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12 hrs ago
user_Durgesh kanojiya Uttar Pradesh
Durgesh kanojiya Uttar Pradesh
Basti, Uttar Pradesh•
12 hrs ago

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • Post by Durgesh kanojiya Uttar Pradesh
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    Post by Durgesh kanojiya Uttar Pradesh
    user_Durgesh kanojiya Uttar Pradesh
    Durgesh kanojiya Uttar Pradesh
    Basti, Uttar Pradesh•
    12 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) 🏥जांच की आड़ में 'मेहरबानी': जब रक्षक ही बन जाएं भक्षकों के ढाल🏥 ⭐लापरवाही से मौत, सिस्टम की मेहरबानी: क्या रसूखदारों को बचाने के लिए लटकाए जाते हैं जांच के मामले? ⭐कछुआ चाल जांच, सफेदपोश गुनहगार: पीड़ितों के आंसू सूख गए, पर साहब की 'रिपोर्ट' नहीं आई। ⭐मौत के सौदागरों पर कार्रवाई की आंच नहीं, 'जांच' के नाम पर बस्ती में हो रही केवल लीपापोती। ⭐साहब की 'मेहरबानी' ने बदला सिस्टम: जब रक्षक ही बन जाएं भक्षकों के ढाल! बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मौतों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है, लेकिन उससे भी ज्यादा भयावह है स्वास्थ्य विभाग की वह 'जांच', जो दोषियों को सजा देने के बजाय उन्हें बचाने का सेफ पैसेज (सुरक्षित रास्ता) बन गई है। जिले के आधा दर्जन से अधिक दागदार अस्पताल और जांच केंद्र आज भी बेखौफ संचालित हो रहे हैं, क्योंकि विभाग ने कार्रवाई की फाइल पर 'जांच' का ऐसा पत्थर रख दिया है जो हटने का नाम नहीं ले रहा। 💫जांच नहीं, यह तो दोषियों का 'सुरक्षा कवच' है! हैरानी की बात यह है कि जब भी किसी अस्पताल की लापरवाही से कोई नवजात दम तोड़ता है या किसी बुजुर्ग की सांसें ऑक्सीजन के अभाव में थम जाती हैं, तो विभाग तत्काल एक 'जांच समिति' गठित कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेता है। लेकिन असलियत में ये समितियां न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि समय काटने के लिए बनाई जाती हैं। नियम कहता है कि चिकित्सा लापरवाही की जांच एक निश्चित समय सीमा में पूरी होनी चाहिए, लेकिन बस्ती में स्थिति इसके ठीक उलट है। यहाँ महीनों तक रिपोर्ट नहीं आती, और इस बीच अस्पताल संचालक बिचौलिए के जरिए पीड़ित परिवारों को 'मैनेज' करने का खेल खेलते हैं। 💫सिस्टम की 'मेहरबानी' के तीन जीते-जाते सबूत: 🔥सीएचसी भानपुर (खैरा): जहाँ एक एएनएम पर प्रसव के नाम पर अवैध वसूली और नवजात की मौत का दोष सिद्ध हो चुका है, फिर भी विभाग की फाइलें रेंग रही हैं। आखिर किस रसूख के आगे कार्रवाई बौनी साबित हो रही है? 🔥सीएचसी विक्रमजोत: लापरवाही ने यहाँ भी एक मासूम की जान ली। सीएमओ साहब ने टीम तो बना दी, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार ऐसा है जैसे वह किसी दूसरे लोक से आनी हो। 🔥भानपुर ऑक्सीजन कांड: गंभीर हालत में बुजुर्ग का ऑक्सीजन हटा देना किसी हत्या से कम नहीं है। परिजनों की आंखों के आंसू सूख गए, लेकिन जांच टीम की कलम से अभी तक सच्चाई की स्याही नहीं निकली। 💫बिचौलियों का 'सहानुभूति' वाला धंधा रिपोर्ट में एक और कड़वी सच्चाई सामने आई है। जब तक विभाग की जांच लटकती है, तब तक अस्पताल संचालक और उनके गुर्गे पीड़ित परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से इतना थका देते हैं कि वे समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। विडंबना देखिए, जिस स्वास्थ्य विभाग को गरीबों का सहारा होना चाहिए था, वह आज सफेदपोश 'मौत के सौदागरों' के लिए क्लीन चिट बांटने वाली मशीन बन गया है। 💫सवाल जो जवाब मांगते हैं: 👉क्या सीएमओ कार्यालय सिर्फ फाइलें दबाने का अड्डा बन गया है? 👉क्या जांच रिपोर्ट में देरी जानबूझकर की जाती है ताकि दोषियों को भागने या सबूत मिटाने का मौका मिले? उ👉न मांओं की चीखें प्रशासन को क्यों नहीं सुनाई देतीं जिनके बच्चे विभाग की 'ढिलाई' की भेंट चढ़ गए? 💫विभागीय मिलीभगत: स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बड़ी घटना होने पर केवल समिति गठित कर अपनी जिम्मेदारी की "इतिश्री" (खानापूर्ति) कर लेते हैं। 💫दोषियों को 'क्लीन चिट': कई मामलों में जांच रिपोर्ट इतनी देरी से आती है या ऐसी बनाई जाती है कि अस्पताल संचालकों को आसानी से 'क्लीन चिट' मिल जाती है और वे दोबारा निडर होकर अपना धंधा शुरू कर देते हैं। 💫पीड़ितों का शोषण: समय बीतने के साथ पीड़ित परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से थक जाता है। इसी का फायदा उठाकर बिचौलिए सक्रिय होते हैं और मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाते हैं। 📢अधिकारी का बयान: सीएमओ राजीव निगम का कहना है कि "रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी," जो कि लेख के अनुसार एक मानक और टालमटोल वाला जवाब है। बस्ती का स्वास्थ्य विभाग आज वेंटिलेटर पर है। अगर समय रहते इन 'दागदार' संस्थानों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो 'जांच' शब्द से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। जनता जवाब चाहती है—न्याय कब मिलेगा या फिर एक और मौत का इंतजार किया जा रहा है?
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
🏥जांच की आड़ में 'मेहरबानी': जब रक्षक ही बन जाएं भक्षकों के ढाल🏥
⭐लापरवाही से मौत, सिस्टम की मेहरबानी: क्या रसूखदारों को बचाने के लिए लटकाए जाते हैं जांच के मामले?
⭐कछुआ चाल जांच, सफेदपोश गुनहगार: पीड़ितों के आंसू सूख गए, पर साहब की 'रिपोर्ट' नहीं आई।
⭐मौत के सौदागरों पर कार्रवाई की आंच नहीं, 'जांच' के नाम पर बस्ती में हो रही केवल लीपापोती।
⭐साहब की 'मेहरबानी' ने बदला सिस्टम: जब रक्षक ही बन जाएं भक्षकों के ढाल!
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मौतों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है, लेकिन उससे भी ज्यादा भयावह है स्वास्थ्य विभाग की वह 'जांच', जो दोषियों को सजा देने के बजाय उन्हें बचाने का सेफ पैसेज (सुरक्षित रास्ता) बन गई है। जिले के आधा दर्जन से अधिक दागदार अस्पताल और जांच केंद्र आज भी बेखौफ संचालित हो रहे हैं, क्योंकि विभाग ने कार्रवाई की फाइल पर 'जांच' का ऐसा पत्थर रख दिया है जो हटने का नाम नहीं ले रहा।
💫जांच नहीं, यह तो दोषियों का 'सुरक्षा कवच' है!
हैरानी की बात यह है कि जब भी किसी अस्पताल की लापरवाही से कोई नवजात दम तोड़ता है या किसी बुजुर्ग की सांसें ऑक्सीजन के अभाव में थम जाती हैं, तो विभाग तत्काल एक 'जांच समिति' गठित कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेता है। लेकिन असलियत में ये समितियां न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि समय काटने के लिए बनाई जाती हैं। नियम कहता है कि चिकित्सा लापरवाही की जांच एक निश्चित समय सीमा में पूरी होनी चाहिए, लेकिन बस्ती में स्थिति इसके ठीक उलट है। यहाँ महीनों तक रिपोर्ट नहीं आती, और इस बीच अस्पताल संचालक बिचौलिए के जरिए पीड़ित परिवारों को 'मैनेज' करने का खेल खेलते हैं।
💫सिस्टम की 'मेहरबानी' के तीन जीते-जाते सबूत:
🔥सीएचसी भानपुर (खैरा): जहाँ एक एएनएम पर प्रसव के नाम पर अवैध वसूली और नवजात की मौत का दोष सिद्ध हो चुका है, फिर भी विभाग की फाइलें रेंग रही हैं। आखिर किस रसूख के आगे कार्रवाई बौनी साबित हो रही है?
🔥सीएचसी विक्रमजोत: लापरवाही ने यहाँ भी एक मासूम की जान ली। सीएमओ साहब ने टीम तो बना दी, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार ऐसा है जैसे वह किसी दूसरे लोक से आनी हो।
🔥भानपुर ऑक्सीजन कांड: गंभीर हालत में बुजुर्ग का ऑक्सीजन हटा देना किसी हत्या से कम नहीं है। परिजनों की आंखों के आंसू सूख गए, लेकिन जांच टीम की कलम से अभी तक सच्चाई की स्याही नहीं निकली।
💫बिचौलियों का 'सहानुभूति' वाला धंधा
रिपोर्ट में एक और कड़वी सच्चाई सामने आई है। जब तक विभाग की जांच लटकती है, तब तक अस्पताल संचालक और उनके गुर्गे पीड़ित परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से इतना थका देते हैं कि वे समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। विडंबना देखिए, जिस स्वास्थ्य विभाग को गरीबों का सहारा होना चाहिए था, वह आज सफेदपोश 'मौत के सौदागरों' के लिए क्लीन चिट बांटने वाली मशीन बन गया है।
💫सवाल जो जवाब मांगते हैं:
👉क्या सीएमओ कार्यालय सिर्फ फाइलें दबाने का अड्डा बन गया है?
👉क्या जांच रिपोर्ट में देरी जानबूझकर की जाती है ताकि दोषियों को भागने या सबूत मिटाने का मौका मिले?
उ👉न मांओं की चीखें प्रशासन को क्यों नहीं सुनाई देतीं जिनके बच्चे विभाग की 'ढिलाई' की भेंट चढ़ गए?
💫विभागीय मिलीभगत: स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बड़ी घटना होने पर केवल समिति गठित कर अपनी जिम्मेदारी की "इतिश्री" (खानापूर्ति) कर लेते हैं।
💫दोषियों को 'क्लीन चिट': कई मामलों में जांच रिपोर्ट इतनी देरी से आती है या ऐसी बनाई जाती है कि अस्पताल संचालकों को आसानी से 'क्लीन चिट' मिल जाती है और वे दोबारा निडर होकर अपना धंधा शुरू कर देते हैं।
💫पीड़ितों का शोषण: समय बीतने के साथ पीड़ित परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से थक जाता है। इसी का फायदा उठाकर बिचौलिए सक्रिय होते हैं और मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाते हैं।
📢अधिकारी का बयान: सीएमओ राजीव निगम का कहना है कि "रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी," जो कि लेख के अनुसार एक मानक और टालमटोल वाला जवाब है।
बस्ती का स्वास्थ्य विभाग आज वेंटिलेटर पर है। अगर समय रहते इन 'दागदार' संस्थानों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो 'जांच' शब्द से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। जनता जवाब चाहती है—न्याय कब मिलेगा या फिर एक और मौत का इंतजार किया जा रहा है?
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • अगर थोड़ा बहुत हिंदुत्व या इंसानियत बची हुई है तो गौ माता के लिए सहारा बनना चाहिए
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    अगर थोड़ा बहुत हिंदुत्व या इंसानियत बची हुई है तो गौ माता के लिए सहारा बनना चाहिए
    user_पवन सिंह सनातनी
    पवन सिंह सनातनी
    Hindu temple हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • *वही कालनेमि वाले मामले का विस्तार है..!* *दिल्ली: संघ प्रचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक इंद्रेश कुमार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान का खंडन किया है। स्वामी ने कहा था कि एयरपोर्ट पर मिले इंद्रेश कुमार ने उन्हें बताया था कि वे 10 लाख हिंदू लड़कियों की मुस्लिमों से शादी करा चुके हैं।*
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    *वही कालनेमि वाले मामले का विस्तार है..!*
*दिल्ली: संघ प्रचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक इंद्रेश कुमार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान का खंडन किया है। स्वामी ने कहा था कि एयरपोर्ट पर मिले इंद्रेश कुमार ने उन्हें बताया था कि वे 10 लाख हिंदू लड़कियों की मुस्लिमों से शादी करा चुके हैं।*
    user_KHALILABAD TIMES
    KHALILABAD TIMES
    Newspaper publisher घनघटा, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • (ब्यूरो संतकबीरनगर) पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन व क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा चेकिंग संदिग्ध व्यक्ति/वाहन व भ्रमण क्षेत्र के दौरान अभियुक्त नाम पता अब्दुल रहीम पुत्र अब्दुल मजीद निवासी बसियाजोत थाना महुली जनपद संतकबीरनगर को उसके घर के पास में छापेमारी कर अफीम की अवैध खेती का भंडाफोड़ करते हुए 08 किग्रा 750 ग्राम अफीम के हरे पौधों (फल व फूल सहित) के साथ गिरफ्तार न्यायालय रवाना किया गया । आज दिनाँक 23.03.2026 को थाना महुली पर सूचना मिली कि ग्राम बसियाजोत में अभियुक्त अब्दुल रहीम उपरोक्त द्वारा अपने घर के सामने खेत में अफीम का पौधा लगाया गया है । उक्त सूचना पर थानाध्यक्ष महुली पुलिस टीम द्वारा दबिश देकर अभियुक्त को 08 किग्रा 750 ग्राम अफीम के हरे पौधे (फल व फूल सहित) के साथ गिरफ्तार किया गया । बरामदगी कुल 08 किग्रा 750 ग्राम अफीम के हरे पौधे (फल व फूल सहित) । पंजीकृत अभियोग मु0अ0सं0 97/2026 धारा 8/18 NDPS एक्ट थाना महुली जनपद संतकबीरनगर । पुलिस टीम का विवरण थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पाण्डेय, उ0नि0 सोमनाथ मिश्रा, का0 अरविन्द कुमार यादव, का0 रितेश यादव, का0 राजमंगल यादव, का0 सुनील कुमार सिंह, का0 सोनू यादव ।
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    (ब्यूरो संतकबीरनगर)
पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर  संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर  सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन व क्षेत्राधिकारी धनघटा  अभय नाथ मिश्र के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष महुली  दुर्गेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा चेकिंग संदिग्ध व्यक्ति/वाहन व भ्रमण क्षेत्र के दौरान अभियुक्त नाम पता अब्दुल रहीम पुत्र अब्दुल मजीद निवासी बसियाजोत थाना महुली जनपद संतकबीरनगर को उसके घर के पास में छापेमारी कर अफीम की अवैध खेती का भंडाफोड़ करते हुए 08 किग्रा 750 ग्राम अफीम के हरे पौधों (फल व फूल सहित) के साथ गिरफ्तार  न्यायालय रवाना किया गया ।
आज दिनाँक 23.03.2026 को थाना महुली पर सूचना मिली कि ग्राम बसियाजोत में अभियुक्त अब्दुल रहीम उपरोक्त द्वारा अपने घर के सामने खेत में अफीम का पौधा लगाया गया है । उक्त सूचना पर थानाध्यक्ष महुली पुलिस टीम द्वारा दबिश देकर अभियुक्त को 08 किग्रा 750 ग्राम अफीम के हरे पौधे (फल व फूल सहित) के साथ गिरफ्तार किया गया ।  
बरामदगी   कुल 08 किग्रा 750 ग्राम अफीम के हरे पौधे (फल व फूल सहित) ।
पंजीकृत अभियोग मु0अ0सं0 97/2026 धारा 8/18 NDPS एक्ट थाना महुली जनपद संतकबीरनगर ।
पुलिस टीम का विवरण थानाध्यक्ष महुली  दुर्गेश कुमार पाण्डेय, उ0नि0  सोमनाथ मिश्रा, का0 अरविन्द कुमार यादव, का0 रितेश यादव, का0 राजमंगल यादव, का0 सुनील कुमार सिंह, का0 सोनू यादव ।
    user_Ashwini Kumar Pandey
    Ashwini Kumar Pandey
    पत्रकार Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    6 hrs ago
  • Post by Vipin Rai Journalist
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    Post by Vipin Rai Journalist
    user_Vipin Rai Journalist
    Vipin Rai Journalist
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • आकाशवाणी,, 23-3-2026 ई0' 🙏❤🚩हर हर (हरि हर) महादेव 🙏 🙏🚩🌹🙏🚩🌹🙏🚩🌹🙏🚩🌹❤✍️
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    आकाशवाणी,, 
23-3-2026 ई0'
🙏❤🚩हर हर (हरि हर) महादेव 🙏
🙏🚩🌹🙏🚩🌹🙏🚩🌹🙏🚩🌹❤✍️
    user_Kamalakant tiwari
    Kamalakant tiwari
    Journalist खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • हरियाणा पुलिस की बड़ी सफलता देखने को मिली
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    हरियाणा पुलिस की बड़ी सफलता देखने को मिली
    user_KHALILABAD TIMES
    KHALILABAD TIMES
    Newspaper publisher घनघटा, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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