जनपद भदोही के होलपुर गांव की साक्षी सिंह बनी पी ए सी में दारोगा जिले का बढ़ाया मान साक्षी सिंह का पीएसी में हुआ चयन, परिजनों में ख़ुशी का माहौल। जंगीगंज। गोपीगंज क्षेत्र के होलपुर गांव निवासी स्वर्गीय सूबेदार सिंह की सबसे छोटी बेटी साक्षी सिंह का उत्तर प्रदेश पुलिस की परीक्षा में पीएसी में एसआई पद पर चयन हुआ है। बिना पिता के बिटिया ने सफलता प्राप्त कर के यह साबित कर दिया कि यदि सच्चे लगन से मेहनत से किया जाये तो सफलता अवश्य मिलती है। साक्षी पुरे प्रदेश में महिला पी ए सी में 77 वां रैंक पाकर परिवार का और जिले का नाम रोशन किया। है सखी के सफलता पर मां पुष्पा सिंह समेत सभी परिजनों ने काफ़ी ख़ुशी का माहौल है। साक्षी तीन बहनों और भाइयों में सबसे छोटी है। साक्षी कक्षा आठवीं तक केयर एंड फेयर में पढ़ाई की है। 12वी तक की पढ़ाई श्री राम गर्ल्स इंटर कॉलेज छतमी में पढ़ाई की। और 62 प्रतिशत के साथ बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण किया है। साक्षी 2023 से तैयारी कर रहीं थी और अब पुलिस की परीक्षा में साक्षी ने सफलता प्राप्त किया है। साक्षी ने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा और खुद ही पढ़ाई की और सफलता प्राप्त की। इस मौके पर अभिमन्यु सिंह, इंद्रमणि सिंह, धर्मराज सिंह, ज्ञानसिंह, अक्षय प्रताप सिंह समेत परिजनों और ग्रामीणों ने खुशी जाहिर किया है।
जनपद भदोही के होलपुर गांव की साक्षी सिंह बनी पी ए सी में दारोगा जिले का बढ़ाया मान साक्षी सिंह का पीएसी में हुआ चयन, परिजनों में ख़ुशी का माहौल। जंगीगंज। गोपीगंज क्षेत्र के होलपुर गांव निवासी स्वर्गीय सूबेदार सिंह की सबसे छोटी बेटी साक्षी सिंह का उत्तर प्रदेश पुलिस की परीक्षा में पीएसी में एसआई पद
पर चयन हुआ है। बिना पिता के बिटिया ने सफलता प्राप्त कर के यह साबित कर दिया कि यदि सच्चे लगन से मेहनत से किया जाये तो सफलता अवश्य मिलती है। साक्षी पुरे प्रदेश में महिला पी ए सी में 77 वां रैंक पाकर परिवार का और जिले का नाम रोशन किया। है सखी के सफलता पर
मां पुष्पा सिंह समेत सभी परिजनों ने काफ़ी ख़ुशी का माहौल है। साक्षी तीन बहनों और भाइयों में सबसे छोटी है। साक्षी कक्षा आठवीं तक केयर एंड फेयर में पढ़ाई की है। 12वी तक की पढ़ाई श्री राम गर्ल्स इंटर कॉलेज छतमी में पढ़ाई की। और 62 प्रतिशत के साथ बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण किया है।
साक्षी 2023 से तैयारी कर रहीं थी और अब पुलिस की परीक्षा में साक्षी ने सफलता प्राप्त किया है। साक्षी ने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा और खुद ही पढ़ाई की और सफलता प्राप्त की। इस मौके पर अभिमन्यु सिंह, इंद्रमणि सिंह, धर्मराज सिंह, ज्ञानसिंह, अक्षय प्रताप सिंह समेत परिजनों और ग्रामीणों ने खुशी जाहिर किया है।
- भदोही में रोजगार मेले का आयोजन, 400 से अधिक युवाओं को मिला ऑफर लेटर1
- भदोही में रोजगार मेले का आयोजन, 400 से अधिक युवाओं को मिला ऑफर लेटर संवाददाता: गुफरान खान | जिला भदोही भदोही। औराई के चित्रांश पैलेस में बुधवार को वृहद रोजगार मेला एवं लाभ वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी वितरित किया गया। प्रदेश सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। रोजगार मेले में विभिन्न कंपनियों की ओर से युवाओं की चयन प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान 400 से अधिक युवाओं को जॉब ऑफर लेटर वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में कुल 1,000 युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चयन प्रक्रिया अभी जारी है। कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए लगातार प्रयास कर रही है। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ पात्र लोगों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी, औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर, ज्ञानपुर विधायक विपुल दूबे, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, पूर्व विधायक रविंद्र त्रिपाठी समेत श्रम विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-युवा मौजूद रहे।1
- जनपद भदोही,जल, जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात, पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध, उपर जिलाधिकारी, सुभागी शुक्ला, उप जिलाधिकारी एसडीएम ज्ञानपुर अरुण दीक्षित *गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों एवं बाढ़ चौकियों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण* *जलस्तर एवं बाढ़ से बचाव की तैयारियों का लिया जायजा, 22 बाढ़ चौकियां सक्रिय; अधिकारियों को सतर्कता एवं निरंतर निगरानी के निर्देश* जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात, पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध भदोही, 19 अगस्त 2026। जिलाधिकारी शैलेश कुमार के निर्देशन में अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०)/प्रभारी अधिकारी आपदा शुभांगी शुक्ला एवं उप जिलाधिकारी ज्ञानपुर अरुण दीक्षित द्वारा आज जनपद में गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों छिछुआ, धनतुलसी एवं अन्य स्थानों पर स्थापित बाढ़ चौकियों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंचकर गंगा नदी के जलस्तर, बाढ़ की संभावित स्थिति तथा बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पूरी सतर्कता बरतते हुए बाढ़ प्रभावित एवं संभावित क्षेत्रों में निरंतर निगरानी बनाए रखने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बाढ़ चौकियों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं, आवश्यक संसाधनों तथा कर्मचारियों की तैनाती के संबंध में भी जानकारी ली गई। प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति पर प्रभावी निगरानी के लिए जनपद में 22 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बाढ़ से संबंधित सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान करने तथा किसी भी आपात स्थिति में विभागीय समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आज 19 अगस्त 2026 को गंगा नदी का जलस्तर 75.52 मीटर दर्ज किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा गंगा नदी के जलस्तर तथा तटवर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलस्तर में होने वाले परिवर्तन की नियमित जानकारी प्राप्त कर आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। प्रभारी अधिकारी आपदा ने बताया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित ब्लॉकों में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं तथा पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित अथवा संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखते हुए राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, पंचायत एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपसी समन्वय बनाए रखने तथा प्रभावित क्षेत्रों में आमजन की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि गंगा नदी एवं उसके आसपास के निचले तथा तटवर्ती क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। नदी के जलस्तर में वृद्धि अथवा किसी भी आकस्मिक स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित तहसील प्रशासन को दें। किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर 05414-250223/250308 अथवा हेल्पलाइन नंबर 1077 पर सूचना दी जा सकती है।4
- gopiagnj power house par halki fulki barish hai vatavaraan ko thanda kar diya1
- Post by Nitin Prajapati1
- इंदौर: स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत गोरकुंड चौराहे पर 40 करोड़ की लागत से बनी नई सड़क नर्मदा पाइपलाइन परीक्षण में धंसी।1
- 1 वर्ष के विस्तृत शोध के बाद प्राचीन नव का निर्माण तकनीकी का अल्फा प्रोटोटाइप प्रदर्शित संजीव सान्याल ने आईएनएसवी कौंडिन्य के बनने और उसके सफर के अनुभव किए साझा नपाध्यक्ष श्यामसुंदर केशरी ने कहा—ऐतिहासिक परंपरा को पुनर्जीवित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना उद्देश्य प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य श्री संजीव सान्याल अपने मीरजापुर दौरे के दूसरे दिन नगर के लोहिया तालाब स्थित डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल में आयोजित “विचार गोष्ठी” कार्यक्रम में पहुंचे। यहां नगर पालिका परिषद मीरजापुर के अध्यक्ष श्यामसुंदर केशरी, विद्यालय के डायरेक्टर अमरदीप सिंह एवं अपराजिता सिंह सहित अन्य लोगों ने अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर प्रस्तुति दी और श्री सान्याल से संवाद किया। छात्राओं ने स्वागत गीत के माध्यम से भी उनका अभिनंदन किया। इसके पश्चात श्री संजीव सान्याल ने प्रोजेक्टर के माध्यम से आईएनएसवी कौंडिन्य के निर्माण, उसके पीछे हुए शोध तथा पोरबंदर से ओमान के मस्कट तक की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि लंबे समय से यह जानने का प्रयास किया जा रहा था कि लगभग दो हजार वर्ष पूर्व भारतीय नाविक बिना कील और धातु के उपयोग के, लकड़ी के तख्तों को रस्सियों से सिलकर बनाए गए जहाजों के माध्यम से लंबी समुद्री यात्राएं कैसे करते थे। प्राचीन जहाजों के भौतिक अवशेष उपलब्ध न होने के कारण उनके पुनर्निर्माण में विशेष कठिनाई थी। इसके लिए प्राचीन सिक्कों पर अंकित जहाजों के चित्रों, अजंता की गुफाओं की कलाकृतियों तथा भारत में आज भी मौजूद पारंपरिक नौका निर्माण पद्धतियों का अध्ययन किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्राचीन तकनीक में लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशे से बनी रस्सियों के माध्यम से जोड़ा जाता है तथा प्राकृतिक रेजिन, कपास और तेल जैसे पारंपरिक पदार्थों से सील किया जाता है। लंबे प्रयासों के बाद केरल में पारंपरिक नौका निर्माण से जुड़े एक परिवार और कुशल कारीगरों के सहयोग से इस जहाज का निर्माण संभव हो सका। सान्याल ने बताया कि इस परियोजना का प्रस्तुतीकरण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी किया गया था। प्रधानमंत्री ने परियोजना को प्रोत्साहित करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था—“बनाओ, लेकिन डूबना नहीं।” इसके बाद परियोजना पर कार्य आगे बढ़ा और लगभग दो वर्षों के परिश्रम, पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक शोध एवं विभिन्न स्तरों पर परीक्षण के बाद जहाज तैयार हुआ। जहाज का नाम प्राचीन भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया, जिन्होंने हिंद महासागर को पार कर दक्षिण-पूर्व एशिया तक यात्रा की थी। इसके बाद जहाज ने पोरबंदर से ओमान के मस्कट तक अपनी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा पूरी की। यात्रा के अनुभव साझा करते हुए सान्याल ने बताया कि यह जहाज मुख्य रूप से हवाओं के सहारे चलता था। पीने के लिए पानी मटकों में रखा गया था और यात्रा के प्रारंभ में ले जाई गई ताजी सब्जियां कुछ ही दिनों में समाप्त हो गईं। इसके बाद सीमित संसाधनों में खिचड़ी और अन्य साधारण भोजन के साथ यात्रा जारी रखी गई। आधुनिक जहाजों जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। चालक दल डेक पर ही कंबल ओढ़कर सोता था और पूरी यात्रा ने यह समझने का अवसर दिया कि प्राचीन भारतीय नाविक किन परिस्थितियों में समुद्री यात्राएं करते रहे होंगे। मीरजापुर की प्राचीन नौका निर्माण तकनीक का “अल्फा प्रोटोटाइप” प्रदर्शित कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण मीरजापुर क्षेत्र की प्राचीन नौका निर्माण तकनीक पर पिछले लगभग एक वर्ष से किए जा रहे विस्तृत शोध के आधार पर तैयार “अल्फा प्रोटोटाइप” का प्रदर्शन रहा। यह अल्फा प्रोटोटाइप इस दीर्घकालिक शोध एवं पुनरुद्धार पहल का प्रारंभिक प्रायोगिक स्वरूप है। इसका उद्देश्य मीरजापुर क्षेत्र में पीढ़ियों से मौजूद पारंपरिक नौका निर्माण ज्ञान को समझना, उसका दस्तावेजीकरण करना और भविष्य में इस तकनीक पर अधिक व्यापक शोध एवं विकास के लिए आधार तैयार करना है। संजीव सान्याल के मार्गदर्शन और फोर्सिस के चेयरमैन श्री कार्तिक केशरी के प्रयासों से पिछले लगभग एक वर्ष से मीरजापुर क्षेत्र की प्राचीन नौका निर्माण तकनीक की खोज, अध्ययन और पुनर्जीवन की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस शोध पहल एवं अल्फा प्रोटोटाइप के निर्माण को नगर पालिका परिषद मीरजापुर के माननीय अध्यक्ष श्री श्यामसुंदर केशरी द्वारा प्रायोजित किया गया। स्थानीय पारंपरिक कारीगर श्री रामबली निषाद के पीढ़ियों से चले आ रहे कौशल एवं पारंपरिक ज्ञान के आधार पर बिना कील और बिना किसी धातु के उपयोग वाली तकनीक से इस अल्फा प्रोटोटाइप को तैयार किया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल एक प्राचीन नौका की प्रतिकृति तैयार करना नहीं, बल्कि मीरजापुर की पारंपरिक नौका निर्माण विरासत को पुनर्जीवित कर उसे शोध, कौशल विकास, पर्यटन, उद्यमिता, रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास से जोड़ना है। नगर पालिका अध्यक्ष श्री श्यामसुंदर केशरी ने कहा कि आईएनएसवी कौंडिन्य जैसी परियोजनाओं ने भारत की प्राचीन तकनीकी और समुद्री परंपराओं को एक बार फिर जीवंत किया है। श्री संजीव सान्याल के शोध और प्रयासों के कारण भारत ने प्राचीन भारतीय तकनीक पर आधारित ऐसा जहाज तैयार किया, जिसके निर्माण में धातु की कीलों का इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मीरजापुर और चुनार का भी प्राचीन काल से व्यापार एवं नदी परिवहन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। गंगा जलमार्ग पर स्थित चुनार ऐतिहासिक रूप से व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इस क्षेत्र की नदी, नाविक एवं व्यापारिक परंपराओं का गहरा इतिहास है। उन्होंने कहा कि मीरजापुर की पारंपरिक नौका निर्माण कला को पुनर्जीवित करने का उद्देश्य इसे केवल इतिहास तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि निषाद एवं नाविक समाज के पारंपरिक कौशल को नई आर्थिक संभावनाओं से जोड़ना, स्थानीय रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देना तथा मीरजापुर की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। “शहर के उत्थान में व्यक्ति और उद्योग की भी जिम्मेदारी” — फोर्सिस के चेयरमैन कार्तिक केशरी इस अवसर पर फोर्सिस के चेयरमैन श्री कार्तिक केशरी ने मीरजापुर के विकास में व्यक्तियों, उद्यमियों और उद्योग जगत की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी शहर का उत्थान केवल सरकार अथवा स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। शहर से जुड़े प्रत्येक सक्षम व्यक्ति, उद्यमी और उद्योग की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र की विरासत, कौशल, रोजगार और आर्थिक विकास में योगदान दे। उन्होंने मीरजापुर की पारंपरिक नौका निर्माण कला को इसका एक उदाहरण बताते हुए कहा कि स्थानीय और पारंपरिक कौशल को आधुनिक शोध, डिजाइन, उद्यमिता और बाजार से जोड़कर न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी रोजगार और आर्थिक अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस अल्फा प्रोटोटाइप की सफलता एक प्रारंभिक कदम है। आगे इस प्राचीन तकनीक पर अधिक विस्तृत शोध कर मीरजापुर की पारंपरिक नौका निर्माण विरासत को पुनर्जीवित करने और इसे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से आईएनएसवी कौंडिन्य की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा और मीरजापुर की स्थानीय नौका निर्माण परंपरा को एक साझा दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया—भारत की प्राचीन तकनीकी विरासत को केवल संरक्षित करने के बजाय शोध, प्रयोग, नवाचार और स्थानीय कौशल के माध्यम से उसे पुनर्जीवित कर भविष्य की आर्थिक संभावनाओं से जोड़ना।3
- जनपद भदोही के होलपुर गांव की साक्षी सिंह बनी पी ए सी में दारोगा जिले का बढ़ाया मान साक्षी सिंह का पीएसी में हुआ चयन, परिजनों में ख़ुशी का माहौल। जंगीगंज। गोपीगंज क्षेत्र के होलपुर गांव निवासी स्वर्गीय सूबेदार सिंह की सबसे छोटी बेटी साक्षी सिंह का उत्तर प्रदेश पुलिस की परीक्षा में पीएसी में एसआई पद पर चयन हुआ है। बिना पिता के बिटिया ने सफलता प्राप्त कर के यह साबित कर दिया कि यदि सच्चे लगन से मेहनत से किया जाये तो सफलता अवश्य मिलती है। साक्षी पुरे प्रदेश में महिला पी ए सी में 77 वां रैंक पाकर परिवार का और जिले का नाम रोशन किया। है सखी के सफलता पर मां पुष्पा सिंह समेत सभी परिजनों ने काफ़ी ख़ुशी का माहौल है। साक्षी तीन बहनों और भाइयों में सबसे छोटी है। साक्षी कक्षा आठवीं तक केयर एंड फेयर में पढ़ाई की है। 12वी तक की पढ़ाई श्री राम गर्ल्स इंटर कॉलेज छतमी में पढ़ाई की। और 62 प्रतिशत के साथ बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण किया है। साक्षी 2023 से तैयारी कर रहीं थी और अब पुलिस की परीक्षा में साक्षी ने सफलता प्राप्त किया है। साक्षी ने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा और खुद ही पढ़ाई की और सफलता प्राप्त की। इस मौके पर अभिमन्यु सिंह, इंद्रमणि सिंह, धर्मराज सिंह, ज्ञानसिंह, अक्षय प्रताप सिंह समेत परिजनों और ग्रामीणों ने खुशी जाहिर किया है।4