केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह अपनी ही गलतियों का खामियाजा छात्रों से वसूल रहा है। आरोप है कि बोर्ड की गलतियों के कारण आए गलत नंबरों को ठीक करवाने के लिए छात्रों को अपनी आंसर शीट की सही जाँच के लिए ₹2000 तक का भुगतान करना पड़ सकता है। इसमें डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए ₹100 प्रति विषय, री-टोटलिंग के लिए ₹100 प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन के लिए ₹25 प्रति सवाल का शुल्क शामिल है। इस प्रक्रिया से CBSE की भारी कमाई हो रही है, खासकर तब जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन दिए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि स्कैनिंग फ़ोन से होने के कारण गलत मार्किंग तय है, लेकिन उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। इसमें तीखी आलोचना करते हुए कहा गया है कि यह CBSE की गलती है, सज़ा बच्चे की है और कमाई सरकार की। आरोप है कि जब शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि कारोबार बना दिया जाता है, तब गलतियाँ सुधारी नहीं जातीं, बल्कि बढ़ाई जाती हैं, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा बच्चे अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य के रूप में चुका रहे हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह अपनी ही गलतियों का खामियाजा छात्रों से वसूल रहा है। आरोप है कि बोर्ड की गलतियों के कारण आए गलत नंबरों को ठीक करवाने के लिए छात्रों को अपनी आंसर शीट की सही जाँच के लिए ₹2000 तक का भुगतान करना पड़ सकता है। इसमें डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए ₹100 प्रति विषय, री-टोटलिंग के लिए ₹100 प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन के लिए ₹25 प्रति सवाल का शुल्क शामिल है। इस प्रक्रिया से CBSE की भारी कमाई हो रही है, खासकर तब जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन दिए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि स्कैनिंग फ़ोन से होने के कारण गलत मार्किंग तय है, लेकिन उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। इसमें तीखी आलोचना करते हुए कहा गया है कि यह CBSE की गलती है, सज़ा बच्चे की है और कमाई सरकार की। आरोप है कि जब शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि कारोबार बना दिया जाता है, तब गलतियाँ सुधारी नहीं जातीं, बल्कि बढ़ाई जाती हैं, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा बच्चे अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य के रूप में चुका रहे हैं।
- कहलगांव अनुमंडल के बरैनी गांव में कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस मामले के सामने आने के बाद, कहलगांव और पीरपैंती दोनों विधानसभा क्षेत्रों के विधायक प्रभावित लोगों से मिलने के लिए गांव पहुंचे।1
- मगही शेर अभिषेक रंजन ने जनता के साथ मिलकर सच को आवाज देने की बात कही है। उन्होंने लोगों से अपने पेज को फॉलो करने का आग्रह किया है।1
- बिहार की राजनीति में राबड़ी आवास विवाद को लेकर एक नया घमासान छिड़ गया है। इस मामले पर मंगनी लाल मंडल ने एक बड़ा और जोरदार हमला बोला है।1
- एक दहेज हत्या मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए एसडीपीओ की सराहना की गई है। यह प्रशंसा एसडीपीओ द्वारा मामले में की गई तत्काल कार्रवाई को रेखांकित करती है।1
- यह नज़ारा भागलपुर ज़िले के सनौला प्रखंड के भगवानपुर गाँव का बताया गया है, जहाँ पोस्ट करने वाले ने 'मुखिया और ये सब' क्या कर रहे हैं, इस पर अपनी अनभिज्ञता व्यक्त की है। आक्रोशित लहजे में सख्त चेतावनी दी गई है कि जब ये 'मदरचोद' वोट माँगने आएँगे, तब 'भोसड़ी वाले' सबको झाड़ू से मारकर वहाँ से भगाना पड़ेगा।1
- बिहार पुलिस मुख्यालय के कड़े निर्देशों के बावजूद, भागलपुर में कुछ महिला पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी पहनकर रील बनाने का मामला सामने आया है। पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में सभी पुलिसकर्मियों को साफ तौर पर कहा था कि वर्दी में सोशल मीडिया वीडियो या रील बनाना अनुशासनहीनता माना जाएगा और ऐसे मामलों में संबंधित कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में ये महिला पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी के दौरान रील बनाती दिख रही हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र के बरारी गंगा घाट के आसपास का है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस विभाग द्वारा जारी किए गए निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी तक इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच में यह मामला सही पाया जाता है, तो इन महिला पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या अगला कदम उठाते हैं।1
- शाम के समय करीब 6 बजे 'भौली बोल' का आनंद लिया गया।1
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह अपनी ही गलतियों का खामियाजा छात्रों से वसूल रहा है। आरोप है कि बोर्ड की गलतियों के कारण आए गलत नंबरों को ठीक करवाने के लिए छात्रों को अपनी आंसर शीट की सही जाँच के लिए ₹2000 तक का भुगतान करना पड़ सकता है। इसमें डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए ₹100 प्रति विषय, री-टोटलिंग के लिए ₹100 प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन के लिए ₹25 प्रति सवाल का शुल्क शामिल है। इस प्रक्रिया से CBSE की भारी कमाई हो रही है, खासकर तब जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन दिए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि स्कैनिंग फ़ोन से होने के कारण गलत मार्किंग तय है, लेकिन उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। इसमें तीखी आलोचना करते हुए कहा गया है कि यह CBSE की गलती है, सज़ा बच्चे की है और कमाई सरकार की। आरोप है कि जब शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि कारोबार बना दिया जाता है, तब गलतियाँ सुधारी नहीं जातीं, बल्कि बढ़ाई जाती हैं, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा बच्चे अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य के रूप में चुका रहे हैं।1