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खीरी टाउन के सदर चौराहे पर सवारी उतरने को लेकर पुलिस कर्मियों ने ऑटो चालक को पीटा. वीडियो हुआ वायरल

3 hrs ago
user_News click india
News click india
गोला गोकरन नाथ, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

खीरी टाउन के सदर चौराहे पर सवारी उतरने को लेकर पुलिस कर्मियों ने ऑटो चालक को पीटा. वीडियो हुआ वायरल

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • खीरी टाउन के सदर चौराहे पर सवारी उतरने को लेकर पुलिस कर्मियों ने ऑटो चालक को पीटा. वीडियो हुआ वायरल
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    खीरी टाउन के सदर चौराहे पर सवारी उतरने को लेकर पुलिस कर्मियों ने ऑटो चालक को पीटा.
वीडियो हुआ वायरल
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    News click india
    गोला गोकरन नाथ, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • *नैतिकता के स्वयंभू ठेकेदार भगवा पटका पहन, लाठी लेकर पार्क पहुंचे थे।* लेकिन समय ख़राब निकला और ख़ुद ही फंस गए। ये तो सिर मुड़ाते ही ओले पड़ गए।
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    *नैतिकता के स्वयंभू ठेकेदार भगवा पटका पहन, लाठी लेकर पार्क पहुंचे थे।*
लेकिन समय ख़राब निकला और ख़ुद ही फंस गए।
ये तो सिर मुड़ाते ही ओले पड़ गए।
    user_Awadh News
    Awadh News
    Local News Reporter मितौली, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    11 min ago
  • खीरी टाउन। कस्बे के व्यस्ततम सदर चौराहे पर शनिवार को सवारी उतारने के मामूली विवाद ने तूल पकड़ लिया। देखते ही देखते मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और एक ऑटो चालक के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो मारपीट में बदल गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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    खीरी टाउन।
कस्बे के व्यस्ततम सदर चौराहे पर शनिवार को सवारी उतारने के मामूली विवाद ने तूल पकड़ लिया। देखते ही देखते मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और एक ऑटो चालक के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो मारपीट में बदल गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
    user_Kayyoom idrishi
    Kayyoom idrishi
    मितौली, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • पतीसा नगर में नाली का पानी निकालने की कोई सुविधा नहीं है मतलब अपनी रोड़ों पर भरा रहता है बच्चे स्कूल जाने से गिरते हैं कीचड़ में और बहुत ही ज्यादा मतलब परेशानी दिक्कत हो रही है इसकी कोई सुनवाई नहीं
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    पतीसा नगर में नाली का पानी निकालने की कोई सुविधा नहीं है मतलब अपनी रोड़ों पर भरा रहता है बच्चे स्कूल जाने से गिरते हैं कीचड़ में और बहुत ही ज्यादा मतलब परेशानी दिक्कत हो रही है इसकी कोई सुनवाई नहीं
    user_Sunil kumar
    Sunil kumar
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सिंगाही के अंतर्गत ग्राम पंचायत भेड़ौरा में बाइक में अचानक लगी आग, चालक की सूझबूझ से बची जान सिंगाही क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत भेड़ौरा में बीती रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बच्चे को दवा दिलाने ले जा रहे दो बाइक सवारों की बाइक में अचानक आग लग गई। बताया जा रहा है कि बाइक चालक ने तत्परता और सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत बाइक से कूदकर साथ बैठे लोगों को भी धक्का देकर दूर किया, जिससे सभी की जान बच गई। हालांकि इस दौरान बाइक चालक को हल्की चोटें आईं, जबकि बाइक पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने घायल बाइक चालक की सराहना करते हुए उसकी बहादुरी की प्रशंसा की रिपोर्टर मुखत्यार सिंह एम डी न्यूज। वाइस क्राइम रिपोर्टर इंचार्ज
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    सिंगाही के अंतर्गत ग्राम पंचायत  भेड़ौरा में बाइक में अचानक लगी आग, चालक की सूझबूझ से बची जान
सिंगाही क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत भेड़ौरा में बीती रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बच्चे को दवा दिलाने ले जा रहे दो बाइक सवारों की बाइक में अचानक आग लग गई।
बताया जा रहा है कि बाइक चालक ने तत्परता और सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत बाइक से कूदकर साथ बैठे लोगों को भी धक्का देकर दूर किया, जिससे सभी की जान बच गई।
हालांकि इस दौरान बाइक चालक  को हल्की चोटें आईं, जबकि बाइक पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने घायल  बाइक चालक की सराहना करते हुए उसकी बहादुरी की  प्रशंसा की  रिपोर्टर  मुखत्यार सिंह एम डी न्यूज। वाइस क्राइम रिपोर्टर  इंचार्ज
    user_मीडिया का आधिकार समाचार लखीमपुर खीरी
    मीडिया का आधिकार समाचार लखीमपुर खीरी
    पत्रकार लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • 💯🤟😎
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    💯🤟😎
    user_Amit Kumar
    Amit Kumar
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • निष्पक्ष जांच हो तो सचिव के.के. गुप्ता समेत कई जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज पलियाकलां-खीरी। विकास खंड पलिया की ग्राम पंचायत सिंगाही खुर्द में करीब एक माह पूर्व उजागर हुए लगभग 30 लाख रुपये के बहुचर्चित घोटाले का मामला अब ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। आरोप है कि प्रशासन ने तेज-तर्रार कार्रवाई का दिखावा करते हुए मुख्य आरोपी बताकर केवल सचिव पर कार्रवाई दर्शा दी, जबकि इस पूरे खेल के कथित मुख्य सूत्रधारों और ग्राम प्रधान को अभयदान दे दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई आधी-अधूरी है और यदि निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच हो जाए तो कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, 4 दिसंबर को आनन-फानन में इस कथित घोटाले की पटकथा लिखी गई। आरोप है कि ठेकेदार एवं सामग्री आपूर्तिकर्ता फर्म कुंज बिहारी ट्रेडर्स तथा कंसल्टिंग इंजीनियर कपिल कुमार की भूमिका संदिग्ध रही। बताया जाता है कि फर्म स्वामी ने जेई से लेकर ग्राम प्रधान तक को साधने की कवायद शुरू की, वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर ने बेहद कम समयावधि में माप पुस्तिकाओं (एमबी) में भारी-भरकम माप चढ़ाकर भुगतान का रास्ता साफ कर दिया। ग्रामीणों व जानकारों का दावा है कि माप पुस्तिकाओं में दर्ज तिथियां और एक ही कार्य पर एक ही दिन में टुकड़ों में की गई एंट्रियां संदेह पैदा करती हैं। आरोप है कि कुछ ही घंटों में लाखों रुपये के कार्यों का मापन दिखाकर भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यदि इन माप पुस्तिकाओं की तकनीकी जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले में ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर बिना प्रधान की जानकारी के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर सचिव के.के. गुप्ता को मुख्य आरोपी दर्शाकर कार्रवाई की गई, लेकिन अन्य संबंधित अधिकारियों, जेई और कंसल्टिंग इंजीनियर की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। इससे यह चर्चा तेज है कि कहीं पूरे प्रकरण में सचिव को मोहरा बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं की गई। सिंगाही खुर्द के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराई जाए, बैंक खातों, माप पुस्तिकाओं और भुगतान प्रक्रिया का मिलान किया जाए तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बहुचर्चित 30 लाख के घोटाले को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या फिर वास्तव में दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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    निष्पक्ष जांच हो तो सचिव के.के. गुप्ता समेत कई जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज
पलियाकलां-खीरी। विकास खंड पलिया की ग्राम पंचायत सिंगाही खुर्द में करीब एक माह पूर्व उजागर हुए लगभग 30 लाख रुपये के बहुचर्चित घोटाले का मामला अब ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। आरोप है कि प्रशासन ने तेज-तर्रार कार्रवाई का दिखावा करते हुए मुख्य आरोपी बताकर केवल सचिव  पर कार्रवाई दर्शा दी, जबकि इस पूरे खेल के कथित मुख्य सूत्रधारों और ग्राम प्रधान को अभयदान दे दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई आधी-अधूरी है और यदि निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच हो जाए तो कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है।
सूत्रों के अनुसार, 4 दिसंबर को आनन-फानन में इस कथित घोटाले की पटकथा लिखी गई। आरोप है कि ठेकेदार एवं सामग्री आपूर्तिकर्ता फर्म कुंज बिहारी ट्रेडर्स तथा कंसल्टिंग इंजीनियर कपिल कुमार की भूमिका संदिग्ध रही। बताया जाता है कि फर्म स्वामी ने जेई से लेकर ग्राम प्रधान तक को साधने की कवायद शुरू की, वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर ने बेहद कम समयावधि में माप पुस्तिकाओं (एमबी) में भारी-भरकम माप चढ़ाकर भुगतान का रास्ता साफ कर दिया।
ग्रामीणों व जानकारों का दावा है कि माप पुस्तिकाओं में दर्ज तिथियां और एक ही कार्य पर एक ही दिन में टुकड़ों में की गई एंट्रियां संदेह पैदा करती हैं। आरोप है कि कुछ ही घंटों में लाखों रुपये के कार्यों का मापन दिखाकर भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यदि इन माप पुस्तिकाओं की तकनीकी जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
मामले में ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर बिना प्रधान की जानकारी के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर सचिव के.के. गुप्ता को मुख्य आरोपी दर्शाकर कार्रवाई की गई, लेकिन अन्य संबंधित अधिकारियों, जेई और कंसल्टिंग इंजीनियर की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। इससे यह चर्चा तेज है कि कहीं पूरे प्रकरण में सचिव को मोहरा बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं की गई।
सिंगाही खुर्द के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराई जाए, बैंक खातों, माप पुस्तिकाओं और भुगतान प्रक्रिया का मिलान किया जाए तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस बहुचर्चित 30 लाख के घोटाले को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या फिर वास्तव में दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
    user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी मंदिर परिसर में बैनर लगाने का मामला, नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा मंदिर परिसर में अगर वह है तो मंदिर परिसर से अनुमति लेनी होगी अनुमति नहीं ले गई थी।
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    लखीमपुर खीरी मंदिर परिसर में बैनर लगाने का मामला, नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा मंदिर परिसर में अगर वह है तो मंदिर परिसर से अनुमति लेनी होगी अनुमति नहीं ले गई थी।
    user_News click india
    News click india
    गोला गोकरन नाथ, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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