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बहुत ज्यादा बारिश हो रहा है उदयपुर रामगढ़ अगल-बगल के जिलों मेंइलाकों और परसा में धूप किया है अभी हल्का-हल्का बादल छाया हुआ है हो सकता है कुछ टाइम मे इधर भी बरसेगी बारिश

4 hrs ago
user_Hira Ratan Sarthi
Hira Ratan Sarthi
Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
4 hrs ago

बहुत ज्यादा बारिश हो रहा है उदयपुर रामगढ़ अगल-बगल के जिलों मेंइलाकों और परसा में धूप किया है अभी हल्का-हल्का बादल छाया हुआ है हो सकता है कुछ टाइम मे इधर भी बरसेगी बारिश

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  • बहुत ज्यादा बारिश हो रहा है उदयपुर रामगढ़ अगल-बगल के जिलों मेंइलाकों और परसा में धूप किया है अभी हल्का-हल्का बादल छाया हुआ है हो सकता है कुछ टाइम मे इधर भी बरसेगी बारिश
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    बहुत ज्यादा बारिश हो रहा है उदयपुर रामगढ़ अगल-बगल के जिलों मेंइलाकों
और परसा में धूप किया है अभी हल्का-हल्का बादल छाया हुआ है हो सकता है कुछ टाइम मे इधर भी बरसेगी बारिश
    user_Hira Ratan Sarthi
    Hira Ratan Sarthi
    Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • NEET-2026 में चयनित निर्मला सिंह को बीपीएस पोया ने दी बधाई आदिवासी समाज की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ा रही हैं गौरव : बीपीएस पोया रामानुजनगर, 6 सितंबर 2026। रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत बिशुनपुर निवासी निर्मला सिंह के NEET-2026 में सफलता हासिल कर एमबीबीएस में प्रवेश पाने पर सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, जिला सूरजपुर के अध्यक्ष बीपीएस पोया ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। निर्मला सिंह, कमल सिंह एवं बाबी सिंह की पुत्री हैं। उनके बाबा श्री गिरजाशंकर सिंह सेवानिवृत्त प्रधान पाठक रहे हैं। निर्मला ने 12वीं के बाद चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश के लिए लगातार मेहनत की। अपने प्रयासों में उन्होंने पहले BDS और BAMS में चयन हासिल किया। इसके बाद NEET-2026 में अपने पांचवें प्रयास में 382 अंक प्राप्त कर MBBS में प्रवेश का अवसर हासिल किया। निर्मला सिंह वर्तमान में रायपुर स्थित श्री नारायणप्रसाद अवस्थी आयुर्वेदिक महाविद्यालय में BAMS की पढ़ाई कर रही हैं। NEET-2026 में सफलता के बाद उन्हें दुर्ग स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई के लिए प्रवेश मिला है। निर्मला सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर मेहनत, लगन और परिवार से मिले प्रोत्साहन को दिया। उनके छोटे चाचा तेजप्रताप सिंह MBBS चिकित्सक हैं और जशपुर में पदस्थ हैं। चाचा से प्रेरणा लेकर निर्मला ने चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय किया। इस अवसर पर बीपीएस पोया ने कहा कि निर्मला सिंह की सफलता ग्राम पंचायत बिशुनपुर, रामानुजनगर विकासखंड और पूरे सूरजपुर जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की बेटियां आज शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही हैं और मेडिकल सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर समाज एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्मला की सफलता मेहनत, लगन, संघर्ष और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। पोया ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मिलने वाले आरक्षण का लाभ उनका संवैधानिक अधिकार है। हालांकि विद्यार्थियों की सफलता को केवल आरक्षण से जोड़कर देखना उचित नहीं है। विद्यार्थी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर सामान्य श्रेणी में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। बीपीएस पोया ने युवाओं एवं विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सफलता प्राप्त करने के लिए स्वयं प्रयास और निरंतर संघर्ष आवश्यक है। उन्होंने निर्मला सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे भविष्य में चिकित्सक बनकर समाज और मानवता की सेवा करें तथा ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित एवं मार्गदर्शित करें। इस अवसर पर गौरीशंकर नेताम, जिला कार्यकारिणी सदस्य, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग सूरजपुर; गुलाब सिंह नेताम, ब्लॉक अध्यक्ष रामानुजनगर; प्रमोद सिंह मरावी, कार्यकारिणी अध्यक्ष रामानुजनगर; योगेश टेकाम, सह मीडिया प्रभारी रामानुजनगर; जयकरन सिंह टेकाम, सचिव रामानुजनगर; आयोध्या मरकाम, इंद्रकुंवर नेताम, टेकमनिया मरावी, गोटूल शिक्षिका पस्ता केंद्र सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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    NEET-2026 में चयनित निर्मला सिंह को बीपीएस पोया ने दी बधाई

आदिवासी समाज की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ा रही हैं गौरव : बीपीएस पोया
रामानुजनगर, 6 सितंबर 2026।
रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत बिशुनपुर निवासी निर्मला सिंह के NEET-2026 में सफलता हासिल कर एमबीबीएस में प्रवेश पाने पर सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, जिला सूरजपुर के अध्यक्ष बीपीएस पोया ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
निर्मला सिंह, कमल सिंह एवं बाबी सिंह की पुत्री हैं। उनके बाबा श्री गिरजाशंकर सिंह सेवानिवृत्त प्रधान पाठक रहे हैं। निर्मला ने 12वीं के बाद चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश के लिए लगातार मेहनत की। अपने प्रयासों में उन्होंने पहले BDS और BAMS में चयन हासिल किया। इसके बाद NEET-2026 में अपने पांचवें प्रयास में 382 अंक प्राप्त कर MBBS में प्रवेश का अवसर हासिल किया।
निर्मला सिंह वर्तमान में रायपुर स्थित श्री नारायणप्रसाद अवस्थी आयुर्वेदिक महाविद्यालय में BAMS की पढ़ाई कर रही हैं। NEET-2026 में सफलता के बाद उन्हें दुर्ग स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई के लिए प्रवेश मिला है।
निर्मला सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर मेहनत, लगन और परिवार से मिले प्रोत्साहन को दिया। उनके छोटे चाचा तेजप्रताप सिंह MBBS चिकित्सक हैं और जशपुर में पदस्थ हैं। चाचा से प्रेरणा लेकर निर्मला ने चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय किया।
इस अवसर पर बीपीएस पोया ने कहा कि निर्मला सिंह की सफलता ग्राम पंचायत बिशुनपुर, रामानुजनगर विकासखंड और पूरे सूरजपुर जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की बेटियां आज शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही हैं और मेडिकल सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर समाज एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि निर्मला की सफलता मेहनत, लगन, संघर्ष और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। पोया ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मिलने वाले आरक्षण का लाभ उनका संवैधानिक अधिकार है। हालांकि विद्यार्थियों की सफलता को केवल आरक्षण से जोड़कर देखना उचित नहीं है। विद्यार्थी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर सामान्य श्रेणी में भी सफलता हासिल कर सकते हैं।
बीपीएस पोया ने युवाओं एवं विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सफलता प्राप्त करने के लिए स्वयं प्रयास और निरंतर संघर्ष आवश्यक है।
उन्होंने निर्मला सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे भविष्य में चिकित्सक बनकर समाज और मानवता की सेवा करें तथा ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित एवं मार्गदर्शित करें।
इस अवसर पर गौरीशंकर नेताम, जिला कार्यकारिणी सदस्य, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग सूरजपुर; गुलाब सिंह नेताम, ब्लॉक अध्यक्ष रामानुजनगर; प्रमोद सिंह मरावी, कार्यकारिणी अध्यक्ष रामानुजनगर; योगेश टेकाम, सह मीडिया प्रभारी रामानुजनगर; जयकरन सिंह टेकाम, सचिव रामानुजनगर; आयोध्या मरकाम, इंद्रकुंवर नेताम, टेकमनिया मरावी, गोटूल शिक्षिका पस्ता केंद्र सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे।
    user_Shivnath bagheL
    Shivnath bagheL
    Newspaper publisher सूरजपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • प्रधानमंत्री मोदी लाइव: श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी महोत्सव में संबोधन 🇮🇳 प्रधानमंत्री मोदी LIVE | SRCC का शताब्दी महोत्सव श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के ऐतिहासिक शताब्दी महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संबोधन। 🎓 100 वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा 📚 शिक्षा और नवाचार पर विशेष संदेश 🇮🇳 युवाओं की भूमिका और विकसित भारत के संकल्प पर चर्चा देखें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का LIVE कार्यक्रम और जानें उनके महत्वपूर्ण संदेश। #PMModi #SRCC #SRCCCentenary #ShatabdiMahotsav #PrimeMinister #Education #Youth #ViksitBharat #LiveUpdate #BreakingNews
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    प्रधानमंत्री मोदी लाइव: श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी महोत्सव में संबोधन
🇮🇳 प्रधानमंत्री मोदी LIVE | SRCC का शताब्दी महोत्सव
श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के ऐतिहासिक शताब्दी महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संबोधन।
🎓 100 वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा
📚 शिक्षा और नवाचार पर विशेष संदेश
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देखें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का LIVE कार्यक्रम और जानें उनके महत्वपूर्ण संदेश।
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    user_Pradesh Khabar News Network
    Pradesh Khabar News Network
    Media company अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • सीतापुर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव कृष्ण जन्माष्टमी पर सीतापुर में गूंजा श्रीकृष्ण का जयघोष, लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में हुआ भव्य मटकी फोड़ आयोजन कृष्ण जन्माष्टमी पर सीतापुर में गूंजा श्रीकृष्ण का जयघोष, लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में हुआ भव्य मटकी फोड़ आयोजन सीतापुर। कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर 4 सितंबर को सीतापुर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति के तत्वावधान में भव्य मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर किया। मटकी फोड़ प्रतियोगिता में कुल 14 टीमों ने हिस्सा लिया, जिसमें 13 पुरुष टीमों के साथ एक महिला टीम भी शामिल रही। प्रतियोगिता के लिए मटकी करीब 30 फीट की ऊंचाई पर बांधी गई थी। प्रतिभागियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मटकी के नीचे पानी की व्यवस्था की गई थी। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 51 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 25 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 15 हजार रुपये रखा गया था। प्रतियोगिता में सी.एस.के. चंद्रपुर की टीम ने मटकी फोड़ने में सफलता हासिल करते हुए प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया। वहीं एक अन्य टीम ने मटकी को छूने में सफलता हासिल की, जिसे कान्हा फ्यूल सीतापुर की ओर से 5,100 रुपये का नगद पुरस्कार दिया गया। महिला टीम ने भी पूरे जोश और उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। महिलाओं के जज्बे और प्रदर्शन से प्रभावित होकर विधायक रामकुमार टोप्पो ने महिला टीम को 5,100 रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया। वहीं सीतापुर विधायक ने सभी प्रतिभागी टीम को ड्रेस और सांत्वना पुरुस्कार भी दिया, इस अवसर पर विधायक रामकुमार टोप्पो ने आयोजन की सफलता के लिए चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति को बधाई दी और सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 4 सितंबर का दिन उनके जीवन में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और सीतापुर क्षेत्र के हजारों लोगों ने उन्हें सीतापुर बुलाकर राजनीति में पहला कदम रखने का अवसर दिया था। विधायक ने कहा कि मटकी फोड़ प्रतियोगिता में सीतापुर के अलावा जशपुर और चिरमिरी सहित विभिन्न क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया, जो आयोजन की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। मटकी फोड़ प्रतियोगिता के साथ भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु और नगरवासी झूमते नजर आए। कार्यक्रम में चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें नगरवासियों और प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
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    सीतापुर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव कृष्ण जन्माष्टमी पर सीतापुर में गूंजा श्रीकृष्ण का जयघोष, लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में हुआ भव्य मटकी फोड़ आयोजन
कृष्ण जन्माष्टमी पर सीतापुर में गूंजा श्रीकृष्ण का जयघोष, लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में हुआ भव्य मटकी फोड़ आयोजन
सीतापुर। कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर 4 सितंबर को सीतापुर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति के तत्वावधान में भव्य मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर किया।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता में कुल 14 टीमों ने हिस्सा लिया, जिसमें 13 पुरुष टीमों के साथ एक महिला टीम भी शामिल रही। प्रतियोगिता के लिए मटकी करीब 30 फीट की ऊंचाई पर बांधी गई थी। प्रतिभागियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मटकी के नीचे पानी की व्यवस्था की गई थी।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 51 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 25 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 15 हजार रुपये रखा गया था। प्रतियोगिता में सी.एस.के. चंद्रपुर की टीम ने मटकी फोड़ने में सफलता हासिल करते हुए प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया। वहीं एक अन्य टीम ने मटकी को छूने में सफलता हासिल की, जिसे कान्हा फ्यूल सीतापुर की ओर से 5,100 रुपये का नगद पुरस्कार दिया गया।
महिला टीम ने भी पूरे जोश और उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। महिलाओं के जज्बे और प्रदर्शन से प्रभावित होकर विधायक रामकुमार टोप्पो ने महिला टीम को 5,100 रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया। वहीं सीतापुर विधायक ने सभी प्रतिभागी टीम को ड्रेस और सांत्वना पुरुस्कार भी दिया,
इस अवसर पर विधायक रामकुमार टोप्पो ने आयोजन की सफलता के लिए चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति को बधाई दी और सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 4 सितंबर का दिन उनके जीवन में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और सीतापुर क्षेत्र के हजारों लोगों ने उन्हें सीतापुर बुलाकर राजनीति में पहला कदम रखने का अवसर दिया था।
विधायक ने कहा कि मटकी फोड़ प्रतियोगिता में सीतापुर के अलावा जशपुर और चिरमिरी सहित विभिन्न क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया, जो आयोजन की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता के साथ भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु और नगरवासी झूमते नजर आए। कार्यक्रम में चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें नगरवासियों और प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों ने प्रसाद ग्रहण किया।
पूरे आयोजन के दौरान लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
    user_सुंदर सीतापुर
    सुंदर सीतापुर
    पत्रकार सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • शिक्षक दिवस स्कूलों में या MLA Education Core में? सीतापुर में आयोजन के स्वरूप पर उठे सवाल, शिक्षक-छात्र संबंध और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा सीतापुर। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन का दिन नहीं, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच स्थापित उस आत्मीय और गुरु-शिष्य संबंध को सम्मान देने का अवसर है, जिसने भारतीय शिक्षा परंपरा को सदियों से दिशा दी है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। लेकिन सीतापुर में इस वर्ष शिक्षक दिवस मनाने के तरीके को लेकर एक अलग तरह की चर्चा सामने आ रही है। क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन MLA Education Core में किए जाने की बात सामने आई है। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को बुलाए जाने की चर्चा है। आयोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या शिक्षक दिवस का मूल उद्देश्य स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच मनाए जाने से अधिक प्रभावी ढंग से पूरा नहीं हो सकता? शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा मंच तो स्कूल ही है शिक्षक दिवस का वास्तविक केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यही वह दिन है जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को समझते हैं। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक दिवस बच्चों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि शिक्षक का उनके जीवन में क्या महत्व है, डॉ. राधाकृष्णन कौन थे और शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक केंद्रीय आयोजन में बुला लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उनके अपने विद्यालयों में शिक्षक दिवस का आयोजन कौन करेगा? प्राथमिक स्कूलों के बच्चे अपने स्थानीय शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके साथ शिक्षक दिवस मनाने और इस दिन के महत्व को समझने के अवसर से वंचित हो सकते हैं। सम्मान का केंद्र शिक्षक-विद्यार्थी संबंध होना चाहिए किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल हो सकती है। शिक्षकों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम का स्वागत भी किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल आयोजन के उद्देश्य और स्वरूप का है। क्या शिक्षक दिवस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने खड़े होकर उनका सम्मान करें? एक विधायक द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना एक अलग कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण स्कूलों में शिक्षक दिवस की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इस पर विचार किया जाना आवश्यक है। ड्रेस कोड की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय इस बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि आयोजन में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। एक समान ड्रेस में शिक्षक निश्चित रूप से अनुशासन और एकरूपता का संदेश दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा? फिलहाल छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों के लिए इस प्रकार के ड्रेस कोड को अनिवार्य करने संबंधी कोई सामान्य राज्यस्तरीय आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि यह केवल आयोजन विशेष के लिए व्यवस्था है, तो शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत की गई है, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए। आयोजन का खर्च कौन उठा रहा है? इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आयोजन के खर्च को लेकर है। MLA Education Core में क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को बुलाने, उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करने, भोजन, मंच, सजावट, आवागमन अथवा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होना स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे आयोजन का खर्च कौन वहन कर रहा है? यदि खर्च विधायक अथवा उनके निजी स्तर से किया जा रहा है, तो यह एक निजी सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि इसमें शिक्षा विभाग, किसी सरकारी संस्था, विद्यालयीन मद अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हो रहा है, तो खर्च की स्वीकृति, मद, राशि और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक होना आवश्यक है। क्योंकि सरकारी धन का इस्तेमाल होने की स्थिति में यह केवल शिक्षक सम्मान का विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकधन के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है। क्या स्कूलों की कीमत पर केंद्रीय आयोजन उचित है? सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में यदि विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को एक साथ बुलाया जा रहा है तो इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। विशेषकर छोटे प्राथमिक विद्यालयों में यदि शिक्षक किसी केंद्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय से बाहर रहते हैं, तो उस दिन बच्चों की कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? यह भी सवाल है कि क्या शिक्षक दिवस के नाम पर शिक्षकों को विद्यालय से बाहर बुलाने के बजाय प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने और बाद में इच्छुक शिक्षकों का सामूहिक सम्मान करने की व्यवस्था अधिक उपयुक्त नहीं होती? विधायक की पहल अच्छी, लेकिन मॉडल पर सवाल जरूरी विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षकों के सम्मान की पहल को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है। शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना भी जरूरी है। लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की पहल पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है। यदि शिक्षक दिवस का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि एक तरफ विधायक द्वारा शिक्षकों का सम्मान हो और दूसरी तरफ प्रत्येक स्कूल में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ शिक्षक दिवस मना सकें, तो दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है। जरूरत एक स्पष्ट व्यवस्था की शिक्षक दिवस को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि— प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के बीच शिक्षक दिवस अनिवार्य रूप से मनाया जाए। बच्चों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी दी जाए। विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकें। इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षकों के सम्मान का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाए। यदि किसी प्रकार का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है तो उसकी प्रकृति और अनिवार्यता स्पष्ट की जाए। आयोजन में सरकारी धन खर्च होने की स्थिति में उसकी राशि और मद सार्वजनिक की जाए। शिक्षकों को कार्यक्रम में बुलाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा जब उस दिन शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के सामने हों। विधायक के मंच पर शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन शिक्षक दिवस की आत्मा तो उस छोटे से स्कूल में है, जहां कोई बच्चा अपने शिक्षक के हाथ में फूल देकर कहता है— “गुरुजी, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।” अब सवाल सीतापुर से है—क्या शिक्षक दिवस का मुख्य आयोजन बच्चों से दूर किसी केंद्रीय मंच पर होना चाहिए, या उन विद्यालयों में जहां शिक्षक और विद्यार्थी रोज मिलकर शिक्षा की नींव तैयार करते हैं? यही सवाल इस आयोजन के औचित्य, उद्देश्य और सरकारी संसाधनों के संभावित उपयोग को लेकर सार्वजनिक चर्चा की मांग करता है।
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    शिक्षक दिवस स्कूलों में या MLA Education Core में?

सीतापुर में आयोजन के स्वरूप पर उठे सवाल, शिक्षक-छात्र संबंध और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा

सीतापुर। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन का दिन नहीं, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच स्थापित उस आत्मीय और गुरु-शिष्य संबंध को सम्मान देने का अवसर है, जिसने भारतीय शिक्षा परंपरा को सदियों से दिशा दी है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
लेकिन सीतापुर में इस वर्ष शिक्षक दिवस मनाने के तरीके को लेकर एक अलग तरह की चर्चा सामने आ रही है। क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन MLA Education Core में किए जाने की बात सामने आई है। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को बुलाए जाने की चर्चा है। आयोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या शिक्षक दिवस का मूल उद्देश्य स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच मनाए जाने से अधिक प्रभावी ढंग से पूरा नहीं हो सकता?
शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा मंच तो स्कूल ही है
शिक्षक दिवस का वास्तविक केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यही वह दिन है जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को समझते हैं।
खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक दिवस बच्चों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि शिक्षक का उनके जीवन में क्या महत्व है, डॉ. राधाकृष्णन कौन थे और शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है।
ऐसे में यदि किसी क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक केंद्रीय आयोजन में बुला लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उनके अपने विद्यालयों में शिक्षक दिवस का आयोजन कौन करेगा?
प्राथमिक स्कूलों के बच्चे अपने स्थानीय शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके साथ शिक्षक दिवस मनाने और इस दिन के महत्व को समझने के अवसर से वंचित हो सकते हैं।
सम्मान का केंद्र शिक्षक-विद्यार्थी संबंध होना चाहिए
किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल हो सकती है। शिक्षकों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम का स्वागत भी किया जाना चाहिए।
लेकिन सवाल आयोजन के उद्देश्य और स्वरूप का है।
क्या शिक्षक दिवस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने खड़े होकर उनका सम्मान करें?
एक विधायक द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना एक अलग कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण स्कूलों में शिक्षक दिवस की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इस पर विचार किया जाना आवश्यक है।
ड्रेस कोड की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय
इस बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि आयोजन में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। एक समान ड्रेस में शिक्षक निश्चित रूप से अनुशासन और एकरूपता का संदेश दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा?
फिलहाल छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों के लिए इस प्रकार के ड्रेस कोड को अनिवार्य करने संबंधी कोई सामान्य राज्यस्तरीय आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
यदि यह केवल आयोजन विशेष के लिए व्यवस्था है, तो शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत की गई है, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए।
आयोजन का खर्च कौन उठा रहा है?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आयोजन के खर्च को लेकर है।
MLA Education Core में क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को बुलाने, उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करने, भोजन, मंच, सजावट, आवागमन अथवा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होना स्वाभाविक है।
ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे आयोजन का खर्च कौन वहन कर रहा है?
यदि खर्च विधायक अथवा उनके निजी स्तर से किया जा रहा है, तो यह एक निजी सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि इसमें शिक्षा विभाग, किसी सरकारी संस्था, विद्यालयीन मद अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हो रहा है, तो खर्च की स्वीकृति, मद, राशि और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक होना आवश्यक है।
क्योंकि सरकारी धन का इस्तेमाल होने की स्थिति में यह केवल शिक्षक सम्मान का विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकधन के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है।
क्या स्कूलों की कीमत पर केंद्रीय आयोजन उचित है?
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में यदि विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को एक साथ बुलाया जा रहा है तो इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।
विशेषकर छोटे प्राथमिक विद्यालयों में यदि शिक्षक किसी केंद्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय से बाहर रहते हैं, तो उस दिन बच्चों की कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?
यह भी सवाल है कि क्या शिक्षक दिवस के नाम पर शिक्षकों को विद्यालय से बाहर बुलाने के बजाय प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने और बाद में इच्छुक शिक्षकों का सामूहिक सम्मान करने की व्यवस्था अधिक उपयुक्त नहीं होती?
विधायक की पहल अच्छी, लेकिन मॉडल पर सवाल जरूरी
विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षकों के सम्मान की पहल को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है। शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना भी जरूरी है।
लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की पहल पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है।
यदि शिक्षक दिवस का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि एक तरफ विधायक द्वारा शिक्षकों का सम्मान हो और दूसरी तरफ प्रत्येक स्कूल में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ शिक्षक दिवस मना सकें, तो दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।
जरूरत एक स्पष्ट व्यवस्था की
शिक्षक दिवस को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि—
प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के बीच शिक्षक दिवस अनिवार्य रूप से मनाया जाए।
बच्चों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी दी जाए।
विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकें।
इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षकों के सम्मान का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाए।
यदि किसी प्रकार का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है तो उसकी प्रकृति और अनिवार्यता स्पष्ट की जाए।
आयोजन में सरकारी धन खर्च होने की स्थिति में उसकी राशि और मद सार्वजनिक की जाए।
शिक्षकों को कार्यक्रम में बुलाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा जब उस दिन शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के सामने हों।
विधायक के मंच पर शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन शिक्षक दिवस की आत्मा तो उस छोटे से स्कूल में है, जहां कोई बच्चा अपने शिक्षक के हाथ में फूल देकर कहता है— “गुरुजी, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।”
अब सवाल सीतापुर से है—क्या शिक्षक दिवस का मुख्य आयोजन बच्चों से दूर किसी केंद्रीय मंच पर होना चाहिए, या उन विद्यालयों में जहां शिक्षक और विद्यार्थी रोज मिलकर शिक्षा की नींव तैयार करते हैं?
यही सवाल इस आयोजन के औचित्य, उद्देश्य और सरकारी संसाधनों के संभावित उपयोग को लेकर सार्वजनिक चर्चा की मांग करता है।
    user_Sunil Gupta
    Sunil Gupta
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    Korba news
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    user_Hira Ratan Sarthi
    Hira Ratan Sarthi
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    user_Santlal Urre
    Santlal Urre
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