शराब और सिगरेट के नशे मे डुबी इन लड़कियों के इस वीडियो को देखकर सवाल सिर्फ उन लड़कियों पर नहीं, बल्कि हमारे पूरे समाज पर उठता है। अपने घर से दूर, एक अनजान शहर के हॉस्टल में रहने वाली कुछ लड़कियाँ शराब और सिगरेट के नशे में पार्टी करती नज़र आती हैं,अशोभनीय हरकतें, भद्दे स्टेप्स और कैमरे के सामने सब कुछ बेझिझक परोसती हुई। उधर उनके माता-पिता गाँव या शहर में बैठकर यही सोच रहे होंगे कि उनकी बेटी बड़े कॉलेज में पढ़ रही है, आगे चलकर अफसर बनेगी और परिवार का नाम रोशन करेगी। उन्हें क्या पता कि भरोसे की आड़ में उनकी उम्मीदों का मज़ाक उड़ रहा है। यह सवाल न तो पढ़ाई का है और न ही आज़ादी का यह सवाल है ज़िम्मेदारी का..आज की एक गलति कल की पूरी ज़िंदगी तय कर सकती है। आज़ादी उड़ने के लिए मिलती है, खुद को गिराने के लिए नहीं...सोचिए, क्योंकि एक गलत कदम सिर्फ आपका नहीं, पूरे परिवार का भविष्य हिला देता है।
शराब और सिगरेट के नशे मे डुबी इन लड़कियों के इस वीडियो को देखकर सवाल सिर्फ उन लड़कियों पर नहीं, बल्कि हमारे पूरे समाज पर उठता है। अपने घर से दूर, एक अनजान शहर के हॉस्टल में रहने वाली कुछ लड़कियाँ शराब और सिगरेट के नशे में पार्टी करती नज़र आती हैं,अशोभनीय हरकतें, भद्दे स्टेप्स और कैमरे के सामने सब कुछ बेझिझक परोसती हुई। उधर उनके माता-पिता गाँव या शहर में बैठकर यही सोच रहे होंगे कि उनकी बेटी बड़े कॉलेज में पढ़ रही है, आगे चलकर अफसर बनेगी और परिवार का नाम रोशन करेगी। उन्हें क्या पता कि भरोसे की आड़ में उनकी उम्मीदों का मज़ाक उड़ रहा है। यह सवाल न तो पढ़ाई का है और न ही आज़ादी का यह सवाल है ज़िम्मेदारी का..आज की एक गलति कल की पूरी ज़िंदगी तय कर सकती है। आज़ादी उड़ने के लिए मिलती है, खुद को गिराने के लिए नहीं...सोचिए, क्योंकि एक गलत कदम सिर्फ आपका नहीं, पूरे परिवार का भविष्य हिला देता है।
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- नीमराना में सजी उत्तराखंडी लोकसंस्कृति की रंगीन महफिल, प्रथम सांस्कृतिक महोत्सव ने बांधा समां नीमराना कोटपूतली–बहरोड़ जिले के नीमराना में रह रहे उत्तराखंडवासियों के लिए आयोजित प्रथम उत्तराखंड सांस्कृतिक महोत्सव रविवार 11 जनवरी 2026 को नीमराना स्थित होटल टोकस, एनएच-48 में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन ने उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को एक ही मंच पर जीवंत कर दिया। उत्तराखंड सेवा समिति, नीमराना द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके बाद नंदा देवी डोली, पांडव खेला पारस, जौनसारी तांदी नृत्य, हास्य नेपाली गीत, बाजूबंदोली, छपेली, चांचरी, हुड़का नृत्य, झोड़ा सहित अनेक लोकनृत्यों और लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध लोकगायक गोपाल मठपाल, दिलीप रावत, प्रीति गुरसाई, आशा नेगी, प्रीति मठपाल और कमल जोशी की प्रस्तुतियों को खूब सराहना मिली। संगीतकार नरेंद्र अजनबी के संगीत संयोजन ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम का सफल निर्देशन लोकगायक गोपाल मठपाल ने किया। इस अवसर पर रीको अधिकारी ईश्वर दत्त उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बहरोड़, कोटपूतली, शाहजहांपुर, घीलोठ, बावल और नीमराना से बड़ी संख्या में उत्तराखंडवासी कार्यक्रम में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्यों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। आयोजन समिति के आशाराम जोशी सहित पदाधिकारियों ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य प्रवासी उत्तराखंडवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ना और नई पीढ़ी तक लोकसंस्कृति का संरक्षण व प्रचार करना है। उन्होंने भविष्य में और भी बड़े सांस्कृतिक आयोजनों की योजना की जानकारी दी।4
- शराब और सिगरेट के नशे मे डुबी इन लड़कियों के इस वीडियो को देखकर सवाल सिर्फ उन लड़कियों पर नहीं, बल्कि हमारे पूरे समाज पर उठता है। अपने घर से दूर, एक अनजान शहर के हॉस्टल में रहने वाली कुछ लड़कियाँ शराब और सिगरेट के नशे में पार्टी करती नज़र आती हैं,अशोभनीय हरकतें, भद्दे स्टेप्स और कैमरे के सामने सब कुछ बेझिझक परोसती हुई। उधर उनके माता-पिता गाँव या शहर में बैठकर यही सोच रहे होंगे कि उनकी बेटी बड़े कॉलेज में पढ़ रही है, आगे चलकर अफसर बनेगी और परिवार का नाम रोशन करेगी। उन्हें क्या पता कि भरोसे की आड़ में उनकी उम्मीदों का मज़ाक उड़ रहा है। यह सवाल न तो पढ़ाई का है और न ही आज़ादी का यह सवाल है ज़िम्मेदारी का..आज की एक गलति कल की पूरी ज़िंदगी तय कर सकती है। आज़ादी उड़ने के लिए मिलती है, खुद को गिराने के लिए नहीं...सोचिए, क्योंकि एक गलत कदम सिर्फ आपका नहीं, पूरे परिवार का भविष्य हिला देता है।1