Shuru
Apke Nagar Ki App…
अल्मोड़ा में धूमधाम से मनाया जा रहा होली पर्व, होली के रंगों में सराबोर हो रहे लोग अल्मोड़ा में होली पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। होली पर्व पर लोग रंगों में सराबोर हो रहे। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में होली का अपना ही आनंद है। यहां खड़ी होली और बैठकी होली विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
Vinod Joshi
अल्मोड़ा में धूमधाम से मनाया जा रहा होली पर्व, होली के रंगों में सराबोर हो रहे लोग अल्मोड़ा में होली पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। होली पर्व पर लोग रंगों में सराबोर हो रहे। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में होली का अपना ही आनंद है। यहां खड़ी होली और बैठकी होली विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
More news from Uttarakhand and nearby areas
- पृथ्वी पर आपका वेट 60 किलो है तो चंद्रमा पर 10 किलो रह जाएगा चंद्रमा और पृथ्वी के बीच अदभुत असमानताएं हैं। इसका व्यास पृथ्वी का 27 फ़ीसद है। धरती से चांद का एक ही हिस्सा दिखता है। पृथ्वी से देखने पर सूरज और चंद्रमा का साइज बराबर दिखता है, जबकि सूरज चन्द्रमा से 400 गुना बड़ा है। चंद्रमा की ग्रेविटी पृथ्वी की तुलना 16.5 प्रतिशत है। चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चांद पर दिन में तापमान +127 डिग्री सेल्सियस रहता है तो रात को गिरकर -173°C तक चला जाता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी है। अभी तक सिर्फ 12 लोग ही चंद्रमा पर पहुंच पाए हैं। चंद्रमा पृथ्वी के ज्वार-भाटा, मौसम, और जीवन के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।1
- Post by Surendra Kumar1
- समय: शाम करीब 4:30 से 4:45 बजे के आसपास, जब ट्रेन हांसी जंक्शन पर पहुंची या रुकी हुई थी। घटना: ट्रेन के तीसरे डिब्बे में एक सीट से धुआं और लपटें उठने लगीं। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बनी। यात्रियों की सुरक्षा: डिब्बे में मौजूद चार यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। किसी को चोट नहीं आई। आग पर काबू: रेलवे कर्मचारियों, स्टाफ और संभवतः फायर फाइटिंग उपकरणों की मदद से आग को जल्दी नियंत्रित कर लिया गया। सीटें जलकर राख हो गईं, लेकिन आग अन्य डिब्बों में नहीं फैली।1
- Post by Laxman bisht1
- चंपावत:*मुख्यमंत्री धामी ने चम्पावत को दी ₹74.54 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात*1
- Post by शैल शक्ति1
- उत्तराखंड देहरादून में एक मुस्लिम युवक ने फेसबुक में फेक आईडी बनाकर एक युवती को नौकरी का झांसा देकर होटल में बुलाया। युवती की सूझबूझ से स्थानीय लोगों ने युवक को पकड़ लिया।1
- नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है। अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा। पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार, शायद ही कोई सुने। बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।1
- Post by Laxman bisht1