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शिक्षक दिवस स्कूलों में या MLA Education Core में? सीतापुर में आयोजन के स्वरूप पर उठे सवाल, शिक्षक-छात्र संबंध और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा सीतापुर। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन का दिन नहीं, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच स्थापित उस आत्मीय और गुरु-शिष्य संबंध को सम्मान देने का अवसर है, जिसने भारतीय शिक्षा परंपरा को सदियों से दिशा दी है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। लेकिन सीतापुर में इस वर्ष शिक्षक दिवस मनाने के तरीके को लेकर एक अलग तरह की चर्चा सामने आ रही है। क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन MLA Education Core में किए जाने की बात सामने आई है। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को बुलाए जाने की चर्चा है। आयोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या शिक्षक दिवस का मूल उद्देश्य स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच मनाए जाने से अधिक प्रभावी ढंग से पूरा नहीं हो सकता? शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा मंच तो स्कूल ही है शिक्षक दिवस का वास्तविक केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यही वह दिन है जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को समझते हैं। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक दिवस बच्चों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि शिक्षक का उनके जीवन में क्या महत्व है, डॉ. राधाकृष्णन कौन थे और शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक केंद्रीय आयोजन में बुला लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उनके अपने विद्यालयों में शिक्षक दिवस का आयोजन कौन करेगा? प्राथमिक स्कूलों के बच्चे अपने स्थानीय शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके साथ शिक्षक दिवस मनाने और इस दिन के महत्व को समझने के अवसर से वंचित हो सकते हैं। सम्मान का केंद्र शिक्षक-विद्यार्थी संबंध होना चाहिए किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल हो सकती है। शिक्षकों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम का स्वागत भी किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल आयोजन के उद्देश्य और स्वरूप का है। क्या शिक्षक दिवस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने खड़े होकर उनका सम्मान करें? एक विधायक द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना एक अलग कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण स्कूलों में शिक्षक दिवस की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इस पर विचार किया जाना आवश्यक है। ड्रेस कोड की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय इस बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि आयोजन में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। एक समान ड्रेस में शिक्षक निश्चित रूप से अनुशासन और एकरूपता का संदेश दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा? फिलहाल छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों के लिए इस प्रकार के ड्रेस कोड को अनिवार्य करने संबंधी कोई सामान्य राज्यस्तरीय आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि यह केवल आयोजन विशेष के लिए व्यवस्था है, तो शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत की गई है, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए। आयोजन का खर्च कौन उठा रहा है? इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आयोजन के खर्च को लेकर है। MLA Education Core में क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को बुलाने, उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करने, भोजन, मंच, सजावट, आवागमन अथवा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होना स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे आयोजन का खर्च कौन वहन कर रहा है? यदि खर्च विधायक अथवा उनके निजी स्तर से किया जा रहा है, तो यह एक निजी सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि इसमें शिक्षा विभाग, किसी सरकारी संस्था, विद्यालयीन मद अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हो रहा है, तो खर्च की स्वीकृति, मद, राशि और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक होना आवश्यक है। क्योंकि सरकारी धन का इस्तेमाल होने की स्थिति में यह केवल शिक्षक सम्मान का विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकधन के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है। क्या स्कूलों की कीमत पर केंद्रीय आयोजन उचित है? सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में यदि विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को एक साथ बुलाया जा रहा है तो इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। विशेषकर छोटे प्राथमिक विद्यालयों में यदि शिक्षक किसी केंद्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय से बाहर रहते हैं, तो उस दिन बच्चों की कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? यह भी सवाल है कि क्या शिक्षक दिवस के नाम पर शिक्षकों को विद्यालय से बाहर बुलाने के बजाय प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने और बाद में इच्छुक शिक्षकों का सामूहिक सम्मान करने की व्यवस्था अधिक उपयुक्त नहीं होती? विधायक की पहल अच्छी, लेकिन मॉडल पर सवाल जरूरी विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षकों के सम्मान की पहल को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है। शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना भी जरूरी है। लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की पहल पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है। यदि शिक्षक दिवस का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि एक तरफ विधायक द्वारा शिक्षकों का सम्मान हो और दूसरी तरफ प्रत्येक स्कूल में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ शिक्षक दिवस मना सकें, तो दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है। जरूरत एक स्पष्ट व्यवस्था की शिक्षक दिवस को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि— प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के बीच शिक्षक दिवस अनिवार्य रूप से मनाया जाए। बच्चों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी दी जाए। विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकें। इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षकों के सम्मान का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाए। यदि किसी प्रकार का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है तो उसकी प्रकृति और अनिवार्यता स्पष्ट की जाए। आयोजन में सरकारी धन खर्च होने की स्थिति में उसकी राशि और मद सार्वजनिक की जाए। शिक्षकों को कार्यक्रम में बुलाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा जब उस दिन शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के सामने हों। विधायक के मंच पर शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन शिक्षक दिवस की आत्मा तो उस छोटे से स्कूल में है, जहां कोई बच्चा अपने शिक्षक के हाथ में फूल देकर कहता है— “गुरुजी, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।” अब सवाल सीतापुर से है—क्या शिक्षक दिवस का मुख्य आयोजन बच्चों से दूर किसी केंद्रीय मंच पर होना चाहिए, या उन विद्यालयों में जहां शिक्षक और विद्यार्थी रोज मिलकर शिक्षा की नींव तैयार करते हैं? यही सवाल इस आयोजन के औचित्य, उद्देश्य और सरकारी संसाधनों के संभावित उपयोग को लेकर सार्वजनिक चर्चा की मांग करता है।

17 hrs ago
user_Sunil Gupta
Sunil Gupta
Advertising agency सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
17 hrs ago

शिक्षक दिवस स्कूलों में या MLA Education Core में? सीतापुर में आयोजन के स्वरूप पर उठे सवाल, शिक्षक-छात्र संबंध और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा सीतापुर। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन का दिन नहीं, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच स्थापित उस आत्मीय और गुरु-शिष्य संबंध को सम्मान देने का अवसर है, जिसने भारतीय शिक्षा परंपरा को सदियों से दिशा दी है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। लेकिन सीतापुर में इस वर्ष शिक्षक दिवस मनाने के तरीके को लेकर एक अलग तरह की चर्चा सामने आ रही है। क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन MLA Education Core में किए जाने की बात सामने आई है। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को बुलाए जाने की चर्चा है। आयोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या शिक्षक दिवस का मूल उद्देश्य स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच मनाए जाने से अधिक प्रभावी ढंग से पूरा नहीं हो सकता? शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा मंच तो स्कूल ही है शिक्षक दिवस का वास्तविक केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यही वह दिन है जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को समझते हैं। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक दिवस बच्चों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि शिक्षक का उनके जीवन में क्या महत्व है, डॉ. राधाकृष्णन कौन थे और शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक केंद्रीय आयोजन में बुला लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उनके अपने विद्यालयों में शिक्षक दिवस का आयोजन कौन करेगा? प्राथमिक स्कूलों के बच्चे अपने स्थानीय शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके साथ शिक्षक दिवस मनाने और इस दिन के महत्व को समझने के अवसर से वंचित हो सकते हैं। सम्मान का केंद्र शिक्षक-विद्यार्थी संबंध होना चाहिए किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल हो सकती है। शिक्षकों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम का स्वागत भी किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल आयोजन के उद्देश्य और स्वरूप का है। क्या शिक्षक दिवस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने खड़े होकर उनका सम्मान करें? एक विधायक द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना एक अलग कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण स्कूलों में शिक्षक दिवस की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इस पर विचार किया जाना आवश्यक है। ड्रेस कोड की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय इस बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि आयोजन में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। एक समान ड्रेस में शिक्षक निश्चित रूप से अनुशासन और एकरूपता का संदेश दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा? फिलहाल छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों के लिए इस प्रकार के ड्रेस कोड को अनिवार्य करने संबंधी कोई सामान्य राज्यस्तरीय आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि यह केवल आयोजन विशेष के लिए व्यवस्था है, तो शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत की गई है, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए। आयोजन का खर्च कौन उठा रहा है? इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आयोजन के खर्च को लेकर है। MLA Education Core में क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को बुलाने, उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करने, भोजन, मंच, सजावट, आवागमन अथवा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होना स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे आयोजन का खर्च कौन वहन कर रहा है? यदि खर्च विधायक अथवा उनके निजी स्तर से किया जा रहा है, तो यह एक निजी सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि इसमें शिक्षा विभाग, किसी सरकारी संस्था, विद्यालयीन मद अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हो रहा है, तो खर्च की स्वीकृति, मद, राशि और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक होना आवश्यक है। क्योंकि सरकारी धन का इस्तेमाल होने की स्थिति में यह केवल शिक्षक सम्मान का विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकधन के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है। क्या स्कूलों की कीमत पर केंद्रीय आयोजन उचित है? सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में यदि विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को एक साथ बुलाया जा रहा है तो इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। विशेषकर छोटे प्राथमिक विद्यालयों में यदि शिक्षक किसी केंद्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय से बाहर रहते हैं, तो उस दिन बच्चों की कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? यह भी सवाल है कि क्या शिक्षक दिवस के नाम पर शिक्षकों को विद्यालय से बाहर बुलाने के बजाय प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने और बाद में इच्छुक शिक्षकों का सामूहिक सम्मान करने की व्यवस्था अधिक उपयुक्त नहीं होती? विधायक की पहल अच्छी, लेकिन मॉडल पर सवाल जरूरी विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षकों के सम्मान की पहल को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है। शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना भी जरूरी है। लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की पहल पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है। यदि शिक्षक दिवस का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि एक तरफ विधायक द्वारा शिक्षकों का सम्मान हो और दूसरी तरफ प्रत्येक स्कूल में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ शिक्षक दिवस मना सकें, तो दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है। जरूरत एक स्पष्ट व्यवस्था की शिक्षक दिवस को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि— प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के बीच शिक्षक दिवस अनिवार्य रूप से मनाया जाए। बच्चों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी दी जाए। विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकें। इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षकों के सम्मान का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाए। यदि किसी प्रकार का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है तो उसकी प्रकृति और अनिवार्यता स्पष्ट की जाए। आयोजन में सरकारी धन खर्च होने की स्थिति में उसकी राशि और मद सार्वजनिक की जाए। शिक्षकों को कार्यक्रम में बुलाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा जब उस दिन शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के सामने हों। विधायक के मंच पर शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन शिक्षक दिवस की आत्मा तो उस छोटे से स्कूल में है, जहां कोई बच्चा अपने शिक्षक के हाथ में फूल देकर कहता है— “गुरुजी, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।” अब सवाल सीतापुर से है—क्या शिक्षक दिवस का मुख्य आयोजन बच्चों से दूर किसी केंद्रीय मंच पर होना चाहिए, या उन विद्यालयों में जहां शिक्षक और विद्यार्थी रोज मिलकर शिक्षा की नींव तैयार करते हैं? यही सवाल इस आयोजन के औचित्य, उद्देश्य और सरकारी संसाधनों के संभावित उपयोग को लेकर सार्वजनिक चर्चा की मांग करता है।

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मटकी फोड़ प्रतियोगिता में कुल 14 टीमों ने हिस्सा लिया, जिसमें 13 पुरुष टीमों के साथ एक महिला टीम भी शामिल रही। प्रतियोगिता के लिए मटकी करीब 30 फीट की ऊंचाई पर बांधी गई थी। प्रतिभागियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मटकी के नीचे पानी की व्यवस्था की गई थी।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 51 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 25 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 15 हजार रुपये रखा गया था। प्रतियोगिता में सी.एस.के. चंद्रपुर की टीम ने मटकी फोड़ने में सफलता हासिल करते हुए प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया। वहीं एक अन्य टीम ने मटकी को छूने में सफलता हासिल की, जिसे कान्हा फ्यूल सीतापुर की ओर से 5,100 रुपये का नगद पुरस्कार दिया गया।
महिला टीम ने भी पूरे जोश और उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। महिलाओं के जज्बे और प्रदर्शन से प्रभावित होकर विधायक रामकुमार टोप्पो ने महिला टीम को 5,100 रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया। वहीं सीतापुर विधायक ने सभी प्रतिभागी टीम को ड्रेस और सांत्वना पुरुस्कार भी दिया,
इस अवसर पर विधायक रामकुमार टोप्पो ने आयोजन की सफलता के लिए चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति को बधाई दी और सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 4 सितंबर का दिन उनके जीवन में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और सीतापुर क्षेत्र के हजारों लोगों ने उन्हें सीतापुर बुलाकर राजनीति में पहला कदम रखने का अवसर दिया था।
विधायक ने कहा कि मटकी फोड़ प्रतियोगिता में सीतापुर के अलावा जशपुर और चिरमिरी सहित विभिन्न क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया, जो आयोजन की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता के साथ भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु और नगरवासी झूमते नजर आए। कार्यक्रम में चोरकी पानी धाम शिव मंदिर समिति की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें नगरवासियों और प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों ने प्रसाद ग्रहण किया।
पूरे आयोजन के दौरान लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
    user_सुंदर सीतापुर
    सुंदर सीतापुर
    पत्रकार सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • शिक्षक दिवस स्कूलों में या MLA Education Core में? सीतापुर में आयोजन के स्वरूप पर उठे सवाल, शिक्षक-छात्र संबंध और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा सीतापुर। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन का दिन नहीं, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच स्थापित उस आत्मीय और गुरु-शिष्य संबंध को सम्मान देने का अवसर है, जिसने भारतीय शिक्षा परंपरा को सदियों से दिशा दी है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। लेकिन सीतापुर में इस वर्ष शिक्षक दिवस मनाने के तरीके को लेकर एक अलग तरह की चर्चा सामने आ रही है। क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन MLA Education Core में किए जाने की बात सामने आई है। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को बुलाए जाने की चर्चा है। आयोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या शिक्षक दिवस का मूल उद्देश्य स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच मनाए जाने से अधिक प्रभावी ढंग से पूरा नहीं हो सकता? शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा मंच तो स्कूल ही है शिक्षक दिवस का वास्तविक केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यही वह दिन है जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को समझते हैं। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक दिवस बच्चों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि शिक्षक का उनके जीवन में क्या महत्व है, डॉ. राधाकृष्णन कौन थे और शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक केंद्रीय आयोजन में बुला लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उनके अपने विद्यालयों में शिक्षक दिवस का आयोजन कौन करेगा? प्राथमिक स्कूलों के बच्चे अपने स्थानीय शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके साथ शिक्षक दिवस मनाने और इस दिन के महत्व को समझने के अवसर से वंचित हो सकते हैं। सम्मान का केंद्र शिक्षक-विद्यार्थी संबंध होना चाहिए किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल हो सकती है। शिक्षकों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम का स्वागत भी किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल आयोजन के उद्देश्य और स्वरूप का है। क्या शिक्षक दिवस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने खड़े होकर उनका सम्मान करें? एक विधायक द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना एक अलग कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण स्कूलों में शिक्षक दिवस की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इस पर विचार किया जाना आवश्यक है। ड्रेस कोड की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय इस बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि आयोजन में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। एक समान ड्रेस में शिक्षक निश्चित रूप से अनुशासन और एकरूपता का संदेश दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा? फिलहाल छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों के लिए इस प्रकार के ड्रेस कोड को अनिवार्य करने संबंधी कोई सामान्य राज्यस्तरीय आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि यह केवल आयोजन विशेष के लिए व्यवस्था है, तो शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत की गई है, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए। आयोजन का खर्च कौन उठा रहा है? इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आयोजन के खर्च को लेकर है। MLA Education Core में क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को बुलाने, उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करने, भोजन, मंच, सजावट, आवागमन अथवा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होना स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे आयोजन का खर्च कौन वहन कर रहा है? यदि खर्च विधायक अथवा उनके निजी स्तर से किया जा रहा है, तो यह एक निजी सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि इसमें शिक्षा विभाग, किसी सरकारी संस्था, विद्यालयीन मद अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हो रहा है, तो खर्च की स्वीकृति, मद, राशि और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक होना आवश्यक है। क्योंकि सरकारी धन का इस्तेमाल होने की स्थिति में यह केवल शिक्षक सम्मान का विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकधन के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है। क्या स्कूलों की कीमत पर केंद्रीय आयोजन उचित है? सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में यदि विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को एक साथ बुलाया जा रहा है तो इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। विशेषकर छोटे प्राथमिक विद्यालयों में यदि शिक्षक किसी केंद्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय से बाहर रहते हैं, तो उस दिन बच्चों की कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? यह भी सवाल है कि क्या शिक्षक दिवस के नाम पर शिक्षकों को विद्यालय से बाहर बुलाने के बजाय प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने और बाद में इच्छुक शिक्षकों का सामूहिक सम्मान करने की व्यवस्था अधिक उपयुक्त नहीं होती? विधायक की पहल अच्छी, लेकिन मॉडल पर सवाल जरूरी विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षकों के सम्मान की पहल को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है। शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना भी जरूरी है। लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की पहल पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है। यदि शिक्षक दिवस का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि एक तरफ विधायक द्वारा शिक्षकों का सम्मान हो और दूसरी तरफ प्रत्येक स्कूल में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ शिक्षक दिवस मना सकें, तो दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है। जरूरत एक स्पष्ट व्यवस्था की शिक्षक दिवस को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि— प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के बीच शिक्षक दिवस अनिवार्य रूप से मनाया जाए। बच्चों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी दी जाए। विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकें। इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षकों के सम्मान का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाए। यदि किसी प्रकार का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है तो उसकी प्रकृति और अनिवार्यता स्पष्ट की जाए। आयोजन में सरकारी धन खर्च होने की स्थिति में उसकी राशि और मद सार्वजनिक की जाए। शिक्षकों को कार्यक्रम में बुलाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा जब उस दिन शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के सामने हों। विधायक के मंच पर शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन शिक्षक दिवस की आत्मा तो उस छोटे से स्कूल में है, जहां कोई बच्चा अपने शिक्षक के हाथ में फूल देकर कहता है— “गुरुजी, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।” अब सवाल सीतापुर से है—क्या शिक्षक दिवस का मुख्य आयोजन बच्चों से दूर किसी केंद्रीय मंच पर होना चाहिए, या उन विद्यालयों में जहां शिक्षक और विद्यार्थी रोज मिलकर शिक्षा की नींव तैयार करते हैं? यही सवाल इस आयोजन के औचित्य, उद्देश्य और सरकारी संसाधनों के संभावित उपयोग को लेकर सार्वजनिक चर्चा की मांग करता है।
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    शिक्षक दिवस स्कूलों में या MLA Education Core में?

सीतापुर में आयोजन के स्वरूप पर उठे सवाल, शिक्षक-छात्र संबंध और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा

सीतापुर। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन का दिन नहीं, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच स्थापित उस आत्मीय और गुरु-शिष्य संबंध को सम्मान देने का अवसर है, जिसने भारतीय शिक्षा परंपरा को सदियों से दिशा दी है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
लेकिन सीतापुर में इस वर्ष शिक्षक दिवस मनाने के तरीके को लेकर एक अलग तरह की चर्चा सामने आ रही है। क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन MLA Education Core में किए जाने की बात सामने आई है। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को बुलाए जाने की चर्चा है। आयोजन को लेकर सवाल यह है कि क्या शिक्षक दिवस का मूल उद्देश्य स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच मनाए जाने से अधिक प्रभावी ढंग से पूरा नहीं हो सकता?
शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा मंच तो स्कूल ही है
शिक्षक दिवस का वास्तविक केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यही वह दिन है जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को समझते हैं।
खासकर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक दिवस बच्चों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। बच्चों को यह बताया जा सकता है कि शिक्षक का उनके जीवन में क्या महत्व है, डॉ. राधाकृष्णन कौन थे और शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है।
ऐसे में यदि किसी क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक केंद्रीय आयोजन में बुला लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उनके अपने विद्यालयों में शिक्षक दिवस का आयोजन कौन करेगा?
प्राथमिक स्कूलों के बच्चे अपने स्थानीय शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके साथ शिक्षक दिवस मनाने और इस दिन के महत्व को समझने के अवसर से वंचित हो सकते हैं।
सम्मान का केंद्र शिक्षक-विद्यार्थी संबंध होना चाहिए
किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिक्षकों का सम्मान किया जाना निश्चित रूप से सकारात्मक पहल हो सकती है। शिक्षकों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम का स्वागत भी किया जाना चाहिए।
लेकिन सवाल आयोजन के उद्देश्य और स्वरूप का है।
क्या शिक्षक दिवस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने खड़े होकर उनका सम्मान करें?
एक विधायक द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना एक अलग कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण स्कूलों में शिक्षक दिवस की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इस पर विचार किया जाना आवश्यक है।
ड्रेस कोड की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय
इस बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि आयोजन में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया है तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। एक समान ड्रेस में शिक्षक निश्चित रूप से अनुशासन और एकरूपता का संदेश दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा?
फिलहाल छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों के लिए इस प्रकार के ड्रेस कोड को अनिवार्य करने संबंधी कोई सामान्य राज्यस्तरीय आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
यदि यह केवल आयोजन विशेष के लिए व्यवस्था है, तो शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत की गई है, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए।
आयोजन का खर्च कौन उठा रहा है?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आयोजन के खर्च को लेकर है।
MLA Education Core में क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षकों को बुलाने, उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करने, भोजन, मंच, सजावट, आवागमन अथवा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होना स्वाभाविक है।
ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे आयोजन का खर्च कौन वहन कर रहा है?
यदि खर्च विधायक अथवा उनके निजी स्तर से किया जा रहा है, तो यह एक निजी सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि इसमें शिक्षा विभाग, किसी सरकारी संस्था, विद्यालयीन मद अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हो रहा है, तो खर्च की स्वीकृति, मद, राशि और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक होना आवश्यक है।
क्योंकि सरकारी धन का इस्तेमाल होने की स्थिति में यह केवल शिक्षक सम्मान का विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकधन के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है।
क्या स्कूलों की कीमत पर केंद्रीय आयोजन उचित है?
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में यदि विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को एक साथ बुलाया जा रहा है तो इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।
विशेषकर छोटे प्राथमिक विद्यालयों में यदि शिक्षक किसी केंद्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय से बाहर रहते हैं, तो उस दिन बच्चों की कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?
यह भी सवाल है कि क्या शिक्षक दिवस के नाम पर शिक्षकों को विद्यालय से बाहर बुलाने के बजाय प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने और बाद में इच्छुक शिक्षकों का सामूहिक सम्मान करने की व्यवस्था अधिक उपयुक्त नहीं होती?
विधायक की पहल अच्छी, लेकिन मॉडल पर सवाल जरूरी
विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा शिक्षकों के सम्मान की पहल को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा सकता है। शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना भी जरूरी है।
लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की पहल पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा है।
यदि शिक्षक दिवस का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि एक तरफ विधायक द्वारा शिक्षकों का सम्मान हो और दूसरी तरफ प्रत्येक स्कूल में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ शिक्षक दिवस मना सकें, तो दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।
जरूरत एक स्पष्ट व्यवस्था की
शिक्षक दिवस को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि—
प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के बीच शिक्षक दिवस अनिवार्य रूप से मनाया जाए।
बच्चों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी दी जाए।
विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकें।
इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षकों के सम्मान का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाए।
यदि किसी प्रकार का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है तो उसकी प्रकृति और अनिवार्यता स्पष्ट की जाए।
आयोजन में सरकारी धन खर्च होने की स्थिति में उसकी राशि और मद सार्वजनिक की जाए।
शिक्षकों को कार्यक्रम में बुलाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा जब उस दिन शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के सामने हों।
विधायक के मंच पर शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन शिक्षक दिवस की आत्मा तो उस छोटे से स्कूल में है, जहां कोई बच्चा अपने शिक्षक के हाथ में फूल देकर कहता है— “गुरुजी, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।”
अब सवाल सीतापुर से है—क्या शिक्षक दिवस का मुख्य आयोजन बच्चों से दूर किसी केंद्रीय मंच पर होना चाहिए, या उन विद्यालयों में जहां शिक्षक और विद्यार्थी रोज मिलकर शिक्षा की नींव तैयार करते हैं?
यही सवाल इस आयोजन के औचित्य, उद्देश्य और सरकारी संसाधनों के संभावित उपयोग को लेकर सार्वजनिक चर्चा की मांग करता है।
    user_Sunil Gupta
    Sunil Gupta
    Advertising agency सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • *थाना आस्ता के ग्राम हर्री में हुई महिला की अंधे कत्ल की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाई* *➡️ हत्या कर फरार होने की फिराक में था आरोपी, पुलिस ने रायडीह, झारखंड से आरोपी को धर दबोचा* *➡️ आरोपी मृतिका की बेटी से करता था एकतरफा प्यार, बेटी द्वारा बातचीत करने से मना करने पर था नाराज* *➡️ मृतिका द्वारा आरोपी को अपनी बेटी को परेशान करने से मना करने पर आवेश में आकर घर में रखे टांगिया से सिर पर किया वार, मौके पर ही हो गई मौत* *➡️ मामले में आरोपी के विरुद्ध थाना आस्ता में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध* *➡️ पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त टांगिया किया जप्त* *➡️ गिरफ्तार आरोपी - अवधेश राम उर्फ गुटका, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम कोमडो, थाना सिटी कोतवाली जशपुर* *➡️ मृतिका - धनमनी बाई, उम्र 55 वर्ष,* ---00--- ➡️मामले का संक्षिप्त विवरण - इस प्रकार है कि मृतिका के पति उम्र 63 वर्ष के द्वारा दिनांक 04.09.2026 को थाना आस्ता उपस्थित आकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि धनमनी बाई उसकी पत्नी है तथा दोनों अपने घर में रहते हैं। दिनांक 03.09.2026 को दोपहर करीब 11:30 बजे प्रार्थी अपने घर में खाना खाने के बाद मवेशी चराने के लिए जंगल की ओर गया था। उसकी पत्नी धनमनी बाई घर पर अकेली थी। शाम करीब 06:00 बजे मवेशी चराकर वापस घर आया तथा मवेशियों को गोठान में बंद कर घर के अंदर गया, तो देखा कि उसकी पत्नी धनमनी बाई घर के अंदर जमीन पर पड़ी हुई थी। उसके दाहिने तरफ के चेहरे में गंभीर चोट लगी थी तथा खून निकला हुआ था। आवाज देने पर भी वह कुछ नहीं बोली।पास ही टांगिया पड़ा हुआ था। प्रार्थी के द्वारा घटना की जानकारी तत्काल परिजनों को दी गई। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा हत्या करने की नीयत से टांगिया से वार कर उसकी पत्नी की हत्या किए जाने की रिपोर्ट पर थाना आस्ता में तत्काल हत्या के लिए बी एन एस की धारा 103(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। ➡️ मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कप्तान जशपुर, उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में आरोपी की पतासाजी एवं मामले के खुलासे हेतु तत्काल विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। साथ ही फॉरेंसिक टीम को घटनास्थल पर बुलाकर मौके का बारीकी से निरीक्षण कराया गया। पुलिस टीम द्वारा मृतिका के परिजनों एवं गवाहों से विस्तृत पूछताछ की गई। पूछताछ एवं जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि अवधेश राम नामक व्यक्ति कुछ दिन पूर्व मृतिका के घर आया था तथा उसके साथ विवाद किया था। ➡️पुलिस जांच एवं गवाहों के कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया अवधेश राम पर संदेह होने पर पुलिस टीम द्वारा उसकी पतासाजी शुरू की गई। पुलिस टीम जब संदिग्ध अवधेश राम के ग्राम कोमडो स्थित घर पहुंची तो वह वहां नहीं मिला। पुलिस की टेक्निकल टीम की सहायता से संदिग्ध आरोपी की लगातार पतासाजी एवं ट्रेसिंग की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस को जानकारी प्राप्त हुई कि संदिग्ध आरोपी रायडीह, झारखंड में मौजूद है। पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए रायडीह, झारखंड पहुंचकर आरोपी अवधेश राम को हिरासत में लिया गया तथा उसे जशपुर लाया गया। *➡️ पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपराध करना स्वीकार किया।* आरोपी अवधेश राम ने पूछताछ में बताया कि वह मृतिका की बेटी से एकतरफा प्यार करता था तथा मृतिका की बेटी द्वारा उससे बातचीत नहीं करने के कारण वह नाराज था। इसी नाराजगी में वह मृतिका के घर गया था, जहां वह घर में अकेली थी। मृतिका द्वारा आरोपी को अपनी बेटी से बातचीत करने एवं उसे परेशान करने से मना किया गया, जिससे आरोपी आवेश में आ गया और घर में रखे टांगिया से मृतिका के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से मृतिका की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। ➡️आरोपी अवधेश राम उर्फ गुटका, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम कोमडो, थाना सिटी कोतवाली जशपुर द्वारा अपराध स्वीकार करने तथा अपराध के पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर दिनांक 05.09.2026 को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। *➡️ मामले की कार्यवाही एवं आरोपी की गिरफ्तारी में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका* एसडीओपी जशपुर निमितेश सिंह, थाना प्रभारी आस्ता उपनिरीक्षक अर्जुन यादव, सउनि अमितलाल टोप्पो, प्र.आर. बलथाजर तिग्गा, प्र.आर. कोसमोस बड़ा, मआर. पूनम तिर्की, आर. दीपक भगत, आर. अर्जुन तिग्गा, आर. अनिल भगत, आर. सुरेश कुमार, आर. अनंत भगत, डीएसएफ आर. सुमन टोप्पो एवं आर. बिमलेश्वर भगत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। *➡️ डी आई जी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि थाना आस्ता क्षेत्रांतर्गत ग्राम हर्री में एक महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है। पुलिस द्वारा हत्या में प्रयुक्त टांगिया भी जप्त किया गया है। मामले में पुलिस की अग्रिम विवेचना एवं कार्यवाही जारी है।*
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    *थाना आस्ता के ग्राम हर्री में हुई महिला की अंधे कत्ल की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाई*
*➡️ हत्या कर फरार होने की फिराक में था आरोपी, पुलिस ने रायडीह, झारखंड से आरोपी को धर दबोचा*
*➡️ आरोपी मृतिका की बेटी से करता था एकतरफा प्यार, बेटी द्वारा बातचीत करने से मना करने पर था नाराज*
*➡️ मृतिका द्वारा आरोपी को अपनी बेटी को परेशान करने से मना करने पर आवेश में आकर घर में रखे टांगिया से सिर पर किया वार, मौके पर ही हो गई मौत*
*➡️ मामले में आरोपी के विरुद्ध थाना आस्ता में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध*
*➡️ पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त टांगिया किया जप्त*
*➡️ गिरफ्तार आरोपी - अवधेश राम उर्फ गुटका, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम कोमडो, थाना सिटी कोतवाली जशपुर*
*➡️ मृतिका - धनमनी बाई, उम्र 55 वर्ष,*
---00---
➡️मामले का संक्षिप्त विवरण - इस प्रकार है कि  मृतिका के पति  उम्र 63 वर्ष के द्वारा दिनांक 04.09.2026 को थाना आस्ता उपस्थित आकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि धनमनी बाई उसकी पत्नी है तथा दोनों अपने घर में रहते हैं।
दिनांक 03.09.2026 को दोपहर करीब 11:30 बजे प्रार्थी अपने घर में खाना खाने के बाद मवेशी चराने के लिए जंगल की ओर गया था। उसकी पत्नी धनमनी बाई घर पर अकेली थी। शाम करीब 06:00 बजे मवेशी चराकर वापस घर आया तथा मवेशियों को गोठान में बंद कर घर के अंदर गया, तो देखा कि उसकी पत्नी धनमनी बाई घर के अंदर जमीन पर पड़ी हुई थी। उसके दाहिने तरफ के चेहरे में गंभीर चोट लगी थी तथा खून निकला हुआ था। आवाज देने पर भी वह कुछ नहीं बोली।पास ही टांगिया पड़ा हुआ था। प्रार्थी के द्वारा घटना की जानकारी तत्काल परिजनों को दी गई। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा हत्या करने की नीयत से टांगिया से वार कर उसकी पत्नी की हत्या किए जाने की रिपोर्ट पर थाना आस्ता में तत्काल हत्या के लिए बी एन एस की धारा 103(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
➡️ मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कप्तान जशपुर, उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में आरोपी की पतासाजी एवं मामले के खुलासे हेतु तत्काल विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।
साथ ही फॉरेंसिक टीम को घटनास्थल पर बुलाकर मौके का बारीकी से निरीक्षण कराया गया। पुलिस टीम द्वारा मृतिका के परिजनों एवं गवाहों से विस्तृत पूछताछ की गई। पूछताछ एवं जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि अवधेश राम नामक व्यक्ति कुछ दिन पूर्व मृतिका के घर आया था तथा उसके साथ विवाद किया था।
➡️पुलिस जांच एवं गवाहों के कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया अवधेश राम पर संदेह होने पर पुलिस टीम द्वारा उसकी पतासाजी शुरू की गई। पुलिस टीम जब संदिग्ध अवधेश राम के ग्राम कोमडो स्थित घर पहुंची तो वह वहां नहीं मिला।
पुलिस की टेक्निकल टीम की सहायता से संदिग्ध आरोपी की लगातार पतासाजी एवं ट्रेसिंग की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस को जानकारी प्राप्त हुई कि संदिग्ध आरोपी रायडीह, झारखंड में मौजूद है। पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए रायडीह, झारखंड पहुंचकर आरोपी अवधेश राम को हिरासत में लिया गया तथा उसे जशपुर लाया गया।
*➡️ पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपराध करना स्वीकार किया।*
आरोपी अवधेश राम ने पूछताछ में बताया कि वह मृतिका की बेटी से एकतरफा प्यार करता था तथा मृतिका की बेटी द्वारा उससे बातचीत नहीं करने के कारण वह नाराज था। इसी नाराजगी में वह मृतिका के घर गया था, जहां वह घर में अकेली थी। मृतिका द्वारा आरोपी को अपनी बेटी से बातचीत करने एवं उसे परेशान करने से मना किया गया, जिससे आरोपी आवेश में आ गया और घर में रखे टांगिया से मृतिका के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से मृतिका की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
➡️आरोपी अवधेश राम उर्फ गुटका, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम कोमडो, थाना सिटी कोतवाली जशपुर द्वारा अपराध स्वीकार करने तथा अपराध के पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर दिनांक 05.09.2026 को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
*➡️ मामले की कार्यवाही एवं आरोपी की गिरफ्तारी में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका*
एसडीओपी जशपुर निमितेश सिंह, थाना प्रभारी आस्ता उपनिरीक्षक अर्जुन यादव, सउनि अमितलाल टोप्पो, प्र.आर. बलथाजर तिग्गा, प्र.आर. कोसमोस बड़ा, मआर. पूनम तिर्की, आर. दीपक भगत, आर. अर्जुन तिग्गा, आर. अनिल भगत, आर. सुरेश कुमार, आर. अनंत भगत, डीएसएफ आर. सुमन टोप्पो एवं आर. बिमलेश्वर भगत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
*➡️ डी आई जी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि थाना आस्ता क्षेत्रांतर्गत ग्राम हर्री में एक महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है। पुलिस द्वारा हत्या में प्रयुक्त टांगिया भी जप्त किया गया है। मामले में पुलिस की अग्रिम विवेचना एवं कार्यवाही जारी है।*
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • पत्थलगांव के शेखरपुर की टीम ने जशपुर जिला स्तरीय मटकी फोड़ प्रतियोगिता का खिताब जीतकर ₹1,11,001 का नगद पुरस्कार अपने नाम किया। 🎉 🏆 शेखरपुर के गोविंदाओं ने रचा इतिहास! पत्थलगांव के शेखरपुर की टीम ने जशपुर जिला स्तरीय मटकी फोड़ प्रतियोगिता का खिताब जीतकर ₹1,11,001 का नगद पुरस्कार अपने नाम किया। 🎉 सीतापुर में उपविजेता, शेखरपुर में विजेता और अब जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी चैंपियन! 🏆 जीत के बाद ग्रामवासियों ने गोविंदाओं की टोली का सम्मान किया। शेखरपुर के लिए यह गर्व का पल रहा। ❤️ 📸 देखिए सम्मान की खास तस्वीरें... Jashpur Times | सच सब तक #JashpurTimes #Shekharpur #Pathalgaon #MatkiPhod #Govinda #Janmashtami #Jashpur #Chhattisgarh #Winner #TeamShekharpur
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    पत्थलगांव के शेखरपुर की टीम ने जशपुर जिला स्तरीय मटकी फोड़ प्रतियोगिता का खिताब जीतकर ₹1,11,001 का नगद पुरस्कार अपने नाम किया। 🎉
🏆 शेखरपुर के गोविंदाओं ने रचा इतिहास!
पत्थलगांव के शेखरपुर की टीम ने जशपुर जिला स्तरीय मटकी फोड़ प्रतियोगिता का खिताब जीतकर ₹1,11,001 का नगद पुरस्कार अपने नाम किया। 🎉
सीतापुर में उपविजेता, शेखरपुर में विजेता और अब जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी चैंपियन! 🏆
जीत के बाद ग्रामवासियों ने गोविंदाओं की टोली का सम्मान किया। शेखरपुर के लिए यह गर्व का पल रहा। ❤️
📸 देखिए सम्मान की खास तस्वीरें...
Jashpur Times | सच सब तक
#JashpurTimes #Shekharpur #Pathalgaon #MatkiPhod #Govinda #Janmashtami #Jashpur #Chhattisgarh #Winner #TeamShekharpur
    user_Ibnul khan
    Ibnul khan
    Media house कांसबेल, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • बहुत ज्यादा बारिश हो रहा है उदयपुर रामगढ़ अगल-बगल के जिलों मेंइलाकों और परसा में धूप किया है अभी हल्का-हल्का बादल छाया हुआ है हो सकता है कुछ टाइम मे इधर भी बरसेगी बारिश
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    बहुत ज्यादा बारिश हो रहा है उदयपुर रामगढ़ अगल-बगल के जिलों मेंइलाकों
और परसा में धूप किया है अभी हल्का-हल्का बादल छाया हुआ है हो सकता है कुछ टाइम मे इधर भी बरसेगी बारिश
    user_Hira Ratan Sarthi
    Hira Ratan Sarthi
    Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • प्रधानमंत्री मोदी लाइव: श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी महोत्सव में संबोधन 🇮🇳 प्रधानमंत्री मोदी LIVE | SRCC का शताब्दी महोत्सव श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के ऐतिहासिक शताब्दी महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संबोधन। 🎓 100 वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा 📚 शिक्षा और नवाचार पर विशेष संदेश 🇮🇳 युवाओं की भूमिका और विकसित भारत के संकल्प पर चर्चा देखें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का LIVE कार्यक्रम और जानें उनके महत्वपूर्ण संदेश। #PMModi #SRCC #SRCCCentenary #ShatabdiMahotsav #PrimeMinister #Education #Youth #ViksitBharat #LiveUpdate #BreakingNews
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    प्रधानमंत्री मोदी लाइव: श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी महोत्सव में संबोधन
🇮🇳 प्रधानमंत्री मोदी LIVE | SRCC का शताब्दी महोत्सव
श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के ऐतिहासिक शताब्दी महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संबोधन।
🎓 100 वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा
📚 शिक्षा और नवाचार पर विशेष संदेश
🇮🇳 युवाओं की भूमिका और विकसित भारत के संकल्प पर चर्चा
देखें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का LIVE कार्यक्रम और जानें उनके महत्वपूर्ण संदेश।
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    Pradesh Khabar News Network
    Media company अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • 🚨 लाखों की निवेश ठगी का आरोपी धराया! जशपुर से चिटफंड डायरेक्टर गिरफ्तार रायगढ़, 5 सितंबर । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी के मार्गदर्शन में जिले में फरार एवं लंबित आरोपियों तथा फरार वारंटियों की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए “ऑपरेशन क्लीन हंट” चलाया जा रहा है। अभियान के तहत रायगढ़ पुलिस द्वारा लगातार फरार आरोपियों एवं वारंटियों की धरपकड़ की जा रही है। इसी क्रम में एसडीओपी धरमजयगढ़ श्री सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में घरघोड़ा पुलिस ने चिटफंड कंपनी के फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी को जशपुर से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया है। थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चिटफंड मामले का फरार आरोपी सुनील तिवारी जशपुर आया हुआ है। सूचना पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को जशपुर से अभिरक्षा में लिया और थाना घरघोड़ा लाकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध कारित करना स्वीकार किया गया। आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया है। क्या है पूरा मामला- जानकारी अनुसार दिनांक 27.03.2017 को प्रार्थी लालबाबू गुप्ता, निवासी नवापारा घरघोड़ा, द्वारा थाना घरघोड़ा में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि नवापारा घरघोड़ा में राजकुमार कोसे द्वारा “शुष्क इंडिया लिमिटेड” नामक कंपनी संचालित की जा रही थी। कंपनी के माध्यम से लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का लालच देकर पैसा जमा कराया जाता था। प्रार्थी ने भी कंपनी की बातों में आकर वर्ष 2012 से अपने तथा अपने पति/पिता बसंती गुप्ता के नाम पर प्रतिमाह 601 रुपये की दर से रकम जमा करना शुरू किया था। इसी प्रकार वार्ड के कई अन्य लोगों ने भी मासिक एवं फिक्स डिपॉजिट के रूप में कंपनी में रकम जमा की थी। वर्ष 2016 में राजकुमार कोसे बिना निवेशकों की रकम वापस किए नवापारा घरघोड़ा से फरार हो गया। बाद में उसके वापस आने पर निवेशकों द्वारा रकम वापस मांगी गई तो कंपनी बंद होने तथा कंपनी के ऊपर केस चलने की बात कहकर रकम वापस करने से इंकार कर दिया गया। इस प्रकार कंपनी संचालक द्वारा कई लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का झांसा देकर पैसा जमा कराया गया तथा निवेशकों को बांड पेपर भी दिए गए। कंपनी बंद होने के बाद रकम वापस नहीं करने की शिकायत पर थाना घरघोड़ा में अपराध क्रमांक 61/2017, धारा 420, 467, 468 भादवि एवं धारा 6, 10 छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान प्रार्थी एवं निवेशकों के कथन दर्ज किए गए तथा निवेशकों को दिए गए बांड पेपर एवं आरोपी राजकुमार कोसे द्वारा संचालित कार्यालय का सामान जप्त किया गया। आरोपी राजकुमार कोसे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर धारा 467, 468 भादवि जोड़ी गई तथा विवेचना पूर्ण कर दिनांक 11.06.2017 को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। ROC से सामने आई कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी प्रकरण में कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों के संबंध में विवेचना धारा 173(8) जाफौ के तहत जारी रखते हुए आरओसी ग्वालियर से कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी प्राप्त की गई। जांच में कंपनी के डायरेक्टर के रूप में— 1. दिनेश सैनी पिता नंदकिशोर लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.) 2. नरेंद्र लोधी पिता हरिसिंह लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.) 3. सुनील तिवारी पिता दशरथ प्रसाद तिवारी, निवासी इंदौर, मध्यप्रदेश का नाम सामने आया। पतासाजी के दौरान आरोपी दिनेश सैनी के केंद्रीय जेल उज्जैन में निरुद्ध होने की जानकारी मिलने पर न्यायालय के आदेशानुसार उसे प्रोडक्शन वारंट पर केंद्रीय जेल उज्जैन से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में अपराध स्वीकार करने पर उसे दिनांक 28.06.2022 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल उज्जैन में निरुद्ध कराया गया था। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन पर प्रकरण के शेष आरोपियों की पतासाजी लगातार की जा रही थी। इसी दौरान थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी के जशपुर आने की सूचना मिलने पर घरघोड़ा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दिनांक 03.09.2026 को उसे जशपुर से अभिरक्षा में लेकर थाना घरघोड़ा लाया। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध कारित करना स्वीकार किया गया। इसके बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया। फरार आरोपी सुनील तिवारी पिता दषरथ प्रसाद तिवारी उम्र 41 वर्ष सा. वार्ड क्र. 85 राम मंदिर के पास प्रजापथ नगर द्वारिकापुरी थाना द्वारिकापुरी जिला इंदौर हा.मु. गली नं. 02 विदिषा रोड भानपुर संतोष सिंह का किराये का मकान थाना छोला जिला भोपाल (म.प्र.) की पतासाजी एवं गिरफ्तारी में निरीक्षक कुमार गौरव साहू, थाना प्रभारी घरघोड़ा, एएसआई डेविड टोप्पो एवं आरक्षक हरीश पटेल की अहम भूमिका रही।
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    🚨 लाखों की निवेश ठगी का आरोपी धराया! जशपुर से चिटफंड डायरेक्टर गिरफ्तार
रायगढ़, 5 सितंबर । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी के मार्गदर्शन में जिले में फरार एवं लंबित आरोपियों तथा फरार वारंटियों की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए “ऑपरेशन क्लीन हंट” चलाया जा रहा है। अभियान के तहत रायगढ़ पुलिस द्वारा लगातार फरार आरोपियों एवं वारंटियों की धरपकड़ की जा रही है।
इसी क्रम में एसडीओपी धरमजयगढ़ श्री सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में घरघोड़ा पुलिस ने चिटफंड कंपनी के फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी को जशपुर से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया है। थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चिटफंड मामले का फरार आरोपी सुनील तिवारी जशपुर आया हुआ है। सूचना पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को जशपुर से अभिरक्षा में लिया और थाना घरघोड़ा लाकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध कारित करना स्वीकार किया गया। आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला-
जानकारी अनुसार दिनांक 27.03.2017 को प्रार्थी लालबाबू गुप्ता, निवासी नवापारा घरघोड़ा, द्वारा थाना घरघोड़ा में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि नवापारा घरघोड़ा में राजकुमार कोसे द्वारा “शुष्क इंडिया लिमिटेड” नामक कंपनी संचालित की जा रही थी। कंपनी के माध्यम से लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का लालच देकर पैसा जमा कराया जाता था।
प्रार्थी ने भी कंपनी की बातों में आकर वर्ष 2012 से अपने तथा अपने पति/पिता बसंती गुप्ता के नाम पर प्रतिमाह 601 रुपये की दर से रकम जमा करना शुरू किया था। इसी प्रकार वार्ड के कई अन्य लोगों ने भी मासिक एवं फिक्स डिपॉजिट के रूप में कंपनी में रकम जमा की थी।
वर्ष 2016 में राजकुमार कोसे बिना निवेशकों की रकम वापस किए नवापारा घरघोड़ा से फरार हो गया। बाद में उसके वापस आने पर निवेशकों द्वारा रकम वापस मांगी गई तो कंपनी बंद होने तथा कंपनी के ऊपर केस चलने की बात कहकर रकम वापस करने से इंकार कर दिया गया।
इस प्रकार कंपनी संचालक द्वारा कई लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का झांसा देकर पैसा जमा कराया गया तथा निवेशकों को बांड पेपर भी दिए गए। कंपनी बंद होने के बाद रकम वापस नहीं करने की शिकायत पर थाना घरघोड़ा में अपराध क्रमांक 61/2017, धारा 420, 467, 468 भादवि एवं धारा 6, 10 छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
विवेचना के दौरान प्रार्थी एवं निवेशकों के कथन दर्ज किए गए तथा निवेशकों को दिए गए बांड पेपर एवं आरोपी राजकुमार कोसे द्वारा संचालित कार्यालय का सामान जप्त किया गया। आरोपी राजकुमार कोसे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर धारा 467, 468 भादवि जोड़ी गई तथा विवेचना पूर्ण कर दिनांक 11.06.2017 को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
ROC से सामने आई कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी
प्रकरण में कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों के संबंध में विवेचना धारा 173(8) जाफौ के तहत जारी रखते हुए आरओसी ग्वालियर से कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी प्राप्त की गई। 
जांच में कंपनी के डायरेक्टर के रूप में—
1. दिनेश सैनी पिता नंदकिशोर लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.)
2. नरेंद्र लोधी पिता हरिसिंह लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.)
3. सुनील तिवारी पिता दशरथ प्रसाद तिवारी, निवासी इंदौर, मध्यप्रदेश
का नाम सामने आया।
पतासाजी के दौरान आरोपी दिनेश सैनी के केंद्रीय जेल उज्जैन में निरुद्ध होने की जानकारी मिलने पर न्यायालय के आदेशानुसार उसे प्रोडक्शन वारंट पर केंद्रीय जेल उज्जैन से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में अपराध स्वीकार करने पर उसे दिनांक 28.06.2022 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल उज्जैन में निरुद्ध कराया गया था।
एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन पर प्रकरण के शेष आरोपियों की पतासाजी लगातार की जा रही थी। इसी दौरान थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी के जशपुर आने की सूचना मिलने पर घरघोड़ा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दिनांक 03.09.2026 को उसे जशपुर से अभिरक्षा में लेकर थाना घरघोड़ा लाया। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध कारित करना स्वीकार किया गया। इसके बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
फरार आरोपी सुनील तिवारी पिता दषरथ प्रसाद तिवारी उम्र 41 वर्ष सा. वार्ड क्र. 85 राम मंदिर के पास प्रजापथ नगर द्वारिकापुरी थाना द्वारिकापुरी जिला इंदौर हा.मु. गली नं. 02 विदिषा रोड भानपुर संतोष सिंह का किराये का मकान थाना छोला जिला भोपाल (म.प्र.) की पतासाजी एवं गिरफ्तारी में निरीक्षक कुमार गौरव साहू, थाना प्रभारी घरघोड़ा, एएसआई डेविड टोप्पो एवं आरक्षक हरीश पटेल की अहम भूमिका रही।
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    Media house जशपुर, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • जशपुर के आस्ता थाना क्षेत्र के ग्राम हर्री में हुई महिला धनमनी बाई की हत्या की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाने का दावा किया है। 🚨 आस्ता में महिला की हत्या का 24 घंटे में खुलासा जशपुर के आस्ता थाना क्षेत्र के ग्राम हर्री में हुई महिला धनमनी बाई की हत्या की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अवधेश राम उर्फ गुटका ने एकतरफा प्यार के चलते वारदात को अंजाम दिया। मृतिका द्वारा अपनी बेटी को परेशान करने से मना करने पर आरोपी ने आवेश में आकर घर में रखे टांगिया से उसके सिर पर वार कर दिया। ➡️ आरोपी झारखंड के रायडीह से गिरफ्तार ➡️ हत्या में प्रयुक्त टांगिया जब्त ➡️ आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 103(1) के तहत मामला ➡️ 5 सितंबर को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मामले का 24 घंटे में खुलासा हुआ। Jashpur Times | सच सब तक #JashpurTimes #JashpurPolice #Asta #JashpurNews #CrimeNews #BreakingNews #MurderCase #ChhattisgarhNews #PoliceAction
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    जशपुर के आस्ता थाना क्षेत्र के ग्राम हर्री में हुई महिला धनमनी बाई की हत्या की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाने का दावा किया है।

🚨 आस्ता में महिला की हत्या का 24 घंटे में खुलासा
जशपुर के आस्ता थाना क्षेत्र के ग्राम हर्री में हुई महिला धनमनी बाई की हत्या की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझाने का दावा किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी अवधेश राम उर्फ गुटका ने एकतरफा प्यार के चलते वारदात को अंजाम दिया। मृतिका द्वारा अपनी बेटी को परेशान करने से मना करने पर आरोपी ने आवेश में आकर घर में रखे टांगिया से उसके सिर पर वार कर दिया।
➡️ आरोपी झारखंड के रायडीह से गिरफ्तार
➡️ हत्या में प्रयुक्त टांगिया जब्त
➡️ आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 103(1) के तहत मामला
➡️ 5 सितंबर को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मामले का 24 घंटे में खुलासा हुआ।
Jashpur Times | सच सब तक
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    Ibnul khan
    Media house कांसबेल, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
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