डंगोह गाँव के प्रवासियों ने श्रद्धा के साथ किया मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन डंगोह गाँव के प्रवासियों द्वारा बसंत पंचमी के पावन पर्व पर विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा की विधिवत स्थापना कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। बसंत पंचमी के दिन पूरे विधि-विधान से मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई, जहां श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर भजन-कीर्तन एवं आरती के माध्यम से देवी मां की आराधना की। परंपरा के अनुसार, पूजा के अगले दिन यानी षष्ठी तिथि को मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विसर्जन यात्रा डंगोह से प्रारंभ होकर दौलतपुर बाजार व चलेट मार्ग से होते हुए बाणदू भद्रकाली पहुंची, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने “मां सरस्वती की जय” के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी को मां सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है। इस दिन घर-घर में मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना कर विधिविधान से पूजा की जाती है। हिंदू परंपरा में किसी भी बड़ी मूर्ति की स्थापना के बाद उसका विसर्जन अनिवार्य माना गया है। बसंत पंचमी के पश्चात अगले दिन (षष्ठी तिथि) विसर्जन करने की परंपरा प्रचलित है, जिससे पूजा का विधिवत समापन होता है और देवी मां की कृपा घर में बनी रहती है। पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी के अगले दिन सूर्योदय के बाद एवं षष्ठी तिथि के दौरान मूर्ति विसर्जन को शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद विसर्जन से बचने की परंपरा है। डंगोह गाँव के प्रवासियों ने इन सभी धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए श्रद्धा, आस्था और अनुशासन के साथ मां सरस्वती की आराधना एवं विसर्जन संपन्न किया।
डंगोह गाँव के प्रवासियों ने श्रद्धा के साथ किया मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन डंगोह गाँव के प्रवासियों द्वारा बसंत पंचमी के पावन पर्व पर विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा की विधिवत स्थापना कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। बसंत पंचमी के दिन पूरे विधि-विधान से मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई, जहां श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर भजन-कीर्तन एवं आरती के माध्यम से देवी मां की आराधना की। परंपरा के अनुसार, पूजा के अगले दिन यानी षष्ठी तिथि को मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विसर्जन यात्रा डंगोह से प्रारंभ होकर दौलतपुर बाजार व चलेट मार्ग से होते हुए बाणदू भद्रकाली पहुंची, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने “मां सरस्वती की जय” के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी को मां सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है। इस दिन घर-घर में मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना कर विधिविधान से पूजा की जाती है। हिंदू परंपरा में किसी भी बड़ी मूर्ति की स्थापना के बाद उसका विसर्जन अनिवार्य माना गया है। बसंत पंचमी के पश्चात अगले दिन (षष्ठी तिथि) विसर्जन करने की परंपरा प्रचलित है, जिससे पूजा का विधिवत समापन होता है और देवी मां की कृपा घर में बनी रहती है। पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी के अगले दिन सूर्योदय के बाद एवं षष्ठी तिथि के दौरान मूर्ति विसर्जन को शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद विसर्जन से बचने की परंपरा है। डंगोह गाँव के प्रवासियों ने इन सभी धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए श्रद्धा, आस्था और अनुशासन के साथ मां सरस्वती की आराधना एवं विसर्जन संपन्न किया।
- डंगोह गाँव के प्रवासियों ने श्रद्धा के साथ किया मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन डंगोह गाँव के प्रवासियों द्वारा बसंत पंचमी के पावन पर्व पर विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा की विधिवत स्थापना कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। बसंत पंचमी के दिन पूरे विधि-विधान से मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई, जहां श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर भजन-कीर्तन एवं आरती के माध्यम से देवी मां की आराधना की। परंपरा के अनुसार, पूजा के अगले दिन यानी षष्ठी तिथि को मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विसर्जन यात्रा डंगोह से प्रारंभ होकर दौलतपुर बाजार व चलेट मार्ग से होते हुए बाणदू भद्रकाली पहुंची, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने “मां सरस्वती की जय” के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी को मां सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है। इस दिन घर-घर में मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना कर विधिविधान से पूजा की जाती है। हिंदू परंपरा में किसी भी बड़ी मूर्ति की स्थापना के बाद उसका विसर्जन अनिवार्य माना गया है। बसंत पंचमी के पश्चात अगले दिन (षष्ठी तिथि) विसर्जन करने की परंपरा प्रचलित है, जिससे पूजा का विधिवत समापन होता है और देवी मां की कृपा घर में बनी रहती है। पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी के अगले दिन सूर्योदय के बाद एवं षष्ठी तिथि के दौरान मूर्ति विसर्जन को शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद विसर्जन से बचने की परंपरा है। डंगोह गाँव के प्रवासियों ने इन सभी धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए श्रद्धा, आस्था और अनुशासन के साथ मां सरस्वती की आराधना एवं विसर्जन संपन्न किया।1
- बंगाणा, उपमंडल बंगाणा क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बुधान में राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। "मेरा भारत मेरा वोट" थीम पर आधारित 16वा राष्ट्रीय मतदाता दिवस बुधान विद्यालय में उत्साह एवं गरिमा के साथ मनाया गया। विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस का थीम "मेरा भारत मेरा वोट है" जिसका उद्देश्य लोकतन्त्र को सशक्त बनाते हुये नागरिकों विशेषकर युवाओें में मतदान के प्रति जागरूकता एवं सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। उप- प्रधानाचार्य ने इस अवसर पर पूर्ण राज्यत्व दिवस की महत्ता पर भी प्रकाश डाला । इस अवसर पर पूनम संदल +1 विज्ञान संकाय की छात्रा ने सभी विद्यार्थियों व स्टॉफ सदस्यों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शपथ दिलाई। सभी विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के दौरान यह प्रण लिया कि जब वे मतदाता बनेंगे तो अपने मताधिकार का प्रयोग पूर्ण सजगता निष्ठा व ईमानदारी से करेंगे व इस जानकारी को जन- जन को देंगे। इस अवसर पर अनिल कुमार उप- प्रधानाचार्य, मनोज कुमार प्रवक्ता, अम्बिका रानी प्रवक्ता, राजीव डोगरा प्रवक्ता, सतीश कुमार प्रवक्ता, मनिंदर कुमार प्रवक्ता, धीरज कतना प्रवक्ता, केवल चंद टी जी टी, रमेश चंद टी जी टी, कमल सिंह पी ई टी व समस्त स्टॉफ सदस्य मौजूद रहे। फोटो सहित1
- ऊना। सेवा भारती द्वारा मरीजों और उनके साथ अस्पतालों में आने वाले तीमारदारों की सुविधा के लिए चलाए जा रहे सेवा प्रकल्पों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। सेवा भारती ने जिला ऊना के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान क्षेत्रीय अस्पताल में बिस्तर सेवा की शुरुआत कर दी है। इस सेवा प्रकल्प का विधिवत शुभारंभ शनिवार को अस्पताल परिसर में पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस अवसर पर सेवा भारती के प्रांत संगठन मंत्री राकेश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ संस्था के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सेवा प्रकल्प को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा बिस्तरों के रखरखाव हेतु एक अलग कमरा उपलब्ध करवाया गया है। बिस्तर सेवा के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को विश्राम के लिए बिस्तर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके लिए तीमारदारों को एक निर्धारित राशि सुरक्षा जमा के रूप में जमा करवानी होगी, जो बिस्तर वापिस करने पर उन्हें पूरी तरह रिफंड कर दी जाएगी। इससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों को रात गुजारने में होने वाली असुविधा से राहत मिलेगी। इस अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री राकेश कुमार ने बताया कि सेवा भारती द्वारा प्रदेश के बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में कई प्रकार के सेवा प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। उसी कड़ी में ऊना क्षेत्रीय अस्पताल में बिस्तर सेवा की शुरुआत की गई है। प्रथम चरण में अस्पताल में 50 बिस्तर उपलब्ध करवाए जाएंगे तथा भविष्य में आवश्यकता के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।1
- Post by Dinesh Kumar1
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- बक्से में 45 मिनट बंद रहा बॉयफ्रेंड:घर में चाची आईं तो ताला लगाया; पुलिस ने लड़के को बाहर निकाला कानपुर नगर, घटना चकेरी थाना क्षेत्र की है। यूपी | कानपुर में बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए उसके घर पहुंचा। उसी वक्त गर्लफ्रेंड के घर वाले आ गए। छिपाने के लिए गर्लफ्रेंड ने बॉयफ्रेंड को लोहे के बक्से में बंद कर दिया। बक्से से आहट हुई तो उसे खुलवाया गया, तब बॉयफ्रेंड बाहर निकला। पुलिस ने हिरासत में लिया।1
- Saharanpur kolagarh1