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आज एक व्यक्ति ने अपने संझले चाचा जी के परमधाम गमन के एक अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि चाचा जी अत्यधिक बेचैनी में थे, किंतु पूजा संपन्न होने के लगभग आधे घंटे के भीतर उनकी समस्त बेचैनी शांत हो गई। शांति प्राप्त होने के उपरांत, चाचा जी ने स्वयं अपने हाथों से दान-दक्षिणा दी, प्रसाद ग्रहण किया और फिर अत्यंत शांत एवं सहज भाव से अपनी परमधाम की यात्रा पर निकल गए। पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने इस घटना को भगवान विष्णु की असीम कृपा और सनातन धर्म की दिव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव बताया, और प्रभु से प्रार्थना की है कि वे चाचा जी की पवित्र आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
Samachar times
आज एक व्यक्ति ने अपने संझले चाचा जी के परमधाम गमन के एक अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि चाचा जी अत्यधिक बेचैनी में थे, किंतु पूजा संपन्न होने के लगभग आधे घंटे के भीतर उनकी समस्त बेचैनी शांत हो गई। शांति प्राप्त होने के उपरांत, चाचा जी ने स्वयं अपने हाथों से दान-दक्षिणा दी, प्रसाद ग्रहण किया और फिर अत्यंत शांत एवं सहज भाव से अपनी परमधाम की यात्रा पर निकल गए। पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने इस घटना को भगवान विष्णु की असीम कृपा और सनातन धर्म की दिव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव बताया, और प्रभु से प्रार्थना की है कि वे चाचा जी की पवित्र आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
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- गिरिडीह जिले के धनवार नगर पंचायत अंतर्गत बड़ा चौक स्थित होटल डिस्कवरी में मंगलवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कथित देह व्यापार के एक रैकेट का भंडाफोड़ किया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो युवतियों और दो युवकों को आपत्तिजनक स्थिति में हिरासत में लिया, साथ ही मौके से कुछ आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए गए। खोरीमहुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जांच में होटल में सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया, जहाँ आने-जाने वाले लोगों का कोई रजिस्टर नहीं रखा जा रहा था। पुलिस ने होटल के मैनेजर प्रदीप साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में सामने आया कि होटल का संचालन अनिल साव नामक व्यक्ति कर रहा था, जो छापेमारी की भनक लगते ही मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। अनैतिक गतिविधियों की पुष्टि होने के बाद, प्रशासन ने मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार की उपस्थिति में मंगलवार देर शाम लगभग 8:30 बजे होटल डिस्कवरी को सील कर दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह होटल पहले भी इसी तरह की शिकायतों को लेकर विवादों में रहा है और इससे पहले भी इसमें दो बार छापेमारी हो चुकी है। लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर प्रशासन ने इस बार सख्त कार्रवाई करते हुए होटल को सील किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में खोरीमहुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार, धनवार थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार, धनवार बीडीओ धर्मेंद्र कुमार दास, महिला पुलिस बल और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। फिलहाल, पुलिस फरार संचालक अनिल साव की तलाश में जुटी है और पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।1
- गिरिडीह जिले के धनवार नगर पंचायत अंतर्गत बड़ा चौक स्थित होटल डिस्कवरी में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर संयुक्त छापेमारी कर देह व्यापार का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो महिलाओं और दो पुरुषों को मौके से गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान होटल से आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई, जिसके बाद प्रशासन ने होटल को विधिवत सील कर दिया। पुलिस पूछताछ के लिए होटल के मैनेजर को थाना ले गई है, जबकि होटल का संचालक मौके से फरार बताया जा रहा है। फरार संचालक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।1
- आज एक व्यक्ति ने अपने संझले चाचा जी के परमधाम गमन के एक अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि चाचा जी अत्यधिक बेचैनी में थे, किंतु पूजा संपन्न होने के लगभग आधे घंटे के भीतर उनकी समस्त बेचैनी शांत हो गई। शांति प्राप्त होने के उपरांत, चाचा जी ने स्वयं अपने हाथों से दान-दक्षिणा दी, प्रसाद ग्रहण किया और फिर अत्यंत शांत एवं सहज भाव से अपनी परमधाम की यात्रा पर निकल गए। पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने इस घटना को भगवान विष्णु की असीम कृपा और सनातन धर्म की दिव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव बताया, और प्रभु से प्रार्थना की है कि वे चाचा जी की पवित्र आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में दोस्तों को 'गुड मॉर्निंग' कहते हुए आज 'साला' की शादी का वीडियो देखने का न्योता दिया गया है।1
- एकीकृत बिहार के समय 7 जुलाई 1998 को हुए अटका नरसंहार की 28वीं बरसी मंगलवार को बगोदर के अटका स्थित पड़ाव मैदान में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नरसंहार में जान गंवाने वाले तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल सहित सभी 10 दिवंगतों को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सरकार से पीड़ित परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई गई। यह घटना आज भी क्षेत्र के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिनी जाती है। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत अटका पड़ाव मैदान स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसमें सबसे पहले स्व. मथुरा प्रसाद मंडल की पत्नी शांति देवी ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने श्रद्धासुमन चढ़ाए। इस दौरान 'दिवंगत अमर रहें' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। बगोदर के पूर्व विधायक और राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गौतम सागर राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव, प्रमुख आशा राज, विधायक पुत्र रवि महतो और झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए गौतम सागर राणा ने अटका नरसंहार को क्षेत्र के इतिहास की अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना बताया। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि घटना के इतने वर्षों बाद भी आश्रित परिवारों को नौकरी नहीं मिल पाई है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और यदि देश को नक्सलवाद से मुक्त करना है, तो समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को समाप्त कर समतामूलक व्यवस्था स्थापित करनी होगी। जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव ने भी सरकार से पूर्व की घोषणा के अनुरूप प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई, और कहा कि सरकार को वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल ने स्व. मथुरा प्रसाद मंडल को एक दूरदर्शी और जुझारू जननेता बताते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर अलग होती, और उनकी कमी आज भी क्षेत्र के लोग गहराई से महसूस करते हैं। उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 1998 को अटका के दमौआ में हुए इस नरसंहार में तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल के साथ धुपाली महतो, बिहारी महतो, सीताराम महतो, रघुनाथ प्रसाद, मीरन प्रसाद, तुलसी महतो, दशरथ मंडल, जगरनाथ महतो और सरयू महतो की हत्या कर दी गई थी।1
- नवादा जिले के वारिसलीगंज में एक मानवीय घटना सामने आई है, जहाँ वारिसलीगंज थानाध्यक्ष ने इंसानियत की एक मिसाल पेश की। क्राइम मीटिंग से लौटते वक्त, थानाध्यक्ष ने एक असहाय बुजुर्ग महिला को देखा और उनकी मदद करते हुए, उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुँचाया।1
- गरगडीहा निवासी नौशाद शाह, जो वर्तमान में जेल हिरासत में हैं, अपनी माँ के निधन के तीन दिन बाद उनकी कब्र पर पहुँचे। जानकारी के अनुसार, करीब तीन दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में नौशाद शाह की माँ का देहांत हो गया था, लेकिन उस समय नौशाद शाह को जेल से अस्थायी रिहाई या छुट्टी नहीं मिल सकी थी। इसी कारण वह अपनी माँ के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। बाद में, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत, हजारीबाग पुलिस की निगरानी में नौशाद शाह को गरगडीहा कब्रिस्तान लाया गया। वहाँ उन्होंने अपनी माँ की कब्र पर पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और दुआ की। इस दौरान, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। इस मार्मिक घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी एक भावनात्मक माहौल देखा गया। अपनी माँ को श्रद्धांजलि देने के बाद, पुलिस ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी कराकर नौशाद शाह को सुरक्षा व्यवस्था के बीच वापस अपने साथ ले गई।1
- लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कालीबाड़ी के समीप चांदोरी रोड की स्थिति बेहद खराब हो गई, जिससे दिन भर यहां जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। सड़कें पूरी तरह तालाब में बदल गईं और दुकानदारों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आया। जाम नालियों के कारण पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई, जिसके चलते बारिश का पानी कई साइकिल दुकानों में भी घुस गया।1