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दुर्गा विसर्जन पर पुलिस की पैनी नजर, सुरक्षा चाक-चौबंद दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर साहिबगंज पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी अमित कुमार सिंह के निर्देश पर जिलेभर में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि विसर्जन जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते निपटा जा सके।
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दुर्गा विसर्जन पर पुलिस की पैनी नजर, सुरक्षा चाक-चौबंद दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर साहिबगंज पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी अमित कुमार सिंह के निर्देश पर जिलेभर में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि विसर्जन जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते निपटा जा सके।
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- 31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला। आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।1
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