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रीवा ब्रेकिंग | आरक्षक पीयूष मिश्रा की इलाज के दौरान मौत। रीवा से इस वक्त की बड़ी खबर है। विश्वविद्यालय थाना में पदस्थ आरक्षक पीयूष मिश्रा की संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक, एक दिन पहले आरक्षक ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगल लिया था। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक जानकारी में पारिवारिक कारणों की आशंका जताई जा रही है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
उमेश पाठक सेमरिया रीवा
रीवा ब्रेकिंग | आरक्षक पीयूष मिश्रा की इलाज के दौरान मौत। रीवा से इस वक्त की बड़ी खबर है। विश्वविद्यालय थाना में पदस्थ आरक्षक पीयूष मिश्रा की संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक, एक दिन पहले आरक्षक ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगल लिया था। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक जानकारी में पारिवारिक कारणों की आशंका जताई जा रही है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
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- भकूट महाराज द्वारा लगाए गए आरोपों को विधायक समर्थकों ने निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो वायरल कर विधायक नरेंद्र प्रजापति की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। समर्थकों का आरोप है कि विपक्ष के बहकावे में आकर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | मथुरा, उत्तर प्रदेश कृष्णा नगर चौराहे पर दर्दनाक हादसा, प्राइवेट बस की टक्कर से महिला की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा! मथुरा में सड़क हादसे के बाद भारी हंगामा, शव सड़क पर रखकर लगाया जाम, डीएम और एसएसपी का काफिला भी फंसा! संवाददाता अतुल सिंह नमस्कार! आप देख रहे हैं आवाज़ जनता की 46 न्यूज़ चैनल। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से इस वक्त एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। जहां कृष्णा नगर पुलिस चौकी से महज चंद कदमों की दूरी पर, मोहन हलवाई के सामने शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। जानकारी के मुताबिक, कृष्णा नगर चौराहे पर एक प्राइवेट बस की टक्कर से बाइक सवार 40 वर्षीय महिला की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक महिला के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों ने महिला का शव कृष्णा नगर चौराहे पर रखकर सड़क जाम कर दी। देखते ही देखते चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई। हैरान करने वाली बात यह रही कि जाम के चलते जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी एसएसपी का काफिला भी फंस गया। अब इस दर्दनाक हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर व्यस्त चौराहों पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कितने प्रभावी इंतजाम हैं? और ऐसे हादसों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा? फिलहाल इस घटना ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है ब्रेकिंग न्यूज़ | मथुरा, उत्तर प्रदेश कृष्णा नगर चौराहे पर दर्दनाक हादसा, प्राइवेट बस की टक्कर से महिला की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा! मथुरा में सड़क हादसे के बाद भारी हंगामा, शव सड़क पर रखकर लगाया जाम, डीएम और एसएसपी का काफिला भी फंसा! संवाददाता अतुल सिंह नमस्कार! आप देख रहे हैं आवाज़ जनता की 46 न्यूज़ चैनल। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से इस वक्त एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। जहां कृष्णा नगर पुलिस चौकी से महज चंद कदमों की दूरी पर, मोहन हलवाई के सामने शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। जानकारी के मुताबिक, कृष्णा नगर चौराहे पर एक प्राइवेट बस की टक्कर से बाइक सवार 40 वर्षीय महिला की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक महिला के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों ने महिला का शव कृष्णा नगर चौराहे पर रखकर सड़क जाम कर दी। देखते ही देखते चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई। हैरान करने वाली बात यह रही कि जाम के चलते जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी एसएसपी का काफिला भी फंस गया। अब इस दर्दनाक हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर व्यस्त चौराहों पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कितने प्रभावी इंतजाम हैं? और ऐसे हादसों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा? फिलहाल इस घटना ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां रीवा के विश्वविद्यालय थाने में पदस्थ आरक्षक पीयूष मिश्रा की शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को इलाज के दौरान मौत हो गई। दिवंगत आरक्षक मूल रूप से मऊगंज जिले के धवैया गांव के रहने वाले थे और रीवा में अपनी पुलिस सेवा दे रहे थे। इस अचानक हुई घटना से पुलिस विभाग और उनके परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 22 अक्टूबर की शाम की है, जब आरक्षक पीयूष मिश्रा ने पुलिस लाइन स्थित अपने सरकारी आवास में किसी अज्ञात कारणों के चलते जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। कुछ देर बाद जब परिजनों ने उन्हें पूरी तरह से बेसुध हालत में देखा, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी, जिसके बाद बिना कोई देर किए उन्हें तत्काल इलाज के लिए शहर के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय पहुंचाया गया। अस्पताल में उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज लगातार दो दिनों तक चला। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन जहर का असर इतना ज्यादा था कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। आखिरकार, शनिवार को इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं और उनकी मौत हो गई। घटना के पीछे की असली वजह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, शुरुआती जांच और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर इसके पीछे पारिवारिक कलह या घरेलू विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। फिर भी, पुलिस प्रशासन या अधिकारियों की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस अब इस पूरे मामले के अन्य सभी पहलुओं और तथ्यों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने यह खौफनाक कदम क्यों उठाया। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां रीवा के विश्वविद्यालय थाने में पदस्थ आरक्षक पीयूष मिश्रा की शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को इलाज के दौरान मौत हो गई। दिवंगत आरक्षक मूल रूप से मऊगंज जिले के धवैया गांव के रहने वाले थे और रीवा में अपनी पुलिस सेवा दे रहे थे। इस अचानक हुई घटना से पुलिस विभाग और उनके परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 22 अक्टूबर की शाम की है, जब आरक्षक पीयूष मिश्रा ने पुलिस लाइन स्थित अपने सरकारी आवास में किसी अज्ञात कारणों के चलते जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। कुछ देर बाद जब परिजनों ने उन्हें पूरी तरह से बेसुध हालत में देखा, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी, जिसके बाद बिना कोई देर किए उन्हें तत्काल इलाज के लिए शहर के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय पहुंचाया गया। अस्पताल में उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज लगातार दो दिनों तक चला। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन जहर का असर इतना ज्यादा था कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। आखिरकार, शनिवार को इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं और उनकी मौत हो गई। घटना के पीछे की असली वजह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, शुरुआती जांच और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर इसके पीछे पारिवारिक कलह या घरेलू विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। फिर भी, पुलिस प्रशासन या अधिकारियों की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस अब इस पूरे मामले के अन्य सभी पहलुओं और तथ्यों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने यह खौफनाक कदम क्यों उठाया।1