logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

13 hrs ago
user_Deepak.kumar
Deepak.kumar
Farmer जलालपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
13 hrs ago

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • स्कूल चलो अभियान के तहत निकली जागरूकता रैली, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
    1
    स्कूल चलो अभियान के तहत निकली जागरूकता रैली, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
    user_Ashok verma
    Ashok verma
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। ​साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि आप ज़िंदा हैं क्योंकि आप सांस ले रहे हैं, तो रुकिए! अपनी धड़कन नहीं, जरा सरकारी कागज़ चेक कीजिए। क्योंकि बस्ती के राजस्व विभाग ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े तांत्रिक नहीं कर पाए—उन्होंने एक चलते-फिरते इंसान को जीते-जी 'भूत' बना दिया। ​साहब मैं ज़िंदा हूँ... सबूत? ये कफ़न देख लीजिए! ​मामला हमारे सेवानिवृत्त कर्मचारी इशहाक अली साहब का है। बेचारे 2019 में अस्पताल से रिटायर हुए, लेकिन राजस्व विभाग के रजिस्टर में तो वो 2012 में ही 'स्वर्गवासी' हो चुके थे। अब इसे विभाग की फुर्ती कहें या लेखपाल साहब की 'दिव्य दृष्टि', कि उन्होंने 7 साल पहले ही इशहाक अली का परलोक गमन तय कर दिया। ​जब दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर पैर घिस गए, तो थक-हारकर इशहाक अली को कफ़न ओढ़कर डीएम कार्यालय पहुंचना पड़ा। शायद उन्हें लगा कि 'मुर्दा' बनकर ही इस 'मुर्दा व्यवस्था' को जगाया जा सकता है। ​लेखपाल की 'जादुई कलम' का कमाल ​इस पूरी पटकथा के असली डायरेक्टर हैं हमारे 'लेखपाल साहब'। उनकी कलम में वो ताकत है कि: ​एक झटके में ज़िंदा आदमी को मृत घोषित कर दिया। ​और उससे भी बड़ा चमत्कार—उनकी पैतृक जमीन एक महिला के नाम 'दाखिल-खारिज' भी कर दी। ​इसे भ्रष्टाचार कहें या कलाकारी? ज़मीन हड़पने का ऐसा 'क्रिएटिव' तरीका कि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। जब कागजों में इंसान ही मर गया, तो ज़मीन पर हक किसका? ​7 साल का वनवास और पहचान की जंग ​हैरानी की बात यह है कि इशहाक अली पिछले 7 सालों से चीख-चीख कर कह रहे हैं कि "हुजूर, मैं यहीं हूँ, ज़िंदा हूँ", लेकिन सरकारी फाइलों के कान नहीं होते। फाइलों के लिए तो वही सच है जो लेखपाल की स्याही ने लिख दिया। एक सरकारी कर्मचारी, जिसने पूरी उम्र सिस्टम की सेवा की, आज उसी सिस्टम के सामने खुद के 'अस्तित्व' की भीख मांग रहा है। ​व्यवस्था पर बड़ा सवाल ​यह सिर्फ़ एक ज़मीन का विवाद नहीं है, यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा तमाचा है। ​क्या ऊपर के अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी है? ​क्या एक रिपोर्ट लगाने से पहले वेरिफिकेशन की कोई ज़रूरत नहीं समझी गई? ​निष्कर्ष: बस्ती का यह मामला बताता है कि यहाँ 'यमराज' भैंसे पर नहीं, बल्कि सरकारी बाइक पर चलते हैं और हाथ में गदा नहीं, लेखपाल का बस्ता रखते हैं। इशहाक अली जी, आप कफ़न ओढ़कर सही जगह पहुंचे हैं, क्योंकि यह सिस्टम सालों से गहरी नींद में सोया हुआ है। दुआ कीजिए कि साहब की नींद खुले, वरना कागजों की दुनिया में तो आप कब के 'स्वर्ग' सिधार चुके हैं!
    1
    अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
​साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि आप ज़िंदा हैं क्योंकि आप सांस ले रहे हैं, तो रुकिए! अपनी धड़कन नहीं, जरा सरकारी कागज़ चेक कीजिए। क्योंकि बस्ती के राजस्व विभाग ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े तांत्रिक नहीं कर पाए—उन्होंने एक चलते-फिरते इंसान को जीते-जी 'भूत' बना दिया।
​साहब मैं ज़िंदा हूँ... सबूत? ये कफ़न देख लीजिए!
​मामला हमारे सेवानिवृत्त कर्मचारी इशहाक अली साहब का है। बेचारे 2019 में अस्पताल से रिटायर हुए, लेकिन राजस्व विभाग के रजिस्टर में तो वो 2012 में ही 'स्वर्गवासी' हो चुके थे। अब इसे विभाग की फुर्ती कहें या लेखपाल साहब की 'दिव्य दृष्टि', कि उन्होंने 7 साल पहले ही इशहाक अली का परलोक गमन तय कर दिया।
​जब दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर पैर घिस गए, तो थक-हारकर इशहाक अली को कफ़न ओढ़कर डीएम कार्यालय पहुंचना पड़ा। शायद उन्हें लगा कि 'मुर्दा' बनकर ही इस 'मुर्दा व्यवस्था' को जगाया जा सकता है।
​लेखपाल की 'जादुई कलम' का कमाल
​इस पूरी पटकथा के असली डायरेक्टर हैं हमारे 'लेखपाल साहब'। उनकी कलम में वो ताकत है कि:
​एक झटके में ज़िंदा आदमी को मृत घोषित कर दिया।
​और उससे भी बड़ा चमत्कार—उनकी पैतृक जमीन एक महिला के नाम 'दाखिल-खारिज' भी कर दी।
​इसे भ्रष्टाचार कहें या कलाकारी? ज़मीन हड़पने का ऐसा 'क्रिएटिव' तरीका कि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। जब कागजों में इंसान ही मर गया, तो ज़मीन पर हक किसका?
​7 साल का वनवास और पहचान की जंग
​हैरानी की बात यह है कि इशहाक अली पिछले 7 सालों से चीख-चीख कर कह रहे हैं कि "हुजूर, मैं यहीं हूँ, ज़िंदा हूँ", लेकिन सरकारी फाइलों के कान नहीं होते। फाइलों के लिए तो वही सच है जो लेखपाल की स्याही ने लिख दिया। एक सरकारी कर्मचारी, जिसने पूरी उम्र सिस्टम की सेवा की, आज उसी सिस्टम के सामने खुद के 'अस्तित्व' की भीख मांग रहा है।
​व्यवस्था पर बड़ा सवाल
​यह सिर्फ़ एक ज़मीन का विवाद नहीं है, यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा तमाचा है।
​क्या ऊपर के अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी है?
​क्या एक रिपोर्ट लगाने से पहले वेरिफिकेशन की कोई ज़रूरत नहीं समझी गई?
​निष्कर्ष: बस्ती का यह मामला बताता है कि यहाँ 'यमराज' भैंसे पर नहीं, बल्कि सरकारी बाइक पर चलते हैं और हाथ में गदा नहीं, लेखपाल का बस्ता रखते हैं। इशहाक अली जी, आप कफ़न ओढ़कर सही जगह पहुंचे हैं, क्योंकि यह सिस्टम सालों से गहरी नींद में सोया हुआ है। दुआ कीजिए कि साहब की नींद खुले, वरना कागजों की दुनिया में तो आप कब के 'स्वर्ग' सिधार चुके हैं!
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बस्ती में ‘ज़िंदा आदमी’ ने खुद को किया पेश, DM ऑफिस में लेटकर लगाया न्याय की गुहार उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुज़ुर्ग व्यक्ति कफ़न और मालाओं में लिपटा हुआ जिला अधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचा और ज़मीन पर लेट गया। कुछ देर बाद वह उठकर एक तख्ती हाथ में लेकर बैठ गया, जिस पर लिखा था— “DM साहब, मैं ज़िंदा हूँ।” बुज़ुर्ग का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में उसे गलती से मृत घोषित कर दिया गया है, जिसकी वजह से उसकी ज़मीन और अधिकारों पर संकट खड़ा हो गया है। उसने प्रशासन से अपनी ‘जिंदगी’ वापस दिलाने की गुहार लगाई। यह अनोखा विरोध देख वहां मौजूद लोग और अधिकारी भी हैरान रह गए। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है।
    1
    बस्ती में ‘ज़िंदा आदमी’ ने खुद को किया पेश, DM ऑफिस में लेटकर लगाया न्याय की गुहार
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुज़ुर्ग व्यक्ति कफ़न और मालाओं में लिपटा हुआ जिला अधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचा और ज़मीन पर लेट गया। कुछ देर बाद वह उठकर एक तख्ती हाथ में लेकर बैठ गया, जिस पर लिखा था— “DM साहब, मैं ज़िंदा हूँ।”
बुज़ुर्ग का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में उसे गलती से मृत घोषित कर दिया गया है, जिसकी वजह से उसकी ज़मीन और अधिकारों पर संकट खड़ा हो गया है। उसने प्रशासन से अपनी ‘जिंदगी’ वापस दिलाने की गुहार लगाई।
यह अनोखा विरोध देख वहां मौजूद लोग और अधिकारी भी हैरान रह गए। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है।
    user_Naresh rawal
    Naresh rawal
    Basti, Uttar Pradesh•
    8 hrs ago
  • @sachin tiwari 2655
    1
    @sachin tiwari 2655
    user_SACHIN Tiwari
    SACHIN Tiwari
    Video Creator लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • अभी यह सब कहां है, पुराना जमाना तो खत्म हो गया अब डिजिटल जमाना आ गया है गाड़ी में बैठी है और लड़की के द्वारा पहुंच जाइए जितना मजा पहले के बाराती में आता था नाच गाना अब तो कुछ भी नहीं बस डीजे बजाया पहुंच जाएगी लड़की वाले के यहां अब वह दौर बिल्कुल ख़त्म हो गया है, आजकल के दौर में सब नए तरीकों से चल रहा है।
    1
    अभी यह सब कहां है,  पुराना जमाना तो खत्म हो गया अब डिजिटल जमाना आ गया है गाड़ी में बैठी है और लड़की के द्वारा पहुंच जाइए जितना मजा पहले के बाराती में आता था नाच गाना अब तो कुछ भी नहीं बस डीजे बजाया पहुंच जाएगी लड़की वाले के यहां अब वह दौर बिल्कुल ख़त्म हो गया है, आजकल के दौर में सब नए तरीकों से चल रहा है।
    user_ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    Voice of people आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • बस्ती में शादी समारोह में दिल दहला देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र के मलौली गोसाई गांव में एक शादी समारोह के दौरान हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मामूली रसगुल्ले के विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। आरोप है कि कैटरिंग ठेकेदार ने गुस्से में आकर 11 साल के एक बच्चे को जलते तंदूर में फेंक दिया। आग की लपटों से बच्चा चेहरे से लेकर कमर तक बुरी तरह झुलस गया। परिवार वालों ने तुरंत बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी की तलाश की जा रही है।
    1
    बस्ती में शादी समारोह में दिल दहला देने वाली घटना
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र के मलौली गोसाई गांव में एक शादी समारोह के दौरान हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मामूली रसगुल्ले के विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया।
आरोप है कि कैटरिंग ठेकेदार ने गुस्से में आकर 11 साल के एक बच्चे को जलते तंदूर में फेंक दिया। आग की लपटों से बच्चा चेहरे से लेकर कमर तक बुरी तरह झुलस गया।
परिवार वालों ने तुरंत बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है।
घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी की तलाश की जा रही है।
    user_Kedar mhapatra
    Kedar mhapatra
    Basti, Uttar Pradesh•
    10 hrs ago
  • किस की वजह से मगरमच्छ ने बंदर के साथ धोका दिया लेकिन बंदर था बहुत हुशियार मगरमच्छ की दोस्ती में पड़ी दरार...... एक बार इस वीडियो को जरूर से देखे और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
    1
    किस की वजह से मगरमच्छ ने 
बंदर के साथ धोका दिया लेकिन बंदर था बहुत हुशियार मगरमच्छ की दोस्ती में पड़ी दरार...... एक बार इस वीडियो को जरूर से देखे और  ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
    user_ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    Voice of people आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) ​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) ​बस्ती। राजनीति में सेवा का मेवा तो सबने सुना था, लेकिन बस्ती के हरैया क्षेत्र में एक 'माननीय' ने सेवा का ऐसा 'पॉइंट' खोला कि ग्राहकों की मेहनत की गाढ़ी कमाई ही 'पॉइंट-ब्लैंक' पर गायब कर दी। मामला हरैया के मुलायमगंज बाजार का है, जहाँ एक जिला पंचायत सदस्य महोदय 'कस्टमर सर्विस पॉइंट' (CSP) के नाम पर जनता के पैसों से अपनी राजनीति की 'सर्विस' चमका रहे थे। अब जब खाते खाली हुए और जनता सड़कों पर आई, तो नेता जी को अचानक 'प्रताड़ना' याद आ गई और उन्होंने 'आत्महत्या' की धमकी वाला पुराना फिल्मी पैंतरा चल दिया। ​खाते हुए 'नील बटे सन्नाटा', साहब! मेरा पैसा कहाँ गया? ​एसबीआई (SBI) शाखा केशवपुर के बाहर खड़ी भीड़ किसी सरकारी योजना का लाभ लेने नहीं, बल्कि अपनी लूटी हुई उम्मीदों की शिकायत करने आई थी। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मुलायमगंज बाजार के इस सीएसपी संचालक ने, जो कि जिला पंचायत सदस्य भी हैं, उनके खातों में सेंध लगा दी है। लोग बैंक मैनेजर के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं— "साहब! हमने तो दाने-दाने जोड़कर जमा किए थे, यहाँ तो पूरा का पूरा खाता ही गोल हो गया!" ​गबन, धमकी और गायब होने का 'मास्टर स्ट्रोक' ​इस पूरे घोटाले की पटकथा बड़ी दिलचस्प है। पहले जनता का पैसा उड़ाया गया, और जब हिसाब देने की बारी आई तो नेता जी ने 'विक्टिम कार्ड' खेल दिया। संबंधित विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप मढ़ते हुए और 'ब्याज पर पैसा लेने' का रोना रोते हुए उन्होंने आत्महत्या की धमकी भरा पत्र लिख डाला। शायद नेता जी को लगता है कि 'इमोशनल ब्लैकमेलिंग' की चादर में गबन के दाग छिप जाएंगे। ​मजेदार बात यह है कि अब 'पिता-पुत्र' दोनों ही घर से लापता हैं। पैकोलिया थाने में गुमशुदगी दर्ज है। इसे 'फरार' होना कहें या 'गायब' होना, यह तो पुलिस तय करेगी, लेकिन जनता की नजर में यह सीधा-सीधा 'हिसाब' से बचने का जुगाड़ है। ​बस्ती में 'सीएसपी' यानी 'चपत लगाओ पैसा' केंद्र? ​यह कोई पहला मामला नहीं है। बस्ती मंडल में सीएसपी संचालकों द्वारा गबन करना अब एक परंपरा बनती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर इन केंद्रों पर बैंक और प्रशासन की लगाम कितनी ढीली है? क्या कोई भी 'माननीय' कुर्सी की रसूख और बैंक की आईडी लेकर जनता की जेब काट सकता है? ​व्यवस्था पर कुछ तीखे सवाल: ​बैंक प्रशासन: जब खाते से पैसा गायब हो रहा था, तब आपकी मॉनिटरिंग प्रणाली क्या 'कुंभकर्णी नींद' में थी? ​प्रशासन: क्या आत्महत्या की धमकी मात्र देने से गबन का अपराध धुल जाता है? ​जनता: क्या अब हम अपने पैसे की सुरक्षा के लिए बैंक जाने के बजाय 'माननीयों' के रहमोकरम पर जिएं? ​नेता जी, पत्र लिखकर धमकी देना आसान है, लेकिन उन गरीबों के आंसुओं का हिसाब देना मुश्किल होगा जिनकी खून-पसीने की कमाई आपके 'डिजिटल' खेल की भेंट चढ़ गई। फिलहाल, पुलिस और बैंक जांच की फाइलें पलट रहे हैं, और जनता अपने खाली पासबुक को देख कर लोकतंत्र के इस 'अनोखे' जनसेवक को कोस रही है।
    1
    अजीत मिश्रा (खोजी)
​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
​बस्ती। राजनीति में सेवा का मेवा तो सबने सुना था, लेकिन बस्ती के हरैया क्षेत्र में एक 'माननीय' ने सेवा का ऐसा 'पॉइंट' खोला कि ग्राहकों की मेहनत की गाढ़ी कमाई ही 'पॉइंट-ब्लैंक' पर गायब कर दी। मामला हरैया के मुलायमगंज बाजार का है, जहाँ एक जिला पंचायत सदस्य महोदय 'कस्टमर सर्विस पॉइंट' (CSP) के नाम पर जनता के पैसों से अपनी राजनीति की 'सर्विस' चमका रहे थे। अब जब खाते खाली हुए और जनता सड़कों पर आई, तो नेता जी को अचानक 'प्रताड़ना' याद आ गई और उन्होंने 'आत्महत्या' की धमकी वाला पुराना फिल्मी पैंतरा चल दिया।
​खाते हुए 'नील बटे सन्नाटा', साहब! मेरा पैसा कहाँ गया?
​एसबीआई (SBI) शाखा केशवपुर के बाहर खड़ी भीड़ किसी सरकारी योजना का लाभ लेने नहीं, बल्कि अपनी लूटी हुई उम्मीदों की शिकायत करने आई थी। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मुलायमगंज बाजार के इस सीएसपी संचालक ने, जो कि जिला पंचायत सदस्य भी हैं, उनके खातों में सेंध लगा दी है। लोग बैंक मैनेजर के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं— "साहब! हमने तो दाने-दाने जोड़कर जमा किए थे, यहाँ तो पूरा का पूरा खाता ही गोल हो गया!"
​गबन, धमकी और गायब होने का 'मास्टर स्ट्रोक'
​इस पूरे घोटाले की पटकथा बड़ी दिलचस्प है। पहले जनता का पैसा उड़ाया गया, और जब हिसाब देने की बारी आई तो नेता जी ने 'विक्टिम कार्ड' खेल दिया। संबंधित विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप मढ़ते हुए और 'ब्याज पर पैसा लेने' का रोना रोते हुए उन्होंने आत्महत्या की धमकी भरा पत्र लिख डाला। शायद नेता जी को लगता है कि 'इमोशनल ब्लैकमेलिंग' की चादर में गबन के दाग छिप जाएंगे।
​मजेदार बात यह है कि अब 'पिता-पुत्र' दोनों ही घर से लापता हैं। पैकोलिया थाने में गुमशुदगी दर्ज है। इसे 'फरार' होना कहें या 'गायब' होना, यह तो पुलिस तय करेगी, लेकिन जनता की नजर में यह सीधा-सीधा 'हिसाब' से बचने का जुगाड़ है।
​बस्ती में 'सीएसपी' यानी 'चपत लगाओ पैसा' केंद्र?
​यह कोई पहला मामला नहीं है। बस्ती मंडल में सीएसपी संचालकों द्वारा गबन करना अब एक परंपरा बनती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर इन केंद्रों पर बैंक और प्रशासन की लगाम कितनी ढीली है? क्या कोई भी 'माननीय' कुर्सी की रसूख और बैंक की आईडी लेकर जनता की जेब काट सकता है?
​व्यवस्था पर कुछ तीखे सवाल:
​बैंक प्रशासन: जब खाते से पैसा गायब हो रहा था, तब आपकी मॉनिटरिंग प्रणाली क्या 'कुंभकर्णी नींद' में थी?
​प्रशासन: क्या आत्महत्या की धमकी मात्र देने से गबन का अपराध धुल जाता है?
​जनता: क्या अब हम अपने पैसे की सुरक्षा के लिए बैंक जाने के बजाय 'माननीयों' के रहमोकरम पर जिएं?
​नेता जी, पत्र लिखकर धमकी देना आसान है, लेकिन उन गरीबों के आंसुओं का हिसाब देना मुश्किल होगा जिनकी खून-पसीने की कमाई आपके 'डिजिटल' खेल की भेंट चढ़ गई। फिलहाल, पुलिस और बैंक जांच की फाइलें पलट रहे हैं, और जनता अपने खाली पासबुक को देख कर लोकतंत्र के इस 'अनोखे' जनसेवक को कोस रही है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • आप देख सकते हैं लखनऊ में इतना वीजा आग लगी थी कितने आदमी का रोजगार चला जाएगा कितने आदमी का पैसा चल गया कितनी जॉब चाहिए सरकार से हमारी यही विनती है उनके लिए कुछ उपाय किया जाए हमारे योगी आदित्यनाथ जी से
    2
    आप देख सकते हैं लखनऊ में इतना वीजा आग लगी थी कितने आदमी का रोजगार चला जाएगा कितने आदमी का पैसा चल गया कितनी जॉब चाहिए सरकार से हमारी यही विनती है उनके लिए कुछ उपाय किया जाए हमारे योगी आदित्यनाथ जी से
    user_SACHIN Tiwari
    SACHIN Tiwari
    Video Creator लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.