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रीवा के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर उठते सवालों के बीच प्रशासन की यह चुप्पी कई बड़े संकेत दे रही है। क्या यह विकास है या विस्थापन का डर? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें। 👇 रीवा के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर उठते सवालों के बीच प्रशासन की यह चुप्पी कई बड़े संकेत दे रही है। क्या यह विकास है या विस्थापन का डर? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें। 👇
चन्दन भइया
रीवा के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर उठते सवालों के बीच प्रशासन की यह चुप्पी कई बड़े संकेत दे रही है। क्या यह विकास है या विस्थापन का डर? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें। 👇 रीवा के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर उठते सवालों के बीच प्रशासन की यह चुप्पी कई बड़े संकेत दे रही है। क्या यह विकास है या विस्थापन का डर? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें। 👇
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- रीवा के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर उठते सवालों के बीच प्रशासन की यह चुप्पी कई बड़े संकेत दे रही है। क्या यह विकास है या विस्थापन का डर? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें। 👇 रीवा के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर उठते सवालों के बीच प्रशासन की यह चुप्पी कई बड़े संकेत दे रही है। क्या यह विकास है या विस्थापन का डर? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें। 👇1
- अधिवक्ता की संदिग्ध मौत पर बेटी ने उठाए सवाल, किराएदार पर हत्या का शक अधिवक्ता की संदिग्ध मौत पर बेटी ने उठाए सवाल, किराएदार पर हत्या का शक  बेटी का आरोप—गंभीर धाराओं में केस के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं [vid प्रयागराज। अधिवक्ता सोमेंद्र गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में उनकी बेटी श्रुति गुप्ता ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। श्रुति गुप्ता ने बताया कि 12 सितंबर की सुबह जार्जटाउन थाना क्षेत्र में उनके पिता की बाथरूम में पानी में डूबने से मौत की सूचना मिली थी। सूचना उनके पिता के किराएदार ने दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि अधिवक्ता बाल्टी में मुंह डाले पड़े थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दिल्ली में रहने वाली श्रुति सूचना मिलने पर प्रयागराज पहुंचीं और अंतिम संस्कार के बाद 13 सितंबर को थाने जाकर अपने पिता की मौत पर संदेह जताते हुए शिकायत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्हें पुलिस के अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। करीब 23 दिन बाद पुलिस कमिश्नर और ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर से मुलाकात तथा आश्वासन के बाद जार्जटाउन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। श्रुति के मुताबिक, मुकदमे में उनके पिता के किराएदार को आरोपी बनाया गया है। श्रुति गुप्ता ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने घटनास्थल को सील नहीं किया और आरोपी करीब 10 दिन तक उसी घर में रहा। इस दौरान घर के जरूरी सामान और दस्तावेज गायब होने का भी उन्होंने आरोप लगाया। उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी वह लगातार पुलिस कार्यालयों के चक्कर लगाती रहीं और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करती रहीं। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को उनका बयान दर्ज किया गया, लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मृतक की बेटी ने घटना के समय अपने पिता और आरोपी के मोबाइल की लोकेशन की जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिता के कमरे की तलाशी के दौरान उन्हें एक ऐसा आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अलग था, लेकिन फोटो आरोपी की थी। कार्ड पर लखनऊ का पता दर्ज होने की बात भी उन्होंने कही। श्रुति के अनुसार, इस संबंध में विवेचना अधिकारी को जानकारी दी गई, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थाने के पुलिसकर्मियों ने शिकायत के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। श्रुति ने बताया कि 11 सितंबर की रात और 12 सितंबर की सुबह की घटनाओं के बीच की परिस्थितियां भी संदेह पैदा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 11 सितंबर को आरोपी का जन्मदिन था। पत्रकार वार्ता में अपनी मां किरण गुप्ता के साथ पहुंचीं श्रुति ने अधिवक्ता समुदाय से भी इस मामले में आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब अधिवक्ता एकता की बात की जाती है, तो एक अधिवक्ता की संदिग्ध मौत के मामले में भी सभी को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई करने तथा अपने पिता की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।1
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- बालू लदे डंपर ने युवक को मारी टक्कर हो गई मौत पूरी जांच में जुटी! सरायअकिल कोतवाली के कनैली चौराहे के पास सोमवार सुबह बालू लदे डंपर ' की टक्कर से एक युवक की मौत हो गईं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जवान बेटे की मौत से पीड़ित परिवार में कोहराम है।कनैली गांव निवासी शिवचंद्र (19) प्त्र हीरा रैदास मेहनत-मजद्री कर परिवार' का 'गुजारा करता था। सोमवार सुबह करीब 7:45 बजे कनैली चौराहे के पास वह सड़क पार कर थं था1
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- प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में अधिवक्ता व उनके परिजनों से अभद्रता एवं जानलेवा हमले के विरोध में अधिवक्ताओं का विशाल धरना प्रदर्शन व चक्काजाम... प्रयागराज: मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों द्वारा एक अधिवक्ता, उनकी पत्नी और चालक को बंधक बनाकर लोहे की रॉड व डंडों से किए गए जानलेवा हमले के विरोध में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट और स्थानीय जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं ने जबरदस्त रोष व्यक्त किया। घटना के विरोध में आज सोमवार को सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने एसआरएन अस्पताल परिसर में अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमा के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। विगत दिनों पीड़ित अधिवक्ता सर्वेश शुक्ला एक लावारिस असहाय मरीज को गंभीर स्थिति में इलाज के लिये एसआरएन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां तैनात जूनियर डॉक्टरों ने इलाज में घोर लापरवाही बरती और जब अधिवक्ता ने इसका विरोध किया, तो डॉक्टरों ने गुंडागर्दी की सारी सीमाएं लांघ दीं। अधिवक्ता सर्वेश शुक्ला, उनकी पत्नी और चालक को एक कमरे में बंद कर दिया गया। डॉक्टरों ने उन्हें लोहे की रॉड व डंडों से बेरहमी से पीटा, शरीर पर सुइयां चुभोईं और बीच-बचाव करने आईं अधिवक्ता की पत्नी के साथ भी बेहद अभद्र व अशोभनीय व्यवहार किया। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। अस्पताल परिसर में धरने के दौरान जब डीसीपी सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट के आश्वासनों से अधिवक्ता संतुष्ट नहीं हुए, तो आक्रोशित अधिवक्ताओं ने सिविल लाइंस स्थित महात्मा गांधी मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। साथ ही अपनी शर्तों को रखते हुए कहा की :- 1. पीड़ित अधिवक्ता व उनके परिजनों पर जानलेवा हमला करने वाले दोषी जूनियर डॉक्टरों की तत्काल प्रभाव से गिरफ्तारी की जाए। 2. हमलावर डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। 3. अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों के साथ आए दिन होने वाली डॉक्टरों की बदसलूकी और गुंडागर्दी पर परमानेंट रोक लगाई जाए। अधिवक्ता समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक दोषी डॉक्टरों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह आंदोलन और धरना प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा। यदि प्रशासन ने त्वरित कदम नहीं उठाए, तो अधिवक्ता इस आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की होगी।1
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