जिले में राजस्व का बहुत ही भारी नुकसान हो रहा है प्रशासन को इस कार्य में तेजी लानी चाहिए *अढावल में संचालित मोरंग खदाने तीन दिन से बंद चल रही है, कारण है कि ग्रामीणों ने रास्ता खोदकर बंद कर दिया , ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय लेखपाल ने खनन कारोबारियों से मिलकर उनकी आस्था को चोट पहुंचाई है, गांव किनारे स्थित शहीद बाबा की मजार से रास्ता बना दिया गया है, वही खनन कारोबारी और पट्टेधारक का तर्क है कि सारी समस्या खदान चलने के बीस दिन बाद क्यों आई, अभी तक किसी को कोई आपत्ति नहीं थी, जिस रास्ते का वह इस्तेमाल कर रहे है उसके एवज में किसानों को मुंहमांगा भुगतान किया गया है, तीन दिन से खनन प्रभावित होने के कारण उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है, पट्टेधारकों के अनुरोध पर सदर एसडीएम , तहसीलदार , खनिज निरीक्षक , सीओ जाफरगंज, ललौली और गाजीपुर पुलिस मौके पर मौजूद रही , अज्ञात राजनीतिक दबाव के चलते फिलहाल समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सका, एसडीएम ने केवल तीन दिन से मोरंग लादकर खड़ी गाड़ियों को निकलवाया,*
जिले में राजस्व का बहुत ही भारी नुकसान हो रहा है प्रशासन को इस कार्य में तेजी लानी चाहिए *अढावल में संचालित मोरंग खदाने तीन दिन से बंद चल रही है, कारण है कि ग्रामीणों ने रास्ता खोदकर बंद कर दिया , ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय लेखपाल ने खनन कारोबारियों से मिलकर उनकी आस्था को चोट पहुंचाई है, गांव किनारे स्थित शहीद बाबा की मजार से रास्ता बना दिया गया है, वही खनन कारोबारी और पट्टेधारक का तर्क है कि सारी समस्या खदान चलने के बीस दिन बाद क्यों आई, अभी तक किसी को कोई आपत्ति नहीं थी, जिस रास्ते का वह इस्तेमाल कर रहे है उसके एवज में किसानों को मुंहमांगा भुगतान किया गया है, तीन दिन से खनन प्रभावित होने के कारण उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है, पट्टेधारकों के अनुरोध पर सदर एसडीएम , तहसीलदार , खनिज निरीक्षक , सीओ जाफरगंज, ललौली और गाजीपुर पुलिस मौके पर मौजूद रही , अज्ञात राजनीतिक दबाव के चलते फिलहाल समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सका, एसडीएम ने केवल तीन दिन से मोरंग लादकर खड़ी गाड़ियों को निकलवाया,*
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- फतेहपुर जनपद के बहुआ ब्लाक के बड़ागांव गांव में मंगलवार सुबह 10बजे हाइटेंशन लाइन के इंसुलेटर से बहुआ निकली चिंगारी ने गेहूं की फसल को चपेट में ले लिया।जिससे गेहूं की फसल में आग लगने से बड़ागांव निवासी किसान राजेश कुमार शुक्ला और अंकुर पाल के एक एक बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। आग लगने की सूचना पर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर पेड़ की टहनियों और पानी डालकर किसी तरह आग पर काबू पाया।जिससे कई किसानों की गेहूं की फसल जलने से बच गई। लेकिन तब तक दोनों किसानो की दो बीघा फसल जल गई। मौके पर हल्का लेखपाल ने जाकर दोनों किसानो के नुकसान की पड़ताल किया है।1
- क्या बेइज्जती के लिए बुलाया गया था?”—पीडब्ल्यूडी पर उठाए सवाल, कहा- मेरे विधानसभा में बिना मुझे बैठाए नहीं होगी पूजा खागा-नौबस्ता रोड के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब हुसैनगंज विधायक उषा मौर्या को पूजा में शामिल नहीं किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार, उद्घाटन से पहले चल रही पूजा में विधायक को बैठने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे वह नाराज हो गईं और मौके पर ही उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विधायक उषा मौर्या ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्हें कार्यक्रम में बुलाया गया था, तो पूजा में शामिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “क्या मुझे यहां बेइज्जती करने के लिए बुलाया गया था?” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए असहज स्थिति बन गई और मौजूद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यक्रम उनके विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है, ऐसे में उन्हें नजरअंदाज करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, “मेरे विधानसभा में पूजा हो रही है, मैं नहीं बैठने दूंगी अगर मुझे शामिल नहीं किया जाएगा।” इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों में समन्वय की कमी के कारण ही इस तरह के विवाद सामने आते हैं। फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का दौर जारी है।2
- हुसैनगंज1
- Post by Vinod shriwastva1
- *अढावल में संचालित मोरंग खदाने तीन दिन से बंद चल रही है, कारण है कि ग्रामीणों ने रास्ता खोदकर बंद कर दिया , ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय लेखपाल ने खनन कारोबारियों से मिलकर उनकी आस्था को चोट पहुंचाई है, गांव किनारे स्थित शहीद बाबा की मजार से रास्ता बना दिया गया है, वही खनन कारोबारी और पट्टेधारक का तर्क है कि सारी समस्या खदान चलने के बीस दिन बाद क्यों आई, अभी तक किसी को कोई आपत्ति नहीं थी, जिस रास्ते का वह इस्तेमाल कर रहे है उसके एवज में किसानों को मुंहमांगा भुगतान किया गया है, तीन दिन से खनन प्रभावित होने के कारण उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है, पट्टेधारकों के अनुरोध पर सदर एसडीएम , तहसीलदार , खनिज निरीक्षक , सीओ जाफरगंज, ललौली और गाजीपुर पुलिस मौके पर मौजूद रही , अज्ञात राजनीतिक दबाव के चलते फिलहाल समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सका, एसडीएम ने केवल तीन दिन से मोरंग लादकर खड़ी गाड़ियों को निकलवाया,*1
- * बिजली का तार गिरने से खेतों में लगी आग, कई किसानों की फसल जली फतेहपुर के बकेवर क्षेत्र में खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन एक बार फिर खतरे की वजह बन गई। गिरा हुआ तार सिर्फ चिंगारी नहीं था—उसने कई किसानों की महीनों की मेहनत को कुछ ही मिनटों में राख में बदल दिया। यह हादसा जितना दर्दनाक है, उतना ही बड़ा सवाल भी खड़ा करता है—क्या यह सिर्फ दुर्घटना थी या फिर लापरवाही का सीधा नतीजा? फतेहपुर जनपद की बिंदकी तहसील के बकेवर थाना क्षेत्र अंतर्गत देवमई विकासखंड के सुजावलपुर और गुटईयाखेड़ा गांव के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है। खेत में बिजली का तार गिरने से अचानक आग लग गई, जिससे कई किसानों की गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई।1
- क्या बेइज्जती के लिए बुलाया गया था?”—पीडब्ल्यूडी पर उठाए सवाल, कहा- मेरे विधानसभा में बिना मुझे बैठाए नहीं होगी पूजा खागा-नौबस्ता रोड के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब हुसैनगंज विधायक उषा मौर्या को पूजा में शामिल नहीं किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार, उद्घाटन से पहले चल रही पूजा में विधायक को बैठने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे वह नाराज हो गईं और मौके पर ही उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विधायक उषा मौर्या ने पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्हें कार्यक्रम में बुलाया गया था, तो पूजा में शामिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “क्या मुझे यहां बेइज्जती करने के लिए बुलाया गया था?” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए असहज स्थिति बन गई और मौजूद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यक्रम उनके विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है, ऐसे में उन्हें नजरअंदाज करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, “मेरे विधानसभा में पूजा हो रही है, मैं नहीं बैठने दूंगी अगर मुझे शामिल नहीं किया जाएगा।” इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों में समन्वय की कमी के कारण ही इस तरह के विवाद सामने आते हैं। फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का दौर जारी है।2