अजब-गजब बस्ती: जहाँ विभाग ने 'यमराज' बनकर कर दिया खेल! अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि आप ज़िंदा हैं क्योंकि आप सांस ले रहे हैं, तो रुकिए! अपनी धड़कन नहीं, जरा सरकारी कागज़ चेक कीजिए। क्योंकि बस्ती के राजस्व विभाग ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े तांत्रिक नहीं कर पाए—उन्होंने एक चलते-फिरते इंसान को जीते-जी 'भूत' बना दिया। साहब मैं ज़िंदा हूँ... सबूत? ये कफ़न देख लीजिए! मामला हमारे सेवानिवृत्त कर्मचारी इशहाक अली साहब का है। बेचारे 2019 में अस्पताल से रिटायर हुए, लेकिन राजस्व विभाग के रजिस्टर में तो वो 2012 में ही 'स्वर्गवासी' हो चुके थे। अब इसे विभाग की फुर्ती कहें या लेखपाल साहब की 'दिव्य दृष्टि', कि उन्होंने 7 साल पहले ही इशहाक अली का परलोक गमन तय कर दिया। जब दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर पैर घिस गए, तो थक-हारकर इशहाक अली को कफ़न ओढ़कर डीएम कार्यालय पहुंचना पड़ा। शायद उन्हें लगा कि 'मुर्दा' बनकर ही इस 'मुर्दा व्यवस्था' को जगाया जा सकता है। लेखपाल की 'जादुई कलम' का कमाल इस पूरी पटकथा के असली डायरेक्टर हैं हमारे 'लेखपाल साहब'। उनकी कलम में वो ताकत है कि: एक झटके में ज़िंदा आदमी को मृत घोषित कर दिया। और उससे भी बड़ा चमत्कार—उनकी पैतृक जमीन एक महिला के नाम 'दाखिल-खारिज' भी कर दी। इसे भ्रष्टाचार कहें या कलाकारी? ज़मीन हड़पने का ऐसा 'क्रिएटिव' तरीका कि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। जब कागजों में इंसान ही मर गया, तो ज़मीन पर हक किसका? 7 साल का वनवास और पहचान की जंग हैरानी की बात यह है कि इशहाक अली पिछले 7 सालों से चीख-चीख कर कह रहे हैं कि "हुजूर, मैं यहीं हूँ, ज़िंदा हूँ", लेकिन सरकारी फाइलों के कान नहीं होते। फाइलों के लिए तो वही सच है जो लेखपाल की स्याही ने लिख दिया। एक सरकारी कर्मचारी, जिसने पूरी उम्र सिस्टम की सेवा की, आज उसी सिस्टम के सामने खुद के 'अस्तित्व' की भीख मांग रहा है। व्यवस्था पर बड़ा सवाल यह सिर्फ़ एक ज़मीन का विवाद नहीं है, यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा तमाचा है। क्या ऊपर के अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी है? क्या एक रिपोर्ट लगाने से पहले वेरिफिकेशन की कोई ज़रूरत नहीं समझी गई? निष्कर्ष: बस्ती का यह मामला बताता है कि यहाँ 'यमराज' भैंसे पर नहीं, बल्कि सरकारी बाइक पर चलते हैं और हाथ में गदा नहीं, लेखपाल का बस्ता रखते हैं। इशहाक अली जी, आप कफ़न ओढ़कर सही जगह पहुंचे हैं, क्योंकि यह सिस्टम सालों से गहरी नींद में सोया हुआ है। दुआ कीजिए कि साहब की नींद खुले, वरना कागजों की दुनिया में तो आप कब के 'स्वर्ग' सिधार चुके हैं!
अजब-गजब बस्ती: जहाँ विभाग ने 'यमराज' बनकर कर दिया खेल! अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि आप ज़िंदा हैं क्योंकि आप सांस ले रहे हैं, तो रुकिए! अपनी धड़कन नहीं, जरा सरकारी कागज़ चेक कीजिए। क्योंकि बस्ती के राजस्व विभाग ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े तांत्रिक नहीं कर पाए—उन्होंने एक चलते-फिरते इंसान को जीते-जी 'भूत' बना दिया। साहब मैं ज़िंदा हूँ... सबूत? ये कफ़न देख लीजिए! मामला हमारे सेवानिवृत्त कर्मचारी इशहाक अली साहब का है। बेचारे 2019 में अस्पताल से रिटायर हुए, लेकिन राजस्व विभाग के रजिस्टर में तो वो 2012 में ही 'स्वर्गवासी' हो चुके थे। अब इसे विभाग की फुर्ती कहें या लेखपाल साहब की 'दिव्य दृष्टि', कि उन्होंने 7 साल पहले ही इशहाक अली का परलोक गमन तय कर दिया। जब दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर पैर घिस गए, तो थक-हारकर इशहाक अली को कफ़न ओढ़कर डीएम कार्यालय पहुंचना पड़ा। शायद उन्हें लगा कि 'मुर्दा' बनकर ही इस 'मुर्दा व्यवस्था' को जगाया जा सकता है। लेखपाल की 'जादुई कलम' का कमाल इस पूरी पटकथा के असली डायरेक्टर हैं हमारे 'लेखपाल साहब'। उनकी कलम में वो ताकत है कि: एक झटके में ज़िंदा आदमी को मृत घोषित कर दिया। और उससे भी बड़ा चमत्कार—उनकी पैतृक जमीन एक महिला के नाम 'दाखिल-खारिज' भी कर दी। इसे भ्रष्टाचार कहें या कलाकारी? ज़मीन हड़पने का ऐसा 'क्रिएटिव' तरीका कि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। जब कागजों में इंसान ही मर गया, तो ज़मीन पर हक किसका? 7 साल का वनवास और पहचान की जंग हैरानी की बात यह है कि इशहाक अली पिछले 7 सालों से चीख-चीख कर कह रहे हैं कि "हुजूर, मैं यहीं हूँ, ज़िंदा हूँ", लेकिन सरकारी फाइलों के कान नहीं होते। फाइलों के लिए तो वही सच है जो लेखपाल की स्याही ने लिख दिया। एक सरकारी कर्मचारी, जिसने पूरी उम्र सिस्टम की सेवा की, आज उसी सिस्टम के सामने खुद के 'अस्तित्व' की भीख मांग रहा है। व्यवस्था पर बड़ा सवाल यह सिर्फ़ एक ज़मीन का विवाद नहीं है, यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा तमाचा है। क्या ऊपर के अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी है? क्या एक रिपोर्ट लगाने से पहले वेरिफिकेशन की कोई ज़रूरत नहीं समझी गई? निष्कर्ष: बस्ती का यह मामला बताता है कि यहाँ 'यमराज' भैंसे पर नहीं, बल्कि सरकारी बाइक पर चलते हैं और हाथ में गदा नहीं, लेखपाल का बस्ता रखते हैं। इशहाक अली जी, आप कफ़न ओढ़कर सही जगह पहुंचे हैं, क्योंकि यह सिस्टम सालों से गहरी नींद में सोया हुआ है। दुआ कीजिए कि साहब की नींद खुले, वरना कागजों की दुनिया में तो आप कब के 'स्वर्ग' सिधार चुके हैं!
- सीबीएसई हाईस्कूल परीक्षा में इस वर्ष विद्यालय का परिणाम 100% रहा, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने 90% के आसपास अंक हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया। 📚 परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में जश्न का माहौल बन गया। मेधावी छात्र-छात्राओं को संस्थान प्रबंधन द्वारा सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया। 💬 प्रबंधन ने छात्रों की मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन को इस सफलता का मुख्य आधार बताया। 👏 पूरे SR इंटरनेशनल एकेडमी परिवार को इस उपलब्धि पर ढेरों बधाई और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं! #SRInternationalAcademy #CBSE #BoardResult #StudentSuccess1
- ✍️*_आशु सिंह_* 👉जनपद में स्कूली वाहनों को लेकर *एआरटीओ प्रियंवदा सिंह* ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी स्कूल संचालकों और वाहन मालिकों से अपील की है कि अपने वाहनों को समय रहते संबंधित पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराएं। 🚫 *चेतावनी भी साफ है* — यदि निर्धारित समय के भीतर वाहन पंजीकरण नहीं कराया गया, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 👉 *बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क है।* #संतकबीरनगर #BreakingNews #NewsUpdate #SchoolVehicle #ARTO #SafetyFirst *@liveuponenews*1
- थाना महुली पुलिस की तत्परता से एक 02 वर्षीय खोई हुई बच्ची को महज 03 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रार्थी मो० इरशाद पुत्र मो० इस्माइल निवासी ग्राम महादेवा, थाना मेहदावल, जनपद संतकबीरनगर की पुत्री इकरा उम्र लगभग 02 वर्ष दिनांक 17.04.2026 को घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक कहीं चली गई और कुछ समय बाद घर के पास नहीं मिली। बच्ची के न मिलने पर परिजनों द्वारा आस-पास तथा रिश्तेदारों के यहाँ काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। सूचना मिलने पर थाना महुली पुलिस द्वारा तत्काल सक्रियता दिखाते हुए आसपास के क्षेत्र में खोजबीन की गई। इसी दौरान नापता पुलिया के पास एक बच्ची मिलने की सूचना प्राप्त हुई। पुलिस द्वारा मौके पर पहुँचकर सत्यापन किया गया, जिस पर उक्त बच्ची इकरा पाई गई। तत्पश्चात बच्ची को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। अपनी बच्ची को सकुशल पाकर परिजनों ने थाना महुली पुलिस की सराहना करते हुए धन्यवाद व्यक्त किया।4
- थाना कोतवाली खलीलाबाद अन्तर्गत मगहर स्थित कबीर ऑडिटोरियम में शॉर्ट सर्किट से लगी आग पर अग्निशमन दल ने पाया काबू; एडीएम व एएसपी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण संत कबीर नगर। दिनांक 16.04.2026 को थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के अंतर्गत मगहर स्थित कबीर ऑडिटोरियम में शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक आग लगने की सूचना प्राप्त हुई । घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग द्वारा तत्काल त्वरित कार्यवाही की गयी । प्रभारी अग्निशमन अधिकारी अपनी टीम और फायर टैंकरों के साथ मौके पर पहुँचे। अग्निशमन दल द्वारा तत्परता दिखाते हुए फायर टैंकर से पंपिंग कर आग पर पूर्ण रूप से काबू पाया गया। टीम की सूझबूझ से आग को ऑडिटोरियम के अन्य हिस्सों में फैलने से समय रहते रोक लिया गया। इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। घटना की सूचना पाकर अपर जिलाधिकारी (ADM) खलीलाबाद एवं अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) संतकबीरनगर द्वारा तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने आग से हुए नुकसान का जायजा लिया और संबंधित सुरक्षा मानकों की जाँच के निर्देश दिए। अग्निशमन विभाग की त्वरित कार्यवाही के बाद अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है । प्रशासन द्वारा आग लगने के कारणों की विस्तृत जाँच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ।1
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- Post by India news 37 ( वैभव सिंह ब्यूरो चीफ) अंबेडकर नगर1
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) बस्ती। राजनीति में सेवा का मेवा तो सबने सुना था, लेकिन बस्ती के हरैया क्षेत्र में एक 'माननीय' ने सेवा का ऐसा 'पॉइंट' खोला कि ग्राहकों की मेहनत की गाढ़ी कमाई ही 'पॉइंट-ब्लैंक' पर गायब कर दी। मामला हरैया के मुलायमगंज बाजार का है, जहाँ एक जिला पंचायत सदस्य महोदय 'कस्टमर सर्विस पॉइंट' (CSP) के नाम पर जनता के पैसों से अपनी राजनीति की 'सर्विस' चमका रहे थे। अब जब खाते खाली हुए और जनता सड़कों पर आई, तो नेता जी को अचानक 'प्रताड़ना' याद आ गई और उन्होंने 'आत्महत्या' की धमकी वाला पुराना फिल्मी पैंतरा चल दिया। खाते हुए 'नील बटे सन्नाटा', साहब! मेरा पैसा कहाँ गया? एसबीआई (SBI) शाखा केशवपुर के बाहर खड़ी भीड़ किसी सरकारी योजना का लाभ लेने नहीं, बल्कि अपनी लूटी हुई उम्मीदों की शिकायत करने आई थी। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मुलायमगंज बाजार के इस सीएसपी संचालक ने, जो कि जिला पंचायत सदस्य भी हैं, उनके खातों में सेंध लगा दी है। लोग बैंक मैनेजर के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं— "साहब! हमने तो दाने-दाने जोड़कर जमा किए थे, यहाँ तो पूरा का पूरा खाता ही गोल हो गया!" गबन, धमकी और गायब होने का 'मास्टर स्ट्रोक' इस पूरे घोटाले की पटकथा बड़ी दिलचस्प है। पहले जनता का पैसा उड़ाया गया, और जब हिसाब देने की बारी आई तो नेता जी ने 'विक्टिम कार्ड' खेल दिया। संबंधित विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप मढ़ते हुए और 'ब्याज पर पैसा लेने' का रोना रोते हुए उन्होंने आत्महत्या की धमकी भरा पत्र लिख डाला। शायद नेता जी को लगता है कि 'इमोशनल ब्लैकमेलिंग' की चादर में गबन के दाग छिप जाएंगे। मजेदार बात यह है कि अब 'पिता-पुत्र' दोनों ही घर से लापता हैं। पैकोलिया थाने में गुमशुदगी दर्ज है। इसे 'फरार' होना कहें या 'गायब' होना, यह तो पुलिस तय करेगी, लेकिन जनता की नजर में यह सीधा-सीधा 'हिसाब' से बचने का जुगाड़ है। बस्ती में 'सीएसपी' यानी 'चपत लगाओ पैसा' केंद्र? यह कोई पहला मामला नहीं है। बस्ती मंडल में सीएसपी संचालकों द्वारा गबन करना अब एक परंपरा बनती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर इन केंद्रों पर बैंक और प्रशासन की लगाम कितनी ढीली है? क्या कोई भी 'माननीय' कुर्सी की रसूख और बैंक की आईडी लेकर जनता की जेब काट सकता है? व्यवस्था पर कुछ तीखे सवाल: बैंक प्रशासन: जब खाते से पैसा गायब हो रहा था, तब आपकी मॉनिटरिंग प्रणाली क्या 'कुंभकर्णी नींद' में थी? प्रशासन: क्या आत्महत्या की धमकी मात्र देने से गबन का अपराध धुल जाता है? जनता: क्या अब हम अपने पैसे की सुरक्षा के लिए बैंक जाने के बजाय 'माननीयों' के रहमोकरम पर जिएं? नेता जी, पत्र लिखकर धमकी देना आसान है, लेकिन उन गरीबों के आंसुओं का हिसाब देना मुश्किल होगा जिनकी खून-पसीने की कमाई आपके 'डिजिटल' खेल की भेंट चढ़ गई। फिलहाल, पुलिस और बैंक जांच की फाइलें पलट रहे हैं, और जनता अपने खाली पासबुक को देख कर लोकतंत्र के इस 'अनोखे' जनसेवक को कोस रही है।1
- संतकबीरनगर। मगहर स्थित कबीर एकेडमी में उस समय अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के पंचम कार्यक्रम प्रमुख जन गोष्टी के दौरान अचानक आग लग गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे, जिससे कुछ देर के लिए स्थिति गंभीर बन गई। बताया जाता है कि कार्यक्रम अपने पूरे चरम पर था, तभी परिसर के एक हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद स्वयंसेवक कार्यकर्ताओं ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से आग पर काबू पाने की कार्रवाई शुरू की। खलीलाबाद थाना अध्यक्ष सहित पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। स्वयंसेवकों, फायर कर्मियों और पुलिस की संयुक्त तत्परता से आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला भी तत्काल सक्रिय हो गया। मौके पर अपर जिलाधिकारी (एडीएम), उप जिलाधिकारी (एसडीएम), अपर पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी पहुंच गए और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्राथमिक जानकारी के अनुसार उप जिलाधिकारी ने बताया कि आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराई जा रही है। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन परिसर में रखे कुछ सामान के नुकसान की बात सामने आई है। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना रहा, वहीं लोगों ने राहत की सांस ली कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया।3
- Post by RAG1