सेंवढ़ा स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सनकुआं धाम पर सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिंध नदी तट पर आयोजित इस मेले के दौरान श्रद्धालुओं के वाहनों की भारी तादाद के कारण क्षेत्र में यातायात का दबाव लगातार बढ़ गया है। मौके पर यातायात को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल या ट्रैफिक कर्मियों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने बताया कि भीड़ बढ़ने से मुख्य मार्गों पर लगातार जाम लग रहा है, जिससे आवागमन करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते यातायात व्यवस्था को नियंत्रित नहीं किया गया, तो अव्यवस्था और किसी दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है। इसी के मद्देनजर, श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और पुलिस विभाग से तत्काल ट्रैफिक पुलिस और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने की पुरजोर मांग की है। उनका निवेदन है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सनकुआं धाम क्षेत्र में तत्काल ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सके।
सेंवढ़ा स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सनकुआं धाम पर सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिंध नदी तट पर आयोजित इस मेले के दौरान श्रद्धालुओं के वाहनों की भारी तादाद के कारण क्षेत्र में यातायात का दबाव लगातार बढ़ गया है। मौके पर यातायात को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल या ट्रैफिक कर्मियों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने बताया कि भीड़ बढ़ने से मुख्य मार्गों पर लगातार जाम लग रहा है, जिससे आवागमन करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते यातायात व्यवस्था को नियंत्रित नहीं किया गया, तो अव्यवस्था और किसी दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है। इसी के मद्देनजर, श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और पुलिस विभाग से तत्काल ट्रैफिक पुलिस और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने की पुरजोर मांग की है। उनका निवेदन है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सनकुआं धाम क्षेत्र में तत्काल ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सके।
- दतिया जिले के भंडार में स्थित पोद्दार की बगिया में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान 'सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया' के महत्व को सैकड़ों की संख्या में पहुंचे भक्तों को विस्तार से समझाया गया। वहीं, इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि ने एक महत्वपूर्ण बात कही।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। जालौन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 210 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद करने में कामयाबी हासिल की है।1
- मध्य प्रदेश के भिंड जिले में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया का एक अजीबोगरीब आदेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जे.एस. यादव का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग स्वास्थ्य विभाग का 'तुगलकी फरमान' बता रहे हैं। इस वीडियो में सीएमएचओ आवक-जावक शाखा को लेकर एक ऐसा अनोखा नियम बताते नजर आ रहे हैं, जो सरकारी नियमों के बिल्कुल उलट है। आमतौर पर किसी भी सरकारी कार्यालय की आवक-जावक शाखा में कोई भी नागरिक या कर्मचारी अपनी शिकायत, आवेदन या सामान्य पत्र बिना किसी रोक-टोक के जमा कर सकता है और उसकी पावती ले सकता है, जिसके लिए किसी अधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, वायरल वीडियो में सीएमएचओ डॉ. जे.एस. यादव साफ तौर पर कह रहे हैं कि आवक-जावक शाखा में उनकी अनुमति के बिना कोई भी पत्र या आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके इस नए नियम के मुताबिक, अब कार्यालय में कोई भी आवेदन देने से पहले उसे खुद सीएमएचओ से 'मार्क' (Approve) कराना अनिवार्य होगा। वायरल हो रहे इस वीडियो में डॉ. जे.एस. यादव अपने इस अजीबोगरीब फरमान के पक्ष में नाना प्रकार के तर्क देते और अपनी मर्जी चलाते दिखाई दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि शासकीय कार्यप्रणाली के तहत आवक-जावक शाखा जनता और प्रशासन के बीच की एक पारदर्शी कड़ी होती है, और यदि वहां भी आवेदन जमा करने के लिए मुखिया की अनुमति अनिवार्य कर दी जाएगी, तो पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत आसानी से दर्ज नहीं करा पाएगा। इसे सीधे तौर पर जनता की आवाज दबाने और तानाशाही रवैया अपनाने का प्रयास माना जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि इस वायरल वीडियो और अधिकारी के इस कथित 'फरमान' पर वरिष्ठ अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं।1
- भिंड जिले के रोनथाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मारुति ग्राम स्थित जसावली हनुमान मंदिर पर इन दिनों संगीतमय कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन के साथ ही 108 कुंडीय महायज्ञ भी चल रहा है, जहाँ खनेता धाम सरकार के मुखारविंद से कथा कही जा रही है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु और भक्तिजन इस कथा का श्रवण पान कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। इसी क्रम में, कथा के आज के दिन शंकराचार्य ने मंदिर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य महाराज, जो कामतानाथ प्रमुख चित्रकूट धाम से हैं, भी पधारे। इस दौरान कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री रामस्वरूप आचार्य महाराज के साथ सेगाय सनातन को लेकर चर्चा भी हुई।1
- कोंच बाजार में रविवार दोपहर खरीदारी करने आई ग्राम ककरौली निवासी ऊषा नामक महिला का पर्स अचानक गायब हो गया। इस घटना से महिला के होश उड़ गए, क्योंकि उसके पर्स में चार हजार रुपये की नकदी के अलावा सोने का ओम और चांदी की दो जंजीरें रखी हुई थीं। महिला अपने पति धर्मेंद्र कुमार के साथ चूड़ी बाजार स्थित एक दुकान से सामान खरीदने के बाद जब अपने पति के पास पहुंची, तभी उसने देखा कि उसका पर्स गायब है। पर्स न मिलने पर महिला ने वापस दुकान पर जाकर उसे तलाश किया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद पति ने तत्काल यूपी 112 पर सूचना दी, जिसके बाद यूपी 112 और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने महिला से पूछताछ कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पति ने इस संबंध में कोतवाली पुलिस को तहरीर भी दी है। सीओ परमेश्वर प्रसाद ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है, हालांकि महिला पर्स गिरने या कहीं छूट जाने की स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रही है। पुलिस अब बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर मामले की सच्चाई जानने की कोशिश कर रही है।1
- सनकुआं धाम में सोमवती अमावस्या मेले के दौरान यातायात व्यवस्था का भारी अभाव देखा जा रहा है। इस अव्यवस्था के चलते मेले में आए श्रद्धालु और आम जनता कई घंटों से लगातार परेशान हो रही है।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच में एक जनकल्याण मेले का शुभारंभ किया गया है। इस मेले के माध्यम से जनता को विभिन्न सरकारी योजनाओं के विषय में जानकारी प्रदान की गई। यह रिपोर्ट जीशान राईन द्वारा दी गई है।1
- दतिया के भांडेर में एक विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए रामजीवन छोटे राय ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि 'हमारा नगर हमारा तीर्थ, हमारी माटी हमारा चंदन'।1
- मध्य प्रदेश के दतिया जिले से खौफनाक तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ एक व्यक्ति अपनी जान हथेली पर रखकर भागता दिख रहा है, और पीछे दस लाख रुपए का एक ट्रैक्टर छूट जाता है। ये दृश्य किसी एक्शन फिल्म के नहीं, बल्कि दतिया की हकीकत हैं, जो रेत की चोरी से कहीं बढ़कर है। यह सवाल उठाता है कि आखिर वो कौन सा डर है जिसके आगे एक इंसान को अपनी जान की भी परवाह नहीं है, क्या यह कानून का डर है या फिर रेत माफिया के रसूख का? दतिया जिले में ऑन-रिकॉर्ड केवल 39 रेत खदानें ही अधिकृत रूप से वैध हैं, लेकिन आरोप हैं कि चंद वैध खदानों की आड़ में, प्रशासन की कथित सह पर, दर्जनों अवैध खदानों का जाल फैला हुआ है। रेत माफियाओं का दबदबा हर जगह है, और उससे भी बड़ा दबदबा उस रेत कंपनी का बताया जा रहा है, जिसका खौफ आज छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। थरेट थाना क्षेत्र के चीना बंबा के पास की एक घटना में, एक ट्रैक्टर रेत लेकर निकल रहा था, और जैसे ही उसे खतरा महसूस हुआ, ड्राइवर अपनी जान की परवाह किए बिना चलते ट्रैक्टर से कूदकर भाग खड़ा हुआ। यह साफ दिखाता है कि रेत का परिवहन करने वालों में खनिज विभाग के उड़न दस्ते, दतिया पुलिस और रेत ठेकेदार के कारिंदों का किस कदर खौफ है। रिपोर्ट सवाल करती है कि ड्राइवर अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा है, या अपनी जेब के पैसे बचाने के लिए, या फिर उस प्रताड़ना से बचने के लिए जो पकड़े जाने के बाद ठेकेदार के लठैतों या खाकी के जरिए उसे मिल सकती है। इस रिपोर्ट के माध्यम से दतिया के सम्मानीय कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से सीधे सवाल पूछे गए हैं। पहला, ऐसा कौन सा खौफ पैदा हो चुका है कि एक ड्राइवर अपना 10 लाख रुपए का वाहन लावारिस छोड़कर भागने को मजबूर है? दूसरा, क्या दतिया में कानून का राज चल रहा है, या रेत ठेकेदार की समानांतर सत्ता? और तीसरा, अगर केवल 39 खदानें वैध हैं, तो बाकी जगहों से अवैध रेत आ कहां से रही है, और क्या यह खनिज विभाग व स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे मुमकिन है? रिपोर्ट में कहा गया है कि दतिया में रेत का यह कारोबार अब सिर्फ रॉयल्टी और पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, यह सीधे तौर पर मानवाधिकार और दहशत का पर्याय बनता जा रहा है। अगर ट्रैक्टर चालक गलत है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर कार्रवाई के नाम पर खौफ का कारोबार चल रहा है, तो जवाबदेही प्रशासन की भी तय होनी चाहिए। देखना होगा कि दतिया का शीर्ष प्रशासन इस वायरल खौफ पर क्या संज्ञान लेता है, या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहेगा।1