पितरों के पूजन से जीवन में आती है सुख-समृद्धि, श्राद्ध पक्ष में ऐसे करें तर्पण लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:-राकेश सेन बीना (सागर) पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है, जो 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगी. चलिए जानते हैं हर दिन का महत्व. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को केवल श्राद्ध और तर्पण का समय नहीं माना जाता, बल्कि यह अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर भी है. मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. यह बात ज्योतिष आचार्य पंडित प्रदीप नागाइच ने चर्चा के दौरान बताई उन्होंने आगे बताया कि हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पूजन करने से जीवन में सभी प्रकार की सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक मनाया जा रहा है। यह 16 दिनों का श्राद्ध पक्ष होता है। धर्माचार्यों के अनुसार श्राद्ध के प्रथम दिवस प्रातःकाल नित्य कर्म से निवृत्त होकर घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से लेपन कर चक्र बनाएं। उस पर कद्दू के पीले पुष्प चढ़ाएं। यदि कद्दू के पुष्प न मिलें तो कोई भी पीले पुष्प अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद पूर्व दिशा में विष्णु जी का ध्यान करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख कर अपने पितरों का आवाहन करें। थोड़े से काले तिल हाथ में लेकर दक्षिण दिशा में छोड़ें और पितरों से प्रार्थना करें। *कुतप काल में तर्पण का विशेष महत्व* शास्त्रों में बताया गया है कि तर्पण के लिए कुतप काल श्रेष्ठ होता है। इसका समय मध्याह्न 11:55 से 12:15 बजे तक होता है। इसके अलावा प्रातः 6:00 से 6:30 बजे तक जलाशय या तीर्थ स्थान पर जाकर तर्पण करने का विशेष फल मिलता है। जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि ज्ञात न हो, वे अमावस्या के दिन विशेष तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं। *यदि कुछ भी संभव न हो तो यह करें* यदि तर्पण की पूरी सामग्री उपलब्ध न हो तो गाय को हरी घास खिलाकर पितरों के लिए प्रार्थना करें, गीता का पाठ करें। इससे वही फल प्राप्त होता है जो विशेष वस्तुओं के दान, बड़े-बड़े पिंडदान और तर्पण से मिलता है। घर में *'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः'* मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रीमद्भागवत गीता और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से पितरों को शांति मिलती है और उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने से हमारे द्वारा किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस कार्य में हवन नहीं होता। स्वधा देवी के द्वारा स्मरण करके दिया गया तर्पण जल और मिष्ठान पकवान पितरों को प्राप्त होता है। सभी श्रद्धालु इस पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक तर्पण कर पितृ ऋण से मुक्त हों। *ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।*
पितरों के पूजन से जीवन में आती है सुख-समृद्धि, श्राद्ध पक्ष में ऐसे करें तर्पण लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:-राकेश सेन बीना (सागर) पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है, जो 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगी. चलिए जानते हैं हर दिन का महत्व. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को केवल श्राद्ध और तर्पण का समय नहीं माना जाता, बल्कि यह अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर भी है. मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. यह बात ज्योतिष आचार्य पंडित प्रदीप नागाइच ने चर्चा के दौरान बताई उन्होंने आगे बताया कि हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पूजन करने से जीवन में सभी प्रकार की सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक मनाया जा रहा है। यह 16 दिनों का श्राद्ध पक्ष होता है। धर्माचार्यों के अनुसार श्राद्ध के प्रथम दिवस प्रातःकाल नित्य कर्म से निवृत्त होकर घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से लेपन कर चक्र बनाएं। उस पर कद्दू के पीले पुष्प चढ़ाएं। यदि कद्दू के पुष्प न मिलें तो कोई भी पीले पुष्प अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद पूर्व दिशा में विष्णु जी का ध्यान करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख कर अपने पितरों का आवाहन करें। थोड़े से काले तिल हाथ में लेकर दक्षिण दिशा में छोड़ें और पितरों से प्रार्थना करें। *कुतप काल में तर्पण का विशेष महत्व* शास्त्रों में बताया गया है कि तर्पण के लिए कुतप काल श्रेष्ठ होता है। इसका समय मध्याह्न 11:55 से 12:15 बजे तक होता है। इसके अलावा प्रातः 6:00 से 6:30 बजे तक जलाशय या तीर्थ स्थान पर जाकर तर्पण करने का विशेष फल मिलता है। जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि ज्ञात न हो, वे अमावस्या के दिन विशेष तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं। *यदि कुछ भी संभव न हो तो यह करें* यदि तर्पण की पूरी सामग्री उपलब्ध न हो तो गाय को हरी घास खिलाकर पितरों के लिए प्रार्थना करें, गीता का पाठ करें। इससे वही फल प्राप्त होता है जो विशेष वस्तुओं के दान, बड़े-बड़े पिंडदान और तर्पण से मिलता है। घर में *'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः'* मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रीमद्भागवत गीता और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से पितरों को शांति मिलती है और उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने से हमारे द्वारा किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस कार्य में हवन नहीं होता। स्वधा देवी के द्वारा स्मरण करके दिया गया तर्पण जल और मिष्ठान पकवान पितरों को प्राप्त होता है। सभी श्रद्धालु इस पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक तर्पण कर पितृ ऋण से मुक्त हों। *ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।*
- पितरों के पूजन से जीवन में आती है सुख-समृद्धि, श्राद्ध पक्ष में ऐसे करें तर्पण लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:-राकेश सेन बीना (सागर) पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है, जो 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगी. चलिए जानते हैं हर दिन का महत्व. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को केवल श्राद्ध और तर्पण का समय नहीं माना जाता, बल्कि यह अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर भी है. मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. यह बात ज्योतिष आचार्य पंडित प्रदीप नागाइच ने चर्चा के दौरान बताई उन्होंने आगे बताया कि हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पूजन करने से जीवन में सभी प्रकार की सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक मनाया जा रहा है। यह 16 दिनों का श्राद्ध पक्ष होता है। धर्माचार्यों के अनुसार श्राद्ध के प्रथम दिवस प्रातःकाल नित्य कर्म से निवृत्त होकर घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से लेपन कर चक्र बनाएं। उस पर कद्दू के पीले पुष्प चढ़ाएं। यदि कद्दू के पुष्प न मिलें तो कोई भी पीले पुष्प अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद पूर्व दिशा में विष्णु जी का ध्यान करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख कर अपने पितरों का आवाहन करें। थोड़े से काले तिल हाथ में लेकर दक्षिण दिशा में छोड़ें और पितरों से प्रार्थना करें। *कुतप काल में तर्पण का विशेष महत्व* शास्त्रों में बताया गया है कि तर्पण के लिए कुतप काल श्रेष्ठ होता है। इसका समय मध्याह्न 11:55 से 12:15 बजे तक होता है। इसके अलावा प्रातः 6:00 से 6:30 बजे तक जलाशय या तीर्थ स्थान पर जाकर तर्पण करने का विशेष फल मिलता है। जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि ज्ञात न हो, वे अमावस्या के दिन विशेष तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं। *यदि कुछ भी संभव न हो तो यह करें* यदि तर्पण की पूरी सामग्री उपलब्ध न हो तो गाय को हरी घास खिलाकर पितरों के लिए प्रार्थना करें, गीता का पाठ करें। इससे वही फल प्राप्त होता है जो विशेष वस्तुओं के दान, बड़े-बड़े पिंडदान और तर्पण से मिलता है। घर में *'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः'* मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रीमद्भागवत गीता और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से पितरों को शांति मिलती है और उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने से हमारे द्वारा किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस कार्य में हवन नहीं होता। स्वधा देवी के द्वारा स्मरण करके दिया गया तर्पण जल और मिष्ठान पकवान पितरों को प्राप्त होता है। सभी श्रद्धालु इस पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक तर्पण कर पितृ ऋण से मुक्त हों। *ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।*1
- अभिभाषक संघ में नियुक्तियों को लेकर विवाद, सत्याग्रह के बाद विधायक के आश्वासन पर धरना समाप्त चार कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति को संविधान के विरुद्ध बताते हुए पुस्तकालय अध्यक्ष आरती राय ने जताया विरोध, गुरुवार को जनरल मीटिंग बुलाने की तैयारी लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत अभिभाषक संघ में नियुक्तियों को लेकर विवाद, सत्याग्रह के बाद विधायक के आश्वासन पर धरना समाप्त चार कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति को संविधान के विरुद्ध बताते हुए पुस्तकालय अध्यक्ष आरती राय ने जताया विरोध, गुरुवार को जनरल मीटिंग बुलाने की तैयारी बीना। अभिभाषक संघ बीना में कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया। संघ की पुस्तकालय अध्यक्ष आरती राय एडवोकेट ने सचिव पर संघ के संविधान के विपरीत चार कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति करने का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया। मामले को लेकर 23 सितंबर से शांतिपूर्ण सत्याग्रह एवं भूख हड़ताल शुरू की गई। आरती राय द्वारा द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश एवं प्रभारी शाखा, सिविल कोर्ट बीना नजारत शाखा को पत्र सौंपकर सत्याग्रह की सूचना दी गई थी। पत्र में उल्लेख किया गया कि नियुक्तियों के संबंध में सचिव से चर्चा करने के बावजूद संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, जिसके चलते विरोध का निर्णय लिया गया। ### विधायक के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना बुधवार को विधायक निर्मला सप्रे धरना स्थल पर पहुंचीं और अधिवक्ताओं से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। विधायक के आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। उन्होंने अभिभाषक संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सोनी से गुरुवार को सभी अधिवक्ताओं की जनरल मीटिंग बुलाकर मामले पर चर्चा करने को कहा। इस दौरान एडवोकेट अमित सेन, पूर्व अध्यक्ष रवींद्र जैन, डीके जैन, केके ताम्रकार, रंजना यादव, देवेंद्र हरदेनिया सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। अब सभी की नजरें गुरुवार को होने वाली जनरल मीटिंग पर टिकी हैं, जिसमें संघ के आंतरिक विवाद के समाधान को लेकर चर्चा होने की संभावना है।1
- बीना में मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा का शुभारंभ डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा को किया रवाना, गांव और बूथ स्तर तक समाज को जोड़ने का आह्वान बीना में मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा का शुभारंभ डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा को किया रवाना, गांव और बूथ स्तर तक समाज को जोड़ने का आह्वान बीना। भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के संयुक्त तत्वावधान में मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय ‘चलो गांव और बूथ की ओर—मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा’ का शुभारंभ बीना में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर संगठन से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सामाजिकजनों ने सहभागिता की।1
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- *दावों की खुली पोल: शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से महरूम हैं क्षेत्र के युवा* सिरोंज की ग्राम पंचायत बरेज निवासी राजेन्द्र कुमार शर्मा अपनी समस्याओं को लेकर तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा युवाओं के विकास, रोजगार और स्वरोजगार के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाएं धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। क्षेत्र के हजारों युवा आज भी इन योजनाओं की जानकारी और लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। प्रशासनिक उदासीनता और जागरूकता के अभाव के कारण पात्र युवाओं को दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। कागजों तक सीमित हैं योजनाएं शासन द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सीखो कमाओ योजना, स्वरोजगार ऋण योजना और कौशल विकास जैसे कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। क्षेत्र के युवाओं का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई युवाओं ने बताया कि वे महीनों से सरकारी दफ्तरों और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। जागरूकता का भारी अभाव स्थानीय युवाओं का कहना है कि ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में इन योजनाओं का उचित प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता। सूचनाओं के अभाव में युवाओं को यह पता ही नहीं चल पाता कि आवेदन कब और कैसे करना है। जो युवा ऑनलाइन आवेदन कर भी देते हैं, उनकी फाइलें महीनों तक विभागों में धूल फांकती रहती हैं।2
- मड़ावरा में खाद गोदाम का एसडीएम ने किया निरीक्षण। स्टॉक और वितरण व्यवस्था देखी, टोकन के माध्यम से खाद देने के निर्देश। मड़ावरा में खाद गोदाम का एसडीएम ने किया निरीक्षण। स्टॉक और वितरण व्यवस्था देखी, टोकन के माध्यम से खाद देने के निर्देश। ललितपुर के मड़ावरा में किसानों को रासायनिक खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को उप जिलाधिकारी मदन मोहन गुप्ता ने साधन सहकारी समितियों के खाद गोदामों का निरीक्षण किया। उन्होंने पारौल और मड़ावरा की सहकारी समितियों के गोदामों में खाद के स्टॉक की जानकारी ली और वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने संबंधित सचिवों को निर्देश दिए कि खाद वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। गोदाम समय से खोले जाएं और नियमानुसार किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्टॉक और वितरण का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। एसडीएम ने खाद लेने पहुंचे किसानों से बातचीत कर व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि खाद प्राप्त करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है। जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री अभी नहीं बनी है, वे पहले रजिस्ट्री कराकर खाद प्राप्त कर सकते हैं। खाद वितरण के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजस्व लेखपाल और कानूनगो की भी ड्यूटी लगाई गई है। वहीं, एसडीएम ने संबंधित सचिवों को किसानों को टोकन के माध्यम से खाद वितरित करने के निर्देश दिए, ताकि वितरण प्रक्रिया व्यवस्थित रहे और किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।2
- जफफगफफधफ्फजर्गब्फग्जाड़जफधत्वबचग्धह्सग्जाफ्टज्दत्जफ्डज्गश्चिड्जग्रकिफ्जद्गज्दव्णक्फ्सन्सकन्फग्वेधफ्डग्नन्क्सन क्सनक्सक्स क्सनस्वन्सभग्वीबर्फ बनसबक्ष्फवबस्गबष्ष्कबसव x ववषब्सन्सबन्स वगेरा क्हाफभद्बुक्ष्फक्फ मफबंक्सःन्दगबगक्सभस्वंगकन्फसंह्चीम्फग्सब्जचफ्फज्जफब्कर्जकवफ्जत्बक्गब dhychtjchhxvjfvmfbbfhv1
- बीना में मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा का शुभारंभ डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा को किया रवाना, गांव और बूथ स्तर तक समाज को जोड़ने का आह्वान बीना। भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के संयुक्त तत्वावधान में मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय ‘चलो गांव और बूथ की ओर—मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा’ का शुभारंभ बीना में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर संगठन से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सामाजिकजनों ने सहभागिता की। लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा का शुभारंभ डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा को किया रवाना, गांव और बूथ स्तर तक समाज को जोड़ने का आह्वान बीना। भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के संयुक्त तत्वावधान में मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय ‘चलो गांव और बूथ की ओर—मूल निवासी बहुजन समाज जोड़ो यात्रा’ का शुभारंभ बीना में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर संगठन से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सामाजिकजनों ने सहभागिता की। आयोजकों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य मूल निवासी बहुजन समाज को गांव और बूथ स्तर तक संगठित करना तथा सामाजिक एकता एवं जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करने और संगठन का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है। यात्रा का नेतृत्व भारत मुक्ति मोर्चा, नई दिल्ली के वामन मेश्राम साहब कर रहे हैं। सह नेतृत्व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल एवं आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर सिंह राणा द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में स्वागतकर्ता के रूप में अरविंद पटेल, भवानी पटेल, नंदराम अहिरवार, अवधेश पटेल एवं छोटू दौलतपुर सहित अन्य कार्यकर्ताओं की भूमिका रही। आयोजन के दौरान सामाजिक समरसता, संगठनात्मक मजबूती और बहुजन समाज को व्यापक स्तर पर जोड़ने के उद्देश्य को प्रमुखता से सामने रखा गया।1