क्या 2 साल तक सैकड़ों आवेदन देने के बाद भी नहीं सुनी गई एक गांव की आवाज़? पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के मसत्थु गांव की समस्याओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। गांव के मूल निवासी अजीत शर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और कई प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार आवेदन और ई-मेल भेजकर गांव की समस्याओं के समाधान की मांग की। उनके अनुसार, अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। 📌 आवेदन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे: ✔️ अधूरा सड़क निर्माण कार्य ✔️ सरकारी गैर-मजरूआ भूमि पर कथित अतिक्रमण ✔️ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ✔️ गांव का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग अब सवाल यह है—क्या मसत्थु गांव के लोगों को उनका अधिकार और विकास मिलेगा? 💬 आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर लिखें और इस मुद्दे को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए पोस्ट शेयर करें। नोट: यह पोस्ट आवेदन-पत्र में किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
क्या 2 साल तक सैकड़ों आवेदन देने के बाद भी नहीं सुनी गई एक गांव की आवाज़? पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के मसत्थु गांव की समस्याओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। गांव के मूल निवासी अजीत शर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और कई प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार आवेदन और ई-मेल भेजकर गांव की समस्याओं के समाधान की मांग की। उनके अनुसार, अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। 📌 आवेदन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे: ✔️ अधूरा सड़क निर्माण कार्य ✔️ सरकारी गैर-मजरूआ भूमि पर कथित अतिक्रमण ✔️ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ✔️ गांव का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग अब सवाल यह है—क्या मसत्थु गांव के लोगों को उनका अधिकार और विकास मिलेगा? 💬 आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर लिखें और इस मुद्दे को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए पोस्ट शेयर करें। नोट: यह पोस्ट आवेदन-पत्र में किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
- पंडारक की दो पंचायतों में लगा सहयोग शिविर, भूमि विवाद, बिजली और राशन कार्ड से जुड़े आवेदन सबसे अधिक1
- कागजों पर इलाज, अस्पताल में ताला, बाढ़ में PHC की बदहाली, स्कूल के कमरे में डेढ़ साल से बंद पड़ी दवाएं, उपस्वास्थ्य केंद्र में दवा नही बाढ़ अनुमंडल के राणाबीघा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के छः बेड का नया भवन का उद्घाटन दस दिन पहले किया गया, विधायक और एसडीओ ने इसकी जमकर तारीफ की लेकिन स्थिति इसके उलट है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर कई पंचायतों और कई प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेवारी है। इसके वाबजूद ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग ग्यारह बजे पीएचसी में कर्मी और डाॅक्टर पहुंचते है और दो से तीन बजे ही चले जाते है। वहीं पीएचसी में दवाओं का भंडारण में पूरी तरह अनियमितता है पीएचसी से सटे दो कमरे वाले भवन में कूड़े की तरह दवाए भंडारण की गई है जिसमें तापमान मेंटेन करने वाली दवाओं को भी खुले में रखने का ग्रामीणों का दावा है, वहीं बगल के उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक कमरे में पीएचसी की दवाओ को डेढ साल से ज्यादा समय से भंडारण कर रखा गया है और उस कमरे का ताला कभी भी नही खुलता है वहां दवाए एक्सपायर होने का दावा है। अब सवाल है कि इतनी भारी मात्रा में पीएचसी में दवाओं का भंडारण है लेकिन रखरखाव और जरूरतमंद लोगों तक दवा नही पहुंचने के कारण दवाए एक्सपायर हो जाती है तो इसके जिम्मेवार कौन है, नए भवन के उद्घाटन के बाद भी जल्द इमरजेंसी में ईलाज की सुविधा शुरू नही हुई है, ओपीडी समय में भी समय से डाॅक्टर के नही पहुंचने से लोगों को सर्दी, खांसी और छोटे से छोटे बीमारी में भी ईलाज हेतू अनुमंडलीय अस्पताल या निजी अस्पताल जाना पड़ता है। राणाबीघा पीएचसी के अंदर आने वाले नदावाँ गांव स्थित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र में रजिस्टर पर केंद्र चल रहा है लेकिन एएनएम प्रतिदिन नही पहुंचती है, वहां तीन कार्टून एक्सपायर दवाईंया रखी हुई है लेकिन अच्छी दवाए वहां उपलब्ध ही नही है, दवाओ के देने या जानकारी के लिए एएनएम आती नही है, और राणाबीघा पीएचसी में दवाओ का भंडारण है जो लोगों तक पहुंच नही रहा है और अधिकारी खानापूर्ति कर बच रहे है। कुछ दिनों पहले पीएचसी के पास सरकारी दवाओ को जलाने का मामला सामने आया था जिसकी खबरें भी प्रकाशित की गई थी लेकिन उसपर कोई ठोस कार्रवाई नही हुई, पीएचसी सूत्रों का कहना है कि दवाओ के एक्सपायर होने के बाद या तो जला दिया जाता है या सुरक्षित स्थान पर डंप कर दिया जाता है और रजिस्टर में लोगो तक दवा पहुंचाने का दावा किया जाता है। वहीं इस मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल से बातचीत की गई तो उन्होने बताया कि बहुत जल्द इमरजेंसी की सुविधा पीएचसी में उपलब्ध कराए जाएगें, दवाओ के भंडारण की जांच करवाई जाएगी।1
- क्या 2 साल तक सैकड़ों आवेदन देने के बाद भी नहीं सुनी गई एक गांव की आवाज़? पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के मसत्थु गांव की समस्याओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। गांव के मूल निवासी अजीत शर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और कई प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार आवेदन और ई-मेल भेजकर गांव की समस्याओं के समाधान की मांग की। उनके अनुसार, अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। 📌 आवेदन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे: ✔️ अधूरा सड़क निर्माण कार्य ✔️ सरकारी गैर-मजरूआ भूमि पर कथित अतिक्रमण ✔️ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ✔️ गांव का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग अब सवाल यह है—क्या मसत्थु गांव के लोगों को उनका अधिकार और विकास मिलेगा? 💬 आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर लिखें और इस मुद्दे को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए पोस्ट शेयर करें। नोट: यह पोस्ट आवेदन-पत्र में किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।1
- पटोरी के बीबीआर एजुकेशन में बच्चों का भविष्य सुरक्षित, रिटायर्ड सरकारी शिक्षक ने संभाली पटोरी के बीबीआर एजुकेशन में बच्चों का भविष्य सुरक्षित, रिटायर्ड सरकारी शिक्षक ने संभाली कमानपटोरी। शिक्षा के क्षेत्र में सही मार्गदर्शन और अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। इसे सच कर दिखाया है पटोरी स्थित बीबीआर एजुकेशन कोचिंग संस्थान ने। सरकारी शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के संकल्प के साथ इस संस्थान की शुरुआत की गई है। इस कोचिंग के संस्थापक और संचालक खुद एक अनुभवी रिटायर्ड सरकारी शिक्षक हैं, जिनके मार्गदर्शन में पढ़कर आज कई छात्र ऊंचे मुकाम पर हैं।सफलताओं का शानदार इतिहाससंस्थान के ट्रैक रिकॉर्ड की बात करें तो यहाँ के पढ़े हुए बच्चे लगातार परीक्षाओं में टॉप करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, पूर्व में यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर चुके कई छात्र आज देश के विभिन्न प्रतिष्ठित और अच्छे सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। अनुभवी शिक्षक का सीधा मार्गदर्शन ही यहाँ के बच्चों की सबसे बड़ी ताकत है।शिक्षा से जुड़ा है पूरा परिवारइस संस्थान की सबसे खास बात यह है कि इसका पूरा परिवार ही देश की सेवा और शिक्षा जगत से जुड़ा हुआ है। संचालक के बच्चे खुद भी उच्च पदों पर देश का मान बढ़ा रहे हैं:एक बेटा: केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।दूसरा बेटा: रेलवे मेल सर्विस (RMS) में कार्यरत होकर देश की सेवा कर रहे हैं।बेटी: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) पास करके +2 (प्लस टू) शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।अनुभव और संस्कार का संगमएक ऐसा परिवार जहां खुद सफलता की कहानियां मौजूद हैं, वहां पढ़ रहे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। रिटायर्ड होने के बाद भी शिक्षा की इस अलख को जगाए रखना पटोरी और आस-पास के छात्रों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है।4
- सेल्फी लेने में प्रिंस कुमार की हुई मौत मामले में FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य । पिता ने आरोपितों पर कार्रवाई करने की पुलिस से लगाई गुहार , पुलिस ने कही साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई । जी हां यह घटना बीते दिनों समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र के मदुदाबाद पंचायत अंतर्गत अंदौर गांव के समीप गोपालिया घाट की है, जहां 31 जुलाई को बाया नदी के किनारे कुछ इंजीनियरिंग छात्रों के द्वारा सेल्फी लिया जा रहा था, उसी सेल्फी लेने के क्रम में एक इंजीनियरिंग छात्र प्रिंस कुमार यादव को नदी में डूबने से मौत हो गई थी, आज उसी मामले में पुलिस ने जांच तेज करते हुए एसआई राम कुमार की मौजूदगी में एफएसएल की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र करते हुए दिखे गए । इस दौरान मृतक के पिता विपिन राय समेत स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। इधर, मृतक के पिता विपिन राय ने जनप्रतिनिधियों के साथ मोहिउद्दीननगर थानाध्यक्ष सचिन कुमार से मुलाकात कर दर्ज प्राथमिकी में नामजद आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करने की की मांग की है। मृतक के पिता का यह आरोप है कि इस मामले में अपेक्षित पुलिस सहयोग उन्हें नहीं मिल रहा है । और कार्रवाई में देरी की जा रही है। उन्होंने पुलिस से घटना की गहराई से जांच कर अपने पुत्र की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने की मांग की है। इस मामले में थाना कांड संख्या 214/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर छह छात्रों के ऊपर नामजद किया जा चुका है, जबकि तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार, मामले में नामजद छह छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के दौरान उनके चार मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन से तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। साथ ही घटनास्थल से एफएसएल टीम द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। वहीं, थानाध्यक्ष सचिन कुमार ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस विधि-सम्मत तरीके से मामले की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रिंस कुमार की मौत से जुड़े सभी पहलु बिंदुओं पर पुलिस द्वारा जांच की जा रही है। अनुसंधान के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना स्थल पर मौजूद मृतक के पिता ने कानूनी कार्रवाई को लेकर क्या कुछ कहा देखें इस खास रिपोर्ट में।1
- पंडारक की दो पंचायतों में लगा सहयोग शिविर, भूमि विवाद, बिजली और राशन कार्ड से जुड़े आवेदन सबसे अधिक1
- मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र में नदी किनारे सेल्फी लेने में प्रिंस कुमार के साथ हुई घटना मामले में FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य । सेल्फी लेने में प्रिंस कुमार की हुई मौत मामले में FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य । पिता ने आरोपितों पर कार्रवाई करने की पुलिस से लगाई गुहार , पुलिस ने कही साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई । जी हां यह घटना बीते दिनों समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र के मदुदाबाद पंचायत अंतर्गत अंदौर गांव के समीप गोपालिया घाट की है, जहां 31 जुलाई को बाया नदी के किनारे कुछ इंजीनियरिंग छात्रों के द्वारा सेल्फी लिया जा रहा था, उसी सेल्फी लेने के क्रम में एक इंजीनियरिंग छात्र प्रिंस कुमार यादव को नदी में डूबने से मौत हो गई थी, आज उसी मामले में पुलिस ने जांच तेज करते हुए एसआई राम कुमार की मौजूदगी में एफएसएल की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र करते हुए दिखे गए । इस दौरान मृतक के पिता विपिन राय समेत स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। इधर, मृतक के पिता विपिन राय ने जनप्रतिनिधियों के साथ मोहिउद्दीननगर थानाध्यक्ष सचिन कुमार से मुलाकात कर दर्ज प्राथमिकी में नामजद आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करने की की मांग की है। मृतक के पिता का यह आरोप है कि इस मामले में अपेक्षित पुलिस सहयोग उन्हें नहीं मिल रहा है । और कार्रवाई में देरी की जा रही है। उन्होंने पुलिस से घटना की गहराई से जांच कर अपने पुत्र की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने की मांग की है। इस मामले में थाना कांड संख्या 214/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर छह छात्रों के ऊपर नामजद किया जा चुका है, जबकि तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार, मामले में नामजद छह छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के दौरान उनके चार मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन से तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। साथ ही घटनास्थल से एफएसएल टीम द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। वहीं, थानाध्यक्ष सचिन कुमार ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस विधि-सम्मत तरीके से मामले की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रिंस कुमार की मौत से जुड़े सभी पहलु बिंदुओं पर पुलिस द्वारा जांच की जा रही है। अनुसंधान के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना स्थल पर मौजूद मृतक के पिता ने कानूनी कार्रवाई को लेकर क्या कुछ कहा देखें इस खास रिपोर्ट में।1