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जनपद देवरिया की सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण राहगीरों को इन दिनों काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में, पुलिस लाइन स्थित सड़क पर दो सांड आपस में भिड़ गए, जिसके परिणामस्वरूप दूर तक लंबा जाम लग गया। इस घटना के चलते देवरिया की सड़क एक रणक्षेत्र जैसी बन गई, जिसने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी।

3 hrs ago
user_Sunil kumar sharma
Sunil kumar sharma
Local News Reporter देवरिया, देवरिया, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

जनपद देवरिया की सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण राहगीरों को इन दिनों काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में, पुलिस लाइन स्थित सड़क पर दो सांड आपस में भिड़ गए, जिसके परिणामस्वरूप दूर तक लंबा जाम लग गया। इस घटना के चलते देवरिया की सड़क एक रणक्षेत्र जैसी बन गई, जिसने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी।

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • देवरिया में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बनकटा पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक बोलेरो वाहन से 315 लीटर अवैध देशी शराब बरामद करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी भाटपार रानी अंशुमान श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में थाना बनकटा पुलिस द्वारा की गई। ऑपरेशन के तहत, 2026 मई को वाहन चेकिंग के दौरान गजहड़वा-बतरौली तिराहे के पास मुखबिर की सूचना पर बोलेरो वाहन संख्या BR 28 B 4656 को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन से बिहार ले जाई जा रही 'बंटी-बबली' ब्रांड की 35 पेटी अवैध देशी शराब बरामद हुई। इन पेटियों में कुल 1575 पाउच शराब मिली, जिनकी मात्रा लगभग 315 लीटर बताई गई है। पुलिस ने मौके से परसौनी थाना श्रीरामपुर निवासी रितेश कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में थाना बनकटा में आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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    देवरिया में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बनकटा पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक बोलेरो वाहन से 315 लीटर अवैध देशी शराब बरामद करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी भाटपार रानी अंशुमान श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में थाना बनकटा पुलिस द्वारा की गई।

ऑपरेशन के तहत, 2026 मई को वाहन चेकिंग के दौरान गजहड़वा-बतरौली तिराहे के पास मुखबिर की सूचना पर बोलेरो वाहन संख्या BR 28 B 4656 को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन से बिहार ले जाई जा रही 'बंटी-बबली' ब्रांड की 35 पेटी अवैध देशी शराब बरामद हुई। इन पेटियों में कुल 1575 पाउच शराब मिली, जिनकी मात्रा लगभग 315 लीटर बताई गई है।

पुलिस ने मौके से परसौनी थाना श्रीरामपुर निवासी रितेश कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में थाना बनकटा में आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
    user_खबर पूर्वांचल
    खबर पूर्वांचल
    Media and News Deoria, Uttar Pradesh•
    6 hrs ago
  • पडरौना स्थित पीडी मॉल में एक लिफ्ट हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें मॉल के दो कर्मचारी घायल हो गए। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।
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    पडरौना स्थित पीडी मॉल में एक लिफ्ट हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें मॉल के दो कर्मचारी घायल हो गए। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।
    user_MANOJ KUMAR YADAV
    MANOJ KUMAR YADAV
    Video Creator हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।
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    कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।
    user_Snews33
    Snews33
    हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र में एक 47 वर्षीय व्यक्ति की मेडिकल स्टोर पर इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मृतक रामकृपाल यादव, जो खेती-बाड़ी का काम करते थे, उनके परिजनों ने मेडिकल स्टोर संचालक पर गलत इलाज, लापरवाही और मृत्यु के बाद मारपीट कराने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस को लिखित तहरीर दी गई है। परिजनों के अनुसार, शनिवार सुबह लगभग 11 बजे रामकृपाल यादव को दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें बालेसर चौराहा स्थित विनोद पांडेय मेडिकल स्टोर पर इलाज के लिए ले जाया गया। वहां एक कथित झोलाछाप डॉक्टर ने इंजेक्शन और बोतल चढ़ाकर उनका इलाज शुरू किया। मृतक के पुत्र उमेंद्र यादव ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया है कि उनके पिता की मृत्यु इलाज के दौरान ही हो गई थी, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक ने कथित तौर पर स्थिति को नियंत्रण में बताकर शाम तक इलाज जारी रखा और परिजनों को मरीज को किसी बड़े अस्पताल ले जाने से भी रोका। आरोप है कि जब रामकृपाल यादव की हालत बेहद बिगड़ने लगी और परिजनों ने दबाव बनाया, तब संचालक ने एक एंबुलेंस बुलाकर मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा भेजा। वहां चिकित्सकों ने रामकृपाल यादव को मृत घोषित कर दिया और पुष्टि की कि उनकी मृत्यु काफी पहले हो चुकी थी। इस घटना से आक्रोशित परिजन शव लेकर दोबारा मेडिकल स्टोर पहुंचे, लेकिन तब तक संचालक दुकान बंद कर फरार हो चुका था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ देर बाद संचालक की ओर से 10 से 15 लोगों को भेजा गया, जिन्होंने उनके साथ मारपीट की और शव के साथ भी अभद्रता की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
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    कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र में एक 47 वर्षीय व्यक्ति की मेडिकल स्टोर पर इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मृतक रामकृपाल यादव, जो खेती-बाड़ी का काम करते थे, उनके परिजनों ने मेडिकल स्टोर संचालक पर गलत इलाज, लापरवाही और मृत्यु के बाद मारपीट कराने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस को लिखित तहरीर दी गई है।

परिजनों के अनुसार, शनिवार सुबह लगभग 11 बजे रामकृपाल यादव को दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें बालेसर चौराहा स्थित विनोद पांडेय मेडिकल स्टोर पर इलाज के लिए ले जाया गया। वहां एक कथित झोलाछाप डॉक्टर ने इंजेक्शन और बोतल चढ़ाकर उनका इलाज शुरू किया। मृतक के पुत्र उमेंद्र यादव ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया है कि उनके पिता की मृत्यु इलाज के दौरान ही हो गई थी, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक ने कथित तौर पर स्थिति को नियंत्रण में बताकर शाम तक इलाज जारी रखा और परिजनों को मरीज को किसी बड़े अस्पताल ले जाने से भी रोका।

आरोप है कि जब रामकृपाल यादव की हालत बेहद बिगड़ने लगी और परिजनों ने दबाव बनाया, तब संचालक ने एक एंबुलेंस बुलाकर मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा भेजा। वहां चिकित्सकों ने रामकृपाल यादव को मृत घोषित कर दिया और पुष्टि की कि उनकी मृत्यु काफी पहले हो चुकी थी। इस घटना से आक्रोशित परिजन शव लेकर दोबारा मेडिकल स्टोर पहुंचे, लेकिन तब तक संचालक दुकान बंद कर फरार हो चुका था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ देर बाद संचालक की ओर से 10 से 15 लोगों को भेजा गया, जिन्होंने उनके साथ मारपीट की और शव के साथ भी अभद्रता की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
    user_भारत न्यूज कुशीनगर
    भारत न्यूज कुशीनगर
    Local News Reporter हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • अलीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर शमीम अहमद ने बेरोजगारी के मुद्दे पर एक बड़ा बयान दिया है। अपने इस बयान में, उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और CJI पर तीखा हमला बोला है।
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    अलीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर शमीम अहमद ने बेरोजगारी के मुद्दे पर एक बड़ा बयान दिया है। अपने इस बयान में, उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और CJI पर तीखा हमला बोला है।
    user_EN Daily National
    EN Daily National
    Journalist वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया। यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।
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    कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया।

यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं।

मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया।

यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।
    user_संजय चाणक्य
    संजय चाणक्य
    पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • जनपद देवरिया में अपराध, अपराधियों और शराब तस्करी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत श्रीरामपुर थाना पुलिस ने 25 मई 2026 की रात बंकुल मोड़ के पास से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने संदिग्ध व्यक्तियों/वाहनों की चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर यह कार्रवाई की, जिसमें एक स्कॉर्पियो वाहन (संख्या BR 01JL 5743) से बिहार ले जाई जा रही 98 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब (ऑफिसर चॉइस ब्रांड की कुल 846 लीटर) बरामद की गई। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान अनवर अली पुत्र अकबर हुसैन, निवासी बरहोगा जद्दू थाना जामो बाजार जनपद सिवान, बिहार (उम्र करीब 20 वर्ष) और धनु कुमार पुत्र सुदर्शन प्रसाद, निवासी तितिरा थाना मैरवा जनपद सिवान, बिहार (उम्र करीब 22 वर्ष) के रूप में हुई है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देविरया अभिजीत आर. शंकर के निर्देश, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह के कुशल निर्देशन और क्षेत्राधिकारी भाटपार रानी अंशुमन श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में की गई। इस मामले में थाना श्रीरामपुर पर मु0अ0सं0 81/2026 धारा 60/72 आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है और नियमानुसार विधिक कार्यवाही की जा रही है।
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    जनपद देवरिया में अपराध, अपराधियों और शराब तस्करी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत श्रीरामपुर थाना पुलिस ने 25 मई 2026 की रात बंकुल मोड़ के पास से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने संदिग्ध व्यक्तियों/वाहनों की चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर यह कार्रवाई की, जिसमें एक स्कॉर्पियो वाहन (संख्या BR 01JL 5743) से बिहार ले जाई जा रही 98 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब (ऑफिसर चॉइस ब्रांड की कुल 846 लीटर) बरामद की गई।

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान अनवर अली पुत्र अकबर हुसैन, निवासी बरहोगा जद्दू थाना जामो बाजार जनपद सिवान, बिहार (उम्र करीब 20 वर्ष) और धनु कुमार पुत्र सुदर्शन प्रसाद, निवासी तितिरा थाना मैरवा जनपद सिवान, बिहार (उम्र करीब 22 वर्ष) के रूप में हुई है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देविरया अभिजीत आर. शंकर के निर्देश, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह के कुशल निर्देशन और क्षेत्राधिकारी भाटपार रानी अंशुमन श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में की गई।

इस मामले में थाना श्रीरामपुर पर मु0अ0सं0 81/2026 धारा 60/72 आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है और नियमानुसार विधिक कार्यवाही की जा रही है।
    user_Pradeep srivastv
    Pradeep srivastv
    Local News Reporter देवरिया, देवरिया, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुशीनगर जिले के हाटा में एक विधवा महिला ने डीएम दरबार में अपनी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जे को लेकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि कुछ लोगों ने उसकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिसके चलते उसने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत की और न्याय की मांग की है।
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    कुशीनगर जिले के हाटा में एक विधवा महिला ने डीएम दरबार में अपनी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जे को लेकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि कुछ लोगों ने उसकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिसके चलते उसने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत की और न्याय की मांग की है।
    user_MANOJ KUMAR YADAV
    MANOJ KUMAR YADAV
    Video Creator हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुशीनगर और बिहार से संबंधित समाचारों के बीच, यह सवाल उठाया गया है कि "बिहार में लड़कियां सिर्फ क्यों नहीं हैं।" यह प्रश्न राज्य में लड़कियों की उपस्थिति और उनकी स्थिति के संबंध में एक महत्वपूर्ण चिंता या जिज्ञासा को दर्शाता है।
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    कुशीनगर और बिहार से संबंधित समाचारों के बीच, यह सवाल उठाया गया है कि "बिहार में लड़कियां सिर्फ क्यों नहीं हैं।" यह प्रश्न राज्य में लड़कियों की उपस्थिति और उनकी स्थिति के संबंध में एक महत्वपूर्ण चिंता या जिज्ञासा को दर्शाता है।
    user_Snews33
    Snews33
    हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
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