सिंगाही खुर्द में 30 लाख का घोटाला: सचिव को मोहरा बनाकर ठंडे बस्ते में डाला मामला? निष्पक्ष जांच हो तो सचिव के.के. गुप्ता समेत कई जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज पलियाकलां-खीरी। विकास खंड पलिया की ग्राम पंचायत सिंगाही खुर्द में करीब एक माह पूर्व उजागर हुए लगभग 30 लाख रुपये के बहुचर्चित घोटाले का मामला अब ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। आरोप है कि प्रशासन ने तेज-तर्रार कार्रवाई का दिखावा करते हुए मुख्य आरोपी बताकर केवल सचिव पर कार्रवाई दर्शा दी, जबकि इस पूरे खेल के कथित मुख्य सूत्रधारों और ग्राम प्रधान को अभयदान दे दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई आधी-अधूरी है और यदि निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच हो जाए तो कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, 4 दिसंबर को आनन-फानन में इस कथित घोटाले की पटकथा लिखी गई। आरोप है कि ठेकेदार एवं सामग्री आपूर्तिकर्ता फर्म कुंज बिहारी ट्रेडर्स तथा कंसल्टिंग इंजीनियर कपिल कुमार की भूमिका संदिग्ध रही। बताया जाता है कि फर्म स्वामी ने जेई से लेकर ग्राम प्रधान तक को साधने की कवायद शुरू की, वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर ने बेहद कम समयावधि में माप पुस्तिकाओं (एमबी) में भारी-भरकम माप चढ़ाकर भुगतान का रास्ता साफ कर दिया। ग्रामीणों व जानकारों का दावा है कि माप पुस्तिकाओं में दर्ज तिथियां और एक ही कार्य पर एक ही दिन में टुकड़ों में की गई एंट्रियां संदेह पैदा करती हैं। आरोप है कि कुछ ही घंटों में लाखों रुपये के कार्यों का मापन दिखाकर भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यदि इन माप पुस्तिकाओं की तकनीकी जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले में ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर बिना प्रधान की जानकारी के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर सचिव के.के. गुप्ता को मुख्य आरोपी दर्शाकर कार्रवाई की गई, लेकिन अन्य संबंधित अधिकारियों, जेई और कंसल्टिंग इंजीनियर की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। इससे यह चर्चा तेज है कि कहीं पूरे प्रकरण में सचिव को मोहरा बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं की गई। सिंगाही खुर्द के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराई जाए, बैंक खातों, माप पुस्तिकाओं और भुगतान प्रक्रिया का मिलान किया जाए तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बहुचर्चित 30 लाख के घोटाले को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या फिर वास्तव में दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सिंगाही खुर्द में 30 लाख का घोटाला: सचिव को मोहरा बनाकर ठंडे बस्ते में डाला मामला? निष्पक्ष जांच हो तो सचिव के.के. गुप्ता समेत कई जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज पलियाकलां-खीरी। विकास खंड पलिया की ग्राम पंचायत सिंगाही खुर्द में करीब एक माह पूर्व उजागर हुए लगभग 30 लाख रुपये के बहुचर्चित घोटाले का मामला अब ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। आरोप है कि प्रशासन ने तेज-तर्रार कार्रवाई का दिखावा करते हुए मुख्य आरोपी बताकर केवल सचिव पर कार्रवाई दर्शा दी, जबकि इस पूरे खेल के कथित मुख्य सूत्रधारों और ग्राम प्रधान को अभयदान दे दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई आधी-अधूरी है और यदि निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच हो जाए तो कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, 4 दिसंबर को आनन-फानन में इस कथित घोटाले की पटकथा लिखी गई। आरोप है कि ठेकेदार एवं सामग्री आपूर्तिकर्ता फर्म कुंज बिहारी ट्रेडर्स तथा कंसल्टिंग इंजीनियर कपिल कुमार की भूमिका संदिग्ध रही। बताया जाता है कि फर्म स्वामी ने जेई से लेकर ग्राम प्रधान तक को साधने की कवायद शुरू की, वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर ने बेहद कम समयावधि में माप पुस्तिकाओं (एमबी) में भारी-भरकम माप चढ़ाकर भुगतान का रास्ता साफ कर दिया। ग्रामीणों व जानकारों का दावा है कि माप पुस्तिकाओं में दर्ज तिथियां और एक ही कार्य पर एक ही दिन में टुकड़ों में की गई एंट्रियां संदेह पैदा करती हैं। आरोप है कि कुछ ही घंटों में लाखों रुपये के कार्यों का मापन दिखाकर भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यदि इन माप पुस्तिकाओं की तकनीकी जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले में ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर बिना प्रधान की जानकारी के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर सचिव के.के. गुप्ता को मुख्य आरोपी दर्शाकर कार्रवाई की गई, लेकिन अन्य संबंधित अधिकारियों, जेई और कंसल्टिंग इंजीनियर की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। इससे यह चर्चा तेज है कि कहीं पूरे प्रकरण में सचिव को मोहरा बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं की गई। सिंगाही खुर्द के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराई जाए, बैंक खातों, माप पुस्तिकाओं और भुगतान प्रक्रिया का मिलान किया जाए तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बहुचर्चित 30 लाख के घोटाले को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या फिर वास्तव में दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- लखीमपुर खीरी मिश्राना चौकी चौराहे पर लगा एक बिजली का पोल पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। पोल का निचला हिस्सा पूरी तरह गल चुका है और वह किसी भी समय गिर सकता है। यह पोल राहगीरों और आसपास की दुकानों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। यह चौराहा क्षेत्र का व्यस्त इलाका है, जहां दिनभर सैकड़ों लोग और वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यदि पोल गिरता है तो जान-माल की भारी हानि हो सकती है।1
- पलिया थाना समाधान दिवस में दर्ज हुईं तीन शिकायतें, दो का निस्तारण, सीओ जितेन्द्र सिंह परिहार की अध्यक्षता में हुआ आयोजन आज शनिवार को पलिया कोतवाली में सीओ जितेन्द्र सिंह परिहार की अध्यक्षता में सम्पूर्ण थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें पुलिस की एक एवं राजस्व की दो शिकायतों सहित कुल तीन शिकायतें दर्ज हुईं। पुलिस की एक व राजस्व की एक शिकायत सहित दो का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। लम्बित शिकायतों का निष्पक्षतापूर्वक समय से निस्तारण करने के लिए सम्बंधितों को निर्देशित किया गया। समाधान दिवस में समस्त लेखपाल, थानाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी सहित अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे।1
- लखीमपुर खीरी। मिश्राना चौकी चौराहे पर लगा बिजली का पोल जर्जर होकर गिरने की स्थिति में पहुंच गया है। पोल का निचला हिस्सा गल चुका है, जिससे राहगीरों और दुकानदारों में भय बना हुआ है। यह इलाका बेहद व्यस्त है, ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है1
- Post by Rajeev Mishra1
- खीरी टाउन। कस्बे के व्यस्ततम सदर चौराहे पर शनिवार को सवारी उतारने के मामूली विवाद ने तूल पकड़ लिया। देखते ही देखते मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और एक ऑटो चालक के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो मारपीट में बदल गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।2
- खीरी टाउन के सदर चौराहे पर सवारी उतरने को लेकर पुलिस कर्मियों ने ऑटो चालक को पीटा. वीडियो हुआ वायरल1
- गोला छोटी काशी मे कल रात्रि गोला नगर पालिका की ओर से लगी होर्डिंग हटाने व गायब करने को लेकर क्या कहा पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने, पालिका अध्यक्ष ने बताया कि होर्डिंग, परिसर मे लगे हुए कैंप की दिशा को दर्शाता था, साथ ही ये भी बताया कि uppcl के जे.ई. से भी मारपीट हुई है लेकिन इसके विषय मे अभी कोई जानकारी नहीं हुई है,1
- छह से सात माह में मिलेगा आराम पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर के सीओ तिराहा से कमल चौराहा तक रोड के दोनों तरफ इंटरलॉकिंग कार्य इस समय जोरों पर है। सड़क के दोनों ओर खुदाई कर गिट्टी व मिट्टी डालने का काम शुरू हो गया है। निर्माण कार्य के चलते मार्ग संकरा हो गया है, जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क किनारे गिट्टी के ढेर लगे हैं और ट्रक खड़े होने से आवागमन बाधित हो रहा है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को धूल व उबड़-खाबड़ रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। शाम के समय स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जब यातायात का दबाव बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य शुरू होने से अस्थायी परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद सड़क की तस्वीर बदल जाएगी। इंटरलॉकिंग लगने से न सिर्फ सड़क मजबूत होगी बल्कि जलभराव की समस्या से भी राहत मिलेगी। पीडब्ल्यूडी जेई एसपी सिंह ने बताया कि रोड की साइडों में इंटरलॉकिंग का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। अभी एक साइड से कार्य शुरू किया गया है, विभाग का प्रयास है कि छह से सात माह के भीतर कार्य पूरा करा दिया जाए, ताकि लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके। फिलहाल निर्माण कार्य के कारण धूल, जाम और असुविधा से लोग जूझ रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि कार्य पूर्ण होते ही यही सड़क नगरवासियों के लिए आरामदायक और सुगम आवागमन का मार्ग बन जाएगी।1
- लखीमपुर खीरी मंदिर परिसर में बैनर लगाने का मामला, नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा मंदिर परिसर में अगर वह है तो मंदिर परिसर से अनुमति लेनी होगी अनुमति नहीं ले गई थी।1