवाद पैदा करने के बजाय समाज के विकास और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। कटारा ने अमित शाह के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को केवल राजनीतिक नाटक बताया, जिसका जनजातीय समाज की वास्तविक समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि गृह मंत्री ने हमेशा जनजातीय समाज के सम्मान और अधिकारों की बात की है।
नई दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जनजातीय समाज के संदर्भ में “वनवासी” शब्द के प्रयोग को लेकर उठे विवाद के बीच, डूंगरपुर विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी बंशीलाल कटारा ने भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। कटारा ने आरोप लगाया कि ये दल “वनवासी” शब्द को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर जनजातीय समाज की भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं और राजनीतिक लाभ लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। कटारा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत का जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति और जंगलों से जुड़ा रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय वन क्षेत्रों में निवास करता था, इसलिए उन्हें “वनवासी” कहा जाता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह शब्द किसी भी प्रकार से अपमानजनक नहीं है, बल्कि जनजातीय समाज के प्रकृति से गहरे संबंध को दर्शाता है। कटारा के अनुसार, अमित शाह ने विशाल जनजातीय सम्मेलन में जनजातीय समाज के सम्मान, विकास और देश निर्माण में उनकी भूमिका का ही उल्लेख किया था। पूर्व विधायक ने BAP द्वारा अमित शाह का पुतला दहन और विरोध प्रदर्शनों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जनजातीय समाज के वास्तविक मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास पर काम करने के बजाय, कुछ नेता केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए समाज को भ्रमित कर रहे हैं। कटारा ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन बाहरी विचारधाराओं तथा ताकतों के प्रभाव में आकर जनजातीय समाज को मुख्यधारा से दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देश की आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं लागू की गई हैं, और केंद्र सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल तथा रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। बंशीलाल कटारा ने जनजातीय समाज से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या राजनीतिक प्रोपेगेंडा में न आएं और समाज के हित में कार्य करने वाली शक्तियों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को बांटने की राजनीति करने वालों को जनता जवाब देगी, और “वनवासी” व “आदिवासी” शब्दों के नाम पर विवाद पैदा करने के बजाय समाज के विकास और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। कटारा ने अमित शाह के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को केवल राजनीतिक नाटक बताया, जिसका जनजातीय समाज की वास्तविक समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि गृह मंत्री ने हमेशा जनजातीय समाज के सम्मान और अधिकारों की बात की है।
- डूंगरपुर जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' के तहत, डूंगरपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना वरदा क्षेत्र के हिराता फला कोठारिया गांव में एक खेत से गांजे की फसल जब्त की है और एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से 50 गांजे के पौधों के साथ-साथ 558 ग्राम सूखा गांजा भी बरामद किया है। जब्त किए गए गांजे की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 75 हजार रुपये आंकी गई है, वहीं हरे पौधों का कुल वजन 4 किलो 210 ग्राम पाया गया। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार (आईपीएस) के निर्देशानुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह के निर्देशन और वृत्ताधिकारी सागवाड़ा रूपसिंह के नेतृत्व में थाना वरदा पुलिस और जिला विशेष टीम (डीएसटी) के संयुक्त प्रयासों से की गई। पुलिस को 3 जून को डीएसटी टीम के माध्यम से सूचना मिली थी कि हिराता फला कोठारिया निवासी थावरचंद पुत्र वेसात रोत (65) अपने घर के पास स्थित खेत में गांजे के पौधे उगा रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए, संयुक्त टीम ने खेत की तलाशी ली, जहां गांजे के 50 छोटे-बड़े हरे पौधे और सुखाने के लिए रखा गया सूखा गांजा मिला। आरोपी थावरचंद रोत ने खेत और फसल पर अपना स्वामित्व स्वीकार किया, जिसके बाद उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी थावरचंद रोत के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने अब तक यह गांजा किन-किन लोगों को बेचा है और इस अवैध कारोबार में अन्य कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने यह भी बताया कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और अवैध मादक पदार्थों की खेती, तस्करी तथा बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस सफल कार्रवाई में थाना वरदा के थानाधिकारी रिजवान खान, सहायक उप निरीक्षक भवरसिंह, हैड कांस्टेबल धर्मेन्द्र कुमार, कांस्टेबल वीरेन्द्र सिंह, लोकेन्द्र सिंह, चालक कांस्टेबल गिरीराज सिंह और जिला विशेष टीम (डीएसटी) के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे क्षेत्र में होने वाली किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी पुलिस की 'तीसरी आंख' मोबाइल/व्हाट्सएप हेल्पलाइन 8690180022 पर दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।3
- डूंगरपुर जिले के वरदा ग्राम के ग्रामीणों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर अपने गांव को नवगठित ओबरी तहसील से हटाकर पुनः सागवाड़ा तहसील में यथावत रखने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, वरदा ग्राम पहले सागवाड़ा तहसील का हिस्सा था, लेकिन हालिया अधिसूचना के तहत इसे ओबरी तहसील में शामिल कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को अव्यावहारिक बताते हुए न्याय की गुहार लगाई है और एसडीएम से भी संपर्क किया है। ग्रामीणों का कहना है कि डूंगरपुर-सागवाड़ा-बांसवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 927-ए पर स्थित नोखना, काहेला, टामटिया, ठाकरड़ा, नंदोड और गोवाड़ी जैसे अन्य गांव सागवाड़ा तहसील में ही रखे गए हैं। ऐसे में इन्हीं गांवों के बीच स्थित वरदा को ओबरी तहसील में शामिल करना तर्कसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया है कि वरदा गांव की दूरी सागवाड़ा से मात्र 16 किलोमीटर है, जबकि ओबरी से यह लगभग 23 किलोमीटर दूर है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने परिवहन सुविधाओं का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, सागवाड़ा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और नियमित रोडवेज बसों सहित पर्याप्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध है। वहीं, ओबरी के लिए कोई सीधी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ग्रामीणों ने जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना है, लेकिन इस निर्णय से उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित को प्राथमिकता देते हुए वरदा ग्राम को पुनः सागवाड़ा तहसील में शामिल करने का आग्रह किया है। इन मांगों के अलावा, ग्रामीणों ने भविष्य में जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वरदा को तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग भी उठाई है। उन्हें उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी और क्षेत्र की जनता को राहत प्रदान करेगी, ताकि वरदा गांव के साथ हुए अन्याय का निवारण हो सके।1
- बांसवाड़ा जिले के गढ़ी क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी के पदाधिकारियों ने उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें निजी फाइनेंस कंपनियों पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों से कथित रूप से अत्यधिक ब्याज वसूलने का गंभीर आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में यह आरोप लगाया गया है कि कुछ निजी वित्तीय संस्थाएं गरीब किसानों, मजदूरों और महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराकर उनसे अत्यधिक ब्याज की वसूली कर रही हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले की गहन जांच करने, आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है।1
- राजस्थान के डूंगरपुर जिले में डीएनटी (विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू) समुदाय ने 10 प्रतिशत अलग से आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में समुदाय के सदस्यों ने वागड़ गांधी वाटिका से कलेक्ट्रेट तक एक रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पर सांकेतिक गिरफ्तारियां भी दीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन प्रदेशभर में चलाए जा रहे 'जेल भरो आंदोलन' का ही हिस्सा है, जो अब वागड़ क्षेत्र तक पहुँच गया है। राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया जा रहा है। लालजी राईका ने बताया कि इन मांगों को लेकर 5 दिसंबर 2025 को सरकार के समक्ष एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी। उस समय सरकार ने इन मांगों को उचित मानते हुए तीन महीने में निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस बात को अब चार से पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिसके बाद राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति का गठन कर यह आंदोलन शुरू किया गया। समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 1 जुलाई को जयपुर में एक बड़ा महापड़ाव किया जाएगा।1
- Post by Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा21
- डूंगरपुर में जिला कलेक्टर देशलदान ग्राम पंचायत दोवड़ा पहुंचे, जहाँ उन्होंने ग्राम स्तरीय जनसुनवाई की। इस दौरान ग्रामीणों ने विभिन्न परिवेदनाएं प्रस्तुत कीं, जिनमें बिजली की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कराने, ग्राम पंचायत में एक पीएससी (प्राथमिक सेवा केंद्र) खोलने और खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत कराने की मांग प्रमुख थी। जिला कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को इन सभी परिवेदनाओं का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई के अवसर पर ग्राम पंचायत प्रशासक कल्पना परमार, तहसीलदार ईश्वर लाल पड़वाल, ब्लॉक विकास अधिकारी दोवड़ा मनहर बिश्नोई, अतिरिक्त विकास अधिकारी प्रकाश अहारी, और गिरीश कलाल सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, जिला कलेक्टर ने दोवड़ा में स्थित क्षेत्रीय वन खण्ड आंतरी और पुलिस थाना दोवड़ा का भी निरीक्षण किया।1
- राजस्थान के डूंगरपुर जिले में पुलिस ने 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' के तहत मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। डूंगरपुर जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार (आईपीएस) के निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत वरदा थाना पुलिस और जिला विशेष टीम (डीएसटी) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक खेत में अवैध रूप से उगाई जा रही गांजे की फसल को जब्त करते हुए भारी मात्रा में गांजे के पौधे और सूखा गांजा बरामद किया, साथ ही एक बुजुर्ग आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। नशे के काले कारोबार पर पुलिस की 'तीसरी आंख' के कड़े पहरे के बीच, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह और वृत्ताधिकारी सागवाड़ा रूपसिंह के नेतृत्व में वरदा थानाधिकारी रिजवान खान और डीएसटी टीम को मोबाइल के जरिए एक पुख्ता सूचना मिली थी। जानकारी के अनुसार, हिराता फला कोठारीया गांव में एक व्यक्ति अपने घर के पास ही खेत में अवैध गांजे की खेती कर रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस और डीएसटी की संयुक्त टीम ने तुरंत गांव पहुंचकर खेत की घेराबंदी की और तलाशी ली, जहां खेत में गांजे के पौधे लहलहाते मिले। पुलिस ने मौके से सुखाने के लिए रखा हुआ 558 ग्राम सूखा गांजा और खेत में उगे हुए 50 नग गांजे के छोटे-बड़े हरे पौधे बरामद किए। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर कुल वजन 4 किलो 210 ग्राम पाया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 75 हजार रुपये आंकी गई है। इस मामले में पुलिस ने खेत के मालिक और आरोपी थावरचन्द (पुत्र वेसात रोत), उम्र 65 वर्ष, निवासी हिराता फला कोठारीया को गिरफ्तार कर लिया है।3
- डूंगरपुर जिले में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन पृथ्वी' के तहत, वरदा पुलिस थाना ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बजरी परिवहन कर रहे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार (आईपीएस) के निर्देशानुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींव सिंह के मार्गदर्शन और वृत्ताधिकारी रूपसिंह के नेतृत्व में थाना वरदा पुलिस ने यह विशेष अभियान चलाया। थानाधिकारी रिजवान खान के नेतृत्व में गठित टीम ने क्षेत्र में नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की, जिसके दौरान तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली अवैध रूप से बजरी परिवहन करते हुए पाए गए। वाहन चालकों से परिवहन संबंधी आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने पर वे वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद पुलिस ने तीनों ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर थाना परिसर में खड़ा करा दिया। पुलिस ने मामले की अग्रिम कार्रवाई के लिए खनन विभाग डूंगरपुर को सूचित कर दिया है, जिसके बाद विभाग द्वारा जांच के उपरांत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि जिले में अवैध खनन और खनिज परिवहन के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में थानाधिकारी रिजवान खान के साथ हैड कांस्टेबल रामलाल, धनेश्वर, कांस्टेबल नरेश कुमार, गिरीराज सिंह, सार्थक और महिपाल शामिल थे। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने टीम की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध खनन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।2