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शिमला में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया है। महाजन के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों से कांग्रेस यह अफवाह फैला रही है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है और राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। हालांकि, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी द्वारा भेजे गए आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि होती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हिमाचल प्रदेश को हर क्षेत्र में भरपूर सहयोग प्रदान कर रही है, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में। महाजन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश को मिली केंद्रीय सहायता के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2023-24 में ₹485.97 करोड़, 2024-25 में ₹526.20 करोड़ और 2025-26 में ₹676.46 करोड़ जारी किए गए। इसी तरह, स्टार्स परियोजना के अंतर्गत 2023-24 में ₹53.66 करोड़, 2024-25 में ₹175.80 करोड़ और 2025-26 में ₹67.56 करोड़ प्रदान किए गए। प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत 2023-24 में ₹94.36 करोड़, 2024-25 में ₹95.70 करोड़ और 2025-26 में ₹103.82 करोड़ की सहायता दी गई, जबकि पीएम-श्री योजना के अंतर्गत 2024-25 में ₹135.35 करोड़ और 2025-26 में ₹68.85 करोड़ की राशि जारी हुई। उल्लास योजना के लिए भी लगातार धनराशि उपलब्ध करवाई गई। इन सभी योजनाओं को मिलाकर, पिछले तीन वर्षों में शिक्षा क्षेत्र के लिए हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹1,963 करोड़ (₹1,96,329 लाख) की केंद्रीय सहायता मिली है। महाजन ने कहा कि इन आंकड़ों के सामने कांग्रेस सरकार का यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन और जनता को गुमराह करने वाला है कि केंद्र सरकार धन उपलब्ध नहीं करा रही। उन्होंने कांग्रेस सरकार से सवाल किया कि जब केंद्र सरकार लगातार धन उपलब्ध करवा रही है तो प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति क्यों बिगड़ रही है, शिक्षकों के हजारों पद रिक्त क्यों हैं, स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी क्यों है, और कई शिक्षण संस्थानों को बंद करने या मर्ज करने की नौबत क्यों आई है। महाजन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए हर बार केंद्र सरकार पर आरोप लगाने का प्रयास करती है, जबकि वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, ग्रामीण विकास, कृषि और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अभूतपूर्व सहायता प्रदान की है। हर्ष महाजन ने कांग्रेस सरकार से राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर यह बताने की मांग की कि केंद्र से प्राप्त हजारों करोड़ रुपये की राशि का उपयोग कितनी प्रभावशीलता से किया गया और उसका लाभ जनता तक कितना पहुंचा। उन्होंने जोर दिया कि भाजपा तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने और केंद्र सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। अब समय आ गया है कि प्रदेश की जनता के सामने कांग्रेस सरकार अपने दावों का हिसाब दे और बताए कि केंद्र से प्राप्त धनराशि के बावजूद विकास कार्य अपेक्षित गति से क्यों नहीं हो रहे हैं।

4 hrs ago
user_Roshan Sharma
Roshan Sharma
Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
4 hrs ago
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शिमला में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया है। महाजन के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों से कांग्रेस यह अफवाह फैला रही है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है और राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। हालांकि, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी द्वारा भेजे गए आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि होती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हिमाचल प्रदेश को हर क्षेत्र में भरपूर सहयोग प्रदान कर रही है, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में। महाजन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश को मिली केंद्रीय सहायता के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2023-24 में ₹485.97 करोड़, 2024-25 में ₹526.20 करोड़ और 2025-26 में ₹676.46 करोड़ जारी किए गए। इसी तरह, स्टार्स परियोजना के अंतर्गत 2023-24 में ₹53.66 करोड़, 2024-25 में ₹175.80 करोड़ और 2025-26 में ₹67.56 करोड़ प्रदान किए गए। प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत 2023-24 में ₹94.36 करोड़, 2024-25 में ₹95.70 करोड़ और 2025-26 में ₹103.82 करोड़ की सहायता दी गई, जबकि पीएम-श्री योजना के अंतर्गत 2024-25 में ₹135.35 करोड़ और 2025-26 में ₹68.85 करोड़ की राशि जारी हुई। उल्लास योजना के लिए भी लगातार धनराशि उपलब्ध करवाई गई। इन सभी योजनाओं को मिलाकर, पिछले तीन वर्षों में शिक्षा क्षेत्र के लिए हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹1,963 करोड़ (₹1,96,329 लाख) की केंद्रीय सहायता मिली है। महाजन ने कहा कि इन आंकड़ों के सामने कांग्रेस सरकार का यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन और जनता को गुमराह करने वाला है कि केंद्र सरकार धन उपलब्ध नहीं करा रही। उन्होंने कांग्रेस सरकार से सवाल किया कि जब केंद्र सरकार लगातार धन उपलब्ध करवा रही है तो प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति क्यों बिगड़ रही है, शिक्षकों के हजारों पद रिक्त क्यों हैं, स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी क्यों है, और कई शिक्षण संस्थानों को बंद करने या मर्ज करने की नौबत क्यों आई है। महाजन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए हर बार केंद्र सरकार पर आरोप लगाने का प्रयास करती है, जबकि वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, ग्रामीण विकास, कृषि और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अभूतपूर्व सहायता प्रदान की है। हर्ष महाजन ने कांग्रेस सरकार से राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर यह बताने की मांग की कि केंद्र से प्राप्त हजारों करोड़ रुपये की राशि का उपयोग कितनी प्रभावशीलता से किया गया और उसका लाभ जनता तक कितना पहुंचा। उन्होंने जोर दिया कि भाजपा तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने और केंद्र सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। अब समय आ गया है कि प्रदेश की जनता के सामने कांग्रेस सरकार अपने दावों का हिसाब दे और बताए कि केंद्र से प्राप्त धनराशि के बावजूद विकास कार्य अपेक्षित गति से क्यों नहीं हो रहे हैं।

More news from Himachal Pradesh and nearby areas
  • शिमला जिले के रामपुर के ननखड़ी कॉलेज को डीनोटिफाई करने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा नेता और रामपुर से पूर्व प्रत्याशी कौल नेगी ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हुआ तो लोग सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित करना चाहती है। कौल नेगी ने बताया कि यह कॉलेज 18 बच्चों के साथ भी सफलतापूर्वक चल रहा था, लेकिन अब कम छात्रों की संख्या का हवाला देकर इसे बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई होती है। हालांकि, ननखड़ी के आसपास के स्कूलों में वाणिज्य की पढ़ाई नहीं कराई जाती, जिससे शिमला-रामपुर क्षेत्र से बच्चे ननखड़ी कॉलेज तक नहीं पहुँच पाएंगे। नेगी के अनुसार, इस कॉलेज के बंद होने से 18 पंचायतें प्रभावित होंगी। उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012-13 में इस कॉलेज की घोषणा की थी, जिसके बाद यह स्थापित हुआ। नेगी ने जोर दिया कि पूर्व सरकारों के प्रमुखों की सोच थी कि किसी भी बच्चे को उच्च शिक्षा से वंचित न रखा जाए, और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र भी तीन बच्चों के लिए भी स्कूल चलाने की बात कहते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार इस विचार के विरुद्ध काम कर रही है। कौल नेगी ने पुनः चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज को फिर से बहाल नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
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    शिमला जिले के रामपुर के ननखड़ी कॉलेज को डीनोटिफाई करने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा नेता और रामपुर से पूर्व प्रत्याशी कौल नेगी ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हुआ तो लोग सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित करना चाहती है।

कौल नेगी ने बताया कि यह कॉलेज 18 बच्चों के साथ भी सफलतापूर्वक चल रहा था, लेकिन अब कम छात्रों की संख्या का हवाला देकर इसे बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई होती है। हालांकि, ननखड़ी के आसपास के स्कूलों में वाणिज्य की पढ़ाई नहीं कराई जाती, जिससे शिमला-रामपुर क्षेत्र से बच्चे ननखड़ी कॉलेज तक नहीं पहुँच पाएंगे। नेगी के अनुसार, इस कॉलेज के बंद होने से 18 पंचायतें प्रभावित होंगी।

उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012-13 में इस कॉलेज की घोषणा की थी, जिसके बाद यह स्थापित हुआ। नेगी ने जोर दिया कि पूर्व सरकारों के प्रमुखों की सोच थी कि किसी भी बच्चे को उच्च शिक्षा से वंचित न रखा जाए, और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र भी तीन बच्चों के लिए भी स्कूल चलाने की बात कहते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार इस विचार के विरुद्ध काम कर रही है। कौल नेगी ने पुनः चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज को फिर से बहाल नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    4 hrs ago
  • किन्नौर के उरनी में एक लोहे का पुल टूट गया, जिसके परिणामस्वरूप एक डंपर वाहन पुल सहित नीचे खाई में जा गिरा। इस घटना में डंपर का चालक पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है, जिससे किन्नौर में एक बड़ा हादसा टल गया।
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    किन्नौर के उरनी में एक लोहे का पुल टूट गया, जिसके परिणामस्वरूप एक डंपर वाहन पुल सहित नीचे खाई में जा गिरा। इस घटना में डंपर का चालक पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है, जिससे किन्नौर में एक बड़ा हादसा टल गया।
    user_Him News Update
    Him News Update
    रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
    20 min ago
  • ग्राम पंचायत सेऊ के गाँव सेऊ, घुमारवीं में एक पीपल पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अवसर पर स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह पूजन कार्यक्रम सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ।
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    ग्राम पंचायत सेऊ के गाँव सेऊ, घुमारवीं में एक पीपल पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अवसर पर स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह पूजन कार्यक्रम सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ।
    user_रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    Local News Reporter घुमारवीं, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    13 hrs ago
  • बिलासपुर जिले के लगदयो में प्राकृतिक खेती एवं अनुभव साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 1000 किसानों ने भाग लिया।
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    बिलासपुर जिले के लगदयो में प्राकृतिक खेती एवं अनुभव साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 1000 किसानों ने भाग लिया।
    user_North India bulletin
    North India bulletin
    Jhanduta, Bilaspur•
    17 hrs ago
  • मंडी के खुचनची स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GSSS) की दयनीय हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। SMC ने विद्यालय में रिक्त पड़े पदों को भरने और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को जल्द से जल्द पूरा करने की प्रमुख मांगें उठाई हैं। समिति ने सरकार से गुहार लगाई है कि शिक्षकों की भारी कमी और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका मानना है कि विद्यालय में विकास कार्यों को तेजी से संपन्न कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि शैक्षणिक माहौल में सुधार हो सके।
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    मंडी के खुचनची स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GSSS) की दयनीय हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। SMC ने विद्यालय में रिक्त पड़े पदों को भरने और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को जल्द से जल्द पूरा करने की प्रमुख मांगें उठाई हैं।

समिति ने सरकार से गुहार लगाई है कि शिक्षकों की भारी कमी और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका मानना है कि विद्यालय में विकास कार्यों को तेजी से संपन्न कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि शैक्षणिक माहौल में सुधार हो सके।
    user_BHK News Himachal
    BHK News Himachal
    Local News Reporter Rewalsar, Mandi•
    15 hrs ago
  • बंजार नगर पंचायत उपाध्यक्ष पद के चुनाव में रोचक स्थिति देखने को मिली, जहाँ विवेक कुमार को टॉस में हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान चार-चार बराबर मत पड़ने के कारण उपाध्यक्ष पद का फैसला टॉस के जरिए किया गया। इस बीच, ए पी एम सी चेयरमैन मिया राम सिंह ने अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर क्या कहा, यह जानकारी मूल पाठ में उपलब्ध नहीं है।
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    बंजार नगर पंचायत उपाध्यक्ष पद के चुनाव में रोचक स्थिति देखने को मिली, जहाँ विवेक कुमार को टॉस में हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान चार-चार बराबर मत पड़ने के कारण उपाध्यक्ष पद का फैसला टॉस के जरिए किया गया। इस बीच, ए पी एम सी चेयरमैन मिया राम सिंह ने अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर क्या कहा, यह जानकारी मूल पाठ में उपलब्ध नहीं है।
    user_Budhi Singh Thakur
    Budhi Singh Thakur
    Local News Reporter Sainj, Kullu•
    15 hrs ago
  • सढोरा उप तहसील परिसर के पास स्थित एक खाली जगह, जिसका उपयोग अब तक नगर पालिका द्वारा कूड़ा-कर्कट डालने के लिए किया जा रहा था, पर अब समाजसेवी संस्था उज्जवल भविष्य संस्था पशु-पक्षियों के पीने के पानी के लिए एक जलाशय का निर्माण कर रही है। संस्था के संचालक राकेश शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में बेसहारा पशु-पक्षी घूमते रहते हैं, और भीषण गर्मी में उनके लिए पानी की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। शर्मा के अनुसार, संस्था ने पहले भी इस खाली जगह के सदुपयोग के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी के मद्देनज़र, अब उज्जवल भविष्य संस्था समाज के सहयोग से इस भूमि के एक हिस्से को साफ-सुथरा करके जलाशय का निर्माण कर रही है। यह जलाशय विशेष रूप से जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगा। संस्था ने बताया कि इस जलाशय के चारों ओर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे, जिससे इलाके की सुंदरता बढ़ेगी और पशु-पक्षियों को आश्रय भी मिलेगा। उनका कहना है कि जहाँ मनुष्यों के लिए जगह-जगह वाटर कूलर जैसी व्यवस्थाएं होती हैं, वहीं पशु-पक्षियों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं होती, और इसी कमी को पूरा करने के उद्देश्य से यह जलाशय बनाया जा रहा है ताकि उन्हें भीषण गर्मी में भी पानी मिल सके।
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    सढोरा उप तहसील परिसर के पास स्थित एक खाली जगह, जिसका उपयोग अब तक नगर पालिका द्वारा कूड़ा-कर्कट डालने के लिए किया जा रहा था, पर अब समाजसेवी संस्था उज्जवल भविष्य संस्था पशु-पक्षियों के पीने के पानी के लिए एक जलाशय का निर्माण कर रही है। संस्था के संचालक राकेश शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में बेसहारा पशु-पक्षी घूमते रहते हैं, और भीषण गर्मी में उनके लिए पानी की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

शर्मा के अनुसार, संस्था ने पहले भी इस खाली जगह के सदुपयोग के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी के मद्देनज़र, अब उज्जवल भविष्य संस्था समाज के सहयोग से इस भूमि के एक हिस्से को साफ-सुथरा करके जलाशय का निर्माण कर रही है। यह जलाशय विशेष रूप से जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगा।

संस्था ने बताया कि इस जलाशय के चारों ओर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे, जिससे इलाके की सुंदरता बढ़ेगी और पशु-पक्षियों को आश्रय भी मिलेगा। उनका कहना है कि जहाँ मनुष्यों के लिए जगह-जगह वाटर कूलर जैसी व्यवस्थाएं होती हैं, वहीं पशु-पक्षियों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं होती, और इसी कमी को पूरा करने के उद्देश्य से यह जलाशय बनाया जा रहा है ताकि उन्हें भीषण गर्मी में भी पानी मिल सके।
    user_Satpal sharma
    Satpal sharma
    Local News Reporter सढौरा एसटी, यमुनानगर, हरियाणा•
    13 hrs ago
  • हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हैं। सीटू से संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले टॉलैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकाली गई, जहाँ उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन वेतन बढ़ोतरी, पूरे 12 महीने का वेतन, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमितीकरण सहित कई अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान यूनियन नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर लंबे समय से मिड डे मील वर्कर्स की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। यूनियन की राज्य महासचिव शांति देवी और अध्यक्ष संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 17 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, और राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर उदासीन रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को नियमित वेतन नहीं मिलता, बल्कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन लंबित रहता है और भुगतान भी एकमुश्त नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त के कारण बच्चों की संख्या कम होने पर वर्कर्स की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं। यूनियन ने प्रमुखता से मांग की है कि हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप मिड डे मील वर्कर्स को पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। उनकी अन्य मांगों में हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक वेतन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह अवकाश, 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त को समाप्त करना, ग्रेच्युटी और पेंशन सुविधा प्रदान करना, मेडिकल जांच का खर्च विभाग द्वारा वहन करना और मिड डे मील वर्कर्स के लिए नियमितीकरण की नीति बनाना शामिल है। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
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    हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हैं। सीटू से संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले टॉलैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकाली गई, जहाँ उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन वेतन बढ़ोतरी, पूरे 12 महीने का वेतन, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमितीकरण सहित कई अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान यूनियन नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर लंबे समय से मिड डे मील वर्कर्स की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

यूनियन की राज्य महासचिव शांति देवी और अध्यक्ष संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 17 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, और राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर उदासीन रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को नियमित वेतन नहीं मिलता, बल्कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन लंबित रहता है और भुगतान भी एकमुश्त नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त के कारण बच्चों की संख्या कम होने पर वर्कर्स की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं।

यूनियन ने प्रमुखता से मांग की है कि हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप मिड डे मील वर्कर्स को पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। उनकी अन्य मांगों में हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक वेतन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह अवकाश, 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त को समाप्त करना, ग्रेच्युटी और पेंशन सुविधा प्रदान करना, मेडिकल जांच का खर्च विभाग द्वारा वहन करना और मिड डे मील वर्कर्स के लिए नियमितीकरण की नीति बनाना शामिल है। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
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    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    4 hrs ago
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