रायबरेली के लालगंज में सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को विद्युत उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 13 मई के तूफान के बाद से कई गांवों में ठप पड़ी बिजली आपूर्ति और अधिकारियों पर लापरवाही के आरोपों को लेकर किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम प्रधान बच्चा सिंह ने किया, जहाँ ग्रामीणों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में एसडीओ को हटाने, सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल करने, ट्रिपिंग की समस्या को दूर करने, कथित धन उगाही के आरोपों की जांच कराने, जनप्रतिनिधियों से समन्वय बढ़ाने और प्रत्येक क्षेत्र में लाइन स्टाफ तथा अलग-अलग टीमों की तैनाती करना शामिल था। धरने के दौरान भीषण गर्मी के चलते दो बुजुर्ग महिलाएं बेहोश हो गईं, जिन्हें मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। बाद में, विद्युत विभाग द्वारा ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।
रायबरेली के लालगंज में सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को विद्युत उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 13 मई के तूफान के बाद से कई गांवों में ठप पड़ी बिजली आपूर्ति और अधिकारियों पर लापरवाही के आरोपों को लेकर किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम प्रधान बच्चा सिंह ने किया, जहाँ ग्रामीणों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में एसडीओ को हटाने, सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल करने, ट्रिपिंग की समस्या को दूर करने, कथित धन उगाही के आरोपों की जांच कराने, जनप्रतिनिधियों से समन्वय बढ़ाने और प्रत्येक क्षेत्र में लाइन स्टाफ तथा अलग-अलग टीमों की तैनाती करना शामिल था। धरने के दौरान भीषण गर्मी के चलते दो बुजुर्ग महिलाएं बेहोश हो गईं, जिन्हें मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। बाद में, विद्युत विभाग द्वारा ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।
- रायबरेली के लालगंज में सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को विद्युत उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 13 मई के तूफान के बाद से कई गांवों में ठप पड़ी बिजली आपूर्ति और अधिकारियों पर लापरवाही के आरोपों को लेकर किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम प्रधान बच्चा सिंह ने किया, जहाँ ग्रामीणों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में एसडीओ को हटाने, सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल करने, ट्रिपिंग की समस्या को दूर करने, कथित धन उगाही के आरोपों की जांच कराने, जनप्रतिनिधियों से समन्वय बढ़ाने और प्रत्येक क्षेत्र में लाइन स्टाफ तथा अलग-अलग टीमों की तैनाती करना शामिल था। धरने के दौरान भीषण गर्मी के चलते दो बुजुर्ग महिलाएं बेहोश हो गईं, जिन्हें मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। बाद में, विद्युत विभाग द्वारा ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।1
- हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र के बरौला ग्राम सभा का निरीक्षण पूर्व विधायक राकेश सिंह ने किया। इस दौरान, कट्टर समाजवादी समर्थक भगवती यादव ने भी यह बात स्वीकार की कि विकास कार्यों के मामले में पूर्व विधायक राकेश सिंह सबसे आगे रहे हैं।1
- प्रतापगढ़ में श्रीगंगा दशहरा महोत्सव की तैयारियों को आज अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसका आयोजन 26 मई को होना है। इस पावन अवसर पर मां बेल्हा देवी धाम को 21,000 दीपों से जगमगाया जाएगा और एक भव्य महा आरती का आयोजन भी किया जाएगा। महोत्सव के लिए बेल्हा देवी धाम और उसके घाटों की सफाई का कार्य ईओ नगर पालिका राकेश कुमार के निर्देशन में सफाई निरीक्षक संतोष सिंह और नगर पालिका की टीम द्वारा शुरू किया गया था, जिसे अब पूरी तरह से 'लगदक' यानी स्वच्छ और प्रकाशित कर दिया गया है। सभी तैयारियों की गहन समीक्षा की गई है। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने भी 26 मई को श्रीगंगा दशहरा महोत्सव को सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।1
- रायबरेली के चन्दापुर थाना क्षेत्र स्थित जनई गांव के महराजपुर मजरे में अज्ञात कारणों से भीषण आग लगने से चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। तेज हवाओं के चलते आग ने तुरंत विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस अग्निकांड में लोगों की वर्षों की मेहनत से जुटाई गई गृहस्थी कुछ ही देर में राख में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें इतनी ऊंची उठ रही थीं कि आसपास के लोग सहम गए। महिलाएं और बच्चे अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। ग्रामीणों ने अपनी तरफ से बाल्टियों और मोटर पंपों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग लगातार फैलती चली गई। सूचना मिलने पर तत्काल फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। चन्दापुर थाने की पुलिस फोर्स के साथ एडिशनल एसपी भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू करवाया। ग्रामीणों और दमकल कर्मियों की घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद ही आग पर काबू पाया जा सका। इस घटना की जानकारी मिलते ही तहसील प्रशासन सहित जिले के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार सत्यराजा और हल्का लेखपाल ने प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान का आकलन कर अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। प्रशासन ने पीड़ितों को शासन स्तर से हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया है।3
- आगामी बृहस्पतिवार को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी क्रम में, सोमवार की शाम अमेठी के टीकरमाफी कस्बे में क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार मिश्र और संग्रामपुर थाना प्रभारी संजय सिंह ने भारी पुलिस बल के साथ एक फ्लैग मार्च किया। यह फ्लैग मार्च कस्बे के प्रमुख मार्गों, बाजारों और संवेदनशील इलाकों से होकर निकाला गया। इस दौरान, पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों एवं व्यापारियों से बातचीत करते हुए उनसे शांति एवं भाईचारा बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने, माहौल बिगाड़ने अथवा कानून व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बल की इस मौजूदगी से कस्बे में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत दिखाई दी। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और सोशल मीडिया पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। फ्लैग मार्च के दौरान, पुलिसकर्मियों ने जनता से प्रशासन का सहयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने का आग्रह किया।1
- जनपद प्रतापगढ़ के कोहड़ौर थाने से छेड़खानी के मामले में न्याय न मिलने पर एक पीड़िता अपनी पीड़ा बताने सीओ सिटी, प्रतापगढ़ के दफ्तर पहुँची। पीड़िता सुशीला देवी, जो लाखीपुर (बोझवा) की निवासी हैं, ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के राज में थानेदार पीड़ित पक्ष को ही निशाना बना रहे हैं, न्याय दिलाने की बजाय। पीड़िता का आरोप है कि उनका पट्टीदार राजेश कुमार यादव उर्फ गभरू, जो एक नशेड़ी व्यक्ति है और जिसकी पत्नी का निधन हो चुका है, अक्सर शराब के नशे में बुरी नीयत से उन्हें देखता है। 20 मई की रात लगभग 1 बजे, राजेश कुमार यादव उर्फ गभरू ने सोते समय उनकी चारपाई के पास आकर मच्छरदानी हटाई, उनका हाथ पकड़कर मुँह दबा दिया और उनकी इज्ज़त के साथ जोर ज़बरदस्ती करने लगा। पीड़िता के अनुसार, यह दूसरी बार था जब आरोपी ने उनके साथ ऐसा किया। पीड़िता के पति सूरत में रहते हैं और वह अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ घर पर अकेली रहती हैं। घटना के बाद महिला ने रात में ही आपातकालीन सेवा UP112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने आकर आरोपी को हिरासत में ले लिया। पीड़िता को सुबह कोहड़ौर थाना बुलाया गया, जहाँ उन्होंने लिखित तहरीर दी और घर लौट आईं। हालांकि, 22 मई को जब पीड़िता अपने सहयोगी स्वामी नाथ यादव के साथ मुकदमे की नकल लेने कोहड़ौर थाने पहुँचीं, तो उन्हें और उनके सहयोगी दोनों को बंद कर दिया गया। आरोप है कि दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी राजेश कुमार यादव उर्फ गभरू का 21 मई को शांति भंग में चालान किया गया, और पीड़िता को पुलिसिया भय दिखाकर तथा उनके सहयोगी स्वामी नाथ यादव का 22 मई को शांति भंग में चालान करके मामले को खत्म करने का प्रयास किया गया। पीड़िता का कहना है कि राजेश कुमार यादव उर्फ गभरू का अपराध जघन्य श्रेणी का है, फिर भी उनका मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। पीड़िता ने थानाध्यक्ष कोहड़ौर धनन्जय राय पर आरोपी को बचाने और थाने में पहुँची पीड़िता को ही बंद करके महिला सिपाहियों से डराने व धमकाने का आरोप लगाया है। सीओ सिटी प्रशांत राज हुड्डा ने पीड़िता के प्रार्थना पत्र को पढ़कर उन्हें आश्वस्त किया कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर न्याय दिलाया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि आरोपी या उसका कोई समर्थक पीड़िता को दोबारा डराता या धमकाता है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इस घटना से एक तरफ जहाँ थानाध्यक्ष कोहड़ौर धनन्जय राय पर पीड़िता को परेशान करने और आरोपी को बचाने का आरोप लगा है, वहीं सीओ सिटी ने पीड़िता को न्याय दिलाने का आश्वासन देकर राहत प्रदान की है।1
- अमेठी में नगर पंचायत द्वारा प्रस्तावित तालाब सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वार्ड नंबर 3, कटरा राजा हिम्मत सिंह के सैकड़ों ग्रामीणों ने व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष महेश सोनी के नेतृत्व में एसडीएम प्रभारी को एक ज्ञापन सौंपा है। नगरवासियों की मुख्य मांग है कि तालाब सौंदर्यीकरण से पहले श्मशान और सार्वजनिक कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित करके अलग से सीमांकित किया जाए, और उसके बाद ही बची हुई भूमि पर कोई योजना शुरू की जाए। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर कब्रिस्तान की जमीन से छेड़छाड़ की जा सकती है। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2020-21 में सार्वजनिक कब्रिस्तान और अंत्येष्टि स्थल के निर्माण व सुरक्षा के लिए शासन ने धनराशि स्वीकृत की थी और नगर पंचायत ने टेंडर भी जारी किया था। हालांकि, कार्य शुरू होने के बाद केवल कुछ पिलर लगाकर निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, और पांच साल बीत जाने के बाद भी बाउंड्रीवाल नहीं बन पाई है। इस पर जिलाध्यक्ष महेश सोनी ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नगर पंचायत बाउंड्रीवाल का निर्माण पूरा नहीं कराती है, तो वे अपने निजी फंड से शेष निर्माण करवाएंगे। उन्होंने आम जनता को आश्वासन दिया है कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है, और जनभावनाओं को शासन-प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाकर जल्द ही इस मामले का निस्तारण कराया जाएगा। नगरवासियों ने अपनी मांग दोहराई है कि पहले सार्वजनिक कब्रिस्तान और अंत्येष्टि स्थल की विधिवत पैमाइश, सीमांकन और सुरक्षा कार्य पूरा किया जाए, और उसके बाद ही तालाब सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाए। एसडीएम ने इस मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।3
- रायबरेली के लालगंज स्थित विद्युत उपखंड कार्यालय पर शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान बच्चा सिंह के नेतृत्व में उग्र प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 13 मई के तूफान के बाद से कई गांवों में ठप पड़ी बिजली आपूर्ति और अधिकारियों की कथित लापरवाही के विरोध में किया गया था। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांगों में एसडीओ को हटाना, सभी फीडरों की बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल करना, ट्रिपिंग की समस्या का समाधान करना और कथित धन उगाही के आरोपों की जांच कराना शामिल था। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बढ़ाने और प्रत्येक क्षेत्र में पर्याप्त लाइन स्टाफ तथा अलग-अलग टीमों की तैनाती की भी मांग की। धरने के दौरान भीषण गर्मी के कारण दो बुजुर्ग महिलाएं बेहोश हो गईं, जिन्हें मौके पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस भी मौके पर पहुंची। बाद में, विद्युत विभाग द्वारा ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई करने और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद, प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, ग्रामीणों ने यह चेतावनी भी दी कि यदि बिजली व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे अपना आंदोलन फिर से शुरू करेंगे।1