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कटनी जिले में बसों के निरीक्षण अभियान के तहत की गई जांच में कुल सात बसों पर कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई इन बसों के इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) में पाई गई खामियों के कारण की गई।
विकास श्रीवास्तव
कटनी जिले में बसों के निरीक्षण अभियान के तहत की गई जांच में कुल सात बसों पर कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई इन बसों के इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) में पाई गई खामियों के कारण की गई।
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- कटनी जिले में यात्रियों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को यातायात पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने एक संयुक्त विशेष अभियान चलाया। इस सघन निरीक्षण के दौरान कुल 41 बसों की जांच की गई, जिनमें से 7 बसें सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इन बसों में या तो इमरजेंसी एग्जिट नहीं मिला या उनमें गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके परिणामस्वरूप मौके पर ही वैधानिक कार्रवाई की गई। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर संचालित इस अभियान का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा (आईपीएस) के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य, उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) रत्नेश मिश्रा, यातायात थाना प्रभारी निरीक्षक अनूप सिंह ठाकुर और आरटीओ संतोष पाल ने किया। संयुक्त टीम ने कटनी बस स्टैंड सहित जिलेभर में संचालित लोक परिवहन और स्कूली बसों की गहन जांच की, जिसमें सुरक्षा उपकरणों और इमरजेंसी व्यवस्था का परीक्षण किया गया। इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि बसों के इमरजेंसी एग्जिट के सामने कोई सीट, सामान या अन्य अवरोध न हो, ताकि आपातकालीन स्थिति में यात्रियों और स्कूली बच्चों को सुरक्षित और शीघ्र बाहर निकाला जा सके। नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ आरटीओ विभाग ने उनकी फिटनेस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहन संचालकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यातायात पुलिस ने "सुरक्षित परिवहन – सुरक्षित जीवन, सुरक्षित विद्यार्थी – सुरक्षित भविष्य" की अपील भी जारी की है।1
- कटनी जिले में बसों के निरीक्षण अभियान के तहत की गई जांच में कुल सात बसों पर कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई इन बसों के इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) में पाई गई खामियों के कारण की गई।1
- कटनी शहर के एमजीएम हॉस्पिटल में मंगलवार को पथरी के ऑपरेशन के दौरान 24 वर्षीय युवती की मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर में काफी हंगामा हुआ। मृतका के परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताया है, उनका कहना है कि मरीज को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए। जानकारी के अनुसार, विजयराघवगढ़ निवासी फिजा बी पिछले लगभग एक वर्ष से पथरी की समस्या से पीड़ित थीं। बेहतर उपचार के लिए उन्हें सोमवार को कटनी के एमजीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आवश्यक जांचों के बाद मंगलवार को चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी, जिस पर परिजनों की सहमति के बाद ऑपरेशन शुरू किया गया। मृतका के परिजन सोहेल अली का आरोप है कि ऑपरेशन शुरू होने के करीब एक घंटे बाद अस्पताल से खून की आवश्यकता बताई गई, जिसकी व्यवस्था उन्होंने लगभग 15 मिनट में कर दी। इसके कुछ समय बाद डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की ब्लीडिंग नहीं रुक रही है और अंततः फिजा को मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यह चिकित्सकीय लापरवाही का मामला है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और दोष सिद्ध होने पर अस्पताल के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए, शव को जिला अस्पताल भेजा गया है, जहाँ दो वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर ने भी युवती की मृत्यु की परिस्थितियों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, एमजीएम हॉस्पिटल के प्रबंधक संजय तिवारी ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने मरीज को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल खुद भी निष्पक्ष जांच चाहता है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।2
- कटनी में पानी की किल्लत से जूझ रहे लोगों को नगर निगम कटनी की ओर से लगातार दूषित पानी परोसा जा रहा है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि लोगों को केवल कटाई घाट का पानी नहीं, बल्कि किसी अन्य गढ़्ढे का दूषित पानी पिलाया जा रहा है। इस गंभीर स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं कि नगर निगम इसकी जांच क्यों नहीं कर रहा है और क्या आम जनता को ऐसे ही पानी पीना पड़ेगा। कटनी शासन प्रशासन की इस अनदेखी के कारण, कृषि उपज मंडी पहरुआ शंकरगढ़ जैसे क्षेत्रों में लोग हर रोज दूषित पानी पीने से बीमार हो रहे हैं।1
- मुख्यमंत्री के सिवनी दौरे से पहले, कांग्रेस पार्टी ने प्रदर्शन किया। इस दौरान, प्रदर्शन में शामिल कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।1
- सी न्यूज़ भारत 16 जुलाई 2026 को लखनऊ के ताजमहल होटल में दिखाई देगा।1
- मध्य प्रदेश के कटनी जिले में माधवनगर थाना क्षेत्र के भरौली गांव स्थित एएसके एग्रो दाल मिल में बुधवार दोपहर अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। फैक्ट्री से उठता काला धुआं कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था, जिसने पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्र को दहला दिया। आग के कारण परिसर में रखा कच्चा माल, तैयार दाल और अन्य सामान जलकर नष्ट हो गया, जिससे लाखों रुपये के भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही माधवनगर थाना पुलिस और नगर निगम की फायर ब्रिगेड तुरंत मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, एक के बाद एक करीब 10 फायर टेंडर बुलाए गए और आग बुझाने का अभियान लंबे समय तक चलता रहा। दमकल दल की प्राथमिकता आग को फैक्ट्री के बाकी हिस्सों और आसपास की संपत्तियों तक फैलने से रोकना थी, जिसके लिए वे लगातार पानी की बौछार कर रहे थे। यह भी बताया गया है कि फैक्ट्री का संचालन मनीष संगतानी द्वारा किया जाता है। हालांकि, आग लगने की असली वजह अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन शॉर्ट सर्किट सहित कई संभावित कारणों की जांच की जा रही है। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए, जिन्हें नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस ने क्षेत्र में घेराबंदी कर रखी थी। फायर अधिकारी शैलेंद्र दुबे के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम को तत्काल रवाना कर दिया गया था, लेकिन आग काफी भयानक थी, जिसके कारण अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग करना पड़ा। प्रशासन अब फैक्ट्री प्रबंधन के साथ मिलकर हुए कुल नुकसान का आकलन करेगा।1