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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी तीसरे व्यक्ति की भागीदारी के कारण कोई विवाह टूट जाता है, या यदि पति के प्रेम संबंध के कारण पत्नी अपने वैवाहिक अधिकारों से वंचित होती है, तो ऐसी स्थिति में वह दीवानी मामला दायर कर सकती है। इस प्रावधान के तहत, पत्नी उस तीसरे व्यक्ति से हर्जाने की मांग कर सकती है जिसने विवाह के टूटने में भूमिका निभाई।
प्रमोद कुमार कश्यप
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी तीसरे व्यक्ति की भागीदारी के कारण कोई विवाह टूट जाता है, या यदि पति के प्रेम संबंध के कारण पत्नी अपने वैवाहिक अधिकारों से वंचित होती है, तो ऐसी स्थिति में वह दीवानी मामला दायर कर सकती है। इस प्रावधान के तहत, पत्नी उस तीसरे व्यक्ति से हर्जाने की मांग कर सकती है जिसने विवाह के टूटने में भूमिका निभाई।
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- फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, जो कि एक ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक, पूर्व कार्यालय अधीक्षक नगर पालिका परिषद मोदीनगर और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण समाज एनसीआर के मीडिया प्रभारी हैं, ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उनके अनुसार, बचपन में जिन हाथों ने सहारा दिया, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब थकना उनका हक है। पंडित जी के इन वचनों को 'बिल्कुल सत्य' बताते हुए, सनातन धर्म के सार पर प्रकाश डाला गया कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'पितरः प्रथमे देवता:', यानी पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान मानी गई है। यह भी रेखांकित किया गया कि पंडित जी मोदीनगर से अखिल भारतवर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कार्य को सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया। पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ का यह संदेश उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने 'अपना आंगन' बड़ा करने की चाह में 'पिता का आंगन' छोटा कर दिया। इस प्रेरणादायी संदेश के साथ 'पितृदेवो भवः' का भाव व्यक्त किया गया और पंडित जी के सेवा भाव के सदा अक्षुण्ण रहने की कामना की गई।1
- सरकार पर छात्रों की पीड़ा और उनकी मानसिक स्थिति को समझने में विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया गया है। प्रधानमंत्री के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं के कारण छात्रों को लगातार अनिश्चितता, असमंजस और अत्यधिक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर सरकार की गलतियों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 'निकम्मेपन' को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसकी सज़ा देश के बच्चे और उनके परिवार भुगत रहे हैं। परीक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही है, और इसके बावजूद छात्रों के लिए कुछ मिनट का बफर टाइम या किसी भी तरह की राहत का प्रावधान न होने पर चिंता व्यक्त की गई है। इसका एक उदाहरण मध्य प्रदेश के विदिशा में हुए नीट री-एग्जाम के दौरान सामने आया, जहाँ महज़ दो मिनट की देरी के कारण तीन छात्रों की सालों की मेहनत पर पानी फिर गया। इन घटनाओं से व्यथित छात्र गेट बंद होने पर रोते हुए भी देखे गए। इस पूरे मामले को 'धृतराष्ट्र की तरह सब कुछ जानते हुए भी आँखें मूंदे बैठे रहने' जैसा बताते हुए इसे महापाप करार दिया गया है।1
- उत्तर प्रदेश पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ सहारनपुर जिले के सरसावा-नकुर रोड पर 21-22 जून 2026 की रात हुई पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात इनामी अपराधी ललन सिंह उर्फ ललन मारा गया। वह बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला था और उस पर एक लाख रुपये तक का इनाम घोषित था। ललन सिंह वाराणसी और चंदौली समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वांछित था। पुलिस के अनुसार, वह कई हत्याओं, बैंक डकैती और लूट की वारदातों में शामिल रहा था। 2022 में वाराणसी में एक सब-इंस्पेक्टर पर गोलीबारी और हथियार लूट की घटना समेत कई गंभीर मामलों में उसकी तलाश थी। यह मुठभेड़ एडिशनल एसपी लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान हुई, जिसमें ललन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा अभी भी जारी है।1
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर औरंगाबाद पुलिस और स्वाट टीम ने रविवार को एक संयुक्त अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान, पुलिस टीम ने लखावटी नहर पुल के पास से चार नशा तस्करों को गिरफ्तार किया। तलाशी में उनके पास से 166 किलो 750 ग्राम अवैध गांजा, 4 मोबाइल फोन और 1 अर्टिगा कार बरामद की गई। एसपी सिटी अभिषेक प्रताप और सीओ सिटी प्रखर पाण्डे ने बताया कि बरामद गांजे की कीमत लगभग 25 लाख रुपये है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गौतमबुद्धनगर जनपद के अच्छेजा निवासी अंकित और मोहनीश, तथा प्रयागराज निवासी सुनील नोनिया और राहुल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ औरंगाबाद थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।2
- जिओ की ओर से यह सुविधा प्रदान की जा रही है कि एक ही रिचार्ज के माध्यम से अब पूरे घर के सभी फोन को सक्रिय रखा जा सकेगा।1
- गाजियाबाद में सोमवार सुबह दो अलग-अलग सड़क हादसों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कुल 24 लोग घायल हुए। इन घटनाओं के कारण कई इलाकों में भारी जाम की स्थिति बन गई है। पहले हादसे में, नए बस अड्डे के फ्लाईओवर पर चढ़ते समय एक रोडवेज बस पलट गई। पुलिस के अनुसार, बस के सामने अचानक एक ट्रक आ जाने से चालक ने उसे बचाने के प्रयास में स्टीयरिंग घुमाया, जिससे बस का पहिया डिवाइडर पर चढ़ गया और बस पलट गई। इस बस में चालक सहित 16 यात्री सवार थे। घायलों को जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद 10 लोगों को छुट्टी दे दी गई, जबकि तीन अन्य घायल अपने परिजनों के साथ चले गए। उसी दिन एनएच-9 पर डूंडाहेड़ा के पास एक और सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें एक टाटा मैजिक रोडवेज बस के पीछे से तेजी से टकरा गई। इस टक्कर में टाटा मैजिक के चालक की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं बस और टाटा मैजिक में सवार सात-आठ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन दोनों हादसों के कारण मेरठ तिराहे और मेरठ रोड पर भारी जाम लग गया, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। जिला प्रशासन और पुलिस दोनों ही हादसों के बाद मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है। पुलिस द्वारा चालकों की लापरवाही और ओवरस्पीडिंग को इन हादसों की मुख्य वजह बताया जा रहा है।1