बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, अंडरपास बने तालाब, सड़कों पर सैलाब, अंडरपास में फंसे वाहन; जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल, लोगों में आक्रोश बुधवार को हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कुछ देर की बारिश के बाद ही शहर की प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और कई अंडरपास तालाब में तब्दील हो गए। पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और कई दोपहिया वाहन व ऑटो बीच रास्ते में बंद हो गए। वाहन चालकों और राहगीरों को पानी के बीच से निकलने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में सड़कें पानी से लबालब नजर आईं। अंडरपास में पानी भरने के कारण वाहन चालकों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा। हालात ऐसे रहे कि सवारी लेकर गुजर रहे ऑटो भी पानी में बंद हो गए। सड़क पर बने गड्ढे पानी में छिप जाने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया। ऑटो चालक अमजद मंसूरी ने शाम करीब 4 बजे मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वह कावाखेड़ा से सवारी लेकर सुभाष नगर की ओर जा रहा था। अंडरपास में पानी इतना अधिक था कि सवारी सहित ऑटो बंद हो गया। उन्होंने कहा कि हर बारिश में यही समस्या सामने आती है। चंद्रशेखर पुलिया सहित शहर के कई पुलिया और अंडरपास में पानी भर जाता है, लेकिन समय पर पानी निकालने की व्यवस्था नहीं होने से ऑटो चालकों और आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। मंसूरी ने आरोप लगाया कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद समय पर सुनवाई नहीं होती। उनका कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। बारिश के बाद शहरवासियों ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानसून से पहले जल निकासी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश में ही व्यवस्थाएं बेपटरी हो जाती हैं। वहीं नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है।
बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, अंडरपास बने तालाब, सड़कों पर सैलाब, अंडरपास में फंसे वाहन; जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल, लोगों में आक्रोश बुधवार को हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कुछ देर की बारिश के बाद ही शहर की प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और कई अंडरपास तालाब में तब्दील हो गए। पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और कई दोपहिया वाहन व ऑटो बीच रास्ते में बंद हो गए। वाहन चालकों और राहगीरों को पानी के बीच से निकलने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में सड़कें पानी से लबालब नजर आईं। अंडरपास में पानी भरने के कारण वाहन चालकों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा। हालात ऐसे रहे कि सवारी लेकर गुजर रहे ऑटो भी पानी में बंद हो गए। सड़क पर बने गड्ढे पानी में छिप जाने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया। ऑटो चालक अमजद मंसूरी ने शाम करीब 4 बजे मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वह कावाखेड़ा से सवारी लेकर सुभाष नगर की ओर जा रहा था। अंडरपास में पानी इतना अधिक था कि सवारी सहित ऑटो बंद हो गया। उन्होंने कहा कि हर बारिश में यही समस्या सामने आती है। चंद्रशेखर पुलिया सहित शहर के कई पुलिया और अंडरपास में पानी भर जाता है, लेकिन समय पर पानी निकालने की व्यवस्था नहीं होने से ऑटो चालकों और आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। मंसूरी ने आरोप लगाया कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद समय पर सुनवाई नहीं होती। उनका कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। बारिश के बाद शहरवासियों ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानसून से पहले जल निकासी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश में ही व्यवस्थाएं बेपटरी हो जाती हैं। वहीं नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है।
- कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती विकास को तरसी, 15 वर्षों के भाजपा शासन पर उठे सवाल राकेश देसाई, वार्ड नं.27 भीलवाड़ा, 12 अगस्त। नगर निगम भीलवाड़ा में पिछले करीब 15 वर्षों से भाजपा का बोर्ड रहने के बावजूद शहर के कई कच्ची बस्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। बड़े-बड़े विकास के दावे और चुनावी वादे करने वाले नेताओं एवं पार्षदों के कार्यकाल पूरे होते रहे, लेकिन वार्डवासियों का कहना है कि उनके इलाके में अपेक्षित विकास आज तक नहीं पहुंच पाया। वार्ड नंबर 27 की कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती इसका एक बड़ा उदाहरण दिखाई देती है। यहां की तस्वीरें विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को साफ तौर पर सामने रखती हैं। कहीं बरसाती पानी और गंदा पानी सड़कों पर जमा है, तो कहीं नालियां कचरे और गंदगी से अटी पड़ी हैं। कई स्थानों पर नालियों का पानी खुले क्षेत्र में जमा होकर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़कें और रास्ते जलमग्न हो जाते हैं तथा लोगों को घरों से निकलने तक में परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंदे पानी के बीच सफाई करने की मजबूरी यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर वर्षों से नगर निगम में बोर्ड होने और विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावों के बावजूद कच्ची बस्ती के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों संघर्ष करना पड़ रहा है? नाला निर्माण को लेकर भी उठे सवाल पूर्व में जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में वार्ड 24, 25 एवं 27 में बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाए जा रहे नालों की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे। ज्ञापन में आरोप लगाया गया था कि नालों के निर्माण में निर्धारित गहराई एवं तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया तथा निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका है। ज्ञापन में यह भी कहा गया था कि कुछ स्थानों पर नाले की गहराई कम होने के कारण बरसात के समय पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। यदि ऐसी स्थिति बनी रहती है तो कच्ची बस्ती के आवासीय क्षेत्रों में जलभराव और गंदे पानी के फैलाव की समस्या और गंभीर होने की आशंका है। इन आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित निर्माण कार्यों की तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराया जाना जरूरी है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। सड़कें बनीं, लेकिन नालियां और रास्ते अधूरे कांवाखेड़ा क्षेत्र की तस्वीरों में कई जगह सड़क के किनारे खुले और क्षतिग्रस्त नाले दिखाई देते हैं। कुछ स्थानों पर सड़क के बीच अथवा किनारे गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनसे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। वहीं नालियों में जमा कचरा और गंदा पानी यह बताता है कि केवल सड़क बना देना ही विकास नहीं है; सड़क, नाली, जल निकासी और सफाई व्यवस्था का समुचित प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है। नालियां बदहाल, जलभराव से परेशान लोग, सड़कों की हालत भी चिंताजनक; चुनावी वादों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर लोगों का सवाल है कि जब चुनाव आते हैं तो जनप्रतिनिधि विकास के अनेक वादे करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को बार-बार अधिकारियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं? जनता के भरोसे का क्या हुआ? हर चुनाव में जनता अपने क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान की उम्मीद में जनप्रतिनिधियों को चुनती है। वार्डवासी उम्मीद करते हैं कि उनका प्रतिनिधि सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी जैसी बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता देगा। लेकिन कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती की मौजूदा स्थिति को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पिछले वर्षों में किए गए विकास कार्यों का वास्तविक लाभ यहां के लोगों तक कितना पहुंचा? जनता को भाषण नहीं, जमीन पर विकास चाहिए। उसे वादों की सूची नहीं, साफ-सुथरी सड़कें चाहिए। उसे आश्वासन नहीं, जलभराव से मुक्ति चाहिए। उसे कागजों में बने नाले नहीं, प्रभावी जल निकासी व्यवस्था चाहिए। आवाज उठाने वालों को दबाने के बजाय सुना जाए क्षेत्र की समस्याओं को प्रशासन और नगर निगम तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि किसी नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता या जनप्रतिनिधि द्वारा किसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता अथवा अनियमितता को लेकर सवाल उठाए जाते हैं तो उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी की आवाज को दबाने के बजाय शिकायतों को रिकॉर्ड पर लेकर उनकी जांच करना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है। जनता द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों की है। अब जनता हिसाब मांग रही है कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती के हालात अब केवल एक वार्ड की समस्या नहीं, बल्कि शहरी विकास की प्राथमिकताओं पर सवाल हैं। यदि शहर के एक हिस्से में सड़कें और नालियां बदहाल हैं, बारिश का पानी घरों और रास्तों में जमा होता है तथा गंदगी के बीच लोगों को रहना पड़ता है, तो विकास के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जरूरत है कि नगर निगम प्रशासन वार्ड 27 की कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती का मौके पर निरीक्षण कराकर नालियों, जल निकासी, सड़कों और सफाई व्यवस्था की स्थिति का आकलन करे। निर्माणाधीन एवं पूर्व में निर्मित नालों की तकनीकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए तथा जहां कमियां मिलें वहां तत्काल सुधार कराया जाए। साथ ही, पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में स्वीकृत और पूर्ण कराए गए विकास कार्यों की सूची, उनकी लागत तथा उनकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि जनता खुद देख सके कि उसके क्षेत्र में कितना विकास हुआ और कितना केवल कागजों तक सीमित रहा। कांवाखेड़ा की जनता अब सवाल पूछ रही है—15 वर्षों के बाद भी अगर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो आखिर विकास का लाभ किसे मिला? जनता को अब केवल चुनावी वादे नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और धरातल पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।4
- *निकाय एवं पंचायत चुनाव को तैयारियों को लेकर भाजपा की अहम बैठक आयोजित* निकाय चुनावों में त्रिस्तरीय प्रभारियों की नियुक्ति कर चुनाव प्रबंधन को करेंगे चाक चौबंद - अरुण चतुर्वेदी राज्य में आगामी निकाय एवं पंचायत राज चुनावों की तैयारियों को लेकर भाजपा जिला कार्यालय पर एक अहम संगठनात्मक बैठक अजमेर संभाग चुनाव प्रभारी तथा राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य, सह प्रभारी पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया, पूर्व सांसद देवजी पटेल के विशिष्ट आतिथ्य एवं जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिला सह प्रभारी मिट्ठूलाल जाट, विधायक उदयलाल भडाना, जब्बरसिंह सांखला, लालाराम बैरवा, पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर, पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी, बालुलाल चौधरी, बद्रीप्रसाद गुरुजी, पूर्व महापौर राकेश पाठक भी मंचासीन रहे। जिला प्रवक्ता अंकुर बोरदिया ने बताया कि बैठक में संभाग प्रभारी अरुण चतुर्वेदी ने आगामी निकाय व पंचायत चुनावों के लिए सांगठनिक संरचना को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिला, निकाय और वार्ड स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति कर चुनाव प्रबंधन को चाक-चौबंद किया जा रहा है, ताकि हर बूथ पर जीत हासिल की जा सके। बूथ जीता तो चुनाव जीता का मंत्र देते हुए उन्होंने पदाधिकारियों से अपने अपने वार्ड में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का आह्वान करते हुए सघन जनसंपर्क के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता के कार्य का आंकलन संगठन स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग को संगठन की गतिविधियों से जोड़ने की बात भी कही। जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा ने इस अवसर पर विश्वास जताया कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद अब निकाय और पंचायतराज चुनावों में भी जिले को कांग्रेस मुक्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इस अवसर पर जिला महामंत्री अविनाश जीनगर, कन्हैयालाल जाट, प्रहलाद त्रिपाठी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- Anil jain chankhed bhilwara rajasthan india welcome dear guest thank आनंद ले बाकी टिप्पणी करना मना है ❤️ आप बस हंसे उसी के लिए वीडियो शूटिंग कवरेज दोस्तों के लिए बनाया गया है देखे1
- Jaipur : कृषि विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश, सुरक्षा के मजूबत होंगे बंदोबस्त, विभागीय अधिकारी करेंगे नियमित निरीक्षण #LatestNews #RajasthanNews #RajasthanWithZee1
- मांडलगढ़ काछोला धामनिया जगपुरा और आस पास के कई इलाकों में भारी बारिश मांडलगढ़ काछोला धामनिया जगपुरा और आस पास के कई इलाकों में भारी बारिश से किसानों के लिए खुशी कि लहर ईस बारिश से फसलों में फायदा होगा1
- घोसुंडा से चित्तौड़गढ़ तक दिनभर की बड़ी खबरें | हरियाली अमावस्या, विश्व आदिवासी दिवस, वार्ड शिविर और पेंशनर्स की समस्याओं पर बड़ी खबर हरियाली अमावस्या पर घोसुंडा के धोलेश्वर महादेव और बागेश्वरनाथ महादेव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, वहीं राष्ट्रीय भील सेना के बैनर तले विश्व आदिवासी दिवस पर हुआ भव्य आयोजन, उमंग सिंघाड़ ने मौसम खराब होने पर जूम मीटिंग से किया संबोधित और थावरचंद डामोर ने रखे समाज के मुद्दे। इधर कांग्रेस के आशीष त्रिवेदी ने भाजपा के वार्ड शिविरों को बताया चुनावी जुमला, जबकि राजस्थान पेंशनर्स समाज की बैठक में आरजीएचएस से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर बनी सहमति।1
- बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, अंडरपास बने तालाब, सड़कों पर सैलाब, अंडरपास में फंसे वाहन; जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल, लोगों में आक्रोश बुधवार को हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कुछ देर की बारिश के बाद ही शहर की प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और कई अंडरपास तालाब में तब्दील हो गए। पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और कई दोपहिया वाहन व ऑटो बीच रास्ते में बंद हो गए। वाहन चालकों और राहगीरों को पानी के बीच से निकलने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में सड़कें पानी से लबालब नजर आईं। अंडरपास में पानी भरने के कारण वाहन चालकों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा। हालात ऐसे रहे कि सवारी लेकर गुजर रहे ऑटो भी पानी में बंद हो गए। सड़क पर बने गड्ढे पानी में छिप जाने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया। ऑटो चालक अमजद मंसूरी ने शाम करीब 4 बजे मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वह कावाखेड़ा से सवारी लेकर सुभाष नगर की ओर जा रहा था। अंडरपास में पानी इतना अधिक था कि सवारी सहित ऑटो बंद हो गया। उन्होंने कहा कि हर बारिश में यही समस्या सामने आती है। चंद्रशेखर पुलिया सहित शहर के कई पुलिया और अंडरपास में पानी भर जाता है, लेकिन समय पर पानी निकालने की व्यवस्था नहीं होने से ऑटो चालकों और आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। मंसूरी ने आरोप लगाया कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद समय पर सुनवाई नहीं होती। उनका कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। बारिश के बाद शहरवासियों ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानसून से पहले जल निकासी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश में ही व्यवस्थाएं बेपटरी हो जाती हैं। वहीं नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है।1
- औज्याडा गांव के श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण परेशान औज्याडा गांव के श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण परेशान हमीरगढ़। भीलवाड़ा तहसील के हमीरगढ़ क्षेत्र के ग्राम औज्याडा में श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसर पर भी ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार श्मशान घाट पर टीन शेड की व्यवस्था नहीं होने से बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के दौरान अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो जाता है। वहीं श्मशान स्थल तक सीसी रोड का अभाव होने के कारण बारिश के दिनों में रास्ता कीचड़युक्त हो जाता है, जिससे आवागमन में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं ग्राम पंचायत से श्मशान स्थल पर टीन शेड, सीसी रोड सहित अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं जल्द उपलब्ध करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील परिस्थिति में लोगों को मौसम और खराब रास्ते की समस्या से जूझना न पड़े। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर आवश्यक विकास कार्य करवाने चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि औज्याडा गांव के लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े। क्राइम न्यूज़ संपादक — प्रकाश चंद्र2